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सप्लीमेंट्री बजट ने सुक्खू सरकार के वित्तीय प्रबंधन, अनुशासन और दूरदर्शिता की धज्जियाँ उड़ाई – जयराम ठाकुर

प्रदेश में सप्लीमेंट्री बजट का 70 प्रतिशत होना सरकार की आर्थिक नाकामी का प्रमाण पत्र है
शिमला : अपने विधानसभा स्थित कार्यालय में मीडिया से बात करते हुए नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि इस बजट के मुख्यमंत्री के मुख्यमंत्री के तीन प्रिय शब्दों ‘फिस्कल प्रुडेंस, फिस्कल मैनेजमेंट, फिस्कल डिस्पीलीन और व्यवस्था परिवर्तन की धज्जियाँ उड़ा दी हैं। सीएम सुक्खू ने गत वर्ष बजट पेश करने  के पहले कहा था कि वह सबसे ज़्यादा पढ़ने वाले वित्त मंत्री हैं। उन्होंने इतिहास बना दिया। बजट अनुमान पूरी तरह से गलत साबित हुए, सब कुछ हवा हवाई है। बजट का मूल उद्देश्य ही यथार्थवादी अनुमान लगाना होता है। 70% अतिरिक्त खर्च बताता है कि सरकार को अपने ही आंकड़ों पर भरोसा नहीं था। यह साफ संकेत है कि सरकार अपनी ही वित्तीय योजना बनाने में विफल रही। अनुपूरक बजट में तीन मुख्य अवयव होतें हैं, पहला  पुनर्नियोजन, दूसरा अतिरिक्त खर्च, तीसरा भविष्य के अनुमान लगाने में चूँक। सरकार बताए यह अतिरिक्त धनराशि कहाँ से आएगी? क्या जनकल्याण कारी योजनाएं बंद हुई? या सरकार प्रदेश के खर्च अनुमान लगाने में नाकाम रही। या सरकार ने फिजूल खर्ची की। 
जयराम ठाकुर ने कहा कि इस बजट में न फिस्कल मैनेजमेंट है न फिस्कल डिस्पलीन और प्रूडेंस  और न ही कोई व्यवस्था है। यहाँ सिर्फ और सिर्फ़ अव्यवस्था है।।  इतना बड़ा अनुपूरक बजट यह बताता है कि खर्च पर कोई नियंत्रण नहीं है और सरकार बिना योजना के पैसे खर्च कर रही है। यह अनुपूरक बजट ही मुख्य बजट सरकार की आर्थिक नाकामी का प्रमाण पत्र है। गत वर्ष का कैपिटल एक्सपेंडिचर 3941 करोड़ जो पिछले बार से 37% कम है और कुल बजट का मात्र 3.98% है। इससे यह साफ़ है कि प्रदेश में विकास ठप है और सवाल यह उठता है 98 हज़ार 975 करोड़ रुपए आख़िर खर्च कहाँ हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस बार सप्लीमेंट्री बजट के डॉक्यूमेंट्स भी उपलब्ध नहीं करवाया। क्योंकि उन्हें अपनी इस नाकामी का एहसास हो चुका था।

कांगड़ा: देहरा में क्रैच कार्यकर्ता व सहायिका के भरे जाएंगे रिक्त पद

6 अप्रैल तक करें आवेदन ,महिला अभ्यर्थियों से आवेदन आमंत्रित*

देहरा: बाल विकास परियोजना देहरा के अंतर्गत उपमंडल देहरा में मिशन शक्ति–पालना योजना के तहत स्वीकृत आंगनवाड़ी-सह क्रैच केंद्रों में 6 क्रैच कार्यकर्ता एवं 6 क्रैच सहायिका के रिक्त पद भरे जाएंगे।

यह जानकारी देते हुए बाल विकास परियोजना अधिकारी देहरा, राजेंद्र सिंह ने बताया कि नगर परिषद देहरा के आंगनबाड़ी केंद्र हनुमान चौक, शिव मंदिर, राजगढ़ तथा गायत्री मंदिर में एक-एक क्रैच कार्यकर्ता एवं एक-एक क्रैच सहायिका के पद भरे जाएंगे। इसके अतिरिक्त पंचायत त्रिपल के आंगनबाड़ी केंद्र त्रिपल तथा पंचायत हरिपुर के आंगनबाड़ी केंद्र भरा तालाब में भी एक-एक क्रैच कार्यकर्ता व एक-एक क्रैच सहायिका के पद भरे जाएंगे।

उन्होंने बताया कि उपमंडल ज्वालामुखी के अंतर्गत नगर परिषद ज्वालामुखी के आंगनबाड़ी केंद्र अपर बोहन में भी एक क्रैच कार्यकर्ता एवं एक क्रैच सहायिका का पद भरा जाएगा।

उन्होंने बताया कि इच्छुक अभ्यर्थी अपने आवेदन पत्र आवश्यक दस्तावेजों सहित 6 अप्रैल, 2026 को सायं 5 बजे तक कार्यालय बाल विकास परियोजना अधिकारी, देहरा में जमा कर सकते हैं। साक्षात्कार की तिथि की सूचना बाद में अलग से दी जाएगी।

उन्होंने स्पष्ट किया कि इन पदों के लिए केवल महिला अभ्यर्थी ही पात्र होंगी। क्रैच कार्यकर्ता के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता 10+2 तथा क्रैच सहायिका के लिए मैट्रिक पास होना अनिवार्य है। अभ्यर्थी संबंधित आंगनवाड़ी/क्रैच केंद्र के फीडर क्षेत्र की स्थायी निवासी होनी चाहिए।

उन्होंने बताया कि अभ्यर्थियों की आयु 18 से 35 वर्ष के बीच होनी चाहिए तथा परिवार की वार्षिक आय 50,000 रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए।

अधिक जानकारी के लिए अभ्यर्थी कार्यालय बाल विकास परियोजना अधिकारी, देहरा से संपर्क कर सकते हैं।

मण्डी: मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने किया ईवीएम भंडारण कक्ष का निरीक्षण

उपायुक्त की उपस्थिति में ईवीएम मशीनों की प्रथम स्तर जांच सम्पन्न

मण्डी: हिमाचल प्रदेश की मुख्य निर्वाचन अधिकारी नंदिता गुप्ता ने आज यहां ईवीएम की प्रथम स्तर की जांच प्रक्रिया का निरीक्षण किया। जिला निर्वाचन कार्यालय मंडी द्वारा जिले के ईवीएम भंडारण कक्ष (वेयरहाउस) भ्यूली में रखी इन इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) की प्रथम स्तर जांच उपायुक्त एवं जिला निर्वाचन अधिकारी अपूर्व देवगन की उपस्थिति में सफलतापूर्वक सम्पन्न की गई। भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप आयोजित इस प्रक्रिया को पूर्ण पारदर्शिता एवं निर्धारित मानकों के तहत संपन्न किया गया।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी नंदिता गुप्ता ने निरीक्षण के दौरान संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि ईवीएम जांच प्रक्रिया को पूरी गंभीरता, पारदर्शिता एवं समयबद्ध तरीके से संपन्न किया जाए। उन्होंने कहा कि निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

निरीक्षण के दौरान उन्होंने मशीनों की जांच प्रक्रिया, सुरक्षा प्रोटोकॉल तथा रिकॉर्ड संधारण का अवलोकन भी किया और संतोष व्यक्त किया।

इस अवसर पर उपायुक्त अपूर्व देवगन ने कहा कि निर्वाचन प्रक्रिया की निष्पक्षता, पारदर्शिता एवं विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए ईवीएम मशीनों की नियमित एवं वैज्ञानिक तरीके से जांच अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि एफएलसी प्रक्रिया के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाता है कि सभी मशीनें तकनीकी रूप से पूर्णत: सही एवं सुरक्षित हैं और आगामी चुनावों के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार, अतिरिक्त उपायुक्त गुरसिमर सिंह, तहसीलदार (निर्वाचन) राजेश शर्मा सहित मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से संजय शर्मा, भारतीय जनता पार्टी से एडवोकेट करणवीर सिंह भी इस अवसर पर उपस्थित रहे और उन्होंने पूरी प्रक्रिया का अवलोकन किया।

हिमाचल विधानसभा के बजट सत्र में विपक्ष ने परिसर में की नारे बाजी; सरकार पर लगाया ‘माफिया राज’ का आरोप

शिमला: हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन सदन के भीतर और बाहर भारी गहमागहमी देखने को मिली, जहां मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने प्रदेश की कांग्रेस सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए अवैध वन कटान और खनन माफिया को संरक्षण देने के गंभीर आरोप लगाए। सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही भाजपा विधायकों ने विधानसभा परिसर में हाथों में तख्तियां लेकर सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की और प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि वर्तमान कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में माफिया राज पूरी तरह से हावी हो चुका है और सत्ता के संरक्षण में बेशकीमती वन संपदा को बेरहमी से लूटा जा रहा है।

जयराम ठाकुर ने विशेष रूप से सिरमौर जिले के शिलाई क्षेत्र का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि वहां केवल 25 पेड़ काटने की अनुमति ली गई थी, लेकिन असलियत में नियम-कानूनों को ताक पर रखकर 300 से अधिक हरे पेड़ों को जमींदोज कर दिया गया, जिसमें एक रसूखदार कांग्रेस नेता की सीधी संलिप्तता सामने आ रही है। पूर्व मुख्यमंत्री ने धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र का जिक्र करते हुए भी सरकार को घेरा और कहा कि वहां भी कांग्रेस नेताओं के इशारे पर सैकड़ों पेड़ों का अवैध कटान किया गया और जब भाजपा विधायकों की जांच कमेटी ने मामले की तह तक जाने के लिए क्षेत्र का दौरा किया, तो साक्ष्यों को मिटाने के लिए उन कटे हुए पेड़ों को सतलुज नदी में फेंक दिया गया तथा कई पेड़ों को जेसीबी मशीनों के जरिए जमीन में दफन कर दिया गया, जो यह दर्शाता है कि माफिया को प्रशासन और सरकार का कोई डर नहीं रह गया है।

विपक्ष ने स्पष्ट किया कि निजी भूमि की आड़ में सरकारी और संरक्षित वनों पर कुल्हाड़ी चलाई जा रही है और अवैध खनन की गतिविधियां भी चरम पर हैं, जिससे न केवल पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है बल्कि प्रदेश के राजस्व को भी करोड़ों का चूना लगाया जा रहा है। नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री से जवाब मांगते हुए कहा कि सरकार इन माफियाओं पर नकेल कसने में पूरी तरह विफल रही है और विपक्ष जनता के हितों तथा पर्यावरण की रक्षा के लिए इस मुद्दे को सदन से लेकर सड़क तक तब तक उठाता रहेगा जब तक दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित नहीं हो जाती।

बिलासपुर: शिवम ट्रेडर्स, घुमारवीं ने अधिसूचित किए आईटीआई/बहुतकनीकी पास इलेक्ट्रीशियन के 25 पद

25 मार्च को उप रोजगार कार्यालय घुमारवीं तथा 27 मार्च को जिला रोजगार कार्यालय में होंगे साक्षात्कार

बिलासपुर: शिवम ट्रेडर्स, गांधी चैक घुमारवीं ने आईटीआई/बहुतकनीकी पास इलेक्ट्रीशियन के 25 पदों को अधिसूचित किया है। इन पदों के लिए 25 मार्च को उप रोजगार कार्यालय घुमारवीं में तथा 27 मार्च को जिला रोजगार कार्यालय बिलासपुर में प्रातः 10ः30 बजे से कैंपस इंटरव्यू का आयोजन किया जाएगा।

इस बारे जानकारी देते हुए जिला रोजगार अधिकारी बिलासपुर राजेश मेहता ने बताया कि इन पदों के लिए केवल योग्य पुरुष उम्मीदवार ही आवेदन कर सकते है। उन्होंने बताया कि इच्छुक उम्मीदवार आयु 18 से 45 वर्ष होनी चाहिए है।

चयनित अभ्यर्थियों को 15,000 रुपये से 18,000 रुपये तक मासिक वेतन प्रदान किया जाएगा। उन्होंने बताया कि चयनित अभ्यर्थियों को सम्बन्धित कम्पनी द्वारा बिलासपुर, घुमारवीं, भराडी, कलोल, कंदरौर, बरठीं, तलाई तथा झंडूता में नियुक्त किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जिनका नाम रोजगार कार्यालय में पंजीकृत नहीं है वो आॅनलाइन वेबसाइट eemis.hp.gov.in पर अपना आवेदन कर सकते है।

उन्होंने बताया कि इच्छुक उम्मीदवार अपने सभी आवश्यक दस्तावेजों सहित निर्धारित स्थान, तिथि व समय पर उपस्थित होकर कैंपस इंटरव्यू में भाग ले सकते हैं। इस सम्बन्ध में अधिक जानकारी के लिए दूरभाष नम्बर 01978-222450 पर सम्पर्क किया जा सकता है।

हमीरपुर: बड़ू क्षेत्र में जल शक्ति विभाग की योजनाओं के पानी के सैंपल पाए गए हैं सही

पेयजल योजनाओं के पानी की लगातार हो रही है सैंपलिंग एवं टैस्टिंग : अधीक्षण अभियंता

जलस्रोतों के अलावा लोगों को घरों की टंकियां साफ रखने के लिए भी किया जा रहा जागरुक

बड़ू और इसके आस-पास के गांवों में तीन दिनों से सामने नहीं आया पीलिया का कोई नया मामला

हमीरपुर :  बीते दिनों हमीरपुर के निकटवर्ती क्षेत्र बड़ू के कुछ गांवों में पीलिया के कई मामले सामने आने पर जल शक्ति विभाग ने त्वरित कदम उठाते हुए इस क्षेत्र में अपनी चारों पेयजल योजनाओं के स्रोतों और टैंकों से पानी के सैंपल लिए हैं और ये सभी सैंपल सही पाए गए हैं।

जल शक्ति विभाग के अधीक्षण अभियंता नीरज भोगल ने बताया कि विभाग के एसडीओ, जेई और अन्य कर्मचारी लगातार फील्ड में हैं। इन अधिकारियों और कर्मचारियों ने चारों पेयजल योजनाओं के स्रोतों और सभी टैंकों की सफाई और पानी की सैंपलिंग एवं टैस्टिंग सुनिश्चित की है।

अधीक्षण अभियंता ने बताया कि राजकीय प्राथमिक पाठशाला स्वाहल की टंकी के पानी का सैंपल ठीक पाया गया है, लेकिन राजकीय उच्च पाठशाला स्वाहल के हैंडपंप का सैंपल सही नहीं है और इसी स्कूल में पीलिया के लगभग 13 मामले सामने आए हैं।

उन्होंने बताया कि बहुतकनीकी कालेज में भी पीलिया के लगभग 13 मामले पाए गए हैं। इस संस्थान के हैंडपंप का सैंपल तो ठीक पाया गया है, लेकिन संस्थान के कई छात्र बड़ू और इसके आस-पास के गांवों में पीजी में रहते हैं। इसलिए, पीलिया फैलने का कारण अन्य जलस्रोत, भवनों की टंकियों में गंदगी या फिर कोई अन्य कारण हो सकता है।

अधीक्षण अभियंता ने बताया कि इस क्षेत्र में 17, 18 और 19 मार्च को पीलिया का कोई नया मामला सामने नहीं आया है। लेकिन, विभाग के एसडीओ, जेई और अन्य कर्मचारी इसके कारणों का पता लगाने के लिए लगातार सक्रिय हैं। इसके अलावा वे सभी लोगों को घरों में अपनी टंकियों को साफ रखने और पेयजल की स्वच्छता के प्रति भी जागरुक कर रहे हैं।

कोविड प्रभावित लोगों के लिए मनो-सामाजिक सहायता हेल्पलाइन

जेईई, नीट और एसएसबी की मुफ्त कोचिंग के लिए पूर्व सैनिक निगम से करें संपर्क..

हमीरपुर: हिमाचल प्रदेश पूर्व सैनिक निगम तीनों सेनाओं के सिपाही से लेकर जेसीओ रैंक तक के सभी पूर्व सैनिकों के बच्चों को जेईई और नीट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए निशुल्क क्रैश कोर्स की सुविधा प्रदान कर रही है।

निगम के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक लेफ्टिनेंट कर्नल (सेवानिवृत्त) पीसी अत्री (सेना मैडल से अलंकृत) ने बताया कि पूर्व सैनिकों के बच्चों को इस वर्ष भी निगम द्वारा हिम अकादमी हमीरपुर के माध्यम से जेईई और नीट का निशुल्क क्रैश कोर्स करवाया जाएगा। इस योजना के तहत क्रैश कोर्स करने वाले अभ्यर्थी की टयूशन फीस निगम अदा करती है।

निगम के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक ने बताया कि जेईई और नीट के अलावा निगम तीनों सेनाओं के पूर्व सैनिकों के बच्चों को अधिकारी वर्ग में प्रवेश के लिए एसएसबी की कोचिंग भी दिला रही है। यह कोचिंग निंबस डिफेंस एसएसबी अकादमी चंडीगढ़ में करवाई जाती है और इसकी टयूशन फीस भी निगम अदा करती है। यह कोचिंग उसी अभ्यर्थी को दिलाई जाती है, जिसने लिखित परीक्षा पास कर ली हो और उसे एसएसबी इंटरव्यू का कॉल लैटर आ गया हो।

इन दोनों योजनाओं के बारे में अधिक जानकारी के लिए निगम के दूरभाष नंबर 01972222472 पर या वेबसाइट एचपीएक्ससर्विसमैन.इन hpexservicemen.in पर लॉग इन किया जा सकता है।

शिमला: ढल्ली टनल से भट्टाकुफर मार्ग पर वाहनों की आवाजाही 24 मार्च बंद

शिमला: जिला दण्डाधिकारी शिमला अनुपम कश्यप ने पूर्व में जारी आदेशों की निरंतरता में आज आदेश जारी करते हुए ढल्ली टनल (वेस्ट पोर्टल) से भट्टाकुफर राष्ट्रीय राजमार्ग से सटी सड़क पर वाहनों की आवाजाही बंद करने की अनुमति को 24 मार्च 2026 तक बढ़ाया है।

₹120 करोड़ से अधिक की देनदारी के बावजूद HPMC में “5 करोड़ का मुनाफा” – कांग्रेस सरकार का वित्तीय खेल उजागर : संदीपनी 

शिमला: भाजपा प्रदेश प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज ने एमआईएस (मार्केट इंटरवेंशन स्कीम) के तहत सेब बागवानों के 120.59 करोड़ रुपये लंबित होने के मामले पर कांग्रेस सरकार को घेरते हुए कहा कि यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि प्रदेश के अन्नदाता के साथ सीधा आर्थिक अन्याय है।

उन्होंने कहा कि मीडिया रिपोर्ट के अनुसार हजारों बागवानों का भुगतान महीनों से लंबित है, जिससे लगभग 57 हजार से अधिक बागवान प्रभावित हुए हैं। यह स्थिति साफ दर्शाती है कि कांग्रेस सरकार न तो किसानों की हितैषी है और न ही उनकी समस्याओं के प्रति संवेदनशील।

संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि कांग्रेस सरकार के अधिकारी यह तर्क दे रहे हैं कि “अधिक सेब खरीद के कारण भुगतान में देरी हुई”, लेकिन यह तर्क पूरी तरह से गैर-जिम्मेदाराना है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार को पहले से अनुमान था तो वित्तीय प्रबंधन क्यों नहीं किया गया? क्या यह सरकार की नाकामी नहीं कि खरीद तो कर ली, लेकिन भुगतान करने की व्यवस्था नहीं की?

उन्होंने कहा कि एमआईएस के तहत 2025 में लगभग 98,506 मीट्रिक टन सेब की खरीद की गई, लेकिन भुगतान की व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। 

यह स्पष्ट संकेत है कि कांग्रेस सरकार केवल घोषणाएं करती है, जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन पूरी तरह विफल है।

भाजपा प्रवक्ता ने आगे कहा कि हिमाचल में विकास कार्य ठप पड़े हैं, ठेकेदारों को भुगतान नहीं हो रहा, और अब बागवानों का पैसा भी अटका दिया गया है। यह सरकार “घोषणाओं की सरकार” बनकर रह गई है, जिसमें न नीति है और न नीयत।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने सत्ता में आने से पहले किसानों और बागवानों के लिए बड़े-बड़े वादे किए थे, लेकिन आज स्थिति यह है कि किसान सड़कों पर हैं और सरकार जवाब देने से बच रही है।

संदीपनी भारद्वाज ने कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश में “भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी” का माहौल बन चुका है, जिसके कारण योजनाओं का पैसा समय पर लाभार्थियों तक नहीं पहुंच पा रहा।

उन्होंने मांग की कि: एमआईएस के तहत लंबित 120.59 करोड़ रुपये का भुगतान तुरंत किया जाए जिम्मेदार अधिकारियों और विभागीय लापरवाही की जांच हो बागवानों को ब्याज सहित भुगतान दिया जाए अंत में उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कांग्रेस सरकार ने जल्द ही बागवानों को उनका हक नहीं दिया, तो भाजपा प्रदेशभर में आंदोलन छेड़ेगी और इस मुद्दे को सड़क से लेकर सदन तक जोरदार तरीके से उठाएगी।

“कांग्रेस सरकार ने हिमाचल को विकास नहीं, बल्कि कर्ज, भ्रष्टाचार और अव्यवस्था के रास्ते पर धकेल दिया है — भाजपा बागवानों की आवाज बनकर इस अन्याय के खिलाफ संघर्ष करेगी।”

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज ने हिमाचल प्रदेश मार्केटिंग कॉरपोरेशन (HPMC) के वित्तीय दावों पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि एक तरफ जहां बागवानों का ₹120 करोड़ से अधिक का भुगतान लंबित है, वहीं दूसरी ओर बोर्ड मीटिंग में ₹5 करोड़ के मुनाफे का दावा किया जा रहा है। यह पूरी तरह से वित्तीय अनियमितता और आंकड़ों की हेराफेरी का मामला प्रतीत होता है।

उन्होंने कहा कि यदि HPMC पर बागवानों की इतनी बड़ी देनदारी (liability) खड़ी है, तो फिर बैलेंस शीट में लाभ (profit) कैसे दिखाया जा सकता है? क्या सरकार और विभाग जनता को गुमराह करने के लिए गलत वित्तीय तस्वीर पेश कर रहे हैं?

संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि यह मामला केवल तकनीकी नहीं, बल्कि गंभीर वित्तीय पारदर्शिता से जुड़ा प्रश्न है। यदि ₹120 करोड़ से अधिक की देनदारी है, तो वास्तविक स्थिति घाटे की होनी चाहिए, न कि लाभ की। ऐसे में यह आशंका और मजबूत होती है कि बैलेंस शीट में तथ्यों को छुपाया या तोड़ा-मरोड़ा गया है।

उन्होंने आगे कहा कि HPMC द्वारा बनाए गए CA स्टोर भी अभी तक किराए पर नहीं दिए गए हैं, जिससे सरकार की कार्यप्रणाली और प्रबंधन पर और सवाल खड़े होते हैं। करोड़ों रुपये की परिसंपत्तियां बेकार पड़ी हैं और दूसरी ओर बागवानों का पैसा अटका हुआ है।

भाजपा प्रवक्ता ने कांग्रेस सरकार से सीधे सवाल पूछे:

जब ₹120 करोड़ से अधिक की देनदारी है, तो ₹5 करोड़ का मुनाफा कैसे दिखाया गया?

क्या HPMC की बैलेंस शीट में हेराफेरी की गई है?

बागवानों का भुगतान कब तक किया जाएगा?

CA स्टोर जैसी संपत्तियों का उपयोग क्यों नहीं हो रहा?

उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की स्वतंत्र ऑडिट जांच करवाई जाए और यदि कोई वित्तीय गड़बड़ी पाई जाती है तो जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

अंत में संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि कांग्रेस सरकार “व्यवस्था परिवर्तन” के नाम पर केवल आंकड़ों की बाजीगरी कर रही है, जबकि जमीनी सच्चाई यह है कि बागवान आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।

“यह सरकार कागजों में मुनाफा दिखा रही है, जबकि हकीकत में हिमाचल का बागवान कर्ज और बकाया भुगत रहा है – भाजपा इस सच्चाई को जनता के सामने लाती रहेगी।”

किसानों की स्थिति आज बेहद चिंताजनक है क्योंकि उन्हें टीएसओ (ट्री स्प्रे ऑयल) जैसी आवश्यक सामग्री समय पर उपलब्ध नहीं करवाई जा रही है। मजबूरी में किसानों को यह महंगा इनपुट अपनी जेब से खरीदना पड़ रहा है, जिससे उनकी लागत और बढ़ गई है। जबकि सरकार को चाहिए था कि एमआईएस (मार्केट इंटरवेंशन स्कीम) के तहत इस खर्च को वहन करते हुए किसानों को राहत देती। यह स्पष्ट दर्शाता है कि कांग्रेस सरकार न तो किसानों की जरूरतों को समझ रही है और न ही उन्हें समय पर सहायता प्रदान कर पा रही है।

2025 बैच के प्रोबेशनर आईएएस अधिकारीयों ने की उपायुक्त से मुलाकात

शिमला: उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप ने आज यहां 09 प्रोबेशनर आईएएस अधिकारियों के दल से मुलाक़ात की। उपायुक्त ने सभी अधिकारियों को शॉल और टोपी से सम्मानित किया और उनके उज्जवल भविष्य की कामना की। 

इस दौरान प्रोबेशनर आईएएस अधिकारियों ने भी उपायुक्त को स्मृति चिन्ह भेंट किया। 

उल्लेखनीय है कि लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी, मसूरी से 12 प्रोबेशनर आईएएस अधिकारियों का यह दल 17 मार्च से 22 मार्च 2026 तक शिमला के विंटर स्टडी टूर पर आया हुआ है और इस दौरान दल शिमला के विभिन्न संस्थानों का दौरा कर रहा है, जिनमें भारतीय उन्नत अध्ययन संस्थान, केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान, इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल, पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय जाखू आदि संस्थान शामिल हैं। 

सीसीआई मशोबरा का दौरा कर सुखाश्रय योजना की जानकारी भी लें प्रोबेशनर अधिकारी – उपायुक्त

उपायुक्त ने प्रोबेशनर आईएएस अधिकारियों को मशोबरा स्थित बाल देखभाल संस्थान का दौरा करने और प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री सुखाश्रय योजना की जानकारी हासिल करने को कहा। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत प्रदेश के सभी निराश्रित और बेसहारा बच्चों को प्रदेश सरकार ने ‘चिल्ड्रन ऑफ़ दी स्टेट’ का दर्जा दिया है और उनकी पढाई-लिखाई, रहने, खाने-पीने, घूमने आदि का सारा खर्च प्रदेश सरकार वहन कर रही है। 

इसके अतिरिक्त, उपायुक्त ने प्रोबेशनर अधिकारियों को बताया कि 21 मार्च 2026 को मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट प्रस्तुत करेंगे। उन्होंने प्रोबेशनर अधिकारियों को बजट सत्र में भाग लेने का सुझाव दिया।

अनुपम कश्यप ने कहा कि अपने विंटर स्टडी टूर पर शिमला आए सभी प्रोबेशनर अधिकारी प्रदेश सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को किस धरातल पर उतारा जाता है, इस बात की जानकारी हासिल करेंगे। उन्होंने कहा कि यह प्रत्यक्ष अनुभव उनमें समाज के कमजोर वर्ग के प्रति सहानुभूति जगाएगा, जिनकी आगे चलकर उन्हें सेवा करनी है।

इस दौरान तहसील कल्याण अधिकारी सुरेंदर बिमटा भी उपस्थित रहे जिन्हे जिला प्रशासन द्वारा प्रोबेशनर आईएएस अधिकारियों के दल के साथ नोडल अधिकारी के रूप में तैनात किया गया है।