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बिलासपुर: 17 फरवरी को घुमारवीं में 103 पदों के लिए आयोजित होगा लघु रोजगार मेला

प्रतिष्ठित 5 औद्योगिक इकाइयों में कुशल, अकुशल तथा आई.टी.आई. उम्मीदवारों का होगा चयन

बिलासपुर: उप रोजगार कार्यालय घुमारवीं में आगामी 17 फरवरी को लघु रोजगार मेले का आयोजन किया जा रहा है। इस लघु रोजगार मेले में प्रतिष्ठित पांच औद्योगिक इकाइयों में लगभग 103 पदों के लिए कुशल, अर्धकुशल तथा आई.टी.आई. प्रशिक्षित उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा।

इस बारे जानकारी देते हुए जिला रोजगार अधिकारी, बिलासपुर राजेश मेहता ने बताया कि लघु रोजगार मेले में सूरज फैब्रिक्स इंडस्ट्रीज लिमिटेड मैकेनिकल फिटर, इलेक्ट्रीशियन तथा फर्निस मेटलर के पदों के लिए ऐसे आई.टी.आई. पास अभ्यर्थियों का चयन करेगी जिनकी आयु 30 वर्ष या इससे अधिक है। इसी तरह इंस्टा सिक्योर बिजनेस सॉल्यूशंस प्रा.लि. सेल्स इग्जेक्यटिव और सर्वे इग्जेक्यटिव पदों के लिए 12वीं और स्नातक पास ऐसे उम्मीदवारों का चयन करेगी जिनकी आयु 45 वर्ष तक हो, तो वहीं सांख्यान ट्रस्ट प्रा.लि. को एचआर मैनेजर फाइनेंस और अकाउंट के पदों के लिए स्नातक, स्नातकोत्तर तथा होटल स्टाफ के लिए 12वीं और डिप्लोमा होटल मैनेजमैंट पास अभ्यर्थियों का चयन करेगी जिनकी आयु 40 वर्ष तक हो।

उन्होंने बताया कि इस लघु रोजगार मेले में एस.आई.एस. सिक्योरिटी इंडिया लिमिटेड सिक्योरिटी गार्ड एवं सिक्योरिटी सुपरवाइजर के पदों के लिए दसवीं पास अभ्यर्थियों का चयन करेगी जिनकी आयु 19 से 40 वर्ष हो तथा ऊंचाई 168 से.मी. से अधिक तथा वजन 54 से 95 किलोग्राम तक हो। जबकि कम्पीटेंट ऑटोमोबाइल लिमिटेड, नेक्सा को रिलेशनशिप मैनेजर के पदों के लिए किसी भी विषय में स्नातक पास उम्मीदवारों की जरूरत है जिनकी आयु 22 से 40 वर्ष तक हो।

उन्होंने बिलासपुर जिला के इच्छुक अभ्यर्थियों से अपने मूल प्रमाण पत्रों सहित रोजगार मेले में भाग लेकर लाभ उठाने का आह्वान किया है। इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए जिला रोजगार कार्यालय, बिलासपुर के दूरभाष नंबर 01978-222450 पर संपर्क किया जा सकता है।

डेयरी फार्मिंग से बदली तक़दीर, युवाओं के लिए बने प्रेरणा स्रोत

ऊना: हर महीने लगभग चार लाख रुपये का कारोबार और करीब सत्तर हजार रुपये का शुद्ध मुनाफा..वह भी गांव में रहकर। ठाकरां गांव के जरनैल सिंह की यह कहानी किसी बड़े उद्योग की नहीं, बल्कि डेयरी फार्मिंग से बदली एक साधारण किसान की ज़िंदगी की सशक्त मिसाल है।

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार की किसान हितैषी नीतियों ने पशुपालन को सहायक गतिविधि से बढ़ाकर भरोसेमंद और लाभकारी आजीविका के रूप में स्थापित किया है।

सीमित साधनों और छोटे स्तर से शुरू हुआ जरनैल सिंह का यह सफर आज ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाली एक प्रेरक सफलता कहानी बन चुका है।

कोविड संकट से अवसर की ओर सफर

हरोली तहसील के ठाकराँ गांव निवासी जरनैल सिंह पहले पंजाब में कैंटीन का कार्य कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे, लेकिन कोविड-19 महामारी के दौरान उन्हें यह कार्य छोड़ना पड़ा। कठिन परिस्थितियों में हताश होने के बजाय उन्होंने अपने पिता के डेयरी फार्मिंग कार्य को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया और इसे ही अपनी आजीविका का मजबूत आधार बनाया।

*10 पशुओं से शुरू किया डेयरी फार्मिंग कारोबार वर्तमान में है 45 गाय *

जरनैल सिंह के पिता शुरू से ही इस व्यवसाय से जुड़े थे। जरनैल ने इसे व्यवस्थित ढंग से विस्तार देते हुए पहले दस से बीस किया और अब 45 गाय का आधुनिक डेयरी फार्म विकसित किया है। आज उनका फार्म पूरे क्षेत्र के लिए एक आदर्श डेयरी फार्मिंग मॉडल बन चुका है।

होल्स्टीन फ्रीसीयन और जर्सी नस्लों की गायों से प्रतिमाह कर रहे 2.5 से 3 क्विंटल दुग्ध उत्पादन

जरनैल सिंह वर्तमान में प्रतिदिन 2.5 से 3 क्विंटल दूध का उत्पादन कर रहे हैं। दूध की गुणवत्ता और फैट प्रतिशत के आधार पर उन्हें औसतन 40 रुपये प्रति लीटर की दर मिल रही है। उन्होंने बताया कि वेरका प्लांट स्वयं उनके डेयरी फार्म से दूध उठाता है, जिससे विपणन की कोई समस्या नहीं है। परिवार के सभी सदस्य डेयरी फार्मिंग कार्यों में सहयोग करते हैं, वहीं दो अन्य लोगों को भी नियमित रोज़गार उपलब्ध कराया है।

जरनैल सिंह के डेयरी फार्म में होल्स्टीन फ्रीसीयन और जर्सी नस्ल की गायें हैं। होल्स्टीन फ्रीसीयन गायें प्रतिदिन लगभग 40 लीटर, जबकि जर्सी नस्ल की गायें 20 लीटर तक दूध देती है।

उन्होंने बताया कि डेयरी फार्म से उन्हें प्रतिमाह लगभग चार लाख रुपये की आय हो रही है। मजदूरी, चारा, फीड, दवाइयों, बिजली सहित सभी खर्च निकालने के बाद भी वे प्रतिमाह करीब 70 हजार रुपये का शुद्ध मुनाफा अर्जित कर रहे हैं।

विभागीय मार्गदर्शन से दूध उत्पादन में हुआ सुधार

जरनैल सिंह ने बताया कि पशुपालन विभाग के अधिकारी समय-समय पर उनके फार्म का निरीक्षण करते हैं और फीड प्रबंधन, दवाइयों, चारे एवं पशु स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। इससे दूध की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। साथ में पशुओं में बीमारियों की रोकथाम के लिए विभागीय स्तर पर वैक्सीनेशन का कार्य भी किया जाता है।

*एमएसपी निर्धारण से आय में हुआ इजाफा, उत्पादकता में हुआ सुधार *

जरनैल सिंह ने बताया कि हिमाचल सरकार द्वारा भैंस के दूध के दाम 61 रुपये और गाय के दूध के दाम 51 रुपये प्रति लीटर किए जाने से पशुपालकों की आमदनी में बड़ा सुधार आया है। यह निर्णय ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में मील का पत्थर साबित हो रहा है। साथ ही, डेयरी फार्म से निकलने वाले गोबर का उपयोग जरनैल सिंह अपने खेतों में कर रहे हैं, जिससे भूमि की उत्पादकता में सुधार हुआ है। इसके अतिरिक्त वे गोबर को 1700 रुपये प्रति ट्रॉली की दर से बेच भी रहे हैं, जिससे अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है।

जरनैल सिंह ने मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुखू का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी दूरदर्शी सोच और पशुपालक हितैषी नीतियों से ग्रामीण क्षेत्रों में डेयरी फार्मिंग एक स्थायी और सम्मानजनक आजीविका के रूप में उभर रही है। यह मॉडल आज युवाओं को स्वरोज़गार की ओर प्रेरित कर रहा है।

क्या कहते हैं अधिकारी

पशुपालन विभाग ऊना के सहायक निदेशक डॉ. दिनेश परमार ने बताया कि प्रदेश सरकार ने पशु पालकों की आर्थिकी को सुदृढ़ करने के लिए निर्णायक फैसले लिए है। हिमाचल देश का पहला राज्य है जिसने दूध पर न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित किया है। राज्य सरकार ने गाय के दूध का न्यूनतम समर्थन मूल्य 45 रुपये से बढ़ाकर 51 रुपये प्रति लीटर और भैंस के दूध का मूल्य 55 रुपये से बढ़ाकर 61 रुपये प्रति लीटर किया है।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार पशु पालकों से डेयरी कोआपरेटिव सोसाइटियों के ज़रिए दूध ख़रीद कर रही है जिससे पशु पालकों को सीधा लाभ मिल रहा है।

*प्रसाशन सरकारी योजनाओं का लाभ ग्रामीणों तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध *

उपायुक्त ऊना जतिन लाल ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा संचालित की जा रही योजनाओं का वास्तविक लाभ हर ग्रामीण तक धरातल पर पहुँचाने और महत्वाकांक्षी योजनाओं को गति देने के साथ-साथ सरकारी सुविधाओं की व्यापक पहुँच को सुनिश्चित करने के लिए ज़िला प्रसाशन प्रतिबद्ध है, जिसके लिए प्रसाशन की ओर से निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

पांवटा साहिब में पंजाब पुलिस ने मारा छापा, बरामद की नशीली दवाईयां

शिमला: चौपाल में 1.811 किलो चरस के साथ तस्कर गिरफ्तार…

शिमला:  शिमला पुलिस ने चौपाल इलाके में 1.811 किलोग्राम चरस बरामद कर एक नेपाली नागरिक को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। पुलिस अधीक्षक गर्व सिंह ने बताया कि इस सिलसिले में चौपाल थाने में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) कानून की धारा 20 के तहत मामला दर्ज किया गया है। मादक पदार्थ की बरामदगी नौ फरवरी को नियमित रूप से चलाए जाने वाले तलाशी अभियान के दौरान हुई। आरोपी की पहचान चंदन बुद्धा (50) के रूप में हुई है, जो नेपाल का स्थाई निवासी है और शिमला जिले के चौपाल तहसील के बामटा, पोस्ट ऑफिस, गांव पुजारली में रहता था। उन्होंने कहा किगश्त के दौरान चौपाल पुलिस टीम ने एक संदिग्ध को रोका और उसके पास से 1.811 किलोग्राम चरस बरामद की। पुलिस ने कहा कि आरोपी को आधिकारिक तौर पर गिरफ्तार कर लिया गया है और तस्करी के स्रोत तथा ड्रग तस्करी नेटवर्क के साथ उसके संभावित संबंधों का पता लगाने के लिए आगे की जांच चल रही है। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि ड्रग तस्करी से जुड़े लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

RTO शिमला ने बिना वैध दस्तावेजों और एक्सपायर्ड फिटनेस वाली बस जब्त की; बकाया कर 2021 से लंबित..

शिमला: यात्री सुरक्षा और परिवहन नियमों के पालन के लिए आरटीओ शिमला ने आज विशेष अभियान के तहत बस संख्या HP-51-3201 को जब्त किया। वाहन को आगे की कार्रवाई तक एचआरटीसी कार्यशाला में रखा गया है।

जांच में सामने आए उल्लंघन:
• वाहन का फिटनेस प्रमाणपत्र एक्सपायर्ड था और वैध परमिट नहीं था।
• चालक के पास ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन का रजिस्ट्रेशन प्रमाणपत्र नहीं था।
• विशेष सड़क कर लंबित था और 2021 से बकाया था।
• बस अपने परमिट मार्ग से बाहर चल रही थी।

आरटीओ शिमला श्री विश्व मोहन देव चौहान ने कहा, “यह वाहन यात्री सुरक्षा के लिए खतरा था। लापरवाह संचालन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जब्त वाहन पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”

आरटीओ शिमला ने जनता से अपील की है कि यदि कोई ऐसा वाहन देखा जाए जो बिना दस्तावेज या असुरक्षित हो, तो इसकी सूचना तुरंत आरटीओ शिमला को दें।

सेब में अल्टरनेरिया एवं मार्सोनिना लीफ ब्लॉच रोगों पर जागरूकता अभियान 5 जिलों में शुरू

सोलन: सेब में लगने वाले अल्टरनेरिया एवं मार्सोनिना लीफ ब्लॉच रोगों के प्रभावी प्रबंधन को लेकर किसानों में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से आज आठ वैज्ञानिक टीमों ने शिमला, कुल्लू, किन्नौर, चंबा एवं मंडी ज़िलों के प्रमुख सेब उत्पादक क्षेत्रों में व्यापक जागरूकता अभियान की शुरुआत की।

इन टीमों में डॉ. वाई.एस. परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के वैज्ञानिकों के साथ-साथ विश्वविद्यालय के मशोबरा, बजौरा एवं शार्बो (किन्नौर) के क्षेत्रीय उद्यान अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्रों तथा शिमला, सोलन, चंबा एवं किन्नौर के कृषि विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिक शामिल हैं। बागवानी विभाग के  अधिकारी भी इन गतिविधियों में सहयोग कर रहे हैं।

यह जागरूकता अभियान 10 से 19 फ़रवरी तक उन सेब उत्पादक क्षेत्रों में चलाया जा रहा है, जिन्हें इन पर्ण रोगों के प्रति अधिक संवेदनशील पाया गया है। अभियान के दौरान टीमें मैदानी भ्रमण, किसानों से संवाद तथा स्थल पर प्रदर्शन के माध्यम से बागवानों को रोगों के प्रारंभिक लक्षणों की पहचान एवं वैज्ञानिक रूप से अनुशंसित प्रबंधन उपायों को अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। इस पहल का उद्देश्य रासायनिक दवाओं के अंधाधुंध एवं अप्रभावी उपयोग पर रोक लगाना तथा बागानों में रोग चक्र को तोड़ना है।

इस अभियान का लक्ष्य रोग पहचान, रोकथाम उपायों एवं समेकित प्रबंधन रणनीतियों के प्रति किसानों की समझ को सुदृढ़ करना है, जिससे सेब का टिकाऊ उत्पादन सुनिश्चित हो सके और प्रदेश भर के बागवानों की आजीविका में सुधार हो।

शिमला ज़िले में मंगलवार को चार टीमें सक्रिय रहीं। एक टीम ने बागी, रतनारी एवं कलबोग क्षेत्रों का दौरा किया तथा 11 फ़रवरी को चैथला एवं धारोंक क्षेत्रों को कवर करेगी। दूसरी टीम ने शीलघाट एवं नकरारी क्षेत्रों का भ्रमण किया और यह टीम 11 फ़रवरी को टिक्कर एवं करचारी क्षेत्रों में जाएगी। तीसरी टीम ने चियोग एवं तियाली क्षेत्रों का दौरा किया और 11 फ़रवरी को संधू एवं शिलारू क्षेत्रों को कवर करेगी। चौथी टीम ने कांद्रू एवं भराणा क्षेत्रों का दौरा किया, जबकि 11 फ़रवरी को थानेधार एवं खनेटी क्षेत्रों में गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।

किन्नौर ज़िले में मंगलवार को निचार एवं सुंगरा क्षेत्रों को कवर किया गया, जबकि 11 फ़रवरी को बारी एवं पोंडा क्षेत्रों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। चंबा ज़िले में आज भरमौर क्षेत्र को कवर किया गया, जबकि होली क्षेत्र में बुधवार को जागरूकता गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी। कुल्लू ज़िले में टीम ने गड़सा घाटी को कवर किया, जबकि मणिकर्ण घाटी में 11–12 फ़रवरी को कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मंडी ज़िले में टीमों ने संगलवाड़ा एवं धीम कटारू क्षेत्रों को कवर किया, जबकि जंजैहली एवं तुंगधार क्षेत्रों का भ्रमण 11 फ़रवरी को किया जाएगा।

भाजपा ने फिजूलखर्ची कर राज्य के खजाने के किया दुरुपयोग -CM सुक्खू

केन्द्र से पूर्व भाजपा सरकार को आरडीजी के 54,296 करोड़ जबकि वर्तमान कांग्रेस सरकार को तीन वर्षों में केवल 17,563 करोड़ रुपये जारी

शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि पूर्व भाजपा सरकार ने राज्य के खजाने को विकास कार्यों और आवश्यक अधोसंरचना पर खर्च करने के बजाय फिजूलखर्ची और राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि पूर्व भाजपा सरकार को पांच वर्ष के कार्यकाल में 54,296 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) मिला था। यह राशि राज्य की कुल आय का 25 से 30 प्रतिशत थी। इसके अलावा पूर्व भाजपा सरकार को 16,000 करोड़ रुपये की जीएसटी क्षतिपूर्ति भी मिली थी जिसका उपयोग राज्य की आर्थिक स्थिति सुधारने के बजाय मुफ्त योजनाओं और केंद्रीय नेतृत्व को खुश करने के लिए अनावश्यक कार्यक्रमों और संस्थानों को खोलने पर खर्च किया गया।
उन्होंने कहा कि इसके मुकाबले वर्तमान सरकार को पिछले तीन वर्षों में केवल 17,563 करोड़ रुपये आरडीजी मिली है, जो भाजपा को मिली राशि से लगभग आधी है। उन्होंने कहा कि 14वें वित्त आयोग के तहत भाजपा सरकार को राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) के रूप में वर्ष 2018-19 में 8,449 करोड़ रुपये, 2019-20 में 8,271 करोड़ रुपये और 2020-21 में 8,062 करोड़ रुपये मिले। इसके अलावा अंतरिम अनुदान के रूप में 11,431 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। 15वें वित्त आयोग के तहत 2021-22 में 7834 करोड़ रुपये और 2022-23 में 10,249 करोड़ रुपये मिले। इस प्रकार भाजपा सरकार को कुल 54,296 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। इसके बावजूद भाजपा सरकार ने कर्मचारियों के बकाया भुगतान नहीं किए और न ही महंगाई भत्ता (डीए) जारी किया।
जबकि वर्तमान कांग्रेस सरकार को 15वें वित्त आयोग के तहत 2023-24 में 8,058 करोड़ रुपये, 2024-25 में 6,258 करोड़ रुपये और 2025-26 में 3,257 करोड़ रुपये मिले। इस तरह कांग्रेस सरकार को कुल 17,563 करोड़ रुपये ही प्राप्त हुए, जो भाजपा सरकार को मिले अनुदान की तुलना में लगभग आधे से भी कम हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में कोई बड़ा निवेश नहीं किया। अब वर्तमान सरकार इस कमी को पूरा कर रही है और अस्पतालों के आधुनिकीकरण के लिए 3,000 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। इसके साथ ही जायका फेज-2 के तहत 1,300 करोड़ रुपये स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने पर व्यय किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब वर्तमान सरकार ने दिसंबर, 2022 में कार्यभार संभाला, तब राज्य भारी आर्थिक संकट में था। भाजपा शासन के अंत तक राज्य पर कुल कर्ज बढ़कर लगभग 76,185 करोड़ रुपये हो गया था, जिसमें पांच वर्षों में लगभग 28,000 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा कि स्थिति और बिगड़ गई क्योंकि भाजपा सरकार ने बिना बजट प्रावधान के 10,000 करोड़ रुपये के वेतन संशोधन और डीए बकाया की घोषणा कर दी। इसके अलावा भाजपा ने अपने अंतिम छह महीनों में 900 से अधिक संस्थान खोल दिए, जिससे हर साल लगभग 5,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ा। आर्थिक संकट से बचने के लिए वर्तमान सरकार को इनमें से कई संस्थानों को बंद करना पड़ा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की आर्थिक स्थिति को लेकर भाजपा का आज शोर मचाना मात्र दिखावा है, क्योंकि उन्होंने ही राज्य के खजाने को लुटाया। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार आईजीएमसी शिमला, टांडा और चमियाना में रोबोटिक सर्जरी जैसी सुविधाएं आरम्भ की है और शीघ्र ही राज्य के लोगों को प्रदेश में ही बोन मैरो ट्रांसप्लांट जैसी आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
मुख्यमंत्री ने नेता प्रतिपक्ष द्वारा भाजपा विधायकों को वित्तीय प्रस्तुति के लिए आमंत्रित नहीं किए जाने के आरोप को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं को व्यक्तिगत रूप से लिखित निमंत्रण भेजे गए थे, लेकिन उन्होंने जान-बूझकर बैठक में शामिल न होने का फैसला किया।

जयराम ठाकुर बोले- मोदी सरकार ने ट्रेड डील में बागवानों के हितों का रखा है पूरा ध्यान

शिमला : शिमला से जारी बयान में पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि मोदी सरकार देश के सभी वर्गों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी हाल में उनसे समझौता नहीं होगा। अमेरिका से हुई ट्रेड डील और यूरोपीय यूनियन से हुए मुक्त व्यापार समझौते का देश के बागवानों को कोई असर नहीं पड़ेगा। भारत सरकार द्वारा सब के न्यूनतम आयात मूल्य को बढ़ाने की वजह से किसी भी देश  के सेब की लैंडिंग कास्ट हिमाचल के सेब से अधिक ही रहेगी। मोदी सरकार ने न्यूज़ीलैंड, यूरोपीय संघ और अमेरिका से आने वाले सेब के मामले में बागवानों के हितों को पूरी तरह सुरक्षित किया। 
जय राम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के सेब बागवानों के हितों की रक्षा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने ठोस, दूरदर्शी और संतुलित कदम उठाए हैं। सेब आयात को लेकर न्यूज़ीलैंड, यूरोपीय संघ और अमेरिका जैसे देशों के साथ होने वाले व्यापारिक प्रावधानों में यह सुनिश्चित किया गया है कि घरेलू सेब उत्पादकों के हितों पर किसी भी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने सेब आयात के लिए न्यूनतम आयात मूल्य, सीमित कोटा, मौसमी समय-सीमा और सेफगार्ड प्रावधानों को प्रभावी रूप से लागू किया है, जिससे सस्ता विदेशी सेब भारतीय मंडियों में आकर हिमाचल प्रदेश के बागवानों को नुकसान नहीं पहुँचा सकता। 
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यूरोपीय संघ से आने वाले सेब पर ₹80 प्रति किलो का न्यूनतम आयात मूल्य लागू है, जिसके कारण उनकी लैंडेड कीमत ₹96 प्रति किलो से कम नहीं होती। इसी प्रकार न्यूज़ीलैंड से आने वाले सेब उच्च न्यूनतम आयात मूल्य और शुल्क के कारण लगभग ₹140 प्रति किलो की प्रीमियम श्रेणी में ही भारत आते हैं। अमेरिका से आने वाले सेब पर ₹80 प्रति किलो का न्यूनतम आयात मूल्य और 25 प्रतिशत आयात शुल्क लागू होने के बाद उनकी लैंडेड कीमत लगभग ₹105 प्रति किलो रहती है। यह सभी व्यवस्थाएँ यह स्पष्ट करती हैं कि विदेशी सेब भारतीय बाजार में सस्ते दामों पर प्रवेश नहीं कर सकते।सभी देशों के लिए कोटा निर्धारित है यह दोस्त निर्धारित कोटे से ज्यादा से आयात होगा तो उसे पर लगने वाला शुल्क बढ़ जाएगा। 
जय राम ठाकुर ने कहा कि भारत में सेब का कुल घरेलू उत्पादन लगभग 22 लाख मीट्रिक टन है, जबकि कुल आयात लगभग 5.5 लाख मीट्रिक टन के आसपास है। यह दर्शाता है कि आयात घरेलू उत्पादन की तुलना में सीमित है और वह भी पूरी तरह नियंत्रित तथा विनियमित ढाँचे के अंतर्गत किया जाता है।उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में सेब के मुद्दे पर भ्रम फैलाने के प्रयास किए गए, लेकिन आज नीतिगत स्पष्टता और तथ्यों ने यह सिद्ध कर दिया है कि मोदी सरकार ने हर स्तर पर सेब बागवानों के हितों की रक्षा की है। केंद्र सरकार की नीतियों का उद्देश्य साफ़ है कि किसानों और बागवानों की आय, बाजार और भविष्य सुरक्षित रहे। जय राम ठाकुर ने हिमाचल प्रदेश के सेब बागवानों को आश्वस्त किया कि भारतीय जनता पार्टी उनकी आवाज़ के साथ मजबूती से खड़ी है और भविष्य में भी सेब उत्पादकों के हितों से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। साथ ही कांग्रेस समेत अन्य दलों को इस मुद्दे पर झूठ फैलाने से बचने का निवेदन भी किया। 

हिमाचल: जयपुर घूमने गए चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट के साथ CM ने वीडियो कॉल से की बात, जानें उनके अनुभव

शिमला : मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना के अंतर्गत जिला मंडी के चाइल्ड केयर इंस्टीच्यूट (सीसीआई) सुन्दरनगर, तल्यार, भरनल और डैहर में रह रहे ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ इन दिनों एक विशेष शैक्षणिक एवं अनुभवात्मक भ्रमण पर चंडीगढ़ और जयपुर गए हुए हैं। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज दिल्ली से मोबाइल फोन से वीडियो कॉल कर बच्चों से संवाद किया और उन्हें इस यात्रा का भरपूर आनंद लेने के लिए प्रेरित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस भ्रमण के दौरान बच्चों को ज्ञानार्जन के साथ-साथ विभिन्न विषयों को समझने के बेहतरीन अवसर प्राप्त होंगे। उन्होंने बच्चों से पूछा कि क्या उन्होंने पहले कभी हवाई यात्रा की है, जिस पर बच्चों ने बताया कि यह उनका पहला हवाई सफर है और उन्हें हवाई जहाज में यात्रा करने का अनुभव बेहद रोमांचक लगा।
मुख्यमंत्री ने बच्चों से उनके ठहरने और खान-पान की व्यवस्थाओं के बारे में भी जानकारी ली। साथ ही उन्होंने बच्चों को आगामी परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए पढ़ाई पर भी पूरा ध्यान देने के लिए प्रेरित किया। मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि राज्य सरकार 27 वर्ष की आयु तक इन बच्चों का पूरा ध्यान रखेगी।
इस भ्रमण में चार चाइल्ड केयर इंस्टीच्यूट में रह रहे कुल 31 बच्चे भाग ले रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना के तहत राज्य सरकार बच्चों को केवल संरक्षण ही नहीं, बल्कि उनके बेहतर भविष्य के लिए आवश्यक अवसर भी प्रदान कर रही है। इस यात्रा का उद्देश्य बच्चों को राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक विरासत, आधुनिक बुनियादी ढांचे और शैक्षणिक संस्थानों से परिचित करवाना है, ताकि उनका सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया जा सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक एवं अनुभवात्मक भ्रमण बच्चों में आत्मविश्वास, जिज्ञासा, देश के प्रति समझ और सामाजिक चेतना विकसित करने में सहायक सिद्ध होते हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बच्चों की सुरक्षा, सुविधा और देखभाल में किसी भी प्रकार की कोताही न बरती जाए।

शिमला: आर.एस. बाली ने नारकंडा में किया 3 दिवसीय स्की स्नोबोर्ड चैंपियनशिप का शुभारम्भ

हिमाचल: प्रदेश पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष व पर्यटन विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष (कैबिनेट रैंक) आर.एस. बाली ने आज नारकंडा में स्की स्नोबोर्ड चैंपियनशिप का शुभारम्भ किया। यह प्रतियोगिताएं 10 फरवरी से 12 फरवरी तक चलेगी। 

आर.एस. बाली ने कहा कि ऐसी प्रतियोगिताएं हमेशा आयोजित की जानी चाहिए जिससे हमारे आने वाले युवाओं को नई दिशा मिल सके। उन्होंने कहा कि नारकंडा में स्नोबोर्ड चैंपियनशिप एक प्रमुख आयोजन है, जो देश-विदेश के खिलाड़ियों को आकर्षित करता है। इस चैंपियनशिप में खिलाड़ी अपनी गति और कौशल दिखाते हैं, और विजेताओं को पुरस्कार और सम्मान मिलता है। उन्होंने कहा कि नारकंडा साहसिक पर्यटन के लिए एक आदर्श गंतव्य है। यहाँ के बर्फीली पहाड़ियाँ, गहरी घाटियां, और शांत वातावरण साहसिक प्रेमियों के लिए एक अनोखा अनुभव प्रदान करते हैं। यहाँ के प्रमुख साहसिक गतिविधियों में स्नोबोर्डिंग के अतिरिक्त स्कीइंग और ट्रैकिंग व कैंपिंग भी शामिल हैं। 

50 लाख से बनेगी पोर्टेबल लिफ्ट, 10 लाख से बनेगा रेस्ट हाउस का गेट 

आर.एस. बाली ने लोगों की मांग पर स्की स्लोप धुमरी (नारकंडा) में 50 लाख रुपये की लागत से पोर्टेबल लिफ्ट देने की घोषणा की। इसके अतिरिक्त, उन्होंने पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस नारकंडा के पास धुमरी स्की स्लोप की ओर 10 लाख रुपये की लागत से गेट का निर्माण करने की भी घोषणा की। 

इस अवसर पर आर एस बाली ने पौधरोपण भी किया और पर्यावरण को सुन्दर व साफ़ रखने का सन्देश दिया। 

इस दौरान उपमंडल दंडाधिकारी कुमारसैन मुकेश कुमार, ओम प्रकाश शर्मा पूर्व अध्यक्ष नगर पंचायत नारकंडा, रूपेश कंवल पूर्व एचपीटीडीसी और देविंदर राजटा, चेत राम वर्मा पूर्व प्रधान सिहाल नारकंडा, अमित वर्मा अध्यक्ष जिला शिमला स्की, स्नोबोर्ड और क्रॉस फेडरेशन, राजेश शर्मा महासचिव एचपी विंटर गेम्स एसोसिएशन, कमल शर्मा महासचिव, जिला शिमला स्की स्नोबोर्ड और क्रॉस कंट्री फेडरेशन, नरेश कैंथला कैशियर सहित अन्य गणमान्य अतिथि भी उपस्थित रहे। 

शिमला: विक्रमादित्य सिंह 11 फरवरी को बठमाणा (जाबरी) में महिला मंडल भवन का करेंगे शुभारम्भ

शिमला:  लोक निर्माण एवं शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह 11 फरवरी 2026 को प्रातः 11:30 बजे शिमला ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र के बोहली, ग्राम पंचायत बठमाणा (जाबरी) में महिला मंडल भवन का शुभारम्भ करेंगे। इसके पश्चात वह जनता की समस्याएं सुनेंगे और उनका निवारण करेंगे।