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सिरमौर के युवाओं के लिए रोजगार का मौका; 20 मार्च को 28 पदों पर भर्ती

नाहन : रोजगार कार्यालय के माध्यम से मैसर्ज वरव बायोजेनेसिस प्राइवेट लिमिटेड, कालाअंब सिरमौर में 2 पद मेनेजर, 1 सीनियर एग्जीक्यूटिव, 12 केमिस्ट, 11 ऑपरेटर तथा 2 पद इलेक्ट्रीशियन के भरे जाने है। इन पदों के लिए साक्षात्कार 20 मार्च, 2026 को उपरोजगार कार्यालय पांवटा साहिब में प्रातः 10: 30 बजे से आयोजित किए जाएंगे।

जिला रोजगार अधिकारी देविन्द्र कुमार ने यह जानकारी देते हुए बताया कि इस भर्ती प्रक्रिया की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें अनुभवी और योग्य उम्मीदवारों को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। कंपनी द्वारा निर्धारित मानदंडों के अनुसार, मैनेजर के दो पदों के लिए बी.फार्मा या एम.फार्मा के साथ 15 से 20 वर्ष का लंबा अनुभव अनिवार्य किया गया है, जिसके लिए 1 लाख रुपये (CTC) का आकर्षक वेतनमान दिया जाएगा। वहीं, सीनियर एग्जीक्यूटिव (QMS) के एक पद के लिए बी.फार्मा या एम.फार्मा की डिग्री और 8 से 10 वर्ष का अनुभव रखने वाले उम्मीदवारों को 35 से 40 हजार रुपये प्रति माह वेतन मिलेगा।

केमिस्ट के 12 पदों के लिए बी.फार्मा, एम.फार्मा, बी.एससी या एम.एससी की योग्यता के साथ 03 से 05 वर्ष का अनुभव आवश्यक है, जिसमें चयनित युवाओं को 15 से 25 हजार रुपये मासिक वेतन दिया जाएगा। इसी प्रकार, ऑपरेटर के 11 पदों के लिए 10वीं, 12वीं या आईटीआई पास होने के साथ 08 से 10 वर्ष का अनुभव मांगा गया है, जबकि इलेक्ट्रीशियन के 02 पदों के लिए आईटीआई या संबंधित डिप्लोमा के साथ 03 से 05 वर्ष का अनुभव होना अनिवार्य है। इन दोनों ही श्रेणियों के लिए वेतनमान 15 हजार से 25 हजार रुपये प्रति माह के बीच रहेगा।

कंपनी द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, इन सभी पदों के लिए केवल पुरुष उम्मीदवार (Only Male Candidates) ही आवेदन के पात्र होंगे। अभ्यर्थियों की आयु 20 से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए।

इच्छुक अभ्यर्थी 20 मार्च को अपनी शैक्षणिक तथा योग्यता संबंधी दस्तावेज, स्थायी हिमाचली प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, 2 पासपोर्ट फोटो तथा अन्य संबंधित प्रमाण पत्रों सहित कैम्पस इंटरव्यू में भाग ले सकते है। अधिक जानकारी के लिए दूरभाष नं0 7027188837 पर भी संपर्क कर सकते है।

युवाओं के लिए मण्डी में 24 मार्च को लगेगा रोजगार मेला, भरे जाएंगे विभिन्न श्रेणियों के 196 पद

मण्डी: युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा रोजगार मेलों का आयोजन जिला स्तर पर किया जा रहा है। इसी क्रम में जिला रोजगार कार्यालय मण्डी द्वारा 24 मार्च, 2026 को एक लघु रोजगार मेले का आयोजन किया जा रहा है। इस रोजगार मेले में निजी क्षेत्र की विभिन्न कम्पनियां भाग लेंगी और 196 रिक्त पदों को भरने के लिए योग्य अभ्यर्थियों का चयन करेंगी।

जिला रोजगार अधिकारी अरविन्द सिंह चौहान ने बताया कि यह रोजगार मेला 24 मार्च को प्रातः 10.30 बजे मॉडल करियर सेंटर/जिला रोजगार कार्यालय, खलियार, मण्डी (हि.प्र.) में आयोजित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि हीरो मोटर्स कंपनी ई-वैली प्रा. लिमिटेड की ओर से टेक्निकल एसोसिएट/ ऑपरेटिंग इंजीनियर के 35 पदों के लिए साक्षात्कार लिए जाएंगे। इसके लिए शैक्षणिक योग्यता जमा दो कक्षा उत्तीर्ण, आईटीआई, मैकेनिकल या इलेक्ट्रिकल में डिप्लोमा धारक रखी गई है और 18 से 32 वर्ष आयु तक के पुरूष व महिला अभ्यर्थी भाग ले सकते हैं। उन्होंने बताया कि चयनित अभ्यर्थियों को पंजाब के लुधियाना में तैनाती दी जाएगी और वेतन 18,500 रुपए से 22,500 रुपए तक निर्धारित किया गया है।

उन्होंने बताया कि 18 वर्ष से अधिक आयु के पुरूष अभ्यर्थियों के लिए सुपरवाइजर के 60 पदों के लिए भी तीन कंपनियों एलायंस ग्रो स्टाफिंग प्रा. लिमिटेड, नुरेका टैक्नोलॉजी प्रा. लिमिटेड तथा एमटी ऑटोक्राफ्ट सिस्टम लिमिटेड की ओर से साक्षात्कार लिए जाएंगे। शैक्षणिक योग्यता जमा दो कक्षा उत्तीर्ण या इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, फिटर, एमएमवी इत्यादि में आईटीआई डिप्लोमा रखी गई है। उन्होंने बताया कि परवाणु व मोहाली में तैनाती के साथ ही इनके लिए 13,500 रुपए वेतन व अन्य भत्ते निर्धारित किए गए हैं।

कंपीटेंट ऑटोमोबाइल प्रा. लिमिटेड की ओर से सेल्ज़ एग्जीक्यूटिव और सर्विस एडवाइजर के 17 पद के लिए साक्षात्कार लिए जाएंगे। शैक्षणिक योग्यता किसी भी विषय में बी.टेक/डिप्लोमा/ग्रेजुएशन रखी गई है। ड्राइविंग लाइसेंस अनिवार्य होगा। 18 से 35 वर्ष आयु वर्ग के पुरुष और महिला दोनों आवेदन कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि इन पदों के लिए वेतन 14,000 रुपए से 18,000 हजार रुपए व अलग से इंसेंटिव निर्धारित किया गया है और तैनाती मंडी, कुल्लू और मनाली में की जाएगी।

आनंद ऑटो केयर प्रा. लिमिटेड की ओर से सेल्ज़ ऑफिसर के चार पदों के लिए साक्षात्कार लिए जा रहे हैं। शैक्षणिक योग्यता किसी भी विषय में ग्रेजुएशन रखी गई है। इसमें 21 से 35 वर्ष के बीच आयु के पुरुष और महिला दोनों आवेदन कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि वेतन 12,750/- और उससे अधिक (अनुभव के आधार पर) निर्धारित किया गया है और तैनाती मंडी में होगी।

एक्सिस बैंक (एनआईआईटी) की ओर से एसिस्टेंट मैनेजर के 30 पदों के लिए साक्षात्कार लिए जाएंगे। शैक्षणिक योग्यता किसी भी विषय में 50 प्रतिशत अंकों के साथ स्नातक की उपाधि रखी गई है। 21 से 33 वर्ष आयु वर्ग के पुरूष एवं महिला अभ्यर्थी इसके लिए आवेदन कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि इन पदों के लिए वेतन 36,500 रुपए निर्धारित किया गया है और हिमाचल प्रदेश में कहीं भी तैनाती की जा सकती है।

ग्राम तरंग टेक्निकल वोकेशनल एजुकेशन एंड ट्रेनिंग प्रा. लिमिटेड की ओर से इलेक्ट्रीशियन, फिटर, मशीनिस्ट, वायरमैन, इलेक्ट्रॉनिक्स, मोटर मैकेनिक इत्यादि के 50 पदों के लिए साक्षात्कार लिए जाएंगे। शैक्षणिक योग्यता बारहवीं पास/आईटीआई (इलेक्ट्रीशियन, मशीनिस्ट, वायरमैन, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, फिटर, एमएमवी इत्यादि) रखी गई है। इसमें 18 से 25 वर्ष आयु वर्ग के पुरुष उम्मीदवार तथा केवल वे लड़कियां जिन्होंने आईटीआई कोपा ट्रेनिंग पूरी की है, पात्र होंगी। उन्होंने बताया कि वेतन 12,507 रुपए व 800 रुपए उपस्थिति प्रोत्साहन निर्धारित किया गया है और तैनाती कपूरथला में दी जाएगी।

अरविन्द सिंह चौहान ने बताया कि इच्छुक एवं योग्य आवेदक अपने सभी शैक्षणिक योग्यता के मूल प्रमाण पत्र, पासपोर्ट साइज फोटो, रोजगार कार्यालय का प्रमाण पत्र, आधार कार्ड व अपना बायोडाटा साथ लेकर साक्षात्कार के लिए उपस्थित हो सकते हैं। जिला रोजगार अधिकारी ने सभी इच्छुक आवेदकों से अनुरोध किया है कि वे निर्धारित तिथि, समय एवं स्थान पर उपस्थित होकर इस रोजगार मेले में भाग लें और उपलब्ध रोजगार अवसरों का लाभ उठाएं।

पारिश्रमिक आधार पर तहसीलदार, नायब तहसीलदार व पटवारी के रिक्त पदों के लिए पुनः आवेदन मांगे

मण्डी:  मण्डी जिला में उपायुक्त कार्यालय के तहत पारिश्रमिक आधार पर तहसीलदार, नायब तहसीलदार, कानूनगो, पटवारी के खाली पदों पर फिर से भर्ती के लिए इच्छुक और योग्य उम्मीदवारों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। यह आवेदन सभी आवश्यक दस्तावेजों एवं प्रमाण पत्रों के साथ 28 मार्च, 2026 को सायं 05:00 बजे तक उपायुक्त, मंडी के कार्यालय में पहुंच जाने चाहिए। अंतिम तिथि के बाद मिले या अधूरे पाए गए आवेदन बिना कोई और जानकारी दिए अस्वीकृत कर दिए जाएंगे।

उपायुक्त अपूर्व देवगन ने बताया कि पारिश्रमिक (री-एंगेजमेंट) आधार पर जिला में तहसीलदार का एक पद, नायब तहसीलदार के 6 पद तथा पटवारी के 117 पद भरे जाने हैं। इसके लिए आवश्यक योग्यता निर्धारित की गई है, जिसके तहत सेवानिवृत्त होने से पहले आवेदक द्वारा हिमाचल प्रदेश के राजस्व विभाग के किसी भी विंग में कम से कम पांच साल की सेवाएं दी हों और उनके खिलाफ कोई विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई लंबित न हो। इस बारे में संबंधित सेवानिवृत्त व्यक्ति को अपने विभाग से एक प्रमाण पत्र लेना होगा और आवेदन के साथ जमा करना होगा। साथ ही आवेदक को राजकीय अस्पताल से चिकित्सा प्रमाण पत्र भी संलग्न करना होगा। आवेदन के लिए आयु सीमा विज्ञापन तिथि (01-01-2026) को 65 साल से ज़्यादा नहीं होनी चाहिए। आवेदन के साथ दसवीं कक्षा का प्रमाण पत्र भी संलग्न करना होगा।

उन्होंने बताया कि सेवानिवृत्त तहसीलदारों के लिए 70 हजार रुपए प्रति माह, सेवानिवृत्त नायब तहसीलदारों के लिए 60 हजार रुपए प्रतिमाह और सेवानिवृत्त पटवारियों के लिए 40 हजार रुपए प्रतिमाह पारिश्रमिक निर्धारित किया गया है। मंडी जिले में किसी भी खाली पद पर इन्हें तैनात किया जा सकता है। हालांकि किसी भी तहसीलदार/नायब तहसीलदार को उनके गृह उपमंडल में और पटवारियों को गृह/आस-पास के पटवार वृत्त में तैनात नहीं किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि री-एंगेजमेंट के लिए आवेदन पत्र मंडी जिले की आधिकारिक वेबसाइट http://hpmandi.nic.in से डाउनलोड किया जा सकता है। सेवानिवृत्त अधिकारियों को पहली बार में तीन महीने के लिए री-एंगेज किया जाएगा। सेवाओं में प्रदर्शन और ज़रूरत के हिसाब से इसे आगे बढ़ाया जा सकता है। री-एंगेजमेंट की अवधि उनके रिटायरमेंट से पहले दी गई सर्विस में किसी भी बेनिफिट के लिए नहीं गिनी जाएगी।

ऐसे सेवानिवृत्त लोगों की सेवाएं पूरी तरह से अस्थायी होंगी और री-एंगेजमेंट अवधि के दौरान कभी भी खत्म की जा सकती हैं। इन्हें एक महीने की सेवाएं पूरी करने के बाद एक दिन का आकस्मिक अवकाश देय होगा तथा किसी भी तरह का अन्य अवकाश देय नहीं होगा। नियंत्रण अधिकारी की मंज़ूरी के बिना ड्यूटी से बिना इजाज़त गैरहाज़िर रहने पर, बिना कोई नोटिस दिए, वह एंगेजमेंट अपने आप खत्म हो जाएगा। ड्यूटी से गैरहाज़िर रहने के समय के लिए उन्हें कोई मेहनताना नहीं मिलेगा।

उन्होंने बताया कि आवश्यकतानुसार अपनी अधिकारिक सेवा के सिलसिले में यात्रा पर जाने के लिए इन्हें टीए-डीए मिलेगा, जो समकक्ष नियमित अधिकारियों को मिनिमम पे स्केल पर लागू रेट पर मिलेगा। महीने का मेहनताना परफॉर्मेंस/वर्क कंडक्ट सर्टिफिकेट के आधार पर दिया जाएगा, जिसमें उसके द्वारा निपटाए गए केस की डिटेल्स भी शामिल होंगी। यह सर्टिफिकेट संबंधित नियंत्रण प्राधिकारी द्वारा महीने के आखिर में जारी किया जाएगा। राजस्व केस के लंबित मामलों के निपटान के बाद, इनकी सेवाएं समाप्त कर दी जाएंगी।

उन्होंने बताया कि री-एंगेजमेंट के कारण मौजूदा पटवारियों/कानूनगो की पदोन्नति पर कोई असर नहीं पड़ेगा और उनके द्वारा भरे गए पद पदोन्नति के लिए खाली माने जाएंगे। नियमित अधिकारियों के मिलने पर री-एंगेजमेंट खत्म किया जा सकता है।

मण्डी: उपायुक्त ने की वन संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत लंबित प्रस्तावों की समीक्षा; अभी तक 30 प्रस्तावों को मिल चुकी है अंतिम स्वीकृति – अपूर्व देवगन

मण्डी: वन संरक्षण अधिनियम (एफसीए) के अंतर्गत लंबित प्रस्तावों की समीक्षा के लिए उपायुक्त मंडी अपूर्व देवगन की अध्यक्षता में आज यहां एक बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले की विभिन्न विकास परियोजनाओं से संबंधित एफसीए मामलों की विस्तारपूर्वक समीक्षा की गई तथा उनके शीघ्र निष्पादन के लिए संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए।

उपायुक्त अपूर्व देवगन ने कहा कि विकास कार्यों में अनावश्यक देरी से बचने के लिए एफसीए प्रस्तावों का समयबद्ध निपटारा अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि 17 मार्च, 2023 से अब तक जिले के विभिन्न विभागों के कुल 30 प्रस्तावों को अंतिम स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। इनमें से एक प्रस्ताव को फरवरी माह में तथा दो प्रस्तावों को मार्च माह में स्वीकृति प्राप्त हुई है, जिनमें सलापड़-तत्तापानी सड़क, प्रस्तावित करसोग न्यायालय परिसर तथा पधर न्यायालय परिसर शामिल हैं।

उन्होंने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि प्रत्येक लंबित प्रस्ताव के लिए स्पष्ट टाइमलाइन निर्धारित की जाए और निर्धारित अवधि के भीतर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर भी बल देते हुए कहा कि वन भूमि हस्तांतरण से संबंधित सभी औपचारिकताएं प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूर्ण की जाएं।

बैठक के दौरान कुल 131 एफसीए प्रस्तावों पर बिंदुवार चर्चा की गई। इनमें न्यायपालिका से संबंधित 8 मामले, परिवेश 1.0 पोर्टल के 38 प्रस्ताव तथा परिवेश 2.0 पोर्टल के 68 प्रस्ताव शामिल हैं। ये सभी प्रस्ताव न्यायिक परिसरों, सड़कों, भवनों एवं जलविद्युत परियोजनाओं से संबंधित हैं।

इसके अतिरिक्त, 25 ऐसे प्रस्तावों की भी समीक्षा की गई, जिन्हें विगत पांच से दस वर्षों के दौरान स्टेज-1 के तहत सैद्धांतिक स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है, किंतु वे अभी तक स्टेज-2 (अंतिम) स्वीकृति के लिए लंबित हैं।

बैठक में जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण के सचिव विवेक कायस्थ, डीएफओ (मुख्यालय) बसु डोगरा, डीएफओ जोगिंद्रनगर अश्वनी कुमार सहित लोक निर्माण, जल शक्ति तथा अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इसके अलावा डीएफओ सुकेत राकेश कटोच, डीएफओ करसोग के.बी. नेगी, डीएफओ एस.एस. कश्यप वर्चुअल माध्यम से जुड़े।

हिन्दुत्व केवल एक विचार नहीं, बल्कि जीवन शैली – डॉ. वीर सिंह

शिमला: अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की तीन दिवसीय बैठक 13-15 मार्च 2026 को समालखा (पानीपत) में सम्पन्न हुई। शिमला में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हिमाचल प्रांत ने आज इस संदर्भ में प्रेसवार्ता आयोजित की गई। इस अवसर पर हिमाचल प्रांत के संघचालक डॉ. वीर सिंह रांगड़ा, विभाग संघचालक राजकुमार वर्मा और प्रांत प्रचार प्रमुख प्रताप समयाल जी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए डॉ. बीर सिंह रांगड़ा  ने अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की जानकारी मीडिया कर्मियों को दी। उन्होंने कहा कि यह बैठक समालखा (पानीपत) में आयोजित की गई। पूजनीय सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत और  सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने भारत माता को पुष्पांजलि अर्पित कर शुभारंभ किया। सभा में सर्वप्रथम विगत वर्ष में देशभर के संघ कार्य एवं समाज सेवा में दिवंगत हुई महान विभूतियों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। सभा में हिमाचल प्रांत से 21 कार्यकर्ताओं सहित देशभर से कुल 1,438 कार्यकर्ता शामिल हुए।

प्रतिनिधि सभा में देशभर में संघ कार्य की स्थिति को लेकर चिंतन हुआ। पिछले वर्ष में संगठन कार्य का उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। संघ की शाखाएं लगभग छह हजार की वृद्धि के साथ 88 हजार से अधिक हो गई हैं तथा स्थान भी बढ़कर 55 हज़ार से अधिक हो गए हैं। इसके साथ ही साप्ताहिक मिलन और मंडली की संख्या भी बढ़ी है। साप्ताहिक मिलन 32 हज़ार 606 जबकि मंडली की संख्या 13 हजार 211 हो गई है। प्रतिनिधि सभा में संघ शताब्दी वर्ष में आयोजित हो रहे कार्यक्रमों की भी विस्तारपूर्वक समीक्षा की गई। संघ शताब्दी वर्ष में देशभर में आयोजित कुल विजयादशमी उत्सव 62555 और उपस्थित स्वयंसेवक संख्या 32 लाख 45 हजार 141 रही। गृह सम्पर्क अभियान में 10 करोड़ 02 लाख 12 हजार 162 परिवारों में सम्पर्क किया गया, मंडल एवं बस्ती स्तर पर अभी तक संपन्न हुए हिन्दू सम्मेलनों की संख्या 37048 रहीं।

हिमाचल में वर्तमान में संगठनात्मक कुल 26 जिलों में 728 स्थानों पर 1045 शाखाएं, मिलन 283 एवं 141 संघ मंडली चल रहीं हैं। संघ शताब्दी वर्ष में आयोजित विजयादशमी उत्सव 204 कार्यक्रमों में 28916 स्वयंसेवकों ने भाग लिया। गृह सम्पर्क अभियान 12 लाख 22 हजार 410 घरों में सम्पर्क एवं 4118 विशेष व्यक्ति सम्पर्क किया गया। कुल हिन्दू सम्मेलन कार्यक्रम 1089 संपन्न हुए।

संघ शताब्दी वर्ष में सांगठनिक विस्तार के साथ संघ समाज में गुणवत्ता संवर्धन के लिए भी निरंतर कार्य कर रहा है। पंच परिवर्तन के माध्यम से समाज को सकारात्मक परिवर्तन के लिए प्रेरित करना महत्वपूर्ण है। भारतीय अथवा हिन्दुत्व केवल एक विचार नहीं, बल्कि जीवन शैली है और इसके माध्यम से समाज में गुणवत्ता का विस्तार होना चाहिए।

डॉ. वीर सिंह रांगड़ा  ने कहा कि समाज में महापुरुषों के कार्यों को जाति, पंथ के भेद से ऊपर उठकर स्वीकार करना चाहिए और उनके माध्यम से समाज को सकारात्मक परिवर्तन के लिए आगे बढ़ना चाहिए। संघ के स्वयंसेवकों ने इसी दिशा में नवम गुरु श्री तेग बहादुर जी के बलिदान के 350वें वर्ष के अवसर पर देशभर में 2 हजार से अधिक कार्यक्रम किए, जिनमें 7 लाख से अधिक लोग सम्मिलित हुए। इसी प्रकार राष्ट्रगीत वंदेमातरम की 150 वर्षगांठ भी उत्साहपूर्वक मनाई गई। आगामी वर्ष में संत शिरोमणि रविदास जी महाराज के 650वें प्राकट्य वर्ष पर कार्यक्रमों की योजना बनी है।

अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में संत शिरोमणि सद्गुरु श्री रविदास जी के 650वें प्राकट्य वर्ष के अवसर पर माननीय सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी द्वारा वक्तव्य भी जारी किया गया, जिसमें उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ संत शिरोमणि सहुरु रविदास जी के 650वें प्राकट्य वर्ष के अवसर पर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करता है। हमारी श्रेष्ठ संत परंपरा ईश्वर की भारत को एक विशिष्ट देन है। हमारे प्रदीर्घ इतिहास के प्रवाह में इस महान संत परंपरा ने जहां समाज में ईधर की उपासना और भक्ति भाव का जागरण किया, वहीं सामाजिक कुरीतियाँ और भेदभाव का उन्मूलन करते हुए समरस समाज के दृढीकरण के प्रयास किए। साथ ही उन्होंने विदेशी शासकों के अत्याचारों के विरुद्ध संघर्ष के लिए समाज को जागृत और सिद्ध भी किया है।

बिलासपुर के 7 दिवसीय राज्य स्तरीय नलवाड़ी मेले का हुआ भव्य शुभारम्भ

खूंटी गाड़ कर तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने किया मेले का पारम्परिक शुभारम्भ, शोभायात्रा की अगुवाई की

बिलासपुर:  जिला बिलासपुर के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक गौरव के प्रतीक 137 वर्ष पुराने राज्य स्तरीय नलवाड़ी मेला-2026 का आज नगर एवं ग्राम नियोजन, आवास, तकनीकी शिक्षा, व्यावसायिक एवं औद्योगिक प्रशिक्षण मंत्री राजेश धर्माणी ने खूंटी गाड़ कर विधिवत शुभारम्भ किया। इस अवसर पर उन्होंने लक्ष्मी नारायण मंदिर से आरम्भ हुई भव्य शोभायात्रा की अगुवाई की तथा लुहणू मैदान में विभिन्न विभागों द्वारा लगाई गई विकासात्मक प्रदर्शनियों का भी उद्घाटन किया।

लुहणू मैदान में आयोजित शुभारम्भ समारोह में उपस्थित जनसमूह को कहलूरी बोली में संबोधित करते हुए तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि नलवाड़ी मेला बिलासपुर की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पारम्परिक विरासत का जीवंत प्रतीक है, जिसकी पहचान प्रदेश ही नहीं बल्कि देशभर में विशिष्ट रही है। उन्होंने कहा कि इस मेले का इतिहास लगभग 137 वर्ष पुराना है तथा वर्ष 1889 में इसकी शुरुआत सांडू मैदान से हुई मानी जाती है, जो समय के साथ अब लुहणू मैदान में स्थानांतरित हो गया है। यह मेला वर्षों से स्थानीय संस्कृति, लोक परम्पराओं, पशुपालन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने का महत्वपूर्ण माध्यम रहा है।

उन्होंने कहा कि समय के साथ मेले के स्वरूप में परिवर्तन आया है। पूर्व में जहां ग्रामीण अपने उत्पादों की बिक्री और पशुधन की खरीद-फरोख्त के लिए इसमें भाग लेते थे, वहीं वर्तमान में यह मेला सांस्कृतिक, सामाजिक एवं आर्थिक गतिविधियों का प्रमुख मंच बन चुका है। उन्होंने कहा कि परम्परागत हुनर को प्रोत्साहित एवं जीवंत बनाए रखने के लिए घुमारवीं में कौशल विकास केन्द्र स्थापित किया जा रहा है, जहां पारम्परिक शिल्पकारों को प्रशिक्षक के रूप में जोड़कर युवाओं को पुरातन कलाओं से जोड़ा जाएगा।

राजेश धर्माणी ने कहा कि गोविंद सागर झील में जलक्रीड़ा गतिविधियों को मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में प्रोत्साहित करने के लिए शुरू किया है तथा अक्तूबर 2025 में “जल तरंग जोश महोत्सव” का सफल आयोजन कर इस दिशा में सकारात्मक पहल की है।

उन्होंने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए बताया कि गाय के दूध का न्यूनतम समर्थन मूल्य 51 रूपए तथा भैंस के दूध का 61 रूपए निर्धारित किया गया है। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देते हुए गेहूं के लिए 60 रूपए, मक्की के लिए 40 रूपए तथा हल्दी के लिए 90 रूपए प्रति किलोग्राम समर्थन मूल्य तय किया गया है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि जिला बिलासपुर में इस वर्ष 100 क्विंटल कच्ची हल्दी की खरीद हुई है, जिससे किसानों को लाभान्वित किया गया है।

उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण पर बल देते हुए कहा कि प्रदेश के 151 सरकारी विद्यालयों को केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से सम्बद्धता प्रदान की गई है, जिनमें बिलासपुर के 11 विद्यालय भी शामिल हैं। स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूती के लिए नागरिक चिकित्सालयों में न्यूनतम 6 विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती सुनिश्चित की गई है तथा अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में भी मूलभूत सुविधाओं को सुदृढ़ किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार आगामी 21 मार्च को बजट प्रस्तुत करने जा रही है, जो आम जनमानस को समर्पित होगा तथा इसमें जनसुविधाओं को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रावधान किए जाएंगे।

धर्माणी ने भाखड़ा बांध निर्माण के दौरान बिलासपुर और ऊना के लोगों के योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि प्रदेश का भाखड़ा व्यास प्रबन्धन बोर्ड में लगभग 4500 करोड़ रूपए लंबित है। इसके अतिरिक्त शानन जल विद्युत परियोजना की लीज अवधि पूर्ण हो चुकी है, लेकिन अभी तक प्रदेश हित में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।

उन्होंने कहा कि मेले को और अधिक आकर्षक एवं विविधतापूर्ण बनाने के लिए इस वर्ष कई नए कार्यक्रम जोड़े गए हैं। शोभायात्रा में लोक वाद्य कलाकारों की भागीदारी सुनिश्चित की गई है, जिससे पारम्परिक संगीत को प्रोत्साहन मिलेगा। शोभायात्रा के उपरांत सायं 6 बजे सतलुज महाआरती का आयोजन किया जाएगा। इसके अतिरिक्त मेले में नाट्य उत्सव, 19 मार्च को साहित्य उत्सव तथा जिला की उभरती प्रतिभाओं को मंच प्रदान करने के उद्देश्य से “वॉइस ऑफ बिलासपुर” प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें विजेता को 1 लाख रूपए, द्वितीय स्थान पर 50 हजार रूपए तथा तृतीय स्थान पर 25 हजार रूपए प्रदान किए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि जिले की प्रतिभाशाली युवतियों को अपनी प्रतिभा और आत्मविश्वास प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करने के लिए “मिस बिलासपुर 2026” प्रतियोगिता का आयोजन भी किया जा रहा है। 18 मार्च से प्रारम्भ होने वाले कहलूर उत्सव में स्थानीय कलाकार नाटी, लोक नृत्य, वाद्य यंत्रों और लोक गीतों के माध्यम से अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे, जिससे प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को नई पहचान मिलेगी।

इस अवसर पर मेला कमेटी के अध्यक्ष एवं उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार ने मुख्यातिथि का स्वागत करते हुए मेले की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि नलवाड़ी मेला केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि स्थानीय व्यापार, पर्यटन और हस्तशिल्प को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। कहलूर उत्सव हमारी परम्पराओं को संरक्षित करने और उन्हें भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है, जो हमें अपनी जड़ों से जोड़े रखता है।

बिलासपुर: लुहणु घाट में भव्य सतलुज महा आरती का आयोजन

बिलासपुर: राज्य स्तरीय नलवाड़ी मेला के पावन अवसर पर लुहणु घाट में आयोजित सतलुज महा आरती में नगर एवं ग्राम नियोजन, आवास, तकनीकी शिक्षा, व्यावसायिक एवं औद्योगिक प्रशिक्षण मंत्री राजेश धर्माणी ने शिरकत कर विधिवत पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर उन्होंने जिला एवं प्रदेश वासियों की सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। सतलुज तट पर आयोजित इस धार्मिक आयोजन में श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति रही, जिससे पूरा वातावरण भक्ति और आस्था से ओत-प्रोत हो गया।

इस दौरान राज्य स्तरीय नलवाड़ी मेला के अध्यक्ष एवं उपायुक्त राहुल कुमार ने मंत्री राजेश धर्माणी को स्मृति चिन्ह भेंट कर उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया।

कार्यक्रम के माध्यम से क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक, धार्मिक परंपरा को सुदृढ़ करने के साथ साथ प्रकृति को सहेजने के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने की एक अनूठी पहल के साथ यह आयोजन किया गया।

कुल्लू: अटल टनल के साउथ पोर्टल के समीप बर्फबारी में फंसे सभी वाहन सुरक्षित निकाले

कुल्लू: उपायुक्त कुल्लू अनुराग चंद्र शर्मा ने बताया कि भारी बर्फबारी के चलते अटल टनल के साउथ पोर्टल के समीप फंसे सभी 320 वाहनों को भी सुरक्षित रूप से निकालकर मनाली की ओर रवाना कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि अटल टनल के नॉर्थ पोर्टल से साउथ पोर्टल की ओर वाहनों को आने की अनुमति दे दी गई है।

उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन, बीआरओ, पुलिस तथा अन्य संबंधित एजेंसियों के समन्वय से यह राहत एवं बचाव कार्य सफलतापूर्वक एवं समयबद्ध तरीके से संपन्न किया गया।

उपायुक्त ने लोगों और वाहन चालकों से अपील की है कि वे यात्रा के दौरान मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए सावधानी बरतें तथा प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित करें, ताकि सभी की सुरक्षा बनी रहे।

हमीरपुर: जिला परिषद के 10 वार्डों के परिसीमन में आंशिक संशोधन पर आपत्तियां आमंत्रित

हमीरपुर : जिला की कुछ पंचायतों के पुनर्गठन के कारण अब जिला परिषद के कुछ वार्डों के परिसीमन में भी आंशिक संशोधन किया जा रहा है। जिला परिषद हमीरपुर के कुल 19 वार्डों में से 10 वार्ड इससे प्रभावित हो रहे हैं। इन 10 वार्डों-पनोह, उहल, चमनेड, बधानी, धमरोल, जाहू, महल, लहड़ा, अमलैहड़ और सपड़ोह के संशोधित परिसीमन का प्रारूप 16 मार्च को प्रकाशित कर दिया गया है।

उपायुक्त एवं जिला निर्वाचन अधिकारी (पंचायत) गंधर्वा राठौड़ ने इनके प्रारूप के प्रकाशन की अधिसूचना जारी करते हुए बताया कि अगर किसी व्यक्ति को जिला परिषद के इन 10 वार्डों के परिसीमन के संबंध में कोई आपत्ति है या फिर वह अपना कोई सुझाव देना चाहता है तो वह इन्हें जिला निर्वाचन अधिकारी (पंचायत) के कार्यालय में प्रारूप के प्रकाशन की तिथि से तीन दिन के भीतर दर्ज करवा सकता है। इसके बाद कोई भी आपत्ति या सुझाव स्वीकार नहीं किया जाएगा।

बंदरों का आतंक राष्ट्रीय समस्या, निपटने के लिए बने व्यापक कार्ययोजना – अनुराग ठाकुर

नई दिल्ली/ हिमाचल प्रदेश: पूर्व केंद्रीय कैबिनेट मंत्री और हमीरपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद श्री अनुराग सिंह ठाकुर ने लोकसभा में नियम 377 के अंतर्गत
बंदर आतंक की गंभीर और लंबे समय से उपेक्षित समस्या को राष्ट्रीय संकट करार देते हुए तत्काल और समन्वित केंद्रीय हस्तक्षेप की मांग की।

अनुराग सिंह ठाकुर ने सदन का ध्यान देश भर में, विशेष रूप से कृषि प्रधान राज्यों में अनियंत्रित बंदर आबादी द्वारा हो रही भारी तबाही की ओर आकर्षित किया। उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश में अकेले किसानों को 70,000 हेक्टेयर से अधिक कृषि योग्य भूमि पर खेती छोड़नी पड़ी है। राज्य में वार्षिक फसल नुकसान 500 करोड़ रुपये से अधिक है, और 2017 से 2024 के बीच बंदरों के हमलों से कृषि को होने वाला कुल नुकसान अनुमानित 2,200 करोड़ रुपये है। यह आंकड़ा इस संकट की गंभीरता को स्पष्ट रूप से उजागर करता है, जिसे बहुत लंबे समय से अनदेखा किया गया है।

आर्थिक तबाही के अलावा,अनुराग सिंह ठाकुर ने मानव जीवन और सुरक्षा पर बंदरों के प्रकोप के गंभीर खतरे को उजागर किया।
हिमाचल प्रदेश के जिला-स्तरीय आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि पिछले एक वर्ष में अकेले एक जिले में प्रतिदिन लगभग दस लोग बंदरों द्वारा काटे जा रहे हैं। बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग इन हमलों के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील हैं, और बंदर-प्रभावित क्षेत्रों में लोग लगातार भय और तनाव में जी रहे हैं”

इस संकट के मूल कारणों पर बोलते हुए  अनुराग सिंह ठाकुर ने समस्या की जड़ 1978 के बंदर निर्यात प्रतिबंध को बताया, जिसके कारण बंदरों की आबादी अनियंत्रित रूप से बढ़ी है और इसे कभी ठीक से प्रबंधित नहीं किया गया। इसके अलावा, व्यापक वनों की कटाई ने प्राकृतिक आवास नष्ट कर दिए हैं, शिकारी प्रजातियों की कमी ने प्राकृतिक नियंत्रण समाप्त कर दिया है, और राष्ट्रीय स्तर पर कोई समन्वित नीति न होने से राज्य अकेले ही इस चुनौती से जूझ रहे हैं।

 अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा” आज बंदरों का आतंक एक राष्ट्रीय संकट बन चुका है। हमारे किसान अपनी खेतों को छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं। हमारे बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग हर रोज हमलों का सामना कर रहे हैं। राज्य अकेले इस लड़ाई नहीं लड़ सकते। केंद्र को तत्काल एक विश्वसनीय, मानवीय और वैज्ञानिक आधार वाली राष्ट्रीय कार्य योजना लेकर आगे आना चाहिए”

अनुराग सिंह ठाकुर ने भारत सरकार से बंदर-मानव संघर्ष पर एक व्यापक राष्ट्रीय कार्य योजना तैयार करने का आग्रह किया, जिसमें बंदर-प्रभावित राज्यों के साथ परामर्श किया जाए। उन्होंने बड़े पैमाने पर नसबंदी कार्यक्रमों और इम्यूनोकॉन्ट्रासेप्शन तकनीकों को आबादी नियंत्रण के मानवीय तरीकों के रूप में अपनाने, साथ ही अनुराग सिंह ठाकुर ने मानकीकृत, समयबद्ध किसान मुआवजा ढांचे की मांग की, ताकि कृषि नुकसान झेलने वालों को तत्काल राहत मिल सके, साथ ही जमीनी स्तर पर समुदाय-आधारित फसल सुरक्षा सहायता प्रणालियों की स्थापना की। अपने निवेदन में अनुराग सिंह ठाकुर ने सरकार से इस उद्देश्य के लिए समर्पित बजटीय फंड आवंटित करने और राज्य सरकारों को वैज्ञानिक रूप से सत्यापित तथा मानवीय बंदर नियंत्रण उपायों को समयबद्ध तरीके से लागू करने के स्पष्ट निर्देश जारी करने का आह्वान किया। उन्होंने जोर दिया कि यह महज एक राज्य-स्तरीय प्रशासनिक मामला नहीं है, बल्कि एक राष्ट्रीय मुद्दा है जिसके लिए राष्ट्रीय स्तर का समाधान जरूरी है।