कुल्लू: सहायक अभियन्ता विद्युत भुंतर अमन कुमार ने जानकारी दी कि 11 के.वी. कलैहली फीडर में 11 के.वी एच०टी० लाइन को स्थानांतरित करने और सामान्य रखरखाव कार्य के कारण दिनांक 11 फरवरी 2026 में शाढाबाई, कलैहली, बजौरा, रेरी, बजौरा हाट, मशगां, लोअर बजौरा शाडीनाला और आसपास के इलाकों में सुबह 10.00 बजे से सायं 05.00 बजे तक विद्युत आपूर्ति बाधित रहेगी।
उपरोक्त तिथियों में मौसम खराब या बारिश रहती है तो यह कार्य अगले दिन किया जाएगा।
सहायक अभियंता, विद्युत उप-मण्डल-1 कुल्लू ने जानकारी देते हुए बताया कि 11 के० वी० अखाड़ा फीडर के अंतर्गत आने वाले 100 केवीए ट्रांसफार्मर बिपाशा मार्केट, 400 केवीए ट्रांसफार्मर आउटर अखाड़ा की लाइनों की मरम्मत व आवश्यक रख रखाव हेतु इस फीडर के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों बिपाशा मार्केट, आउटर अखाड़ा, केनरा बैंक, दुर्गा माता मंदिर आदि क्षेत्रों में द 10 फरवरी व 11 फरवरी 2026 को सुबह 10:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक या कार्य के पूर्ण होने तक विद्युत आपूर्ति बाधित रहेगी ।

शिमला: वर्ष 2013 बैच के IPS अधिकारी गौरव सिंह ने सोमवार 9 फरवरी को शिमला के नए पुलिस अधीक्षक (SP) के रूप में अपना कार्यभार संभाल लिया है। उन्होंने संजीव गांधी का स्थान लिया है, जिन्हें हाल ही में पदोन्नत कर डीआईजी बनाया गया है।
पदभार संभालते ही एसपी शिमला गौरव सिंह ने पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि नशा तस्करी को रोकना और इसके बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ करना पुलिस की प्राथमिकता रहेगी। इसके अलावा शहर में ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू रखने भी उनकी प्रमुख प्राथमिकताओं में से एक है। उन्होंने कहा कि शहर में यातायात व्यवस्था को सुचारु करने के लिए सभी खाली पदों को भरा जाएगा, जिससे कि ट्रैफिक जाम से निजात मिल सके।
एसपी गौरव सिंह ने स्पष्ट किया कि नशा तस्करी के खिलाफ अभियान पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। उन्होंने चेतावनी दी कि नशा तस्करों के नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए पुलिस सप्लाई और डिमांड दोनों पहलुओं पर काम करेगी।बाहरी राज्यों से नशा तस्करी करने वाले बड़े तस्करों के खिलाफ वित्तीय जांच की जाएगी और उनकी अवैध संपत्ति जब्त की जाएगी। बार-बार अपराध करने वालों पर प्रिवेंटिव डिटेंशन के तहत कार्रवाई होगी।नशे की मांग को कम करने के लिए पुलिस एनजीओ और अन्य हितधारकों के साथ मिलकर स्कूलों और युवाओं के बीच जागरूकता अभियान चलाएगी। नशे के अलावा, उन्होंने शिमला की ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार, कानून-व्यवस्था बनाए रखना और महिलाओं व बच्चों के खिलाफ अपराधों की त्वरित जांच को अपनी मुख्य कार्यसूची में शामिल किया है।

संसद में अनुराग सिंह ठाकुर ने शिशु आहार और सॉफ्ट ड्रिंक्स में उच्च चीनी सामग्री पर नियम 377 के तहत मुद्दा उठाया, मजबूत फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग नियमों की मांग की
नई दिल्ली: पूर्व केंद्रीय कैबिनेट मंत्री और हमीरपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने आज लोकसभा में नियम 377 के तहत भारतीय बाजार में उपलब्ध शिशु आहार और सॉफ्ट ड्रिंक्स में अतिरिक्त चीनी की चिंताजनक मात्रा को लेकर एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या की ओर ध्यान खींचा। उन्होंने सरकार से अतिरिक्त चीनी की सख्त निगरानी सुनिश्चित करने और उपभोक्ताओं, विशेष रूप से बच्चों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए व्यापक, अधिक स्पष्ट और प्रभावी फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग नियम लागू करने का आग्रह किया।वैश्विक स्वास्थ्य मानकों का हवाला देते हुए श्री अनुराग सिंह ठाकुर ने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) वयस्कों और बच्चों के लिए कुल ऊर्जा सेवन में मुक्त शर्करा को 10 प्रतिशत से कम रखने की सिफारिश करता है, आदर्श रूप से 5 प्रतिशत से कम, और शिशु आहार में किसी भी अतिरिक्त चीनी का इस्तेमाल ना करने की सलाह देता है। हालांकि, अध्ययनों से पता चलता है कि भारत में कुछ पैकेज्ड शिशु आहार में प्रति सर्विंग लगभग 2.7 ग्राम अतिरिक्त चीनी होती है, जबकि कई लोकप्रिय सॉफ्ट ड्रिंक्स में प्रति 100 मिलीलीटर लगभग 10.6 ग्राम चीनी होती है। ऐसी उच्च चीनी की खपत बचपन के मोटापे, कम उम्र में डायबिटीज, दांतों की समस्याओं और युवाओं में अन्य रोगों में बढ़ोत्तरी करती है”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मोटापे के बढ़ते खतरे पर बार-बार चेतावनी देने का जिक्र करते हुए अनुराग सिंह ठाकुर ने 2025 में लाल किले से स्वतंत्रता दिवस के संबोधन का हवाला दिया, जहां प्रधानमंत्री जी ने मोटापे को “मूक संकट” बताया था जो राष्ट्र के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है। प्रधानमंत्री मोदी जी ने हर परिवार से खाना पकाने के तेल की खपत 10% कम करने का आह्वान किया था, कहा था, “यदि हर परिवार खाना पकाने के तेल के उपयोग में 10% की कमी करने का फैसला कर ले, तो राष्ट्र के स्वास्थ्य को लाभ होगा”
अनुराग सिंह ठाकुर ने जोर दिया कि मोदी जी यह आह्वान हानिकारक वसा को कम करने की दिशा में सराहनीय प्रयास है, जो अत्यधिक चीनी के साथ मिलकर मोटापे और संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं में योगदान देते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री जी के मन की बात और अन्य सार्वजनिक संबोधनों में दिए गए जोर का भी उल्लेख किया, जहां मोदी जी ने कहा कि “हमारे भोजन की आदतों में छोटे-छोटे बदलाव करके हम अपने भविष्य को मजबूत, फिट और रोग-मुक्त बना सकते हैं,” और मोटापे से लड़ने के लिए खाद्य तेल की मात्रा कम करने पर जागरूकता फैलाने के लिए प्रभावशाली लोगों को नामित भी किया”
अनुराग सिंह ठाकुर ने जोर दिया कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों और मीठे पेय पदार्थों की बढ़ती खपत के लिए मजबूत नियामक हस्तक्षेप की आवश्यकता है। उपभोक्ता संरक्षण को और मजबूत करने के लिए श्री अनुराग सिंह ठाकुर ने स्पष्ट, प्रमुख और आसानी से समझ में आने वाली फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग प्रणाली लागू करने की अपील की, जिसमें चित्रात्मक चेतावनी या स्टार-आधारित रेटिंग शामिल हो जो चीनी, नमक और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक वसा की उच्च मात्रा को स्पष्ट रूप से उजागर करें। उन्होंने कहा कि ऐसी लेबलिंग उपभोक्ताओं को सूचित आहार विकल्प चुनने में सशक्त बनाएगी, खाद्य निर्माताओं को स्वस्थ सामग्री से उत्पादों को रिफॉर्मुलेट करने के लिए प्रोत्साहित करेगी, और उच्च-चीनी उत्पादों की अत्यधिक खपत को हतोत्साहित करेगी। यह प्रधानमंत्री मोदी के तेल और वसा की मात्रा कम करने के आह्वान से मेल खाता है, जो मोटापे से लड़ने के लिए व्यापक आहार परिवर्तन का हिस्सा है।
अनुराग सिंह ठाकुर ने यह भी उल्लेख किया कि कई देशों ने वैश्विक सर्वोत्तम मानकों के हिस्से के रूप में साहसिक फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग प्रथाओं को अपनाया है, जिससे जन जागरूकता में सुधार हुआ है और स्वस्थ उपभोग पैटर्न बने हैं। भारत के नियामक ढांचे को इन अंतरराष्ट्रीय प्रथाओं के साथ संरेखित करने से न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य शासन में भारत की नेतृत्व भूमिका को भी मजबूत करेगा। चीनी की निगरानी और लेबलिंग पर निर्णायक कार्रवाई बच्चों के स्वास्थ्य की रक्षा, दीर्घकालिक स्वास्थ्य सेवा बोझ को कम करने और फिट, स्वस्थ एवं उत्पादक भारत के राष्ट्रीय दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक है।

शिमला: प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार ने राजस्व घाटा अनुदान आरडीजी बंद होने के बाद वित्तीय स्थिति पर चर्चा के लिए बुलाई गई महत्त्वपूर्ण बैठक में भाजपा के शामिल न होने पर कड़ी नाराज़गी और हैरानी व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यह साफ़ दर्शाता है कि भाजपा को प्रदेश की कोई भी चिंता नहीं है।
विनय कुमार ने अपने बयान में यह भी जोड़ते हुए कहा कि जब-जब प्रदेश को ज़रूरत पड़ी है, भाजपा हमेशा ही अपनी जिम्मेदारी से भागी है। जब हिमाचल स्टेटहुड की लड़ाई लड़ रहा था, उस समय भाजपा नेताओं ने इसका खुला विरोध किया था और कहा था “स्टेटहुड को मारो ठुड”।जब प्रदेश में भारी आपदा आई, उस समय विधानसभा में चर्चा से बचने का काम भी भाजपा ने ही किया। सभी दलों के साथ मिलकर केंद्र सरकार के पास जाने के लिए आपदा पर प्रस्ताव पास हुआ, लेकिन भाजपा ने वहां से भी अपनी पीठ दिखाई । आज, जब राजस्व घाटा अनुदान बंद होने पर प्रदेश के भविष्य को लेकर अहम बैठक बुलाई गई, भाजपा नेताओं ने उसमें भी शामिल होने से किनारा कर लिया।
उन्होंने कहा कि यह भाजपा की “मूल प्रवृत्ति” बन चुकी है। प्रदेश की जनता का साथ न देना, बल्कि दिल्ली में बैठे अपने आकाओं के इशारों पर हिमाचल को नुकसान पहुंचाने की साजिश का हिस्सा बने हैं।आरडीजी बंद होना प्रदेश के साथ बड़ा अन्याय है।
विनय कुमार ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार की इस जनविरोधी कार्रवाई के खिलाफ उन्होंने प्रदेश की जनता से आगे आकर सरकार का साथ देने और इस निर्णय का मजबूती से विरोध करने की अपील की है।
भाजपा की नीतियों ने प्रदेश को आर्थिक संकट में धकेला है। उन्होंने प्रदेश भाजपा नेताओं को कठोर शब्दों में घेरते हुए कहा कि पूर्व भाजपा सरकार ने प्रदेश का ख़जाना लुटाया।75 हजार करोड़ से अधिक का कर्ज़ और 12 हजार करोड़ से अधिक की देनदारियां विरासत में कांग्रेस सरकार को दीं।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि पूर्व भाजपा सरकार के आर्थिक कुप्रबंधन ने प्रदेश की वित्तीय रीढ़ तोड़ दी, और आज तक केंद्र ने प्रदेश को एक रुपये का भी आर्थिक सहयोग नहीं दिया। आपदा में भी केंद्र का कोई सहयोग नहीं मिला। विनय कुमार ने पिछले दो वर्ष की प्राकृतिक आपदाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश को हज़ारों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ,लेकिन केंद्र ने अब तक कोई वास्तविक सहायता नहीं दी।
उन्होंने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री द्वारा घोषित 1500 करोड़ रुपये की आपदा राहत राशि भी आज तक प्रदेश को प्राप्त नहीं हुई। इसके बावजूद भाजपा नेता लोगों को भ्रमित कर रहे हैं कि केंद्र ने हिमाचल पर राहत की बरसात कर दी है। भाजपा प्रदेश में राजनीतिक बदले की भावना से काम कर रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा, राजनीतिक द्वेष के चलते, हिमाचल की जनता को सज़ा दे रही है,क्योंकि लोगों ने उन्हें सत्ता से बाहर कर दिया। इसी बदले की भावना के कारण केंद्र न तो राहत दे रहा है, न प्रदेश के अधिकारों पर निर्णय ले रहा है। विनय कुमार ने कहा कि प्रदेश के अधिकारों की लड़ाई कांग्रेस पूरी ताकत से लड़ेंगे। कांग्रेस इससे कभी पीछे नहीं हटेगी, बल्कि हर स्तर पर निर्णायक संघर्ष किया जाएगा।

शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज यहां प्रदेश में एशियन विकास बैंक (एडीबी) के सहयोग से विकसित की जा रही विभिन्न पर्यटन विकास परियोजनाओं की समीक्षा की।
उन्होंने कहा कि राज्य में एडीबी के सहयोग से ट्रेंच-1 में 1620 करोड़ रुपये और ट्रेंच-2 की 730 करोड़ रुपये लागत की परियोजनाएं विकसित की जा रही हैं। उन्होंने परियोजनाओं के निर्माण कार्य में विश्व-स्तरीय गुणवत्ता सुनिश्चित करते हुए उन्हें तय समय के भीतर पूर्ण करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार हिमाचल पर्यटन को ब्रांड के रूप में विकसित करने के ध्येय से कार्य कर रही है। इसी दृष्टिकोण से विभिन्न परियोजनाएं और योजनाएं कार्यान्वित की जा रही हैं। प्रदेश में पर्यटन विकास से राज्य की आर्थिकी सुदृढ़ होगी तथा रोजगार व स्वरोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। सरकार द्वारा पर्यटकों की सुविधा के लिए कनेक्टिविटी व अधोसंरचना का विस्तार किया जा रहा है। विभिन्न हेलीपोर्ट का निर्माण कार्य प्रगति पर है तथा कांगड़ा हवाई अड्डे का विस्तार किया जा रहा है।
ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि जिला कांगड़ा को प्रदेश की पर्यटन राजधानी के रूप में विकसित किया जा रहा है। पालमपुर व नगरोटा बगवां में एशियन विकास बैंक के सहयोग से 77.70 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाएं कार्यान्वित की जा रही हैं, जिनमें पालमपुर में विभिन्न सौंदर्यकरण कार्यों के तहत एचआरटीसी बस स्टैंड के समीप मल्टीलेवल पार्किंग, पुरानी सब्जी मण्डी के समीप पार्किंग, कैफे कॉफी शॉप व पुस्तकालय व रीडिंग रूम, न्यूगल कैफे पालमपुर का जीर्णोद्धार कार्य तथा विभिन्न सड़कों व मार्गों के कार्य शामिल हैं। नगरोटा बगवां में सड़कों के सुधार कार्य, ड्रेन व डक्ट का निर्माण, पुराने बस अड्डे का सौंदर्यकरण, क्लॉक टावर का निर्माण, गांधी ग्राउंड, नारदा-शारदा मंदिर, मटौर गार्डन, बरोह, मेला ग्राउंड तथा गुरूद्धारा श्री पौड साहिब का सौंदर्यकरण सहित विभिन्न कार्य किए जा रहे हैं।
हमीरपुर जिला के श्री बाबा बालक नाथ मंदिर परिसर में 51.09 करोड़ रुपये की लागत से विभिन्न सौंदर्यीकरण व अधोसंरचना विस्तार कार्य, जिला कांगड़ा के धर्मशाला में 33.78 करोड़ रुपये की लागत से आइस स्केटिंग रिंक व रोलर स्केटिंग रिंक, कुल्लू में 20.57 करोड़ रुपये की लागत से वेलनेस सेंटर तथा मनाली में 36.19 करोड़ रुपये की लागत से वेलनेस सेंटर, 8.63 करोड़ रुपये की लागत से कुल्लू स्थित नग्गर कैसल का संरक्षण व जीर्णोद्धार इत्यादि कार्य विभिन्न चरणों में प्रगति पर है। उन्होंने कहा कि शिमला में आईस स्केटिंग रिंक व रोलर स्केटिंग रिंक, मनाली में आईस स्केटिंग रिंक, कालेश्वर महादेव मंदिर कून्हा में जन-सुविधाएं, हमीरपुर जिला के नादौन में राफ्टिंग कॉम्प्लेक्स और अन्य सुविधाएं तथा वेलनेस सेंटर व साहसिक खेल केन्द्र एवं छात्रावास का निर्माण, नगरोटा बगवां में वेलनेस संेटर व म्यूजिकल फाउंटेन का निर्माण एशिएन विकास बैंक के सहयोग से किया जाएगा।
हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष आर.एस. बाली ने पर्यटन विकास बोर्ड के तहत विभिन्न कार्यों की विस्तार से जानकारी तथा सुझाव दिए।

“आर्थिक संकट का समाधान भाषण नहीं, सख्त वित्तीय अनुशासन और खर्चों में कटौती से होगा”
शिमला: भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने प्रदेश की वर्तमान आर्थिक स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हिमाचल में जो वित्तीय संकट की चर्चा हो रही है, वह अचानक उत्पन्न हुई स्थिति नहीं है, बल्कि इसके संकेत वर्षों पहले ही स्पष्ट हो चुके थे। उन्होंने कहा कि आरडीजी (Revenue Deficit Grant) के चरणबद्ध समाप्त होने की जानकारी पहले से थी, इसके बावजूद सरकार ने समय रहते वैकल्पिक संसाधन जुटाने और वित्तीय प्रबंधन की ठोस योजना नहीं बनाई।
प्रो. धूमल ने कहा कि वित्त आयोग की रिपोर्ट में पहले ही स्पष्ट कर दिया गया था कि 31 मार्च 2026 के बाद आरडीजी समाप्त हो जाएगी। यह कोई नई घोषणा नहीं है। जब यह बात वर्षों पहले से ज्ञात थी, तो सरकार को उसी अनुसार अपनी नीतियां, खर्च और आय के स्रोत तय करने चाहिए थे। वित्त आयोग की सिफारिशों को लागू करना केंद्र सरकार का दायित्व होता है, इसलिए इस विषय पर भ्रम फैलाने के बजाय राज्य सरकार को अपनी तैयारी पर जवाब देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आर्थिक संकट हर संसाधन-सीमित राज्य में आता है, लेकिन समझदारी यह है कि उससे निपटने के लिए समय पर कठोर निर्णय लिए जाएं। अपने कार्यकाल का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जब भी कठिन आर्थिक परिस्थितियां आईं, तब सरकार ने बचत और वित्तीय अनुशासन का रास्ता अपनाया। मुख्यमंत्री और मंत्रियों के खर्चों पर नियंत्रण लगाया गया, अनावश्यक यात्रा और सुविधाओं में कटौती की गई। उन्होंने स्वयं उदाहरण देते हुए कहा कि वे निजी यात्राओं में भी राज्य पर बोझ नहीं डालते थे और सादगी से कार्य करते थे।
प्रो. धूमल ने कहा कि उनकी सरकार ने कृषि और बागवानी क्षेत्र में सुधार कर आय बढ़ाने पर जोर दिया। सब्ज़ी उत्पादन और विपणन को बढ़ावा देकर जहां पहले लगभग 250 करोड़ का कारोबार होता था, उसे बढ़ाकर लगभग 2250 करोड़ तक पहुंचाया गया। सेब उत्पादन में आई गिरावट की भरपाई वैकल्पिक कृषि से की गई, जिससे राजस्व में उल्लेखनीय सुधार हुआ और बजट संतुलन में मदद मिली।
उन्होंने वर्तमान सरकार पर परोक्ष निशाना साधते हुए कहा कि एक ओर आर्थिक संकट की बात की जा रही है, दूसरी ओर बड़ी संख्या में चेयरमैन, सलाहकार और पदाधिकारी नियुक्त किए जा रहे हैं, जिन पर भारी खर्च हो रहा है। नई गाड़ियों की खरीद, अतिरिक्त स्टाफ और सुविधाओं पर व्यय — यह सब वित्तीय अनुशासन के विपरीत है। यदि सचमुच स्थिति कठिन है तो सबसे पहले गैर-जरूरी खर्चों पर रोक लगनी चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य संबंधों को लेकर भी तथ्य स्पष्ट होने चाहिए। उन्होंने कहा कि जब-जब केंद्र में भाजपा सरकार रही है, हिमाचल को विशेष सहयोग मिला है — चाहे औद्योगिक पैकेज हो या विशेष श्रेणी राज्य का लाभ। केवल राजनीतिक बयानबाज़ी से आर्थिक स्थिति नहीं सुधरती, उसके लिए ठोस नीति, संसाधन सृजन और व्यय नियंत्रण आवश्यक है।
अंत में प्रो. धूमल ने कहा कि प्रदेश का मुखिया यदि बार-बार यह कहे कि खजाना खाली है, तो इससे जनविश्वास कमजोर होता है। आवश्यकता इस बात की है कि सरकार ठोस कदम उठाए, खर्चों की समीक्षा करे, प्राथमिकताएं तय करे और वित्तीय प्रबंधन को मजबूत बनाए। आर्थिक चुनौतियों का समाधान जिम्मेदार निर्णयों और अनुशासित शासन से ही संभव है।