ब्लॉग

अपनी वित्तीय विफलता छिपाने के लिए केंद्र को दोष दे रही हिमाचल सरकार” – टंडन

शिमला:  भाजपा प्रदेश सह प्रभारी संजय टंडन ने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि राज्य सरकार अपनी वित्तीय अव्यवस्था, बढ़ते कर्ज, राजकोषीय घाटे और गलत प्राथमिकताओं को छिपाने के लिए केंद्र सरकार पर निराधार आरोप लगा रही है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति “नाच ना जाने आँगन टेढ़ा” वाली है — जहां अपनी प्रशासनिक और वित्तीय विफलताओं का ठीकरा दूसरों पर फोड़ा जा रहा है।
उन्होंने कहा कि राजस्व घाटा अनुदान (RDG) का चरणबद्ध समाप्त होना कोई अचानक लिया गया निर्णय नहीं है, बल्कि यह कई वित्त आयोगों से तय प्रक्रिया का हिस्सा रहा है। राज्य सरकार को पहले से इसकी जानकारी थी, फिर भी वैकल्पिक राजस्व स्रोत बढ़ाने और खर्च नियंत्रण की दिशा में गंभीर प्रयास नहीं किए गए।
टंडन ने कहा कि हिमाचल और उत्तराखंड जैसे समान पर्वतीय, सीमित संसाधन और पर्यटन आधारित राज्यों की तुलना करें तो उत्तराखंड ने राजस्व संग्रह, निवेश आकर्षण और वित्तीय अनुशासन में बेहतर प्रदर्शन किया है, जबकि हिमाचल में राजस्व घाटा और कर्ज अनुपात तेजी से बढ़ा है — यह अंतर नीति और प्रबंधन का अंतर दर्शाता है।
संजय टंडन ने कहा कि उपलब्ध सार्वजनिक वित्तीय आकलनों के अनुसार हिमाचल प्रदेश का कर्ज अनुपात 40% से अधिक के स्तर पर पहुंच चुका है, जो गंभीर चेतावनी का संकेत है। इसके विपरीत केंद्र सरकार ने अपना राजकोषीय घाटा नियंत्रित करते हुए इसे लगभग 4.3% तक लाने का लक्ष्य रखा है — वह भी पूंजीगत व्यय और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश बढ़ाते हुए।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार ने बड़ी संख्या में ओएसडी, सलाहकारों और राजनीतिक नियुक्तियों का विस्तार किया, जिससे राजस्व व्यय पर अनावश्यक बोझ बढ़ा। कई विभागों में सलाहकारों को लाखों रुपये मासिक वेतन, वाहन और अन्य सुविधाएं दी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने पहले अपने घर का बजट नहीं संभाला और अब वित्तीय संकट का हवाला देकर केंद्र को दोष दे रही है।
टंडन ने कहा कि केंद्र सरकार की अधिकांश योजनाएं — शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, ग्रामीण विकास, जल, कृषि — 90:10 फंडिंग मॉडल पर चलती हैं। पूर्व भाजपा सरकार के समय इन योजनाओं का अधिकतम उपयोग कर परियोजनाएं लाई गईं, जबकि वर्तमान सरकार पहल और प्रोजेक्ट तैयारी में पिछड़ गई।
उन्होंने कहा कि अधिकारियों से प्रेस कॉन्फ्रेंस करवाकर भय और भ्रम का वातावरण बनाना गलत है। यदि सरकार के पास तथ्य हैं तो मुख्यमंत्री स्वयं सामने आकर जवाब दें। केंद्र सरकार ने हिमाचल के लिए कभी मदद से पीछे हटने का काम नहीं किया।
इसके बाद केंद्रीय बजट 2026 पर बोलते हुए भाजपा प्रदेश सह प्रभारी संजय टंडन ने कहा कि यह बजट एक क्रांतिकारी, दूरदर्शी और परिवर्तनकारी बजट है, जो भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में ठोस आधार देता है।
उन्होंने कहा कि आर्थिक सर्वेक्षण और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार: भारत की अर्थव्यवस्था लगभग 2 ट्रिलियन डॉलर से बढ़कर 4.3 ट्रिलियन डॉलर हो चुकी है
भारत विश्व की 11वीं से चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना
सकल एनपीए लगभग 11% से घटकर 2% से नीचे आया
नेट एनपीए 1% से नीचे
60 करोड़ से अधिक बैंक खाते सक्रिय
वैश्विक रियल-टाइम डिजिटल भुगतान का लगभग 49% भारत में
पूंजीगत व्यय के लिए बजट में लगभग ₹12 लाख करोड़ का प्रावधान
उन्होंने कहा कि बजट में युवाओं, महिलाओं, किसानों, एमएसएमई, उद्यमियों और निवेशकों — सभी वर्गों के लिए ठोस प्रावधान किए गए हैं। आयकर अनुपालन सरल किया गया है, रिटर्न संशोधन की समय सीमा बढ़ाई गई है, डेटा सेंटर और उभरते क्षेत्रों को टैक्स प्रोत्साहन दिया गया है, और इंफ्रास्ट्रक्चर, रेलवे, सड़क, एयरपोर्ट और लॉजिस्टिक्स पर रिकॉर्ड निवेश रखा गया है।
अंत में उन्होंने कहा कि जहां केंद्र सरकार वित्तीय अनुशासन के साथ विकास का मॉडल प्रस्तुत कर रही है, वहीं हिमाचल की कांग्रेस सरकार कुप्रबंधन और दोषारोपण की राजनीति कर रही है। जनता तथ्यों को समझती है और समय आने पर जवाब देगी।

नाहन शहर केे आस पास के क्षेत्र में 11 जुलाई को विद्युत आपूर्ति रहेगी बाधित

हिमाचल: 12 फरवरी को हड़ताल पर रहेंगे बिजली बोर्ड के कर्मचारी

शिमला: “हिमाचल पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन” (HPEA) के अध्यक्ष लोकेश ठाकुर ने बताया कि देश के लगभग 27 लाख बिजली कर्मचारी और अभियंता 12 फरवरी को एक दिन की राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर रहेंगे।

यह हड़ताल पावर सेक्टर के निजीकरण के विरोध में, इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 एवं प्रस्तावित नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी 2026 को वापस लेने तथा पावर सेक्टर के कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग को लेकर की जा रही है।

लोकेश ठाकुर ने बताया कि पहली बार बिजली कर्मचारियों की मांगों के समर्थन में संयुक्त किसान मोर्चा और दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने भी आंदोलन में शामिल होने का निर्णय लिया है। बिजली कर्मचारी, इंजीनियर, मजदूर संगठनों और किसानों की संयुक्त भागीदारी से 12 फरवरी की हड़ताल स्वतंत्र भारत के इतिहास की सबसे बड़ी औद्योगिक कार्रवाई में से एक होगी।

उन्होंने कहा कि पावर सेक्टर में नियमित प्रकृति के कार्यों के लिए बड़े पैमाने पर आउटसोर्सिंग की जा रही है। हड़ताल की प्रमुख मांगों में आउटसोर्सिंग पर रोक लगाना, नियमित पदों पर सीधी भर्ती करना तथा आउटसोर्स कर्मियों का नियमितीकरण भी शामिल है।

हिमाचल पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन ने चिंता व्यक्त की है कि बिजली क्षेत्र का निजीकरण (वितरण, उत्पादन और टीबीसीबी के जरिए ट्रांसमिशन) गरीब उपभोक्ताओं, छोटे एवं मध्यम उद्योगों तथा आम जनता के हितों के विरुद्ध है। इसलिए इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 और प्रस्तावित नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी 2026 को तत्काल वापस लिया जाना आवश्यक है।

हिमाचल पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन ने देश के सभी बिजली कर्मचारियों और अभियंताओं से अपील की है कि वे 12 फरवरी की हड़ताल में बढ़-चढ़कर भाग लें, अपनी एकता का प्रदर्शन करें और इस आंदोलन को ऐतिहासिक बनाएं।

राष्ट्रीय महिला आयोग द्वारा 12 फरवरी को शिमला में महिला सुरक्षा पर स्टेट लेवल कंसल्टेशन का आयोजन

आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर की अध्यक्षता में उच्च शिक्षण संस्थानों में महिलाओं की सुरक्षा पर होगी मंत्रणा

शिमला: राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) द्वारा शिमला में उच्च शिक्षण संस्थाओं में महिलाओं की सुरक्षा पर एक स्टेट लेवल कंसल्टेशन का आयोजन 12 फरवरी को दोपहर 01 से 03 बजे तक उपायुक्त कार्यालय शिमला के बचत भवन में किया जा रहा है। इसका उद्देश्य मौजूदा चुनौतियों पर बात करना, इंस्टीट्यूशनल सिस्टम का आकलन करना और स्टेकहोल्डर्स के बीच मिलकर काम करना है।

आज यहां यह जानकारी देते हुए, आयोग के एक प्रवक्ता ने कहा कि कंसल्टेशन की अध्यक्षता राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर करेंगी और इसमें राज्य पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी, यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर, रजिस्ट्रार, डीन और उच्च शिक्षण संस्थानों के प्रिंसिपल, वरिष्ठ प्रोफेसर और इंटरनल कमेटियों के सदस्य, वकील और कानूनी एक्सपर्ट, स्टूडेंट लीडर और प्रतिनिधि, नेशनल कमीशन फॉर विमेन के अधिकारी और राज्य प्रशासन के प्रतिनिधि शामिल होंगे। 

उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थान युवा महिलाओं की इंटेलेक्चुअल, सोशल और प्रोफेशनल ज़िंदगी को बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। हालांकि महिलाओं के लिए हायर एजुकेशन तक पहुंच काफी बढ़ी है, लेकिन एकेडमिक कैंपस में सुरक्षा, सम्मान और हैरेसमेंट-फ्री माहौल से जुड़ी चिंताएं अभी भी बनी हुई हैं। सेक्सुअल हैरेसमेंट, साइबर हैरेसमेंट, भेदभाव, रिड्रेसल मैकेनिज्म के बारे में जागरूकता की कमी और कानूनी सुरक्षा उपायों को ठीक से लागू न करने की घटनाओं का महिला स्टूडेंट्स और स्टाफ पर बुरा असर पड़ता है। वर्कप्लेस पर महिलाओं का सेक्सुअल हैरेसमेंट (प्रिवेंशन, प्रोहिबिशन एंड रिड्रेसल) एक्ट, 2013 (POSH एक्ट) इंटरनल कमेटियों के गठन और काम करने और सीखने का सुरक्षित माहौल बनाने का आदेश देता है। हालांकि, इसे लागू करने और जागरूकता में कमियां एक चुनौती बनी हुई हैं।
उन्होंने कहा कि कंसल्टेशन का मकसद हायर एजुकेशनल इंस्टिट्यूशन में महिलाओं के लिए सुरक्षा उपायों की मौजूदा स्थिति का रिव्यू करना है। यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में पोष एक्ट और इंटरनल कमेटियों को लागू करने और उनके असर का आकलन करना है। इसके अतिरिक्त, एजुकेशनल इंस्टिट्यूशन, लॉ एनफोर्समेंट एजेंसियों और कानूनी स्टेकहोल्डर्स के बीच तालमेल को मजबूत करना। इसके अलावा, एक सुरक्षित कैंपस माहौल सुनिश्चित करने के लिए सबसे अच्छे तरीकों और रोकथाम की रणनीतियों को बढ़ावा देना। पॉलिसी बनाने वालों, एडमिनिस्ट्रेटर्स, लॉ एनफोर्समेंट, फैकल्टी और स्टूडेंट रिप्रेजेंटेटिव्स के बीच बातचीत के लिए एक प्लेटफार्म देना और इंस्टीट्यूशनल रिस्पांस मैकेनिज्म को बेहतर बनाने के लिए एक्शनेबल सुझाव तैयार करना है।
उन्होंने कहा कि इस कंसल्टेशन से उम्मीद के मुताबिक नतीजों में कानूनी प्रावधान और इंस्टीट्यूशनल जिम्मेदारियों के बारे में जागरूकता बढ़ाना और सेफ्टी मैकेनिज्म और शिकायत सुलझाने के सिस्टम में कमियों की पहचान करना शामिल है। इससे रोकथाम और रिस्पॉन्स के लिए इंटर-एजेंसी कोआर्डिनेशन मजबूत होगा। पॉलिसी और एडमिनिस्ट्रेटिव एक्शन के लिए प्रैक्टिकल सुझाव प्राप्त होंगे। इसके अलावा, महिलाओं के लिए सुरक्षित और सबको साथ लेकर चलने वाली एजुकेशनल जगहें बनाने के आयोग की कमिटमेंट को और मजबूती मिलेगी।

CM सुक्खू बोले- मुझे निशाना बनाने के बजाय RDG मुद्दे पर प्रधानमंत्री से मिलें भाजपा नेता

पी. चिदंबरम ने आरडीजी मुद्दे को उचित मंच पर उठाने का आश्वासन दिया

शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने दिल्ली से शिमला लौटने के उपरान्त मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि भाजपा नेताओं को आपसी राजनीति छोड़कर राज्य के हित में आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) की समाप्ति से हिमाचल प्रदेश को वर्ष 2026 से 2031 तक प्रत्येक वर्ष लगभग 10,000 करोड़ रुपये का नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने आरडीजी समाप्त कर प्रदेश के लोगों का हक छीन लिया है। उन्होंने भाजपा नेताओं से कहा, ‘मुझे निशाना बनाने के बजाय भाजपा नेताओं को आरडीजी की बहाली के लिए प्रधानमंत्री से मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि मैंने कई बार भाजपा नेताओं से प्रदेश सरकार के साथ मिलकर केंद्र के समक्ष प्रदेश का पक्ष रखने का आग्रह किया और आरडीजी के मुद्दे पर भी एक जुट होकर लड़ने के लिए आगे आने को कहा लेकिन मुझे पता है कि वे ऐसा कभी नहीं करेंगे।’
मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम से भेंट कर 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों से हिमाचल प्रदेश पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों के बारे में अवगत करवाया। उन्होंने कहा कि वर्तमान कांग्रेस सरकार को पिछली सरकार से 75,000 करोड़ रुपये का कर्ज और 10,000 करोड़ रुपये की देनदारियां (वेतन और पेंशन एरियर) विरासत में मिली हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार ने कई सुधार और नीतिगत बदलाव किए हैं और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाई है, जिससे पिछले तीन वर्षों में 3,800 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय हुई है। उन्होंने कहा कि श्री चिदंबरम ने प्रदेश सरकार के इन प्रयासों की सराहना की और अधिक जानकारी मांगी तथा इस मुद्दे को उचित मंच पर उठाने का आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि श्री चिदंबरम के अनुसार संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत राज्यों की आय और व्यय की स्थिति को ध्यान में रखने का प्रावधान है। 17 राज्यों से आरडीजी समाप्त करते समय पर्वतीय और छोटे राज्यों के हितों की सुरक्षा जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि तमाम चुनौतियों के बावजूद राज्य सरकार आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही है और आर्थिक सुधार कर रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में राज्य को 54,296 करोड़ रुपये से अधिक आरडीजी मिला, जबकि वर्तमान सरकार को पिछले तीन वर्षों में केवल 17,563 करोड़ रुपये ही प्राप्त हुए हैं। इसके अलावा, पिछली भाजपा सरकार को 16,000 करोड़ रुपये जीएसटी मुआवजे और 11,431 करोड़ रुपये अंतरिम अनुदान के रूप में भी मिले है।
ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि भाजपा सरकार को पांच वर्षों में कुल मिलाकर करीब 70,000 करोड़ रुपये मिले। यदि उसमें से 40,000 करोड़ रुपये कर्ज चुकाने में लगाए जाते, तो आज प्रदेश कर्ज के जाल में नहीं फंसा होता। पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को बताना चाहिए कि ये 70,000 करोड़ रुपये कहां खर्च हुए और किसे इसका लाभ मिला।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली भाजपा सरकार ने आरडीजी का दुरुपयोग कर फिजूलखर्ची की जबकि वर्तमान प्रदेश सरकार ने अनावश्यक खर्चों पर रोक लगाई है और सख्त वित्तीय अनुशासन अपनाया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार किसी भी पद को समाप्त नहीं करेगी, बल्कि युवाओं के लिए रोज़गार के नए अवसर सृजित किए जाएंगे। राज्य के लोगों का हित सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने आवश्यकता के अनुसार ही अध्यक्ष और उपाध्यक्ष नियुक्त किए हैं, जो पिछली भाजपा सरकार की तुलना में लगभग आधे हैं और ये सभी राज्य के विकास में सक्रिय योगदान दे रहे हैं।
श्री सुक्खू ने कहा कि केंद्र से सीमित अनुदान मिलने के बावजूद, 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के पेंशनरों और पारिवारिक पेंशनरों के पेंशन एरियर का भुगतान कर दिया गया है। इसके साथ ही, वर्ष 2016 से 2021 के बीच सेवानिवृत्त हुए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के ग्रेच्युटी और अवकाश नकदीकरण के बकाया भी जारी किए गए हैं, जो वर्तमान प्रदेश सरकार की वित्तीय समझदारी का प्रमाण है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए आईएएस, आईपीएस और आईएफएस कैडर में भी कटौती की गई है। उन्होंने कहा कि आईएफएस पदों की संख्या 110 से घटाकर 86 कर दी गई है। अधिकारी स्तर के पद कम किए गए हैं, जबकि निचले स्तर के पद बढ़ाए गए हैं ताकि प्रशासन अधिक प्रभावी हो सके।
उन्होंने कहा कि खर्च कम करने के लिए कुछ स्कूलों और कॉलेजों का विलय किया गया है। सरकार ने सत्ता संभालने के पहले दिन से ही प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कठिन फैसले लेने शुरू कर दिए थे। उन्होंने कहा कि राज्य ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के माध्यम से एक मजबूत और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय वन प्रबंधन संस्थान की एक रिपोर्ट के अनुसार, हिमाचल प्रदेश देश की अर्थव्यवस्था को करीब 90,000 करोड़ रुपये की पारिस्थितिक सेवाएं प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के संसाधनों पर हमारा अधिकार है और हम इसके लिए पूरी मजबूती से लड़ेंगे।
.0.

शिमला: जनगणना 2027 के प्रथम चरण की तैयारियों के लिए राज्य स्तरीय प्रशिक्षण सम्मेलन आयोजित

शिमला:  मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने आज यहां जनगणना 2027 के प्रथम चरण मकान सूचीकरण एवं मकान गणना की तैयारियों को लेकर आयोजित राज्य स्तरीय प्रशिक्षण सम्मेलन की अध्यक्षता की।
इस अवसर पर मुख्य सचिव ने कहा कि जनगणना एक राष्ट्रीय महत्व की गतिविधि है, जिसे सभी विभागों के समन्वित प्रयासों से समयबद्ध और सटीकता से पूरा किया जाना चाहिए।
उन्होंने अधिकारियों को जनगणना से संबंधित प्रशिक्षण, मानव संसाधन की उपलब्धता और तकनीकी तैयारियों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए ताकि कार्य निष्पक्ष, पारदर्शी और त्रुटिरहित ढंग से सम्पन्न हो सके। उन्होंने इस बार जनगणना के डिजिटलीकृत कोड में संचालित होने को सराहनीय पहल बताया।
सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग एवं सह-राज्य नोडल अधिकारी राजेश शर्मा ने विभिन्न विभागों और अधिकारियों की भूमिकाओं एवं उत्तरदायित्वों पर विस्तार से प्रकाश डाला और जनगणना कार्य के सफल क्रियान्वयन के लिए समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।
सम्मेलन के दौरान जनगणना 2027 के प्रथम चरण से संबंधित कार्य योजना और जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर भी चर्चा की गई।
राज्य स्तरीय जनगणना समन्वय समिति के सदस्यों, सभी मंडलीय आयुक्त, उपायुक्त, नगर निगम आयुक्त, निदेशक जनगणना कार्य दीप शिखा शर्मा, जनगणना कार्य निदेशालय के अधिकारी तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने सम्मेलन में भाग लिया।

शिमला: सीपीआरआई  में 10 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न , देशभर से 18 प्रतिभागियों ने लिया भाग 

शिमला: केन्द्रीय आलू अनुसंधान संस्थान, शिमला के तत्वाधान में 10 दिवसीय शॉर्ट कोर्स प्रशिक्षण कार्यक्रम “कान्वेंशनल एण्ड मौलिक्यूलर टूल्स फॉर क्रॉप इम्प्रूवमेन्ट, प्रोटेक्शन, प्रोडक्शन एण्ड पोस्ट हार्वेस्ट  मेनेजमेंट ऑफ हार्टिकल्चरल क्रॉपस” विषय पर 11 फरवरी, 2026 को सम्पन्न हुआ जिसके समापन के अवसर पर प्रशिक्षणार्थीयों ने अपने अनुभव साझा करते हुए प्रशिक्षण कार्यक्रम की महत्ता बताई इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में देश के अन्य संस्थानों से 18 लोगों ने प्रतिभागिता की, उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम एक उच्च गुणवत्ता का कार्यक्रम था और इससे बढ़कर संस्थान के सभी वैज्ञानिकगणों में व्यक्तिगत से अधिक राष्ट्रीय लक्ष्य दिखाई दिया। उन्होंने अपने अनुभव में संस्थान के उत्कृष्ट संसाधनों, विशेषकर प्रशिक्षणार्थियों की बेहद विद्वतायुक्त दल की भूरी भूरी प्रशंसा की। उन्होंने ना सिर्फ प्रशिक्षण का लाभ उठाया बल्कि उन्हें शिमला के कुफ़री फार्म पर चल रही वैज्ञानिक गतिविधियों व प्रयोगशाला में हैंड्स ऑन एक्सपिरीयन्स भी कराया गया। सभी प्रशिक्षुओं ने इस दौरान संस्थान के द्वारा दी गई खान पान, आवास इत्यादि के लिए संस्थान के निदेशक महोदय तथा इस प्रोग्राम के कोऑर्डिनटरस का दिल से धन्यवाद दिया। इस दौरान डॉ. सलेज सूद ने इस कार्यक्रम के दौरान हुई गतिविधियों से अवगत कराया। डॉ. विकास मंगल ने समापन समारोह में मंच संचालन किया और तथा डॉ. धर्मेन्द्र कुमार ने अपने धन्यवाद भाषण में सभी प्रशिक्षुओं का शिमला में आने के धन्यवाद दिया तथा इस कार्यक्रम में प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से शामिल सभी वैज्ञानिकों, तकनीकी तथा प्रशासनिक अधिकारियों, प्रशिक्षण कार्यक्रम के रिसोर्स पर्सन्स आदि का धन्यवाद किया। समापन के दौरान संस्थान के विभिन्न संभागों के अध्यक्ष डॉ. आलोक कुमार, डॉ. संजीव शर्मा, डॉ. जगदेव, डॉ. विनोद कुमार, डॉ. सोमदत्त उपस्थित रहे। कार्यक्रम की समापन पर डॉ. ब्रजेश सिंह, निदेशक महोदय ने सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र दिया और आशा जताई कि वे इस प्रशिक्षण को प्रयोगशाला से खेतों तक लेकर जाएंगे।

“अपव्यय, सलाहकारों-एडवाइजर्स की फौज, बढ़ते माफिया और रुके विकास कार्य; जनता से किए वादों पर सरकार पूरी तरह असफल” – बिंदल

“प्रदेश में कानून व्यवस्था, वित्त और प्रशासनिक मोर्चे पर पूर्ण विफलता — कांग्रेस सरकार ने हिमाचल को कर्ज और अव्यवस्था में धकेला”

शिमला: भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए वर्तमान प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश के गठन और पूर्ण राज्यत्व प्राप्ति के बाद अनेक सरकारें आईं, परंतु वर्तमान कांग्रेस सरकार ने सवा तीन वर्षों में प्रदेश को आर्थिक, प्रशासनिक और कानून व्यवस्था के मोर्चे पर गंभीर संकट में खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश में हालात ऐसे बन गए हैं कि हत्या, लूट, फिरौती, डकैती और नशे का जाल लगातार फैल रहा है तथा मीडिया रिपोर्टों के अनुसार बड़ी संख्या में युवा नशे की चपेट में हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि खनन माफिया और वन माफिया पूरे प्रदेश में सक्रिय हैं, जिससे सरकार को मिलने वाला राजस्व भारी मात्रा में प्रभावित हो रहा है। कांगड़ा, चंबा, मंडी, सोलन सहित कई जिलों में अवैध खनन और वन कटान के मामलों ने प्रशासनिक व्यवस्था की कमजोरी उजागर की है। वन अधिकारियों पर हमलों की घटनाएं इस बात का प्रमाण हैं कि कानून का डर समाप्त हो चुका है।

डॉ. बिंदल ने कहा कि सरकार ने संसाधन बढ़ाने के बजाय कर्ज बढ़ाने की नीति अपनाई है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि “कर्जा लेकर घी पियो” की नीति पर सरकार चल रही है। प्रदेश में एडवाइजर, ओएसडी और विशेष पदों पर नियुक्तियों की बड़ी फौज खड़ी कर दी गई है, जिनकी संख्या लगभग 70–75 तक पहुंच चुकी है और जिन पर भारी वेतन, वाहन, आवास और अन्य सुविधाओं के रूप में करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि गैरकानूनी रूप से नियुक्त किए गए मुख्य संसदीय सचिव (CPS) मामले में हाईकोर्ट के निर्णय के बाद पद हटाने पड़े, लेकिन तब तक करोड़ों रुपये का व्यय हो चुका था और अब भी इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में महंगे वकीलों पर भारी खर्च किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार ने 100 से अधिक अतिरिक्त, उप और सहायक महाधिवक्ताओं व अन्य विधि अधिकारियों की नियुक्ति की है और गंभीर मामलों में अलग से महंगे वरिष्ठ वकील खड़े किए जा रहे हैं, जिससे करोड़ों का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि निगम-बोर्डों में चेयरमैन और वाइस चेयरमैन की नियुक्तियों में भारी बढ़ोतरी हुई है और यह “मित्रों की सरकार” बनकर रह गई है, जहां योग्यता के बजाय नजदीकी आधार बन गई है। उन्होंने सरकारी होर्डिंग, प्रचार अभियानों, बड़े काफिलों, नई गाड़ियों और हेलीकॉप्टर उपयोग पर भी प्रश्न उठाते हुए कहा कि वित्तीय संकट का हवाला देने वाली सरकार अपने खर्चों में कटौती करती दिखाई नहीं देती।

डॉ. बिंदल ने कहा कि चुनाव से पहले दी गई गारंटियां — ₹1500 मासिक सहायता, मुफ्त बिजली, एक लाख सरकारी नौकरियां — बिना वित्तीय गणना के घोषित की गईं और अब सरकार स्वयं वित्तीय संकट की बात कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारियों के डीए, पेंशन, रिटायरमेंट लाभ और सामाजिक योजनाओं के भुगतान में देरी इसी कुप्रबंधन का परिणाम है।

उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार ने पिछले वर्षों में हिमाचल को पूर्व की तुलना में कई गुना अधिक सहायता दी है, टैक्स डिवोल्यूशन बढ़ा है और सड़क, रेल, स्वास्थ्य, शिक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर के अधिकांश बड़े प्रोजेक्ट केंद्र प्रायोजित योजनाओं से चल रहे हैं। उन्होंने प्रश्न उठाया कि प्रदेश सरकार ने अपने संसाधनों से कितने बड़े विकास कार्य शुरू किए।

अंत में डॉ. बिंदल ने कहा कि प्रदेश की वर्तमान वित्तीय अव्यवस्था के लिए पूरी तरह राज्य सरकार जिम्मेदार है और अब दोषारोपण कर जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास किया जा रहा है। भाजपा इन मुद्दों को जनहित में लगातार उठाती रहेगी।

शिमला: लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने जाबरी में महिला मंडल भवन का किया लोकार्पण 

आर्थिक संकट से उभरेगा हिमाचल – विक्रमादित्य सिंह

शिमला: लोक निर्माण एवं शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने बुधवार को शिमला ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत बठमाना के तहत जाबरी में महिला मंडल भवन का लोकार्पण  किया।

जनसभा को संबोधित करते हुए लोक निर्माण मंत्री ने कहा कि फिजूलखर्ची नहीं होनी चाहिए। प्रदेश आर्थिक संकट से जूझ रहा है। लेकिन हिमाचल इस संकट से उभरेगा और फिर से मजबूत राज्य बनेगा। पूर्व की सरकारों के समय भी इस तरह का संकट आया था, लेकिन प्रदेश निरंतर आगे बढ़ता रहा है और आगे भी बढ़ता रहेगा।  

उन्होंने कहा कि महिलाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार है और इसी दिशा में कार्य करते हुए प्रदेश सरकार हिम ईरा ब्रांड के माध्यम से देश के कोने-कोने में प्रदेश की महिलाओं द्वारा तैयार किये स्थानीय उत्पादों को बेच रहा है तथा महिलाओं को घर बैठे रोजगार मिल रहा है। साढ़े तीन लाख रुपए की लागत से महिला मंडल का निर्माण किया गया है। उन्होंने कहा कि महिला मंडल भवन का महिलाएं अपनी आजीविका को मजबूत करने के लिए सही उपयोग करें। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र की समस्याओं के समाधान के लिए उनका निरंतर प्रयास रहता है। लोगों के साथ संवाद होना चाहिए, जिन लोगों ने क्षेत्र के विकास के लिए कार्य किया है, उन्हें हमेशा याद रखना चाहिए और हमें अपने बुजुर्गों का भी ऋणी रहना चाहिए।

उन्होंने कहा कि धामी कॉलेज हमारे क्षेत्र की शान है और वहां पर आधारभूत ढांचे को मजबूत किया जा रहा है। इस क्षेत्र में स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ करने की मांग लंबे समय से चली  आ रही है। धामी सीएचसी को आदर्श अस्पताल बनाने की दिशा में तीव्र गति में कार्य किया जा रहा है। सुन्नी क्षेत्र में अस्पताल में 100 बेड की क्षमता कर दी गई है। स्वास्थ्य विभाग में  रिक्त पदों को भरने के लिए प्रदेश सरकार ने प्रक्रिया शुरू की है। उन्होंने बताया कि 25 करोड़ रुपए की लागत से पेयजल योजना स्कीम बनाई जा रही है जिससे इस क्षेत्र के छूटे हुए घरों को लाभ मिलेगा। इसके लिए विभाग कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि सिंचाई की योजनाओं के लिए भी कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जायसी मंदिर के पास खेल का  मैदान बनाया जाएगा। इसके अलावा जिम के लिए दो लाख रुपए देने की घोषणा की। 

उन्होंने कहा कि पिछले तीन साल के कार्यकाल के दौरान शिमला ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में 375 से 400 करोड़ रुपए विभिन्न विकास कार्यों पर खर्च किए गए है। उन्होंने कहा कि मंगला माता से भीगड़ी सड़क की सारी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद बजट जारी किए जाएगा। उन्होंने कहा कि बठमाना पंचायत के लिए अभी तक 20 लाख रुपए विकास कार्यों के लिए जारी किया चुका है।

पुलिस को दें नशे की सूचना: उन्होंने कहा कि चिट्टे के कारण युवाओं का भविष्य अधर में लटक गया है। अगर आपके आसपास लोग नशे के कारोबार से जुड़े है तो उनकी सूचना पुलिस को दें। विकास कार्य तभी लाभ देंगें जब हमारी युवा पीढ़ी सुरक्षित रहेगी।

पूर्व विधायक सोहन लाल ने कहा कि महिला मंडल भवन से विभिन्न कार्यों के लिए मदद मिलेगी। महिला मंडल का गांव के लिए बड़ा योगदान है।

लोगों ने रखी समस्याएं: स्थानीय व्यक्ति ने मांग उठाते हुए कहा कि धामी में कृषि विभाग का सेल ऑफिस बंद पड़ा है। इस वजह से किसानों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इस पर कैबिनेट मंत्री ने आश्वासन दिया कि इस समस्या पर सकारात्मक कदम उठाया जाएगा।

ललित कुमार ने इस मौके पर कहा कि थारट सड़क का काम और डंगे का कार्य पूरा नहीं हुआ है। मंत्री ने आश्वासन दिया कि सभी मांगों का समाधान किया जाएगा। मंत्री ने कहा कि धामी में नया सामुदायिक भवन बनाया जाएगा। इसके लिए विभाग भूमि की तलाश कर रहा है।

उपायुक्त किन्नौर ने की वाइब्रेंट विलेज ‌ योजना के तहत आयोजित बैठक की अध्यक्षता

रिकांगपिओ: उपायुक्त किन्नौर डॉ अमित कुमार शर्मा ने आज यहां ‌ उपायुक्त कार्यालय सभागार में वाइब्रेंट विलेज योजना की बैठक का आयोजन किया गया।

बैठक में ‌जिलाधीश किन्नौर ने जनजातीय जिला किन्नौर के सीमावर्ती व दूर-दराज पंचायतों में चल रहे विभिन्न विकासात्मक कार्यों की अद्यतन स्थिति पर चर्चा की गई, जिनमें ‌ पूह उपमंडल के गांव चूलिंग में ‌ संपर्क मार्ग के निर्माण कार्य, सुमरा पंचायत के प्रवेश द्वार, नेसंग पंचायत में पुल निर्माण, सरहद वन वाटिकाएं, छितकुल में बस स्टैंड व इको-पार्क और लियो गांव में मेडिटेशन केंद्र के निर्माण कार्य की स्थिति पर संबंधित अधिकारियों से विचार-विमर्श किया गया।

इसके अलावा अन्य ‌विकास कार्यों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई और उपायुक्त ने ‌योजना के तहत चल रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर विशेष बल देने के निर्देश दिए ‌ ताकि सीमावर्ती क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिल सके और ग्रामीण अधोसंरचना विकास के द्वारा स्थानीय लोगों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो सके।

‌ डॉ अमित कुमार शर्मा ने बताया कि ‌ मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ‌ के प्रयासों से ‌ केंद्र सरकार ने शिपकी ला ‌से चीन के ‌ बीच व्यापार ‌ करने की स्वीकृति प्रदान की जिससे स्थानीय लोगों को लाभ मिलेगा।

बैठक में आदेशक होम गार्ड ‌ प्रथम वाहिनी सुरेश कुमार, परियोजना अधिकारी आई.टी.डी.पी घनश्याम दास शर्मा, भारतीय तिब्बत सीमा पुलिस के उप-आदेशक कुलिस आनंद, मुख्य चिकित्सा अधिकारी किन्नौर डॉ. राकेश नेगी, महा प्रबंधक जिला उद्योग केंद्र गुरु लाल नेगी, खंड विकास अधिकारी कल्पा हिमांशी शर्मा, अधिशाषी अभियंत जल शक्ति अभिषेक शर्मा, अधिशाषी अभियंता लोक निर्माण ललित जरयाल सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे।

इग्नू में प्रवेश  की अंतिम तिथि 15 नवम्बर तक बढ़ी

उचित मूल्य की दुकानों के लिए 3 मार्च तक करें आवेदन

सोलन: ज़िला नियंत्रक खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले सोलन श्रवण कुमार हिमालयन ने कहा कि नगर निगम सोलन के वार्ड नम्बर 16 व विकास खण्ड नालागढ़ की ग्राम पंचायत कोइडी के बैहली गांव में नई उचित मूल्य की दुकान खोलने के लिए इच्छुक व्यक्ति व संस्थाएं ऑनलाईन माध्यम से वेबसाईट emerginghimachal.hp.gov.in पर आवेदन कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि आवेदन की अंतिम तिथि 03 मार्च, 2026 है तथा ऑनलाईन माध्यम से अपलोड आवेदन ही मान्य होंगे। उन्होंने कहा कि आवेदन के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता मैट्रिक व व्यक्तिगत आवेदनकर्ता की आयु 18 से 45 वर्ष के मध्य होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वांछित दस्तावेज़ों के बिना आवेदन मान्य नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि उचित मूल्य की दुकान खोलने की अधिक जानकारी लेने के लिए वांछित औपचारिकताओं एवं दस्तावेज़ों के सम्बन्ध में इच्छुक व्यक्ति व संस्थान ज़िला नियंत्रक, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले सोलन के कार्यालय में किसी भी कार्यालय दिवस में कार्यालय आकर या कार्यालय दूरभाष नम्बर 01792-224114 पर सम्पर्क कर सकते हैं।