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हिमाचल: नूरपुर पुलिस की नशा माफिया पर बड़ी कार्रवाई; इंदौरा में 48.30 लाख की संपत्ति की जब्त

हिमाचल:  प्रदेश पुलिस के प्रवक्ता ने आज यहां बताया कि एंटी चिट्टा अभियान के तहत पुलिस जिला नूरपुर ने एक और महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। पुलिस ने पीआईटी-एनडीपीएस-एक्ट के तहत नशा तस्कर की अवैध गतिविधियों से अर्जित 48,30,997 रुपये की संपत्ति जब्त की है। यह मामला जिला कांगड़ा की तहसील इंदौरा के गांव सिरत के निवासी से संबंधित है। 30 जुलाई, 2023 को पुलिस थाना डमटाल के अंतर्गत भद्राया में नाकाबंदी के दौरान उसके कब्जे से 10.1 ग्राम चिट्टा और 8,500 रुपये बरामद किए गए थे। इस संबंध में एनडीपीएस अधिनियम की धारा-21 और 25 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इससे पहले भी वर्ष, 2022 में उसके विरुद्ध एनडीपीएस अधिनियम के तहत दो मामले दर्ज किए गए थे, जिनमें क्रमशः 8.35 ग्राम और 9.92 ग्राम हेरोइन बरामद की गई थी।
मादक पदार्थों की तस्करी में उसकी निरन्तर संलिप्तता को देखते हुए पुलिस जिला नूरपुर ने उसे पीआईटी-एनडीपीएस अधिनियम के तहत हिरासत में लेने की सिफारिश की थी।
प्रवक्ता ने बताया कि आगे की कार्रवाई के तहत पुलिस जिला नूरपुर ने संलिप्त व्यक्ति की चल एवं अचल संपत्तियों की विस्तृत वित्तीय जांच की और 48,30,997 रुपये की संपत्ति की पहचान की। एनडीपीएस अधिनियम की धारा 68एफ(1) के तहत 12 जून, 2025 को संपत्ति फ्रीज करने का आदेश जारी किया गया, जिसे सक्षम प्राधिकारी ने 9 जुलाई, 2025 को पुष्टि प्रदान की। निर्धारित कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के उपरान्त चिन्हित संपत्तियों को जब्त किया गया।
जब्त की गई संपत्तियों में जिला कांगड़ा की तहसील इंदौरा के गांव छन्नी में स्थित 45,90,557 रुपये मूल्य का एक आवासीय मकान तथा मादक पदार्थों से अर्जित कुल 2,40,440 रुपये शामिल हैं। इस प्रकार जब्त संपत्ति का कुल मूल्य 48,30,997 रुपये है।
प्रवक्ता ने बताया कि यह कार्रवाई मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के एंटी चिट्टा अभियान के प्रति हिमाचल प्रदेश पुलिस की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इस अभियान के तहत केवल मादक पदार्थों के तस्करों को गिरफ्तार करना और नशीले पदार्थों को जब्त करना ही नहीं, बल्कि अवैध गतिविधियों से अर्जित संपत्तियों की पहचान कर उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करना भी शामिल है, ताकि नशे के अवैध कारोबार को आर्थिक रूप से समर्थन देने वाले नेटवर्क को समाप्त किया जा सके।
उन्होंने कहा कि नशामुक्त हिमाचल के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए पुलिस जिला नूरपुर मादक पदार्थों की तस्करी और इससे अर्जित अवैध संपत्तियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई जारी रखेगा। उन्होंने आम जनता से आग्रह किया कि मादक पदार्थों की तस्करी से संबंधित जानकारी पुलिस के साथ साझा करें, ताकि युवाओं को इस सामाजिक बुराई से बचाया जा सके।

हिमाचल में शिक्षकों के लिए राज्यव्यापी सतत व्यावसायिक विकास कार्यक्रम का शुभारंभ

भारती एयरटेल फाउंडेशन, समग्र शिक्षा हिमाचल प्रदेश एवं नीति आयोग की साझेदारी से शिक्षकों को मिलेगा आधुनिक शिक्षण संसाधनों और तकनीक का लाभ

हिमाचल: प्रदेश में शिक्षकों की क्षमता वृद्धि और उनके निरंतर व्यावसायिक विकास को सशक्त बनाने के उद्देश्य से भारती एयरटेल फाउंडेशन, समग्र शिक्षा हिमाचल प्रदेश एवं नीति आयोग ने संयुक्त रूप से TheTeacherApp के माध्यम से 

राज्यव्यापी सतत व्यावसायिक विकास कार्यक्रम (Continuous Professional Development Programme for Teachers) का शुभारंभ वीरवार को पीटरहॉफ होटल में किया गया। इस कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। राज्यव्यापी सतत व्यावसायिक विकास कार्यक्रम की पहल का उद्देश्य प्रदेश के शिक्षकों को उच्च गुणवत्ता वाले प्रशिक्षण संसाधन, नवीन शिक्षण पद्धतियां और तकनीक आधारित शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध करवाना है। इस पहल के माध्यम से शिक्षकों को निरंतर सीखने, अपने शिक्षण कौशल को बेहतर बनाने तथा कक्षा में प्रभावी शिक्षण पद्धतियों को अपनाने के अवसर मिलेंगे। इससे विद्यार्थियों के सीखने के परिणामों में सुधार लाने में भी मदद मिलेगी।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की आधारशिला शिक्षक हैं और विद्यार्थियों के भविष्य के निर्माण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। बदलती शैक्षणिक आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षकों को आवश्यक ज्ञान, कौशल और संसाधनों से सुसज्जित करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भारती एयरटेल फाउंडेशन, समग्र शिक्षा हिमाचल प्रदेश और नीति आयोग के सहयोग से शुरू की गई यह पहल राज्य में शिक्षकों की क्षमता वृद्धि को सशक्त बनाने तथा विद्यार्थियों के सीखने के परिणामों में सुधार लाने में सहायक सिद्ध होगी। शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षा के स्तर में सुधार, विद्यार्थियों की प्रतिभा को निखारने तथा युवाओं को बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध करवाने के लिए प्रतिबद्ध है। शिक्षा किसी भी समाज और राष्ट्र की प्रगति का आधार है। ऐसे में विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित रखने के बजाय उनमें आलोचनात्मक चिंतन, समस्या समाधान, रचनात्मकता और तकनीकी समझ जैसी क्षमताओं का विकास करना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक और नवाचार शिक्षा को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं, लेकिन शिक्षकों का स्थान कोई भी तकनीक नहीं ले सकती। शिक्षक सूर्य के समान हैं और शिक्षा व्यवस्था रूपी सौरमंडल उनके बिना अधूरा है। आधुनिक तकनीक शिक्षकों की सहायता अवश्य कर सकती है, लेकिन विद्यार्थियों को सही दिशा देने, उनमें मानवीय मूल्यों का विकास करने और उनके व्यक्तित्व को निखारने में शिक्षक की ही भूमिका सर्वोपरि रहेगी।

शिक्षा क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश की प्रमुख उपलब्धियां: शिक्षा मंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश ने शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। प्रदेश सरकार का प्रयास है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लाभ दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों, जनजातीय इलाकों और समाज के सभी वर्गों तक पहुंचे। शिक्षा क्षेत्र में हुए सुधारों और उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार के साथ-साथ डिजिटल शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण और विद्यार्थियों के कौशल विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। आज हिमाचल शिक्षा के क्षेत्र में देश भर में इतिहास लिख रहा है। इसमें शिक्षकों की भूमिका सबसे अधिक है।

भारती एयरटेल फाउंडेशन की मुख्य कार्यकारी अधिकारी नूरिया अंसारी ने कहा कि सशक्त शिक्षक ही बच्चों के लिए सार्थक और प्रभावी शिक्षण अनुभवों का निर्माण करते हैं। TheTeacherApp के माध्यम से शिक्षकों को सुलभ, उच्च गुणवत्ता वाले और व्यावहारिक व्यावसायिक विकास संसाधन उपलब्ध करवाने के लिए फाउंडेशन प्रतिबद्ध है। उन्होंने इस साझेदारी के लिए हिमाचल प्रदेश सरकार, समग्र शिक्षा हिमाचल प्रदेश और नीति आयोग का आभार व्यक्त किया।

नीति आयोग के ओएसडी लेफ्टिनेंट कर्नल जितेंद्र वर्मा ने कहा कि शिक्षकों की क्षमता वृद्धि, शैक्षणिक परिणामों में सुधार और गुणवत्तापूर्ण सीखने के अवसरों तक समान पहुंच सुनिश्चित करने के लिए निरंतर व्यावसायिक विकास महत्वपूर्ण है। TheTeacherApp शिक्षकों को व्यापक स्तर पर पेशेवर विकास के अवसर उपलब्ध करवाने वाला एक अभिनव मंच है। उन्होंने इस पहल को भविष्य के लिए तैयार शिक्षा व्यवस्था के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

इस अवसर पर राजकीय उच्च पाठशाला कश्मल के न्यूज़लेटर “कश्मल क्रॉनिकल्स” पहला संस्करण लॉन्च किया गया।

स्कूल शिक्षा निदेशक आशीष कोहली ने कहा कि भारती एयरटेल फाउंडेशन शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान दे रही है। फाउंडेशन ने पहले चरण में 50 स्कूलों में कार्य शुरू किया था और वर्तमान में 160 स्कूलों में भारती एयरटेल फाउंडेशन कार्य कर रही है। लेकिन अब यह टीचर ऐप प्रदेश के सभी शिक्षकों के लिए उपलब्ध रहेगी। शिक्षकों की प्रोफेशनल गुणवत्ता को बढ़ाने की दिशा में उक्त ऐप मददगार साबित होगी।

हिमाचल प्रदेश के शिक्षकों ने शिक्षण में नवाचार और एआई तकनीक के उपयोग से बनाई पहचान: हिमाचल प्रदेश के विभिन्न जिलों के शिक्षकों ने शिक्षण प्रक्रिया में नवाचार, सकारात्मक सोच और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक के उपयोग के माध्यम से उल्लेखनीय पहचान बनाई है। द टीचर ऐप से संबंधित उपलब्ध विवरण के अनुसार, प्रदेश के शिक्षकों को उड़ान पुरस्कार, विकासोन्मुख सोच तथा एआई टूल्स के उपयोग जैसी विभिन्न श्रेणियों में शामिल किया गया है।

उड़ान पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों में 10 शिक्षक शामिल: उड़ान पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों की सूची में चंबा जिला से प्रदीप कुमार, विक्की, अश्वनी कुमार और करनैल सिंह, हमीरपुर जिला से परवीन कुमारी, सपना शर्मा और रेणुका कुमारी, सिरमौर जिला से बीरमा शर्मा, मंडी जिला से संदीप कुमार तथा किन्नौर जिला से इंद्रा कुमारी शामिल हैं। यह शिक्षक अपने-अपने विद्यालयों में शैक्षणिक गतिविधियों से जुड़े हुए हैं।

विकासोन्मुख सोच वाले शीर्ष पांच शिक्षक: विकासोन्मुख सोच वाले शीर्ष पांच शिक्षकों की सूची में चंबा जिला के युधवीर टंडन, हमीरपुर के यज्ञनिश कुमार, शिमला की शीतल ठाकुर, सोलन की अंजना कुमारी धीमान तथा शिमला की मुक्ता शामिल हैं। यह श्रेणी शिक्षकों की सकारात्मक सोच और शैक्षणिक विकास के प्रति उनके दृष्टिकोण को रेखांकित करती है।

एआई टूल्स का उपयोग करने वाले पांच शिक्षक: एआई टूल्स का उपयोग करने वाले शीर्ष पांच शिक्षकों में हमीरपुर जिला की मीनाक्षी शर्मा, बिलासपुर के दैजित सिंह और मंजू शर्मा, मंडी की जमना देवी तथा सोलन के नरेंद्र कुमार शामिल हैं। इन शिक्षकों द्वारा कक्षा की शिक्षण गतिविधियों में एआई टूल्स के उपयोग को विशेष रूप से दर्ज किया गया है।

TheTeacherApp शिक्षकों के लिए निःशुल्क डिजिटल मंच: TheTeacherApp भारती एयरटेल फाउंडेशन का निःशुल्क डिजिटल मंच है, जिसके माध्यम से देशभर में 3.5 लाख से अधिक उपयोगकर्ताओं को प्रशिक्षण एवं व्यावसायिक विकास के अवसर उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। यह मंच स्व-गति आधारित व्यावसायिक विकास पाठ्यक्रमों, विशेषज्ञों द्वारा संचालित वेबिनार, पाठ योजनाओं, मूल्यांकन संबंधी एआई-सक्षम उपकरणों, कक्षा शिक्षण संसाधनों, प्रश्न बैंकों और अवधारणा-आधारित अध्ययन सामग्री सहित विविध सुविधाएं प्रदान करता है।

यह कार्यक्रम समग्र शिक्षा हिमाचल प्रदेश, नीति आयोग, हिमाचल प्रदेश सरकार के शिक्षा विभाग तथा भारती एयरटेल फाउंडेशन की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इसके माध्यम से प्रदेश में शिक्षकों की क्षमता को मजबूत बनाने, आधुनिक तकनीक के प्रभावी उपयोग को प्रोत्साहित करने तथा विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवाने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे।

यह रहे मौजूद: इस अवसर पर उच्च शिक्षा निदेशक डॉ सुनीता सिंह तथा राज्य परियोजना निदेशक, नीति आयोग के ओएसडी लेफ्टिनेंट कर्नल जितेंद्र वर्मा वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम में शामिल हुए।

नई शिक्षा नीति से मिलेंगे दूरगामी परिणाम : त्रिलोक जम्वाल

PDNA फंड में फर्जी टेंडर और कागजों पर काम दिखाकर भुगतान के गंभीर आरोप, कांग्रेस सरकार दे एक-एक रुपये का हिसाब – त्रिलोक जमवाल

शिमला: भाजपा के वरिष्ठ प्रवक्ता एवं विधायक त्रिलोक जमवाल ने PDNA फंड के उपयोग को लेकर कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश में आपदा पुनर्निर्माण के नाम पर सामने आ रही अनियमितताओं की शिकायतें अत्यंत गंभीर हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ स्थानों पर जहां भूस्खलन हुआ ही नहीं, वहां कागजों में स्लिप दिखाकर टेंडर बनाए गए और बिना पर्याप्त काम के बिलों का भुगतान करने की शिकायतें सामने आ रही हैं। यह जनता के पैसे से जुड़ा गंभीर मामला है, जिसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

जमवाल ने कहा कि केंद्र सरकार ने 18 जून 2025 को वर्ष 2023 की आपदा के बाद हिमाचल प्रदेश के लिए ₹2,006.40 करोड़ की पुनर्निर्माण योजना स्वीकृत की, जिसमें केंद्रीय हिस्सा ₹1,504.80 करोड़ था। पहली केंद्रीय किस्त के रूप में ₹451.44 करोड़ जारी किए गए।

उन्होंने कहा कि 13 जनवरी 2026 के सरकारी आदेश के अनुसार दूसरी किस्त में विभिन्न विभागों के लिए ₹753.29 करोड़ स्वीकृत हुए, जिसमें ₹564.97 करोड़ केंद्रीय और ₹188.32 करोड़ राज्य हिस्सा दर्शाया गया है। अकेले लोक निर्माण विभाग को ₹487.80 करोड़, जल शक्ति विभाग को ₹176.48 करोड़, कृषि विभाग को ₹29.13 करोड़ और बिजली बोर्ड को ₹18.22 करोड़ स्वीकृत किए गए।

जमवाल ने सवाल किया कि जब सड़कों और पुलों के पुनर्निर्माण के लिए इतनी बड़ी राशि स्वीकृत हुई, तो आज भी अनेक सड़कें बदहाल क्यों हैं? जनता गड्ढों, टूटी सड़कों और बाधित यातायात से परेशान क्यों है? उन्होंने कहा कि अगस्त 2026 में 259 सड़कें अवरुद्ध होने की खबरें सामने आई थीं। सितंबर में ठियोग और किन्नौर के पूह क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग-5 पर भी यातायात बाधित हुआ।

त्रिलोक जमवाल ने कहा कि सरकारी आदेश में स्पष्ट निर्देश हैं कि PDNA का पैसा केवल 2023 की आपदा में क्षतिग्रस्त और स्वीकृत परिसंपत्तियों पर खर्च होगा। नियमों से बाहर खर्च की व्यक्तिगत जिम्मेदारी संबंधित स्वीकृति अधिकारियों की होगी। ऐसे में सरकार बताए कि क्या प्रत्येक टेंडर से पहले वास्तविक नुकसान का सत्यापन किया गया?

उन्होंने कहा कि आदेश में मार्च 2026 तक धनराशि उपयोग करने और उपयोगिता प्रमाणपत्र जमा करवाने के निर्देश थे। मुख्यमंत्री बताएं कि कितने कार्य पूरे हुए, कितने बिल पास हुए और कितने कार्यों की जांच हुई?

जमवाल ने आरोप लगाया कि राजनीतिक संरक्षण प्राप्त ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने की शिकायतों को सरकार नजरअंदाज नहीं कर सकती। उन्होंने मांग की कि सभी 68 विधानसभा क्षेत्रों की स्वीकृत राशि, टेंडर, ठेकेदारों और भुगतान का विवरण सार्वजनिक किया जाए।

उन्होंने कहा, “आपदा पीड़ितों के पुनर्निर्माण का पैसा किसी के राजनीतिक संरक्षण या निजी लाभ का साधन नहीं बन सकता। जहां अनियमितता के प्रमाण मिलें, वहां जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर कठोर कार्रवाई हो।”

जमवाल ने सभी संदिग्ध कार्यों का विशेष ऑडिट, भौतिक सत्यापन और PDNA फंड पर विधानसभा क्षेत्रवार श्वेतपत्र जारी करने की मांग की।

शिमला: एसजेवीएन ने किया 29वें इंटर-सीपीएसयू कैरम टूर्नामेंट का आयोजन

शिमला:  एसजेवीएन अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, भूपेन्द्र गुप्ता ने निगम द्वारा आयोजित 29वें आंतर-सीपीएसयू कैरम टूर्नामेंट के आरंभ पर भाग लेने वाली सभी टीमों को अपनी शुभकामनाएं दीं है। एसजेवीएन, भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय के अंतर्गत 'पावर स्पोर्ट्स कंट्रोल बोर्ड' (पीएससीबी) के तत्वावधान में 29वें आंतर-सीपीएसयू कैरम टूर्नामेंट का आयोजन कर रहा है। पंकज पोरवाल (आईटीएस), मुख्य सतर्कता अधिकारी, एसजेवीएन ने आज शिमला में इस टूर्नामेंट का उद्घाटन किया।
समारोह को संबोधित करते हुए, पंकज पोरवाल ने कहा कि एसजेवीएन को जीवंत खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के प्रति कंपनी की प्रतिबद्धता को दर्शाते हुए इस टूर्नामेंट की मेजबानी करने में गर्व महसूस हो रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह आयोजन प्रतिभागियों को अपने कौशल को निखारने, अपनी विश्लेषणात्मक क्षमताओं को तीव्र करने और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, आपसी भाईचारे तथा खेल भावना के मूल्यों को बनाए रखने का अवसर प्रदान करेगा।
अपने स्वागत भाषण में सीमा कुमार, विभागाध्यक्ष (मा.सं.) ने भाग लेने वाली टीमों का हार्दिक स्वागत किया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि यह टूर्नामेंट विभिन्न संगठनों के मध्य संबंधों को सुदृढ़ करने, आपसी
सम्मान को बढ़ावा देने और निष्पक्ष खेल-भावना को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। विद्युत मंत्रालय, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण और सीपीएसयू, अर्थात बीबीएमबी, डीवीसी, ग्रिड इंडिया, नीपको, एनएचपीसी, पीएफसी, पीजीसीआईएल, आरईसी, टीएचडीसी तथा एसजेवीएन के पुरुष और महिलाओं की 12 टीमें, एकल और टीम इवेंट्स के रूप में भाग ले रही हैं। समापन समारोह दिनांक 26 अक्टूबर, 2026 को आयोजित किया जाएगा। संपूर्ण टूर्नामेंट के दौरान इंडियन कैरम फेडरेशन के नियमों का अनुपालन किया जाएगा।
इस अवसर पर, एसजेवीएन के बी.आर. सेठी, कार्यकारी निदेशक (वित्त), दीपक सिन्हा,
विभागाध्यक्ष(सीएफएमडी), सीमा कुमार, विभागाध्यक्ष(मा.सं.), हितेश कपूर, मुख्य महाप्रबंधक; उत्तराखंड राज्य कैरम एसोसिएशन के मुख्य रेफरी अनिल कुमार गुप्ता; हिमाचल प्रदेश राज्य कैरम एसोसिएशन के उप-मुख्य रेफरी एवं महासचिव विनोद कुमार, तथा इन एसोसिएशनों के वरिष्ठ अधिकारियों की एक टीम भी उपस्थित रही।
केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा गठित पावर स्पोर्ट्स कंट्रोल बोर्ड एक खेल निकाय है और खेल गतिविधियों को बढ़ावा देना और प्रतिस्पर्धात्मक उपलब्धियों का उत्सव मनाने के उद्देश्य इसे भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय का संरक्षण प्राप्त है।

राज्य एड्स नियंत्रण समिति द्वारा रेड रन आयोजित

एचआईवी एड्स के प्रति जागरूकता व संवेदनशीलता का संदेश

हिमाचल :  प्रदेश राज्य एड्स नियंत्रण समिति द्वारा एचआईवी तथा एड्स के प्रति जागरूकता लाने, इससे जुड़ी व्याप्त भ्रांतियों को दूर करने, एचआईवी से ग्रसित लोगों के प्रति संवेदनशीलता का भाव विकसित करने तथा युवाओं को स्वस्थ्य जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से आज शिमला स्थित पीटरहॉफ में राज्य स्तरीय मैराथन-रेड रन के चौथे संस्करण का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्यातिथि निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. गोपाल बेरी ने महिला एवं पुरुष वर्गों के लिए आयोजित रेड रन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। रेड रन का आयोजन ‘यूथ फॉर एचआईवी एण्ड एसटीआई’ की थीम पर किया गया। इसके माध्यम से जन-जन तक यह संदेश पहुंचाने का प्रयास किया गया कि जागरूकता, सही जानकारी और सामूहिक भागीदारी से एचआईवी तथा एड्स से जुड़ी चुनौतियों का प्रभावी रूप से सामना किया जा सकता है।
रेड रन राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन की एक पहल है जो महाविद्यालयों में चल रहे रेड रिबन क्लबों के माध्यम से आयोजित की जाती है। रेड रिबन विश्व में एचआईवी तथा एड्स के प्रति जागरूकता और एचआईवी पॉजिटिव लोगों के प्रति एकजुटता का प्रतीक है। रेड रन इसी मिशन का सबसे ऊर्जावान रूप है। संक्रमित सुई या सिरिंज साझा करने से एचआईवी और हेपेटाइटिस-बी एवं सी जैसे संक्रमणों का ख़तरा बढ़ सकता है। इसे ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार द्वारा युवाओं को नशे और इंजेक्शन के माध्यम से नशीले पदार्थों के सेवन से दूर रखने के साथ-साथ उनमें जागरूकता बढ़ाने के व्यापक प्रयास लगातार जारी है।
संक्रमण के मामलों को देखते हुए राज्यभर में स्क्रीनिंग और जांच की जा रही है ताकि संक्रमण की शीघ्र पहचान कर उचित उपचार शुरू किया जा सके। प्रदेश सरकार द्वारा इंजेक्शन के माध्यम से नशीले पदार्थों का सेवन करने वाले व्यक्तियों को आवश्यक परामर्श प्रदान करने के साथ ही ओएसटी सेवाएं प्रदान करने को प्राथमिकता प्रदान की जा रही है। हिमाचल प्रदेश के 9 जिलों- ऊना, शिमला, हमीरपुर, चम्बा, कांगड़ा, सिरमौर, बिलासपुर, कुल्लू और मंडी- में कुल 20 ओएसटी केन्द्रों के माध्यम से ओएसटी सेवाएं प्रदान की जा रही हैं।
राज्य स्तरीय मैराथन-रेड रन में शिमला, बिलासपुर, मंडी, सोलन, कांगड़ा, ऊना और हमीरपुर जिलों से कुल 70 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें प्रत्येक जिला से 5 लड़के और 5 लड़कियां शामिल हुईं। रेड रन पीटरहॉफ से सीटीओ तक आयोजित किया गया। पुरुष वर्ग में प्रथम पुरस्कार जिला शिमला के जतिन, द्वितीय पुरस्कार जिला शिमला के ध्रुव तथा तृतीय पुरस्कार हमीरपुर के आर्यन ने प्राप्त किया। महिला वर्ग में प्रथम पुरस्कार जिला हमीरपुर की शिवाली, द्वितीय पुरस्कार जिला ऊना की कुमारी रविना तथा तृतीय पुरस्कार जिला हमीरपुर की राशि ने प्राप्त किया।
इस मैराथन में चयनित 4 प्रतिभागी, 2 लड़के व 2 लड़कियां, 3 नवम्बर, 2026 को बिहार के पटना में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय मैराथन-रेड रन में हिमाचल प्रदेश का प्रतिनिधित्व करेंगे।
इस अवसर पर राज्य एड्स नियंत्रण समिति के राज्य कार्यक्रम अधिकारी डॉ. राजेश ठाकुर ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए कहा कि सभी प्रतिभागियों ने अपनी भागीदारी के माध्यम से नशे के विरुद्ध और एचआईवी एड्स के प्रति जागरूकता के संदेश, समानता एवं संवेदनशीलता के संदेश तथा दिशाबद्ध युवाशक्ति एवं स्वस्थ्य जीवनशैली के संदेश को आगे बढ़ाया है।
इस अवसर पर जय शवरी लोक कलामंच ठियोग से संबंधित कलाकारों ने नशे और एचआईवी पर जागरूकता पर आधारित विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का मंचन किया।
कार्यक्रम में राज्य एड्स नियंत्रण समिति के वरिष्ठ अधिकारी तथा कर्मचारी तथा जिलों से आए प्रतिभागी उपस्थित थे।

पालमपुर: कृषि विवि में नवप्रवेशी विद्यार्थियों के लिए दो सप्ताह का ‘दीक्षारंभ’ कार्यक्रम

कार्यक्रम में विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था, नियमों, संस्थागत मूल्यों और करियर अवसरों से करवाया परिचित

पालमपुर: चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर के कृषि महाविद्यालय में नवप्रवेशी विद्यार्थियों के लिए 8 से 21 अक्टूबर, 2026 तक दो सप्ताह का ‘दीक्षारंभ’ विद्यार्थी प्रेरण एवं आधारभूत प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को विद्यालय से विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था में सहज रूप से समायोजित करना तथा उन्हें विश्वविद्यालय के शैक्षणिक वातावरण, संस्थागत मूल्यों, परिसर सुविधाओं और नियमों से परिचित करवाना था।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय के विभिन्न महाविद्यालयों तथा कृषि महाविद्यालय के विभिन्न विभागों का भ्रमण करवाया गया। उन्हें विश्वविद्यालय की संगठनात्मक संरचना, शैक्षणिक नियमों, आचार संहिता, अनुशासन, परीक्षा प्रणाली, छात्रवृत्ति सुविधाओं और परीक्षाओं में अनुचित साधनों के प्रयोग से संबंधित नियमों की जानकारी दी गई। इन गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली समझने और नए वातावरण में सहज होने का अवसर मिला।

प्रेरणात्मक सत्रों के दौरान कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. ए.डी. बिंद्रा, विद्यार्थी कल्याण अधिकारी डॉ. जय देव तथा विभिन्न विभागाध्यक्षों ने विद्यार्थियों से संवाद किया। उन्होंने विश्वविद्यालय में संचालित शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक गतिविधियों, विभागीय सुविधाओं और विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध अवसरों की जानकारी दी। इसके अतिरिक्त, विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. (मेजर सेवानिवृत्त) अवनींद्र कुमार (एचपीएएस), चिकित्सा अधिकारी डॉ. पारुल ठाकुर, इन्क्यूबेशन सेंटर के प्रभारी डॉ. एस.के. संदल, उप विद्यार्थी कल्याण अधिकारी डॉ. अंजली सूद, एनएसएस अधिकारी डॉ. अंजना पटियाल, एनसीसी अधिकारी डॉ. निशांत तथा उप कुलसचिव राकेश कुमार अवस्थी ने भी विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया।

कार्यक्रम में उद्योग जगत और विश्वविद्यालय के पूर्व विद्यार्थियों के साथ संवाद सत्र भी आयोजित किए गए। उद्योग विशेषज्ञ डॉ. एस.एस. कटियार, इफको के राज्य विपणन प्रबंधक, पूर्व विद्यार्थी डॉ. एच.एल. शर्मा और डॉ. वीरेंद्र कुमार तथा कृषि उपनिदेशक कार्यालय, पालमपुर की विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. अंजू ठाकुर ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने विद्यार्थियों को करियर की संभावनाओं, उद्योग से जुड़ाव और व्यावसायिक अवसरों के बारे में जानकारी देकर प्रेरित किया।

विद्यार्थियों में रचनात्मकता, तार्किक चिंतन और पारस्परिक संवाद कौशल विकसित करने के लिए साहित्यिक गतिविधियां, परिचयात्मक सत्र और विभिन्न खेल आयोजित किए गए। सार्वभौमिक मानवीय मूल्यों, सामाजिक मुद्दों और करियर अवसरों पर जागरूकता सत्र भी आयोजित किए गए। सांस्कृतिक गतिविधियों के अंतर्गत विद्यार्थियों को गायन और नृत्य में प्रतिभा प्रदर्शित करने तथा अक्टूबर के अंत में प्रस्तावित फ्रेशर्स डे की तैयारी करने का अवसर मिला।

कार्यक्रम के आयोजन में डॉ. राज पाल शर्मा, डॉ. राजेश ठाकुर, डॉ. रामेश्वर कुमार, डॉ. विजय कुमारी, डॉ. प्रवीण शर्मा और डॉ. कनिका बघला ने योगदान दिया। ‘दीक्षारंभ’ कार्यक्रम के माध्यम से नवप्रवेशी विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय के वातावरण से परिचित करवाने, उनमें आत्मविश्वास विकसित करने तथा उनकी शैक्षणिक यात्रा की सकारात्मक शुरुआत सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया।

मुख्यमंत्री के नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश सरकार ने हिमाचल प्रदेश पोषण नीति, 2026 को दी स्वीकृति

पारंपरिक खानपान को बढ़ावा देने, खाद्य सुरक्षा सुदृढ़ करने और कुपोषण से निपटने के लिए नई पोषण नीति

हिमाचल : प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के दूरदर्शी नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश पोषण नीति, 2026 को स्वीकृति प्रदान की है। इस नीति का उद्देश्य कुपोषण, एनीमिया, सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी, आहार में विविधता का अभाव तथा खानपान से जुड़ी उभरती बीमारियों जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए एक व्यापक और समन्वित व्यवस्था विकसित करना है। नीति में पारंपरिक हिमाचली खानपान, मौसमी फलों, दालों, मोटे अनाज, हरी पत्तेदार सब्जियों, दुग्ध उत्पादों तथा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया गया है, ताकि जन स्वास्थ्य में सुधार के साथ-साथ लोगों में स्वस्थ खानपान की आदतों को प्रोत्साहित किया जा सके।
यह नीति पोषण के प्रति जीवन-चक्र आधारित दृष्टिकोण अपनाती है, जिसमें जीवन के पहले 1,000 दिनों, मातृ एवं शिशु पोषण, किशोरों तथा समाज के कमजोर वर्गों पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसका उद्देश्य सभी लोगों को सुरक्षित, पौष्टिक और किफायती भोजन उपलब्ध करवाना तथा ऐसे संतुलित एवं सांस्कृतिक रूप से स्वीकार्य आहार को प्रोत्साहित करना है, जिसे परिवार आसानी से अपनी दैनिक जीवनशैली में शामिल कर सकें। दूरदराज और जनजातीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक पोषण एवं स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने के लिए भी विशेष प्रावधान किए जाएंगे।
इस नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, महिला एवं बाल विकास, शिक्षा, कृषि, बागवानी, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, जल शक्ति, ग्रामीण विकास, पंचायती राज सहित अन्य संबंधित विभागों के बीच समन्वित प्रयास किए जाएंगे। विभिन्न विभागों के बीच समन्वय, योजना निर्माण, क्रियान्वयन और निगरानी को सुदृढ़ करने के लिए राज्य पोषण समन्वय प्रकोष्ठ तथा जिला पोषण समन्वय प्रकोष्ठ स्थापित करने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही, एकीकृत बाल विकास सेवा, पीएम पोषण योजना और सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत संचालित पोषण संबंधी कार्यक्रमों को और मजबूत बनाने पर विशेष बल दिया जाएगा। नीति में सामुदायिक सहभागिता तथा व्यवहार परिवर्तन संचार को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है।
खाद्य सुरक्षा संबंधी अधोसंरचना और निगरानी व्यवस्था को सुदृढ़ करना भी इस नीति का एक प्रमुख घटक है। इसके तहत कंडाघाट स्थित संयुक्त परीक्षण प्रयोगशाला का उन्नयन तथा प्रदेश में चार नई प्रयोगशालाएं स्थापित करने की परिकल्पना की गई है। इन पहलों के प्रभावी संचालन के लिए आवश्यक पदों के सृजन और उन्हें भरने का प्रावधान भी किया गया है। धर्मशाला में नई प्रयोगशाला स्थापित करने की प्रक्रिया पहले ही शुरू की जा चुकी है।
इन उपायों से खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की निगरानी बेहतर होगी, उनमें मिलावट एवं दूषित खाने का पता लगाने में सहायता मिलेगी तथा निर्धारित खाद्य सुरक्षा और पोषण मानकों का अनुपालन सुनिश्चित किया जा सकेगा। इस प्रकार, हिमाचल प्रदेश पोषण नीति, 2026 का उद्देश्य प्रदेशवासियों को सुरक्षित, पौष्टिक और संतुलित आहार उपलब्ध करवाने के साथ-साथ स्वस्थ समाज के निर्माण की दिशा में ठोस कदम उठाना है।
नीति में प्रयोगशाला आधारित निगरानी, मोबाइल खाद्य परीक्षण सुविधाओं, जल गुणवत्ता की निगरानी तथा प्रस्तावित राज्य पोषण पोर्टल के माध्यम से पोषण संबंधी आंकड़ों के डिजिटल एकीकरण का भी प्रस्ताव किया गया है। इन पहलों से साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने, निगरानी व्यवस्था को सुदृढ़ करने तथा समय पर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने में सहायता मिलने की उम्मीद है। इसके अतिरिक्त, नीति के तहत पोषण संबंधी जागरूकता बढ़ाने, खाद्य सुरक्षा के प्रति लोगों को शिक्षित करने तथा पहले से संचालित पोषण कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी विशेष बल दिया गया है।
ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार स्वस्थ, सुपोषित और सशक्त हिमाचल प्रदेश के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि पोषण मानव विकास की आधारशिला है और प्रत्येक बच्चे, महिला तथा नागरिक को सुरक्षित, पौष्टिक एवं किफायती भोजन उपलब्ध होना आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस नीति राज्य में पोषण संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए एक व्यापक रूपरेखा की परिकल्पना की गई है। इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी संबंधित विभागों के समन्वित प्रयासों पर विशेष ध्यान दिया गया है। साथ ही, कमजोर एवं दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की पोषण संबंधी आवश्यकताओं को प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने कहा कि खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाओं को सुदृढ़ करना, खाद्य गुणवत्ता की निगरानी में सुधार लाना तथा पारंपरिक हिमाचली आहार को बढ़ावा देना जनस्वास्थ्य की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देने, पोषण के प्रति जागरूकता फैलाने तथा स्वस्थ खानपान की आदतों को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ मौजूदा पोषण एवं खाद्य सुरक्षा कार्यक्रमों के प्रभावी कार्यान्वयन को भी सुनिश्चित करेगी। उन्होंने भरोसा जताया कि इस नीति के प्रभावी क्रियान्वयन से कुपोषण और सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी को कम करने, भावी पीढ़ियों के स्वास्थ्य में सुधार लाने तथा हिमाचल प्रदेश के समग्र सामाजिक-आर्थिक विकास को गति देने में सहायता मिलेगी।

सोलन: नौणी-जर्मनी शैक्षणिक साझेदारी से अनुसंधान एवं सहयोग को मिलेगा बढ़ावा

नौणी विश्वविद्यालय और जर्मनी के विश्वविद्यालय के बीच शैक्षणिक एवं अनुसंधान सहयोग की पहल

सोलन: डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी तथा जर्मनी के वाइहेनस्टेफन-ट्राइज़डॉर्फ यूनिवर्सिटी ऑफ एप्लाइड साइंसेज के बीच शैक्षणिक एवं अनुसंधान सहयोग को लेकर महत्वपूर्ण पहल की गई है। इसी सिलसिले में जर्मनी के प्रो. डॉ. डिट्रिच डार ने 20 और 21 अक्तूबर को नौणी विश्वविद्यालय का दौरा किया।दौरे के दौरान प्रो. डार ने विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एच.एस. बवेजा के साथ बैठक कर दोनों संस्थानों के बीच सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की। इस दौरान विभिन्न शैक्षणिक एवं अनुसंधान गतिविधियों में साझेदारी को लेकर एक औपचारिक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए गए। प्रो. डार ने अपने प्रस्तुतीकरण में दोनों विश्वविद्यालयों के बीच विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के आदान-प्रदान और संयुक्त अनुसंधान की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने विशेष रूप से खाद्य प्रौद्योगिकी, सतत विकास के प्रभावों के आकलन तथा आपूर्ति शृंखला प्रबंधन के क्षेत्रों में सहयोग की रुचि दिखाई। इस अवसर पर डॉ. के.के. रैना, वैज्ञानिक सलाहकार, डॉ. बी.एस. दिल्टा, ओएसडी (परियोजनाएं एवं योजना), डॉ. कपिल कथूरिया, विभागाध्यक्ष, कृषि व्यवसाय प्रबंधन विभाग, डॉ. पीयूष मेहता और डॉ. रश्मि चौधरी उपस्थित रहे।

प्रस्तावित सहयोग के तहत औद्यानिकी, वानिकी और इनसे जुड़े विषयों में शैक्षणिक कार्यक्रमों तथा अनुसंधान को बढ़ावा दिया जाएगा। जैव प्रौद्योगिकी, खाद्य प्रौद्योगिकी, भू-दृश्य वास्तुकला तथा कृषि-खाद्य अर्थव्यवस्था जैसे विषयों में डुअल डिग्री कार्यक्रम शुरू करने की संभावनाओं पर भी विचार किया जाएगा।

कुलपति प्रो. बवेजा ने कहा कि नौणी विश्वविद्यालय के प्रस्तावित दूरस्थ एवं ऑनलाइन शिक्षा कार्यक्रम को जर्मन विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन सेमेस्टर कार्यक्रम से जोड़ने की संभावनाएं भी तलाशी जाएंगी। इससे विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अध्ययन के नए अवसर मिलेगें। उन्होंने कहा कि भविष्य में पाठ्यक्रमों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जलवायु-अनुकूल कृषि, पारिस्थितिकी तंत्र प्रबंधन, कृषि व्यवसाय, डिजिटल तकनीक तथा कौशल एवं उद्यमिता विकास जैसे विषयों को अधिक महत्व दिया जाएगा। व्यावहारिक प्रशिक्षण और उद्योगों के साथ सहयोग से विद्यार्थियों को रोजगार, नवाचार और स्वरोजगार के लिए तैयार करने में मदद मिलेगी।

अनुसंधान के संभावित क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन के प्रति सहनशील बागवानी फसलें, हिमालयी जैव विविधता का संरक्षण, पर्यावरण-अनुकूल खेती, मधुमक्खी पालन एवं मधुमक्खी उत्पादों का चिकित्सकीय उपयोग, पारंपरिक ज्ञान, खाद्य प्रसंस्करण, वन संसाधनों का सतत प्रबंधन, कृषि वानिकी, औषधीय एवं सगंध पौधे तथा कीट एवं रोगों का एकीकृत प्रबंधन शामिल हैं।

इस साझेदारी से संयुक्त अनुसंधान, शोध प्रकाशनों, शिक्षक एवं विद्यार्थी आदान-प्रदान तथा अल्पकालिक शैक्षणिक कार्यक्रमों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे दोनों संस्थानों के बीच ज्ञान और विशेषज्ञता साझा करने के साथ-साथ कृषि एवं खाद्य प्रणालियों से जुड़ी चुनौतियों के समाधान की दिशा में भी काम किया जा सकेगा।

कुल्लू से सिंदूरी किस्म के 1.3 मीट्रिक टन अनार दुबई निर्यात

शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज यहां कहा कि प्रदेश सरकार किसानों और बागवानों की आर्थिकी को सुदृढ़ करने के लिए अनेक प्रभावी कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि किसानों और बागवानों को उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सरकार न केवल देश व प्रदेश के विभिन्न बाजारों तक उनकी पहुंच सुगम बना रही है, बल्कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने के लिए भी हरसंभव सहायता प्रदान कर रही है।
प्रदेश सरकार के इन प्रयासों के परिणामस्वरूप आज कुल्लू जिला में उत्पादित सिंदूरी किस्म के 1.3 मीट्रिक टन अनार संयुक्त अरब अमीरात के दुबई शहर को निर्यात किए गए।
कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण, चंडीगढ़ के क्षेत्रीय कार्यालय ने इन फलों के निर्यात में सहयोग प्रदान किया। अनार कुल्लू के किसानों तथा कुल्लू स्थित भुंतर किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) के माध्यम से एकत्र किए गए थे। इस एफपीओ से लगभग 600 किसान जुड़े हुए हैं। अनार की आपूर्ति करने वाले किसानों में रीना देवी, संजय कुमार, नितिश कुमार और वीर सिंह गुलेरिया शामिल हैं।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी उपज के विपणन के लिए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से सभी आवश्यक सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार कृषि एवं बागवानी उत्पादों के निर्यात को प्रोत्साहित करने के लिए हरसंभव सहयोग दे रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी वर्ष जून माह में शिमला जिला के जड़ोल-टिक्कर और बागी क्षेत्रों के छह प्रगतिशील किसानों द्वारा उत्पादित 400 किलोग्राम चेरी और 400 किलोग्राम प्लम की पहली खेप ओमान को निर्यात की गई थी।
मुख्यमंत्री ने किसानों से अंतरराष्ट्रीय बाजारों की मांग के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाली फसलों और फलों की किस्मों की खेती करने का आग्रह किया, ताकि हिमाचल प्रदेश के फल वैश्विक बाजारों में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर सकें।

सिविल सेवा पुरस्कार, प्रेरणा स्रोत सम्मान और हिमाचल गौरव पुरस्कार-2027 के लिए आवेदन आमंत्रित

शिमला: प्रदेश सरकार के एक प्रवक्ता ने आज यहां बताया कि प्रदेश सरकार ने सिविल सेवा अवार्ड, प्रेरणा स्रोत सम्मान और हिमाचल गौरव पुरस्कार-2027 के लिए नामांकन प्रक्रिया आरम्भ कर दी है। उन्होंने बताया कि आवेदक 31 दिसम्बर, 2026 तक अपने नामांकन प्रस्तुत कर सकते हैं। आवेदन के लिए निर्धारित प्रपत्र ीपउंबींसण्दपबण्पदध्हंक पर उपलब्ध है।
हर वर्ष 15 अप्रैल को हिमाचल दिवस के अवसर पर यह पुरस्कार प्रदान किए जाते हैं। इस संबंध में सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों और सभी उपायुक्तों को पत्र लिखकर ऐसे पात्र लोगों की अनुशंसा करने के लिए कहा गया है ताकि राज्य स्तरीय समिति द्वारा आवेदनों की छंटनी की जा सके। उन्होंने बताया कि नामांकन प्रक्रिया के तहत आवेदकों को दो पृष्ठों का संक्षिप्त विवरण हिन्दी भाषा में प्रस्तुत करना होगा, जिसमें उनकी विशेष उपलब्धियों और सेवाओं का उल्लेख हो।
प्रवक्ता ने कहा कि आवेदन पत्र के साथ आवश्यक दस्तावेज संलग्न कर सामान्य प्रशासन विभाग के कार्यालय में 31 दिसम्बर, 2026 तक भेजना सुनिश्चित करें।