


ऊना: ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बुधवार को ऊना जिले के अंब उपमंडल में 16.26 करोड़ रुपये की लागत से पूर्ण की गई विभिन्न विकास परियोजनाओं का लोकार्पण कर उन्हें जनता को समर्पित किया। इन परियोजनाओं से क्षेत्र की सड़क एवं पुल अधोसंरचना सुदृढ़ हुई है, जिससे आवागमन सुगम होगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने 6.57 करोड़ रुपये की लागत से स्तरोन्नत टकारला-बड़ूही वाया नई आबादी सड़क का लोकार्पण किया। लगभग 5 किलोमीटर लंबे इस मार्ग के उन्नयन से क्षेत्र की 11 हजार से अधिक आबादी को सीधा लाभ मिलेगा और स्थानीय स्तर पर व्यापार, शिक्षा तथा स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच और सशक्त होगी।
इसके अतिरिक्त, उन्होंने लगभग 9.50 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 6.50 किलोमीटर लंबी अंब-गगरेट-अठवां से हरिजन बस्ती सड़क एवं पुल परियोजना का भी लोकार्पण किया। इस परियोजना के पूर्ण होने से श्री चिंतपूर्णी तथा गगरेट विधानसभा क्षेत्रों को बेहतर सड़क संपर्क सुविधा प्राप्त हुई है।
मुख्यमंत्री ने टकारला से ही लगभग 20 लाख रुपये की लागत से निर्मित सामर्थ्य ज्ञानदीप पुस्तकालय एवं व्यायामशाला, मैड़ी खास का पट्टिका का अनावरण कर उद्घाटन किया। यह केंद्र युवाओं के शैक्षणिक, बौद्धिक एवं शारीरिक विकास में सहायक सिद्ध होगा।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार गांवों के समग्र विकास और आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि सड़कें और पुल केवल भौतिक संरचनाएं नहीं, बल्कि गांवों में विकास, अवसर और आत्मनिर्भरता के सेतु हैं। सरकार की प्राथमिकता है कि विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और ग्रामीण क्षेत्रों में संतुलित एवं टिकाऊ विकास सुनिश्चित हो।
इससे पहले, मुख्यमंत्री ने अंब स्थित लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृह में जन समस्याएं सुनी और अधिकांश समस्याओं का मौके पर ही समाधान किया।
स्थानीय विधायक सुदर्शन सिंह बबलू ने क्षेत्र में विकास परियोजनाओं के लोकार्पण के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इन कार्यों से क्षेत्रवासियों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा और अंब उपमंडल में विकास को नई दिशा और गति प्राप्त होगी।

शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज कैथू में हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी बैंक की नव-स्थापित शाखा का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि राज्य में सहकारी बैंकिंग नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। राज्य सरकार वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने और समाज के सभी वर्गों तक सुलभ बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध करवाने के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा कि सहकारी बैंक हिमाचल प्रदेश के किसानों, छोटे व्यापारियों, स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण उद्यमियों को सहायता प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सहकारी संस्थाओं के विकास और सुदृढ़ीकरण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि राज्य सरकार की जमा राशि हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी बैंक में रखी जानी चाहिए ताकि राज्य में सहकारी बैंकिंग प्रणाली की वित्तीय मजबूती और स्थिरता को और अधिक बढ़ावा मिल सके।
ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने एचपीएससीबी के प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि बैंक आम लोगों की सेवा की मूल भावना को बनाए रखते हुए आधुनिक, प्रौद्योगिकी-आधारित बैंकिंग सेवाओं के विस्तार के लिए निरंतर सराहनीय कार्य कर रहा है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि कैथू शाखा स्थानीय लोगों की वित्तीय आवश्यकताओं को प्रभावी ढंग से पूरा करेगी और आर्थिक विकास में योगदान देगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एचपीएससीबी राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं जैसे ई-टैक्सी योजना को लागू करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी बैंक ने मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए 2 करोड़ रुपये का चेक भेंट किया। मुख्यमंत्री ने बैंक के इस उदार योगदान के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह वित्तीय सहायता प्रभावितों को राहत प्रदान करने तथा राज्य में प्राकृतिक आपदाओं और अन्य आपात स्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटने में अत्यंत सहायक साबित होगी।
एचपीएससीबी के प्रबंध निदेशक श्रवण मांटा ने बैंक की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि बैंक ने लगातार अपनी वित्तीय स्थिति को मजबूत किया है तथा बैंक के नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ग्राहकों की सुविधा के लिए बैंक ने डिजिटल बैंकिंग समाधानों को शुरू किया है।

हिमाचल : पूर्व केंद्रीय मंत्री व हमीरपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद श्री अनुराग सिंह ठाकुर ने केंद्र सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश को रेलवे विस्तार के लिए 2 हजार 911 करोड़ रुपए दिए जाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण व रेल मंत्री श्री अश्वनी वैष्णव का आभार प्रकट किया है।
अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा “मोदी सरकार हिमाचल प्रदेश में इंफ़्रास्ट्रक्चर विस्तार और रोज़गार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए कटिबद्ध है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र की मोदी सरकार ने केंद्रीय बजट 2026-27 में देवभूमि हिमाचल प्रदेश को रेल नेटवर्क के विस्तार, आधुनिकीकरण, सुरक्षा परियोजना और विद्युतीकरण के लिए ₹2911 करोड़ रुपए मंजूर किए हैं। मोदी सरकार का हिमाचल में रेल नेटवर्क के विकास में सदा ही विशेष योगदान रहा है औ यह मंजूर राशि कांग्रेस सरकार द्वारा दी गई राशि से 27 गुना अधिक है। देवभूमि हिमाचल के यात्रियों की सुविधा व उनके बेहतर यात्रा अनुभव के लिए केंद्र सरकार प्रतिबद्ध है। इस बड़ी पर आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी , वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमन व रेलमंत्री श्री अश्वनी वैष्णव का हार्दिक आभार प्रकट करता हूँ”
अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा “ अगर देवभूमि में मौजूदा रेलवे विस्तार के कार्यों को देखें तो अभी हिमाचल में 17 हजार 711 करोड़ की परियोजनाएं चल रहीं हैं जिससे राज्य में रेल नेटवर्क बेहतर होगा। 46 करोड़ रुपए की लागत से हिमाचल प्रदेश के चार रेलवे स्टेशन को अमृत स्टेशन योजना के तहत नए सिरे से विकसित किए जाने का भी प्रावधान इस बजट में किया गया है। 2014 से अब तक करीब 16 किलोमीटर की रेल लाइनों का निर्माण हुआ है व 26 फ्लाईओवर और अंडरपास भी विकसित किए गए हैं। मोदी सरकार द्वारा हिमाचल में रेलवे के शत प्रतिशत इलेक्ट्रिफिकेशन का लक्ष्य हासिल भी कर लिया गया है”

शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने मंगलवार देर सायं स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए अधिकारियों को सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों को गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध करवाने के लिए नई आवश्यक औषधि सूची (एसंेशियल ड्रग्स लिस्ट) तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस नई सूची की समीक्षा एक उच्च स्तरीय समिति द्वारा की जाएगी और दवाओं की खरीद सीधे निर्माता कंपनियों से की जाएगी, जिसके लिए आवश्यक प्रावधान किए जाएंगे। निर्माताओं से दवाओं की सीधी खरीद से बिचौलियों के कारण होने वाली देरी को समाप्त करने और अधिक पारदर्शी आपूर्ति श्रृंखला सुनिश्चित करने में बल मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों को उपलब्ध की जाने वाली दवाओं की सैंपलिंग और गुणवत्ता जांच की व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा। इसके लिए राज्य के प्रत्येक चिकित्सा महाविद्यालय में एक समर्पित सेल स्थापित किया जाएगा तथा राज्य सरकार पर्याप्त स्टाफ, प्रशिक्षण और आवश्यक उपकरण उपलब्ध करवाएगी। प्रथम चरण में आईजीएमसी शिमला और डॉ. राजेन्द्र प्रसाद राजकीय आयुर्विज्ञान महाविद्यालय टांडा में यह सेल स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि मरीजों के स्वास्थ्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।
सुक्खू ने यह भी निर्देश दिए कि हिमाचल प्रदेश में दवा निर्माता कंपनियों द्वारा निर्मित दवाओं की गुणवत्ता जांच सुनिश्चित की जाए। उन्होंने अधिकारियों को राज्य में भारत के औषधि एवं प्रसाधन सामग्री नियम, 1945 की अनुसूची-एम के प्रावधानों को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए।
बैठक में सचिव स्वास्थ्य एम. सुधा देवी, विशेष सचिव अश्विनी कुमार, निदेशक आयुष निपुण जिंदल, निदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ. राकेश शर्मा, निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. गोपाल बेरी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

शिमला: शिमला से जारी बयान में पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि पंचायत चुनाव को लेकर सरकार आखिरकार खुलकर सामने आ ही गई। अगर सरकार को समय पर चुनाव नहीं करवाने थे और हाई कोर्ट के आदेशों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देनी ही थी तो सरकार चुनाव की तैयारी का स्वांग क्यों रच रही थी? मुख्यमंत्री एक तरफ माननीय न्यायालय के फैसले पर अवांछनीय टिप्पणी करके निर्वाचन सूची के प्रकाशन के निर्देश की खबरें क्यों छपवा रहे थे? जब भारतीय जनता पार्टी चुनाव में सरकार द्वारा की जा रही देरी पर सवाल उठा रही थी तो मुख्यमंत्री और उनके मंत्री क्यों कह रहे थे कि समय पर चुनाव होंगे? आखिर सरकार और उसके मुखिया किस हद तक, कहां-कहां झूठ बोलेंगे? अपनी पाताल में चली गई लोकप्रियता के चलते सरकार ने बहुत पहले ही ठान लिया था कि उसे पंचायत चुनाव नहीं करवाने हैं। इसीलिए बार-बार राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशों की अवहेलना की जा रही थी उनके द्वारा दिए जा रहे पत्रों पर न तो कोई कार्रवाई की जा रही थी और न ही उचित जवाब दिया जा रहा था। यह सरकार पूर्णतया दिशाहीन और किंकर्तव्यविमूढ़ है।
पूरे देश में लोकतंत्र और संविधान की दुहाई देने वाली कांग्रेस पार्टी की सरकार लोकतंत्र और संविधान की धज्जियां उड़ा रही है और महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज सपनों को कुचल रही है। सरकार पंचायत चुनावों को इतने हल्के में क्यों ले रही है, यह समझ नहीं आ रहा है। एक तरफ सरकार केंद्र द्वारा सहयोग न किए जाने का रोना रोती है और दूसरी तरफ केंद्र द्वारा दिए जा रहे भरपूर सहयोग को प्राप्त करने के रास्ते बंद कर रही। यदि लोगों द्वारा निर्वाचित स्थानीय निकाय नहीं होगा तो उसका विकास कैसे होगा? केंद्र द्वारा चलाई जा रही है सैकड़ों योजनाओं का क्रियान्वयन कैसे किया जाएगा? बिना निर्वाचित प्रतिनिधियों के केंद्र की योजनाएं जमीन पर कैसे पहुंचेंगी क्योंकि ज्यादातर योजना में निर्वाचित स्थानीय निकायों का होना बहुत जरूरी है। यदि सरकार इन चुनाव को साल यह 6 महीने और खींच लेगी तो प्रदेश को केंद्र द्वारा दी जा रही तमाम योजनाओं के पैसे नहीं मिलेंगे या देर से मिलेंगे। इस नुकसान की भरपाई कैसे होगी। 16वें वित्त आयोग में देश भर के शहरी और ग्रामीण निकायों हेतु जो लगभग 8 लाख करोड़ रुपए की धनराशि का प्रावधान किया गया है बिना निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के इसका लाभ कैसे मिलेगा? चुनाव के बिना स्थानीय निकायों का विकास रुक जाएगा। सरकार किसी नाकामी की वजह से मनरेगा प्रदेश में मनरेगा के 1.72 लाख प्रोजेक्ट अटके पड़े हैं और 655 पंचायतों में मनरेगा के तहत एक भी व्यक्ति को एक दिन का भी रोजगार नहीं मिला है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि 9 जनवरी को माननीय उच्च न्यायालय ने 30 अप्रैल तक चुनाव संपन्न करवाने के आदेश दिए थे। तब से सरकार चुनाव करवाने के बजाय चुनाव न करवाने की रणनीति पर काम कर र हीथी। बार-बार डेडलाइन खत्म होने के बाद भी निर्वाचन सूची का प्रकाशन नहीं कर रही थी। साथ ही साथ प्रदेश को गुमराह भी कर रही थी। मुख्यमंत्री ने अपनी मंशा तो न्यायालय के आदेश पर सवालिया निशान लगाते हुए की हुई टिप्पणी से पहले ही जाहिर कर दी थी। सरकार पंचायत चुनाव करवाने में होने वाले खर्च पर दुहाई देती है लेकिन चुनाव न करवाने के लिए मुकदमे लड़ने पर करोड़ों रुपए खर्च करती है। सरकार आपदा प्रबंधन कानून थोप कर प्रदेश में चुनाव रोकना चाहती है लेकिन सबसे ज्यादा आपदा प्रभावित क्षेत्र में जाकर अपने 3 साल का जश्न मनाने के लिए आपदा राहत के लिए केंद्र सरकार द्वारा भेजे गए करोड़ों रुपए खर्च करती है। सरकार आपदा से हुए नुकसान के नाम पर पंचायत चुनाव रोकने की पैरवी भी करती है लेकिन आपदा प्रभावित क्षेत्रों में क्षतिग्रस्त सुविधाओं को बहाल करने के लिए कोई कदम नहीं उठाती है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को यह बताना चाहिए कि आपदा प्रबंधन कानून लागू होने के बाद उन्होंने प्रदेश की आपदा राहत क्षेत्र में आपदा राहत की समीक्षा करने के लिए कितने दौरे किए हैं?

शिमला: ज़िला कल्याण अधिकारी शिमला कपिल देव शर्मा ने सभी सामाजिक सुरक्षा पेंशन लाभार्थियों से अपील की है कि जिन्होंने अपनी ई-केवाईसी सत्यापन अभी तक नहीं करवाया है वे अपने नजदीकी आंगनवाड़ी केंद्र अथवा संबंधित तहसील कल्याण अधिकारी कार्यालय में जाकर 15 फरवरी 2026 से पूर्व सभी आवश्यक दस्तावेजों सहित अपना (ई-केवाईसी) सत्यापन करवाना सुनिश्चित करें।
उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश सरकार, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग हि. प्र. द्वारा निर्णय लिया गया था कि प्रदेश में सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के लाभार्थियों का ऑनलाइन माध्यम से ई-केवाईसी सत्यापन सुनिश्चित करने के लिए एक मोबाइल ऐप तैयार किया जाए ताकि सभी पात्र पेंशनरों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन सुचारू रूप से उनके बैंक/डाकघर के बचत खातों में वितरित की जा सके। विभाग द्वारा सभी सामाजिक सुरक्षा पेंशन लाभार्थियों का सत्यापन (ई-केवाईसी) युद्ध स्तर पर जिला कल्याण अधिकारी व तहसील कल्याण अधिकारी माध्यम से आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के सहयोग से जुलाई 2025 में आरम्भ किया गया था।
इस अभियान के अंतर्गत सभी लाभार्थियों का ई-केवाईसी सत्यापन पूरा करने की अंतिम तिथि 31 जनवरी 2026 निर्धारित की गई थी। जिन पेंशन धारकों ने निर्धारित अवधि में अपना ई-केवाईसी सत्यापन नहीं करवाया है, उनकी पेंशन विभाग द्वारा अस्थायी तौर पर रोक दी गई है।
उन्होंने बताया कि इस अंतिम अवसर के उपरान्त, पेंशन लाभार्थी द्वारा अपनी ई-केवाईसी सत्यापित नहीं करने की स्थिति में यह समझा जाएगा कि पेंशनर अनुपलब्ध है अथवा सामाजिक सुरक्षा पेंशन प्राप्त करने हेतु पात्र नहीं है, तथा उन पैंशनरों की पेंशन स्थायी रूप से बंद कर दी जायेगी। इसके अतिरिक्त, यदि किसी असहाय पेंशनभोगी का आधार कार्ड किसी कारण से नहीं बना है या उसे अपडेट करने की आवश्यकता है, तो वह आधार कार्ड अपडेट करवाने के लिए संबंधित तहसील कल्याण अधिकारी से संपर्क कर सकता है।
ई-केवाईसी सत्यापन हेतु आवश्यक जानकारी एवं समस्या निवारण के लिए लाभार्थी अपने नजदीकी जिला कल्याण अधिकारी, तहसील कल्याण अधिकारी, बाल विकास परियोजना अधिकारी, बाल विकास परियोजना पर्यवेक्षक तथा संबंधित आंगनवाड़ी कार्यकर्ता से अविलम्ब संपर्क करें।

फोरलेन निर्माण कार्य से प्रभावित सड़क एवं घरों को लेकर उपायुक्त की अध्यक्षता में बैठक आयोजित
शिमला: शिमला शहर के चलौंठी क्षेत्र में फोरलेन निर्माण कार्य से प्रभावित सड़क एवं घरों को लेकर उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में विशेष बैठक का आयोजन किया गया।
उपायुक्त शिमला को उपमंडल दण्डाधिकारी शिमला (ग्रामीण) और राज्य भूवैज्ञानिक, हिमाचल प्रदेश, शिमला द्वारा चलौंठी के पास स्थित घरों के संबंध में प्रस्तुत क्षति मूल्यांकन रिपोर्ट सौंप दी है। इस रिपोर्ट के अनुसार निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर शिफट कर दिया गया है। इसमें एक घर को ‘न रहने योग्य’ घोषित किया गया है, दूसरे को अस्थायी रूप से असुरक्षित आंका गया है और शेष घर निगरानी में हैं। बैठक में सड़क बार-बार धंसने का मुद्दा बन गया है, जिससे जनता में अशांति और यातायात की भीड़ पैदा हो रही है।
उपायुक्त ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के प्रतिनिधि को मुआवजे की स्थिति के बारे में अवगत कराने का निर्देश दिया। इसके जवाब में प्रतिनिधि ने सूचित किया कि जिला प्रशासन से आवश्यक दस्तावेज प्राप्त हो गए हैं और उन्हें रियासतग्राही (कंसेसियनार) को भेज दिया गया है, जिन्होंने बाद में उन्हें बीमा कंपनी को जमा कर दिया है। उपायुक्त ने निर्देश दिया कि आगामी 15 दिनों के भीतर इस बारे में सारी कार्रवाई पूर्ण करें और की गई कार्रवाई की जानकारी उपमंडल दण्डाधिकारी शिमला (ग्रामीण) को दें।
उपायुक्त ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के प्रतिनिधि को चलौंठी में प्रभावितों के घरों में किए जा रहे मरम्मत कार्य को लेकर मौजूदा स्थिति के बारे में विस्तृत रिपोर्ट ली। इसके अनुसार भारत कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड के प्रतिनिधि ने सूचित किया कि दरारों को भरने का कार्य प्रगति पर था। हालांकि, स्थानीय निवासियों के अनुरोध पर बर्फबारी के कारण इसे अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। मौसम ठीक होते ही काम फिर से शुरू कर दिया जाएगा।
अनुपम कश्यप ने निर्देश दिया है कि दरारों को एक महीने के भीतर भरा जाए और स्पेक्ट्रोमीटर द्वारा दर्शाए गए चेतावनी संकेतों की भी जांच की जाए। इसके साथ ही इसकी रिपोर्ट तुरंत उपमंडल दण्डाधिकारी शिमला (ग्रामीण) को दी जाए।
वर्तमान में किसान भवन ढली में कोई नहीं रह रहा है। हालांकि, रियायतग्राहियों (कंसेसियनार) द्वारा 06 प्रभावित परिवारों को किराए के आवास उपलब्ध कराए गए हैं। उपायुक्त ने निर्देश दिए कि आगामी 10 दिनों के भीतर रेंट एग्रीमेंट और संबंधित दस्तावेजों की प्रति उपमंडल दण्डाधिकारी शिमला (ग्रामीण) को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। साथ ही यह भी निर्देश दिया कि सभी मुद्दों और उनके उपायों के बारे में नियमित आधार पर एसडीएम ग्रामीण को सूचित किया जाना चाहिए।
इस दौरान बैठक में अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी कानून एवं व्यवस्था पंकज शर्मा, अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी प्रोटोकॉल ज्योति राणा, एसडीएम शिमला ग्रामीण मंजीत शर्मा सहित अन्य हितधारक मौजूद रहे।

प्रदेश पुलिस सबसे आधुनिक, तेज और भरोसेमंद पुलिसः मुख्यमंत्री
कांगड़ा: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज कांगड़ा जिला के पुलिस कॉलेज डरोह में ‘रोजगार संकल्प मेले’ के दौरान नवनियुक्त 1253 कांस्टेबलों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सभी को बधाई देते हुए कहा कि इस बार पुलिस भर्ती पूरी पारदर्शिता के साथ की गई है, जबकि पिछली भाजपा सरकार के कार्यकाल में पुलिस भर्ती के पेपर लीक हुए और पिछली सरकार को युवाओं के दबाव में भर्ती प्रक्रिया को रद्द करना पड़ा। उन्होंने कहा वर्तमान सरकार ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए इस बार पुलिस की भर्ती के पेपर पुलिस विभाग से नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से करवाना सुनिश्चित किया।
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि राज्य सरकार आगामी दो महीनों के भीतर 800 और पुलिस कांस्टेबलों की भर्ती करेगी। उन्होंने कहा कि यह कदम हिमाचल प्रदेश पुलिस को और मजबूत करेगा तथा इससे कानून व्यवस्था को बेहतर तरीके से लागू करने में सहायता मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज आप केवल नौकरी नहीं ले रहे हैं बल्कि आज आप एक जिम्मेदारी, एक पहचान और एक मिशन को स्वीकार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश शांति, संस्कृति और देवभूमि के लिए जाना जाता है। आज सरकार ने नशे के विरुद्ध लड़ाई को एक जन आंदोलन बनाया है जिसकी सबसे सबसे मजबूत ताकत हिमाचल प्रदेश पुलिस है। उन्होंने कहा कि हिमाचल पुलिस देश की सबसे आधुनिक, सबसे तेज और सबसे भरोसेमंद पुलिस फोर्स में शामिल है। उन्होंने कहा कि आपातकालीन सेवा (ईआरएसएस-112) में औसत प्रतिक्रिया समय के मामले में हिमाचल पुलिस पूरे देश में पहले स्थान पर है जबकि सीसीटीएनएस (क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टमस) में पहाड़ी राज्यों में हिमाचल प्रदेश लगातार प्रथम स्थान पर बना हुआ है। आईटीएसएसओ (इनवेस्टिगेशन ट्रैकिंग सिस्टम फॉर सैक्सुअल ओफेंसिसद्ध में हिमाचल पुलिस लगातार देश-भर में पांचवां स्थान प्राप्त कर रही है।
श्री सुक्खू ने कहा कि हमारी सरकार पुलिस वर्दी की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिए गए हैं कि देश की प्रतिष्ठित कंपनियों से उत्तम गुणवत्ता का कपड़ा लिया जाए। साथ ही, पुलिस कांस्टेबलों की यूनिफॉर्म ग्रांट बढ़ाने पर भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष से सभी भूतपूर्व सैनिक 10 वर्ष की सेवा के बाद हॉनरेरी हैड कांस्टेबल और 15 वर्ष की सेवा के बाद हॉनरेरी सहायक सब इंस्पेक्टर बनाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि कांस्टेबल से हेड-कांस्टेबल बनने के लिए बी-1 परीक्षा का निर्णय लिया गया था। उच्च न्यायालय में इस विषय में अंतरिम स्थगन है, लेकिन सरकार पूरी मजबूती से अपना पक्ष रखेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने चिट्टा माफिया के विरुद्ध एक लड़ाई छेड़ी है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में एनडीपीएस एक्ट के तहत 2149 मामले दर्ज किए गए, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 25 प्रतिशत अधिक हैं। प्रदेश सरकार ने युवाओं को चिट्टे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरुक करने के लिए राज्य में जन-आंदोलन आरम्भ किया है तथा एंटी-चिट्टा अवेयरनेस वॉकथॉन इस जन-आंदोलन का एक प्रमुख स्तंभ हैं। इन वॉकथॉनों को हिमाचल प्रदेश पुलिस द्वारा बेहद सफलता के साथ आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने चिट्टे में संलिप्त 12 पुलिस कर्मियों को बर्खास्त किया है और चिट्टे में संलिप्त अन्य विभागों के कर्मचारियों को भी बर्खास्त किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर नशे के विरुद्ध शपथ भी दिलाई।
पुलिस विभाग ने विभिन्न बचाव तकनीकों का प्रदर्शन भी किया।
पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी ने मुख्यमंत्री का स्वागत करते हुए विभाग की गतिविधियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

