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“हिम शिमला लाइव परिवार” की ओर से समस्त देशवासियों को होली उत्सव हार्दिक शुभकामनाएं

‘आवाज-ए-हमीरपुर’ प्रतियोगिता में युवा गायकों को मिलेगा मंच

विजेता को 50,000 और उपविजेता को 31000 तथा तृतीय पुरस्कार में मिलेंगे 21000 रुपये

जिला हमीरपुर के रहने वाले 16 से 35 वर्ष तक के गायक ले सकते हैं भाग

हमीरपुर :  सुजानपुर में पहली मार्च से 4 मार्च तक आयोजित किए जा रहे राष्ट्र स्तरीय होली उत्सव में इस बार जिला हमीरपुर के प्रतिभाशाली युवा गायकों के लिए ‘आवाज-ए-हमीरपुर’ प्रतियोगिता भी आयोजित की जाएगी।

इसके विजेता गायक को 50 हजार रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाएगा। उपविजेता को 31 हजार रुपये और तृतीय स्थान पर रहने वाले गायक को 21 हजार रुपये का पुरस्कार मिलेगा। एडीसी एवं राष्ट्र स्तरीय होली उत्सव की सांस्कृतिक समिति के अध्यक्ष अभिषेक गर्ग ने बताया कि इस प्रतियोगिता में 16 से 35 वर्ष तक के गायक भाग ले सकते हैं।

उन्होंने बताया कि होली उत्सव की सांस्कृतिक संध्याओं के लिए लोक कलाकारों के चयन हेतु 23 से 25 फरवरी तक हमीरपुर के बचत भवन में ऑडिशन लिए जा रहे हैं। 23-24 को जिला हमीरपुर के लोक कलाकारों के ऑडिशन लिए जाएंगे और 25 फरवरी को अन्य जिलों के लोक कलाकारों के ऑडिशन होंगे। इन्हीं ऑडिशन्स के साथ ही ‘आवाज-ए-हमीरपुर’ प्रतियोगिता की स्क्रीनिंग भी होगी। प्रतियोगिता के संबंध में अधिक जानकारी के लिए जिला भाषा अधिकारी के मोबाइल नंबर 82196-24178 पर संपर्क किया जा सकता है।

एडीसी ने जिला के प्रतिभाशाली गायकों से इस प्रतियोगिता में भाग लेने की अपील की है।

शिमला: कुसुम्पटी बाजार सड़क 19 से 22 अगस्त तक यातायात के लिए बंद 

बिलासपुर: जड्डू से बड़गांव गलू सड़क मार्ग 31 मार्च तक यातायात के लिए बंद

बिलासपुर: जिला दण्डाधिकारी एवं उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार ने मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 115 के अंतर्गत आदेश जारी करते हुए बताया कि लोक निर्माण विभाग मण्डल झण्डुता के अंतर्गत जड्डू से बड़गांव गलू सड़क मार्ग आवश्यक मरम्मत कार्य के चलते सभी प्रकार के वाहनों की आवाजाही के लिए आगामी 31 मार्च तक बंद रहेगा।

उन्होंने जारी आदेश में लोगों से जड्डू से बड़गांव गलू रुट के वाहनों को आगामी 31 मार्च तक बाया डोगा-ठठल-जंगल सड़क तथा जय श्री देवी का मोड से कोसरियां सडक मार्ग का उपयोग करने को कहा है।

उन्होंने जारी आदेश में बताया कि इस सड़क मार्ग की मरम्मत कार्य के दौरान केवल एम्बुलेंस, स्कूल बसों, वीआईपी वाहनों तथा अन्य आपातकालीन सेवा वाहनों की आवाजाही की अनुमति रहेगी।

22 फरवरी को बिलासपुर व आसपास के क्षेत्रों में बिजली रहेगी बंद

बिलासपुर: अधिशाषी अभियंता विद्युत उप मण्डल-3 ई. दिनेश कौण्डल ने जानकारी देते हुए बताया कि 22 फरवरी को 33/11 केवी विद्युत उपकेंद्र जबली में 33 केवी यार्ड और 11 केवी यार्ड का जरुरी रख-रखाव व आवश्यक मरम्मत के चलते बिलासपुर में विद्युत आपूर्ति पूर्ण रुप से बाधित रहेगी।

उन्होंने बताया कि 22 फरवरी को पूरे बिलासपुर शहर, नम्होल, एम्स अस्पताल, जुखाला व ऋषिकेश तथा इसके आसपास के क्षेत्रों में प्रातः 9 बजे से सायं 5 बजे तक विद्युत आपूर्ति पूर्ण रुप से बाधित रहेगी। उन्होंने बताया कि शटडाउन मौसम पर निर्भर रहेगा। उन्होंने लोगों से सहयोग की अपील की है।

परीक्षाओं के मद्देनज़र डीजे-लाउडस्पीकर पर नकेल

डीसी जतिन लाल का नियमों के पालन पर जोर, बोले.. उल्लंघन पर होगी कार्रवाई*

ऊना: ऊना जिले में बच्चों की वार्षिक परीक्षाओं के मद्देनज़र जिला प्रशासन ने ध्वनि नियमों के पालन को लेकर सख्त रुख अपनाया है। विद्यार्थियों को शांत एवं अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उपायुक्त ऊना जतिन लाल ने ध्वनि विस्तारक यंत्रों के उपयोग पर निर्धारित नियमों के कड़ाई से पालन के निर्देश जारी किए हैं।

उपायुक्त ने कहा कि परीक्षा अवधि को ध्यान में रखते हुए सभी प्रकार के लाउडस्पीकर, डीजे एवं अन्य ध्वनि विस्तारक उपकरणों का उपयोग तय समय-सीमा और निर्धारित डेसिबल मानकों के अनुरूप ही किया जाए।

*रात 10 बजे के बाद बिना अनुमति लाउडस्पीकर प्रतिबंधित*

उन्होंने कहा कि ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियम, 2000 के तहत रात्रि 10 बजे से प्रातः 6 बजे तक लाउडस्पीकर का उपयोग बिना पूर्व अनुमति प्रतिबंधित है। आवासीय क्षेत्रों में दिन के समय अधिकतम 55 डेसिबल तथा रात्रि में 45 डेसिबल तक ही ध्वनि की अनुमति है। वाणिज्यिक क्षेत्रों में यह सीमा क्रमशः 65 और 55 डेसिबल निर्धारित है, जबकि अस्पताल, शिक्षण संस्थान एवं न्यायालय के 100 मीटर के दायरे को साइलेंस ज़ोन घोषित किया गया है, जहां दिन में 50 तथा रात्रि में 40 डेसिबल की सीमा लागू होती है।

*शादी-ब्याह व धार्मिक आयोजनों में भी नियमों का पालन जरूरी*

उपायुक्त ने विशेष रूप से कहा कि शादी-ब्याह, धार्मिक एवं सामाजिक आयोजन, जुलूस, जागरण, समारोह तथा धार्मिक स्थलों पर उपयोग किए जाने वाले ध्वनि विस्तारक यंत्र भी निर्धारित नियमों एवं समय-सीमा के अंतर्गत ही संचालित किए जाएं। परीक्षा अवधि के दौरान अनावश्यक तेज ध्वनि विद्यार्थियों की पढ़ाई को प्रभावित कर सकती है, इसलिए सभी आयोजकों एवं संस्थानों से सहयोग अपेक्षित है।

*उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई के निर्देश*

उन्होंने जिला पुलिस को निर्देश दिए हैं कि ध्वनि नियमों के उल्लंघन की स्थिति में नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही संबंधित अधिकारियों को भी नियमित निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

उपायुक्त ने सभी धार्मिक, सामाजिक एवं सार्वजनिक संस्थानों तथा आम नागरिकों से आग्रह किया है कि वे विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए ध्वनि नियमों के प्रभावी अनुपालन में प्रशासन का सहयोग करें।

उन्होंने कहा कि यह हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है कि परीक्षा अवधि के दौरान जिले में शांत, अनुशासित एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखें, ताकि विद्यार्थी अपनी परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन कर सकें।

भारी वाहनों के लिए सड़क बन्द करने के सम्बन्ध में आदेश

वाहन पासिंग व ड्राइविंग टेस्ट प्रक्रिया की नई तिथियां निर्धारित

23 की बजाए अब 25 और 26 फ़रवरी को होंगे वाहन पासिंग व ड्राइविंग टेस्ट 

ऊना: क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (आरटीओ) ऊना अशोक कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि आरटीओ ऊना में 23 फ़रवरी को निर्धारित वाहनों की पासिंग/फिटनेस जांच एवं ड्राइविंग टेस्ट प्रशासनिक कारणों के चलते स्थगित कर दिए गए हैं।

उन्होंने बताया कि आम जनता की सुविधा एवं कार्यों के सुचारू संचालन को ध्यान में रखते हुए इन प्रक्रियाओं के लिए नई तिथियां निर्धारित कर दी गई हैं। इसके अनुसार वाहनों की पासिंग/फिटनेस जांच 25 फ़रवरी तथा ड्राइविंग टेस्ट 26 फ़रवरी को आयोजित किए जाएँगे।

आरटीओ अशोक कुमार ने सभी संबंधित वाहन मालिकों एवं आवेदकों से अनुरोध किया है कि वे निर्धारित नई तिथियों के अनुसार अपनी उपस्थिति सुनिश्चित करें ताकि किसी प्रकार की असुविधा न हो।

कांग्रेस को देशहित से कोई सरोकार नहीं, उसे केवल अपनी राजनीतिक जमीन बचाने की चिंता – जयराम ठाकुर

शिमला :  हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष कहा कि दिल्ली में आयोजित एआई समिट के दौरान कांग्रेस द्वारा किया गया  विरोध भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा पर हमला है।  उन्होंने कहा कि कांग्रेस अब एक जिम्मेदार राजनीतिक दल की तरह नहीं बल्कि राष्ट्रविरोधी दल की तरह काम कर रही है और राहुल गांधी मंडली भारत की प्रगति से घबराकर देश की छवि खराब करने पर उतर आई है।
जयराम ठाकुर ने कहा, “आज पूरा विश्व भारत की तकनीकी क्षमता, नवाचार और नेतृत्व का सम्मान कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत वैश्विक मंच पर नई ऊंचाइयों को छू रहा है, लेकिन कांग्रेस ने एक बार फिर अपनी संकीर्ण और ओछी राजनीति का परिचय देते हुए देश के सम्मान को ठेस पहुंचाने का शर्मनाक प्रयास किया है। कांग्रेस का यह विरोध किसी सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि भारत के खिलाफ है।” 
उन्होंने कहा कि कांग्रेस की राजनीति अब पूरी तरह नकारात्मकता, भ्रम फैलाने और भारत की उपलब्धियों को बदनाम करने तक सीमित रह गई है। “राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने विपक्ष की गरिमा को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। कांग्रेस विदेशी मंचों पर भारत को कमजोर दिखाने, निवेशकों को भ्रमित करने और देश की वैश्विक साख को नुकसान पहुंचाने का सुनियोजित प्रयास कर रही है।” 
अब विकास विरोधी कांग्रेस तकनीक विरोधी और राष्ट्र विरोधी मानसिकता का प्रतीक बन चुकी है। जब-जब भारत प्रगति करता है, कांग्रेस विरोध और अवरोध की राजनीति करती है। यह लोकतंत्र नहीं, बल्कि देश की प्रगति को रोकने की साज़िश है। कांग्रेस को देशहित से कोई सरोकार नहीं, उसे केवल अपनी राजनीतिक जमीन बचाने की चिंता है।” 
जयराम ठाकुर ने कहा कि भारत आज विश्व का नेतृत्व करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और ऐसे समय में कांग्रेस का यह रवैया न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि पूरे देश का अपमान भी है।

शिमला: लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह का 2 दिवसीय प्रवास कार्यक्रम जारी

22 फरवरी को रामपुर क्योंथल और 23 फरवरी को होंगे घणाहट्टी में 

शिमला: लोक निर्माण एवं शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह 22 और 23 फरवरी 2026 को शिमला ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र के प्रवास पर रहेंगे। यह जानकारी एक सरकारी प्रवक्ता ने दी। 

उन्होंने बताया कि विक्रमादित्य सिंह 22 फरवरी को प्रातः 11:30 पर ग्राम पंचायत रामपुर क्योंथल के धनुल में आयोजित होने वाले मंत्री आपके द्वार कार्यक्रम में शिरकत करेंगे। 

लोक निर्माण मंत्री 23 फरवरी को प्रातः 11:30 बजे घणाहट्टी पहुंचेंगे और कुफरीधार में लोक निर्माण विभाग के विभिन्न विकासात्मक कार्यों का शिलान्यास करेंगे। इसके पश्चात वह हेल्पिंग हैंड वेलफेयर द्वारा आयोजित उद्यमिता विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन समारोह में बतौर मुख्यातिथि शिरकत करेंगे और सिलाई मशीनें वितरित करेंगे। 

सोलन: नौणी यूनिवर्सिटी में प्राकृतिक खेती आधारित बीज उत्पादन पर कार्यशाला

सोलन: डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी में गुरुवार को ‘सतत एवं लचीली कृषि हेतु प्राकृतिक खेती आधारित बीज उत्पादन’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में चंबा, मंडी, सिरमौर, हमीरपुर, शिमला और सोलन जिलों से किसान उत्पादक कंपनियों (एफपीसी) के लगभग 200 किसानों ने भाग लिया। इसके अतिरिक्त बीज संरक्षण से जुड़े गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधि, आईसीएआर-एनबीपीजीआर शिमला तथा विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक भी उपस्थित रहे।

प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. राजेश्वर सिंह चंदेल ने कहा कि बीज कृषि की आधारशिला हैं और दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने की कुंजी भी। प्राकृतिक खेती में बीज स्वायत्तता के महत्व पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती के बीजों का स्वामित्व और नियंत्रण किसानों के पास ही रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्थानीय बीज हमारे घरों और समुदायों से धीरे-धीरे लुप्त होते जा रहे हैं। हमें उन्हें संजोने, साझा करने और संरक्षित करने की परंपरा को पुनर्जीवित करना होगा।

उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश सौभाग्यशाली है कि यहां अभी भी ऐसे किसान हैं जिनके पास देशी बीजों का पारंपरिक ज्ञान उपलब्ध है। इस ज्ञान का समुचित उपयोग कर देशी बीज किस्मों का व्यवस्थित संरक्षण भविष्य की पीढ़ियों के लिए आवश्यक है। बीज उत्पादन को एक संभावनापूर्ण आजीविका अवसर बताते हुए उन्होंने किसान उत्पादक कंपनियों से सामूहिक ज्ञान को सामूहिक क्रियान्वयन में बदलने तथा किसान-नेतृत्व वाले बीज उद्यम विकसित करने का आह्वान किया।

एलायंस ऑफ बायोवर्सिटी इंटरनेशनल एवं सीआईएटी के कंट्री प्रतिनिधि डॉ. जे.सी. राणा ने बीज उत्पादन में आत्मनिर्भरता को सतत कृषि का आधार बताया। हिमाचल प्रदेश की प्राकृतिक खेती पहल की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि बीज प्रणालियों में आत्मनिर्भरता के लिए सार्वजनिक संस्थानों, निजी हितधारकों और किसान समुदायों के बीच मजबूत सहयोग आवश्यक है। उन्होंने गुणवत्ता मानकों और अनुशासन बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया ताकि व्यापक बाजारों में प्रतिस्पर्धा की जा सके। उन्होंने स्थानीय खाद्य उत्पादों की बेहतर पैकेजिंग और मूल्य संवर्धन पर भी जोर दिया।

डॉ. राणा ने हिमालयन एग्रोइकोलॉजी इनिशिएटिव (एच.ए.आई.) के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि इसका उद्देश्य हिमालयी क्षेत्र में खाद्य प्रणालियों की लचीलापन क्षमता को सुदृढ़ करना है। उन्होंने कहा कि एच.ए.आई रोडमैप उच्च-स्तरीय नीति निर्माताओं और प्रमुख हितधारकों को दिशा प्रदान करेगा तथा स्थानीय समुदायों को खाद्य नीति प्रक्रियाओं में सार्थक भागीदारी का अवसर देगा। उन्होंने इसके सात रणनीतिक स्तंभों की जानकारी दी, जो किसान-केंद्रित, जलवायु-लचीले और पारिस्थितिकीय रूप से सुदृढ़ बदलावों पर आधारित हैं।

पद्मश्री से सम्मानित प्रगतिशील किसान नेक राम शर्मा ने स्थानीय कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप बीजों के संरक्षण के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि कई कृषि समस्याएं पर्यावरणीय अनुकूलता की अनदेखी के कारण उत्पन्न होती हैं, इसलिए क्षेत्र-विशिष्ट देशी किस्मों को बढ़ावा देना आवश्यक है।

प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. इंदर देव ने बताया कि यह पहल विश्वविद्यालय में पूर्व में संचालित एग्रोइकोलॉजिकल क्रॉप प्रोटेक्शन टुवर्ड्स इंटरनेशनल को-इनोवेशन डायनेमिक्स एंड एविडेंस ऑफ सस्टेनेबिलिटी परियोजना के अंतर्गत किए गए प्रयासों पर आधारित है। कार्यशाला समन्वयक डॉ. सुधीर वर्मा ने बताया कि एलायंस द्वारा वित्तपोषित इस पहल का मुख्य उद्देश्य हिमाचल प्रदेश में एफपीसी के माध्यम से प्राकृतिक खेती आधारित बीज उत्पादन को बढ़ावा देना है। परियोजना का फोकस देशी बीज विविधता का संरक्षण, बाहरी इनपुट पर निर्भरता कम करना तथा किसान-नेतृत्व वाली बीज उत्पादन एवं वितरण प्रणाली विकसित करना है।

क्रियान्वयन रणनीति के अंतर्गत एफपीसी के माध्यम से विकेंद्रीकृत शासन को प्रोत्साहित किया जा रहा है। चयनित एफपीसी में सामुदायिक प्रबंधित बीज बैंक स्थापित किए जा रहे हैं, जिन्हें कम लागत और जलवायु-लचीले भंडारण ढांचे से सुसज्जित किया जाएगा। मिट्टी के घड़ों, कोठारों में बीज भंडारण जैसी पारंपरिक पद्धतियों को बेहतर वेंटिलेशन और सुव्यवस्थित लेबलिंग के साथ पुनर्जीवित किया जाएगा। परियोजना में देशी एवं लुप्तप्राय किस्मों का दस्तावेजीकरण, बीजामृत जैसे प्राकृतिक बीज उपचारों पर प्रशिक्षण, प्रदर्शन प्लॉट और विविधता ब्लॉक की स्थापना तथा बीज विनिमय कार्यक्रम भी शामिल हैं।

कार्यशाला के दौरान एग्रोइकोलॉजी और सामुदायिक बीज प्रणालियों पर विभिन्न विशेषज्ञ सत्र आयोजित किए गए। डॉ. जे.सी. राणा ने एचएआई और इसके रोडमैप पर व्याख्यान दिया। ग्राम दिशा ट्रस्ट के आशीष गुप्ता ने सामुदायिक प्रबंधित बीज प्रणालियों पर चर्चा की, जबकि पहाड़ ट्रस्ट के अनूप कुमार ने किसान-केंद्रित प्राकृतिक खेती मॉडलों के अनुभव साझा किए। डॉ. सुभाष वर्मा ने प्राकृतिक खेती के सिद्धांतों तथा बीज जीव विज्ञान एवं बलवत्ता पर उनके प्रभाव को स्पष्ट किया। एफपीसी द्वारा संरक्षित देशी बीज किस्मों की प्रदर्शनी भी लगाई गई तथा बीज संरक्षण में सक्रिय प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया गया।

आर्थिक दृष्टि से यह पहल जलवायु-लचीले बीजों की स्थानीय उपलब्धता सुनिश्चित करेगी, महंगे संकर बीजों पर निर्भरता कम करेगी और देशी फसलों के माध्यम से किसानों की आय में वृद्धि करेगी। पर्यावरणीय रूप से यह कृषि जैव-विविधता को पुनर्जीवित कर रासायनिक उपयोग और कार्बन फुटप्रिंट को कम करेगी।

“फास्टैग के नाम पर जनता पर नया टैक्स बोझ — पर्यटन विरोधी और महंगाई बढ़ाने वाली नीति” : कर्ण नंदा

शिमला: भाजपा प्रदेश मीडिया संयोजक कर्ण नंदा ने प्रदेश सरकार द्वारा 1 अप्रैल 2026 से लागू किए जा रहे नए प्रवेश शुल्क एवं फास्टैग आधारित वसूली तंत्र पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह निर्णय हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था, पर्यटन और आम जनता पर सीधा आर्थिक प्रहार है। उन्होंने कहा कि दूसरे राज्यों के निजी वाहनों के प्रवेश शुल्क को ₹70 से बढ़ाकर ₹130 करना और छोटे मालवाहक वाहनों पर ₹170 तक शुल्क लगाना स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि सरकार राजस्व बढ़ाने के लिए जनता पर आर्थिक बोझ डालने की नीति पर चल रही है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश के अपने मालवाहक वाहनों को भी अब छूट समाप्त कर शुल्क के दायरे में लाना स्थानीय व्यापार और परिवहन क्षेत्र के लिए घातक है। बड़े मालवाहक वाहनों, निर्माण मशीनरी, मिनी बसों और व्यावसायिक वाहनों पर शुल्क में भारी वृद्धि से वस्तुओं की लागत बढ़ेगी और अंततः इसका सीधा असर महंगाई के रूप में आम नागरिक को झेलना पड़ेगा।

कर्ण नंदा ने कहा कि सरकार “ऊंट के मुंह में जीरा” जैसे विकास कार्य दिखाकर जनता से भारी वसूली कर रही है। पर्यटन आधारित प्रदेश में प्रवेश शुल्क बढ़ाना ऐसे है जैसे “अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मारना।” उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आत्मनिर्भर हिमाचल का नारा तो देती है, लेकिन नीतियाँ ऐसी बना रही है जो उद्योग, पर्यटन और परिवहन को कमजोर करती हैं।

उन्होंने कहा कि 55 टोल बैरियरों से ₹185 करोड़ राजस्व लक्ष्य तय करना दर्शाता है कि सरकार का उद्देश्य सुविधा नहीं बल्कि अधिकतम वसूली है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह जनविरोधी निर्णय वापस नहीं लिया गया तो इसका असर प्रदेश की अर्थव्यवस्था, पर्यटन आगमन और रोजगार पर गंभीर रूप से पड़ेगा।

अंत में कर्ण नंदा ने कहा कि भाजपा जनता के हितों की आवाज उठाती रहेगी और प्रदेश सरकार को याद रखना चाहिए कि “जनता सब देख रही है” — जनविरोधी फैसलों का जवाब जनता समय आने पर जरूर देती है।

वंचित वर्गों का सामाजिक उत्थान प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता – मुख्यमंत्री

‘इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना’ के विस्तार से अब विधवा महिलाओं की बेटियों की उच्च शिक्षा का सपना होगा साकार

शिमला: राज्य में शिक्षा की सार्वभौमिक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश सरकार ने प्रभावी कदम उठाए हैं। सरकार ने ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के तहत राज्य में अनेक निर्णायक कदम उठाए हैं। इस क्रम में इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना को विस्तार प्रदान किया गया है जिससे अब विधवा महिलाओं की बेटियों को प्रदेश में और प्रदेश से बाहर उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इस योजना का उद्देश्य विधवा, निराश्रित या तलाकशुदा महिलाओं तथा दिव्यांग अभिभावकों के बच्चों को शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्र में समग्र सहयोग प्रदान करना है।
सरकार ने योजना में संशोधन को स्वीकृति प्रदान की है, जिसके तहत पात्र विधवाओं की बेटियों को 27 वर्ष की आयु तक योजना का लाभ दिया जाएगा। संशोधित प्रावधानों के अनुसार, राज्य से बाहर स्थित सरकारी संस्थानों में व्यावसायिक पाठयक्रम की शिक्षा ग्रहण कर रही छात्राओं को किराया या पीजी आवास शुल्क के लिए अधिकतम 10 महीनों तक प्रति माह 3,000 रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी। सरकारी छात्रावास की सुविधा उपलब्ध न होने की स्थिति में वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
योजना के अंतर्गत इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी, व्यवसाय एवं प्रबंधन, चिकित्सा एवं संबद्ध स्वास्थ्य विज्ञान, लॉ, कंप्यूटर एपलीकेशन एंड आईटी सर्टिफिकेशन, एजुकेशन एंड हयूमेनिटीज़, राज्य व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद (एससीवीटी) द्वारा संचालित विभिन्न पाठयक्रम, शिल्पकार प्रशिक्षण योजना के पाठयक्रम तथा सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी द्वारा संचालित कार्यक्रम शामिल हैं।
वर्तमान में योजना के अंतर्गत पात्र महिलाओं और दिव्यांग अभिभावकों के बच्चों को 18 वर्ष की आयु तक मासिक वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। इसके अतिरिक्त योजना के तहत राज्य के सरकारी संस्थानों में अध्ययनरत लाभार्थियों की टयूशन फीस, छात्रावास शुल्क और अन्य संबंधित शैक्षणिक व्यय भी वहन किए जा रहे हैं। वर्तमान में 18दृ27 वर्ष आयु वर्ग की 504 छात्राएं इस योजना का लाभ उठा रही हैं। एक अनुमान के अनुसार इनमें से लगभग 20 प्रतिशत छात्राएं विस्तारित प्रावधानों के अंतर्गत व्यावसायिक पाठयक्रमों का चयन कर सकती हैं, जिसके लिए लगभग 1 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वार्षिक बजट प्रावधान किया जाएगा।
योजना को विस्तारित करने से लाभार्थियों की संख्या में वृद्धि होने का अनुमान है। इस वित्त वर्ष के लिए राज्य सरकार ने इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना के तहत 31.01 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जिसमें से 3 फरवरी, 2026 तक 22.96 करोड़ रुपये व्यय किए जा चुके हैं।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने समाज के वंचित वर्गों के उत्थान के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा कि योजना का उद्देश्य लाभार्थियों को आत्मनिर्भर बनाना है, ताकि वे बिना किसी आर्थिक बाधा के अपनी शिक्षा पूरी कर सकें। उन्होंने कहा कि सरकार सभी बच्चों तक शिक्षा के समान अवसर उपलब्ध करवाने के लिए प्रमुखता से कार्य कर रही है। सरकार की इस पहल का उद्देश्य सामाजिक व आर्थिक रूप से वंचित वर्गों के बच्चों को वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाना है ताकि वे आर्थिक कठिनाइयों के बिना अपनी शिक्षा निर्बाध जारी रख सकंे।
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