ब्लॉग

शिमला: राज्यसभा उम्मीदवार अनुराग शर्मा ने की CM सुक्खू से मुलाकात

शिमला: कांग्रेस के राज्यसभा उम्मीदवार अनुराग शर्मा ने शुक्रवार को ओक ओवर में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से मुलाकात की।

धारा 118 के बाद अब हिमाचल के होटलों से हिमाचल ऑन सेल मुहिम आगे बढ़ा रही सुक्खू सरकार – जयराम ठाकुर

शिमला: ​हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम के आठ प्रमुख होटलों को आउटसोर्सिंग के माध्यम से निजी ऑपरेटरों को सौंपने के आधिकारिक पत्र के सार्वजनिक होने के बाद प्रदेश की सियासत में उबाल आ गया है, जिसे लेकर पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सुक्खू सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए इसे ‘हिमाचल ऑन सेल’ की नीति करार दिया है। जयराम ठाकुर ने कड़े शब्दों में आरोप लगाया है कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार राज्य के बहुमूल्य संसाधनों की खुली लूट कर रही है और जनसंपदा को अपने खास ‘मित्रों’ की झोली भरने के लिए निजी हाथों में परोस रही है। देवभूमि हिमाचल प्रदेश की भूमि, पहचान और  संसाधनों की रक्षा के लिए बनाए गए हिमाचल प्रदेश भू सुधार एवं किराएदारी अधिनियम 1972 की धारा 118 में छूट दिलाने के नाम पर सरकार पहले से हिमाचल ऑन सेल की मुहिम चला रही है। उसमें अब प्रदेश के होटल भी शामिल कर लिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि विपक्ष पहले ही इस बात की आशंका जता चुका था कि सरकार राज्य के सुचारू रूप से चल रहे और लाभप्रद होटलों को जानबूझकर बर्बाद कर उन्हें प्राइवेट सेक्टर को सौंपने की साजिश रच रही है, लेकिन उस समय मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सार्वजनिक रूप से दावा किया था कि वह ऐसा कभी नहीं होने देंगे। नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री की कथनी और करनी पर सवाल उठाते हुए कहा कि पर्यटन विभाग के पत्र संख्या OP/O&M/TDC/26 (ओपी/ओ एंड एम/ टीडीसी/ 26) से यह स्पष्ट हो गया है कि मुख्यमंत्री ने जनता से झूठ बोला और अब आधिकारिक तौर पर प्रदेश की संपदा को बेचा जा रहा है। 
उन्होंने दावा किया है कि विभाग द्वारा जारी सूची में बिलासपुर का होटल लेक-व्यू, चिंडी का होटल ममलेश्वर, फागू का होटल एप्पल ब्लॉसम, रोहड़ू का होटल चांशल, कुल्लू का होटल सर्वरी, कसौली का होटल ओल्ड रॉसकॉमन, परवाणू का होटल शिवालिक और खड़ापत्थर का होटल गिरिगंगा शामिल हैं, जिन्हें ऑपरेशन और मेंटेनेंस के आधार पर निजी कंपनियों को आउटसोर्स करने की मंजूरी मुख्यमंत्री द्वारा दे दी गई है। 
जयराम ठाकुर ने तंज कसते हुए कहा कि व्यवस्था परिवर्तन का नारा देने वाली सरकार अब ‘हिमाचल को बेचने’ की राह पर निकल पड़ी है और इन होटलों के निजीकरण से न केवल राज्य के राजस्व को स्थायी नुकसान होगा, बल्कि सरकारी क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों का भविष्य भी अधर में लटक जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार घाटे का बहाना बनाकर राज्य की प्राइम लोकेशन पर स्थित इन संपत्तियों को अपने चहेतों को लाभ पहुँचाने के लिए कौड़ियों के भाव लीज पर दे रही है, जो कि हिमाचल की जनता के साथ बड़ा विश्वासघात है। 
विपक्ष ने सरकार को चेतावनी दी है कि वे हिमाचल की अस्मिता और संसाधनों के साथ इस तरह का खिलवाड़ नहीं होने देंगे और सदन से लेकर सड़क तक इस ‘लूट की नीति’ का पुरजोर विरोध किया जाएगा, क्योंकि यह केवल पर्यटन निगम का निजीकरण नहीं बल्कि हिमाचल की आर्थिक संप्रभुता को गिरवी रखने जैसा कदम है।

2026-27 से हिमाचल में एनईपी-2020 के अनुरूप स्नातक पाठयक्रम होंगे शुरू; जल्द भरे जाएंगे 389 शिक्षकों के पद – शिक्षा मंत्री

शिक्षा मंत्री ने एनईपी-2020 पर राज्य स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक की अध्यक्षता की
शिमला: शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने आज यहां राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 के कार्यान्वयन के लिए गठित राज्य स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक की अध्यक्षता की और उच्च शिक्षा को सशक्त बनाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों और शिक्षाविदों को हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला और सरदार पटेल विश्वविद्यालय, मंडी से संबद्ध राजकीय महाविद्यालयों में एनईपी-2020 को प्रभावी ढंग से लागू करने को कहा।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था को एनईपी-2020 के तहत बनाए गए राष्ट्रीय शैक्षणिक ढांचे के अनुरूप बनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि स्नातकोत्तर स्तर पर सेमेस्टर प्रणाली पहले ही सफलतापूर्वक लागू की जा चुकी है और अब इसे स्नातक स्तर पर लागू करने से छात्रों को अधिक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर व्यवस्था उपलब्ध होगी।
रोहित ठाकुर ने विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों को तकनीकी मूल्यांकन, स्पॉट मूल्यांकन और मजबूत आंतरिक मूल्यांकन प्रणाली अपनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन व्यवस्थाओं के माध्यम से विश्वविद्यालय 30 दिनों के भीतर परीक्षा परिणाम घोषित कर सकेंगे, जिससे परिणामों की घोषणा में अनावश्यक विलंब नहीं होगा और पारदर्शिता बढ़ेगी।
उन्होंने 2026-27 शैक्षणिक सत्र से एनईपी-2020 के अनुरूप नए पाठ्यक्रम शुरू करने के निर्देश दिए। इसमें तीन वर्ष का स्नातक कार्यक्रम, चार वर्ष का ऑनर्स/ऑनर्स विद रिसर्च कार्यक्रम और पांच वर्ष का एकीकृत स्नातक और स्नातकोत्तर कार्यक्रम शामिल होंगे। चार वर्ष का स्नातक कार्यक्रम अधिक छात्र संख्या वाले कॉलेजों में शुरू किया जाएगा।
उन्होंने लर्निंग आउटकम आधारित पाठ्यक्रम (एलओसीएफ) अपनाने तथा व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास, इंटर्नशिप और अप्रेंटिसशिप आधारित डिग्री कार्यक्रमों को शामिल करने पर भी बल दिया, ताकि छात्रों की रोजगारोन्मुखी शिक्षा उपलब्ध हो सके।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार जल्द ही उच्च शिक्षा विभाग में शिक्षकों के 389 पद भरेगी और इस संबंध में प्रस्ताव हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग को भेज दिया गया है। उन्होंने कॉलेजों में शैक्षणिक गुणवत्ता और संस्थागत परिणाम सुधारने के लिए आंतरिक रैंकिंग प्रणाली शुरू करने के भी निर्देश दिए।
संस्थागत विकास पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार कॉलेजों को अधिक स्वायत्तता देने के लिए तैयार है, ताकि वे विभिन्न संस्थाओं के साथ समझौता ज्ञापन कर सकें और ऐसे कार्यक्रम शुरू कर सकें जो छात्रों के लिए कौशल विकास और रोजगार के अवसर सृजित करने में सहायक हों।
उन्होंने अधिकारियों को 75 से कम छात्र संख्या वाले कॉलेजों का युक्तिकरण करने के निर्देश दिए, ताकि शैक्षणिक और बुनियादी ढांचे का बेहतर उपयोग हो सके।
रोहित ठाकुर ने कहा कि विश्वविद्यालय शिक्षा के सर्वोच्च मंदिर हैं और राज्य सरकार छात्रों को गुणवत्तापूर्ण तथा कौशल आधारित शिक्षा देने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश शिक्षा के क्षेत्र में कई उपलब्धियां हासिल कर चुका है और उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) के मामले में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है।
उन्होंने कहा कि यदि एनईपी के तहत सेमेस्टर प्रणाली और आंतरिक मूल्यांकन को तुरंत पूरी तरह लागू करना संभव न हो, तो प्रारंभिक चरण में कम से कम 50 प्रतिशत तक इसे लागू करने का प्रयास किया जाए और धीरे-धीरे इसे पूर्ण रूप से लागू किया जाए।
इस अवसर पर सचिव राकेश कंवर ने कहा कि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की सभी मांगों पर सहानुभूति विचार किया जाएगा। शिक्षा के क्षेत्र में आने वाली किसी भी समस्या के समाधान के लिए सकारात्मक कदम उठाए जाएंगे।
उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत के. शर्मा ने राज्य में उच्च शिक्षा की वर्तमान स्थिति और विभाग द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने एनईपी-2020 के कार्यान्वयन में आने वाली चुनौतियों का भी उल्लेख किया और विश्वविद्यालयों व कॉलेजों को विभाग की ओर से पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया।
बैठक में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. महावीर सिंह और सरदार पटेल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. ललित कुमार अवस्थी ने भी अपने सुझाव साझा किए।
इस मौके पर विश्वविद्यालयों की ओर से एनईपी-2020 पर विस्तृत प्रस्तुति भी दी गई।
बैठक में दोनों विश्वविद्यालयों के डीन ऑफ स्टडीज, राज्य टास्क फोर्स के सदस्य, विशेषज्ञ, प्रोफेसर, विभिन्न कॉलेजों के प्राधानाचार्य तथा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

सोलन: नौणी विश्वविद्यालय की फूलगोभी की किस्म को राष्ट्रीय स्तर पर मिली मान्यता

सोलन: डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित फूलगोभी की एक किस्म को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त हुई है। हाल ही में ऑल इंडिया कोऑर्डिनेटेड रिसर्च प्रोजेक्ट ऑन वेजिटेबल क्रॉप्स (AICRP-VC) के सोलन केंद्र के वैज्ञानिकों ने तेलंगाना स्टेट हॉर्टिकल्चरल यूनिवर्सिटी, हैदराबाद में आयोजित AICRP-VC की 44वीं वार्षिक समूह बैठक में भाग लिया। इस बैठक में देशभर के प्रमुख सब्जी वैज्ञानिकों ने भाग लिया, जहां चल रहे अनुसंधानों की समीक्षा, विभिन्न किस्मों के परीक्षणों का मूल्यांकन तथा भारत में सब्जी उत्पादन और उसकी स्थिरता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण सिफारिशें तैयार की गईं।

विश्वविद्यालय के सोलन केंद्र का प्रतिनिधित्व प्रधान अन्वेषक डॉ. रमेश कुमार भारद्वाज और सह-प्रधान अन्वेषक डॉ. देवेंद्र कुमार मेहता, डॉ. कुलदीप सिंह ठाकुर तथा डॉ. दीपिका शांडिल ने किया।वार्षिक बैठक में किस्म विकास, बीज उत्पादन प्रौद्योगिकी, फसल संरक्षण तथा टिकाऊ सब्जी उत्पादन से संबंधित विषयों पर गहन तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। इन विचार-विमर्शों के परिणामस्वरूप सोलन केंद्र से संबंधित आठ प्रमुख सिफारिशें स्वीकृत की गईं। इनमें संभावित सब्जी किस्मों की पहचान एवं रिलीज, बीज उत्पादन तकनीकों में सुधार तथा एकीकृत पौध संरक्षण रणनीतियों को अपनाने से जुड़े सुझाव शामिल हैं।

बैठक की एक प्रमुख उपलब्धि नौणी स्थित सब्जी विज्ञान विभाग द्वारा विकसित देरी से तैयार होने वाली फूलगोभी की किस्म ‘सोलन उज्ज्वला (2022/CAULVAR-3)’ को मिली राष्ट्रीय मान्यता रही। इस किस्म को 2022 से 2024 के दौरान AICRP-VC के अंतर्गत विभिन्न स्थानों पर किए गए परीक्षणों में लगातार बेहतर प्रदर्शन के आधार पर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली किस्म घोषित किया गया।

उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर इस किस्म को जोन–I (जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड) के लिए अनुशंसित किया गया है। इस किस्म में सफेद, सघन और आकर्षक फूल विकसित होते हैं, जिनका वजन लगभग 1.0 से 1.5 किलोग्राम होता है तथा इसकी बाजार योग्य उपज क्षमता लगभग 300–350 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। यह एक ओपन-पॉलिनेटेड किस्म है, जो महंगे संकर बीजों का किफायती विकल्प प्रदान करती है। इस कारण यह विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों के लिए लाभकारी साबित होगी। इसके व्यापक उपयोग से क्षेत्र में देर से तैयार होने वाली फूलगोभी का भरोसेमंद और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन सुनिश्चित होने के साथ किसानों की आय में भी वृद्धि की संभावना है।

इस किस्म का विकास डॉ. देवेंद्र कुमार मेहता, प्रधान वैज्ञानिक, सब्जी विज्ञान विभाग द्वारा किया गया, जिसमें डॉ. रमेश कुमार भारद्वाज और डॉ. कुलदीप सिंह ठाकुर का महत्वपूर्ण योगदान रहा। इसके अलावा डॉ. संदीप कंसल और डॉ. राकेश कुमार ने क्रमशः एकीकृत रोग प्रबंधन (IDM) और एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM) परीक्षणों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

 किस्म की अनुशंसा के अतिरिक्त सोलन केंद्र को बीज संवर्धन तकनीक से संबंधित एक राष्ट्रीय सिफारिश तथा सब्जी फसलों में कीट एवं रोग प्रबंधन से संबंधित छह सिफारिशें भी प्राप्त हुईं। विश्वविद्यालय के लिए एक और गौरवपूर्ण उपलब्धि यह रही कि डॉ. रमेश कुमार भारद्वाज, प्रधान वैज्ञानिक एवं AICRP-VC के प्रधान अन्वेषक, को इंडियन सोसाइटी ऑफ वेजिटेबल साइंस (ISVS) का काउंसलर चुना गया। वहीं डॉ. कुलदीप सिंह ठाकुर, प्रधान वैज्ञानिक, को बीज उत्पादन और टिकाऊ सब्जी उत्पादन तकनीकों के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए ISVS फेलो अवार्ड–2024 से सम्मानित किया गया।

इन उपलब्धियों पर वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए कुलपति प्रो. राजेश्वर सिंह चंदेल ने कहा कि यह उपलब्धि विश्वविद्यालय के लिए गौरव का विषय है और वैज्ञानिकों के उत्कृष्ट अनुसंधान का परिणाम है। उन्होंने कहा कि ‘सोलन उज्ज्वला’ फूलगोभी किस्म का विकास और अनुशंसा किसान-केन्द्रित कृषि अनुसंधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। उन्होंने जोर दिया कि विश्वविद्यालय नवाचार, उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान और ऐसी प्रौद्योगिकियों के प्रसार के लिए निरंतर प्रयासरत है, जो किसानों की आय बढ़ाने, पोषण सुरक्षा मजबूत करने और देश में टिकाऊ बागवानी विकास को प्रोत्साहित करने में सहायक हों।

निदेशक अनुसंधान डॉ. देविना वैद्य ने भी AICRP–वेजिटेबल क्रॉप्स टीम को उनकी उल्लेखनीय उपलब्धियों के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों के समर्पित प्रयासों से विकसित नई किस्में और अनुसंधान कार्य राष्ट्रीय स्तर पर विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा को और सुदृढ़ कर रहे हैं।

दुखद घटनाओं पर राजनीति करना आसान, देश की प्रतिष्ठा बढ़ाना कठिन — विक्रमादित्य सिंह की पोस्ट दुर्भाग्यपूर्ण – त्रिलोक कपूर

शिमला: भाजपा के वरिष्ठ प्रवक्ता त्रिलोक कपूर ने कांग्रेस नेता एवं मंत्री विक्रमादित्य सिंह द्वारा सोशल मीडिया पर की गई विवादित पोस्ट पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि दुखद घटनाओं पर राजनीति करना आसान है, लेकिन देश की प्रतिष्ठा बढ़ाना बेहद कठिन कार्य है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की पोस्ट एक जिम्मेदार मंत्री के पद की गरिमा के अनुरूप नहीं है।
त्रिलोक कपूर ने कहा कि जब भी देश किसी संवेदनशील स्थिति से गुजरता है, तब पूरे देश को एकजुट होकर स्थिति का सामना करना चाहिए, लेकिन कांग्रेस के कुछ नेता ऐसे मौकों पर भी राजनीतिक तंज कसने और सस्ती लोकप्रियता हासिल करने की कोशिश करते हैं। यह न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है बल्कि एक मंत्री के पद की गरिमा के खिलाफ भी है।
उन्होंने कहा कि मंत्री जी कम से कम आपसे ऐसी पोस्ट की उम्मीद हम नहीं करते थे, शायद यह आपकी राजनीतिक मजबूरी रही होगी, लेकिन देशहित और संवेदनशील परिस्थितियों में जिम्मेदार नेताओं को संयम और परिपक्वता दिखानी चाहिए।
भाजपा वरिष्ठ प्रवक्ता ने कहा कि आज भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा और नेतृत्व क्षमता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लगातार मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि दुनिया आज भारत को एक सशक्त, सक्षम और निर्णायक नेतृत्व वाले राष्ट्र के रूप में देखती है।
त्रिलोक कपूर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने विश्व मंच पर अपनी मजबूत पहचान बनाई है और यही सच्चाई है कि “मोदी है तो मुमकिन है।”
उन्होंने कांग्रेस नेताओं को सलाह देते हुए कहा कि पहले अपनी जिम्मेदारी समझें, उसके बाद ही इस प्रकार के तंज कसें, क्योंकि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्तियों से जनता एक जिम्मेदार और गंभीर व्यवहार की अपेक्षा करती है।

मुख्यमंत्री सुक्खू बोले- मुझे 70 हजार करोड़ रुपये मिलते, तो आज हिमाचल कर्ज मुक्त होता

मण्डी: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज जिला मंडी के नाचन विधानसभा क्षेत्र के दियारगी में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए छातर में राजीव गांधी डे-बोर्डिंग स्कूल खोलने की घोषणा की। उन्होंने हिमाचल प्रदेश एससी-एसटी आयोग के अध्यक्ष लाल सिंह कौशल और कांग्रेस नेता नरेश चौहान की हर मांग को पूरा करने की घोषणा भी की। उन्होंने जनसभा में उपस्थित सभी महिला मंडलों को 51-51 हजार रुपये देने की भी घोषणा की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 16वें वित्तायोग ने हिमाचल प्रदेश के लोगों के अधिकार को राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) के रूप में मिलने वाले 10 हजार करोड़ रुपये को बंद कर दिया है। उन्होंने कहा कि पिछली भाजपा सरकार को पांच वर्षों में 54 हजार करोड़ रुपये आरडीजी और 16 हजार करोड़ रुपये जीएसटी प्रतिपूर्ति के रूप में मिले। उन्होंने कहा कि अगर पूर्व मुख्यमंत्री ने वित्तीय अनुशासन रखा होता तो 30 हजार करोड़ रुपये कर्ज कम हो सकता था। पूरे प्रदेश में एक हजार करोड़ रुपये के भवन बना दिए, जो आज खाली पड़े हैं। वर्तमान सरकार को 17 हजार करोड़ रुपये आरडीजी के रूप में मिला और अब अगले वित्त वर्ष से वह भी बंद हो गया है। फिर भी हमने 14 प्रतिशत डीए और सत्तर वर्ष से अधिक आयु वर्ग के पेंशनरों के एरियर भुगतान किया है। अगर मुझे इतना पैसा मिला होता, तो आज हिमाचल प्रदेश कर्ज मुक्त होता।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिला मंडी ने भाजपा को नौ सीटें दी, पिछली भाजपा सरकार में मुख्यमंत्री भी मंडी जिला से थे, लेकिन मेडिकल कॉलेज नेरचौक के हाल भी बदतर थे। उन्होंने कहा कि आज से हमने नेरचौक में रोबोटिक सर्जरी की शुरूआत कर दी है। उन्होंने कहा, ‘‘प्राइवेट अस्पताल में यह ऑपरेशन पांच लाख से होता है, जबकि हिमाचल प्रदेश के मेडिकल कॉलेज में यह ऑपरेशन 50 हजार रुपये में होगा। नेरचौक में कैथ लैब स्थापित करने के लिए 12 करोड़ रुपये दिए।’’
ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में कभी भी पुरानी पेंशन स्कीम बंद नहीं होगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने पहली ही कैबिनेट में ओपीएस दी और यह किसी भी राजनीतिक मंशा से नहीं किया है। उन्होंने कहा कि वह स्वयं एक सरकारी कर्मचारी के बेटे हैं और किसी भी कीमत पर पुरानी पेंशन को बंद नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों का हित सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार एरियर भी देगी और हर चुनौती का सामना करेंगे।
उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचारियों की सूची तैयार की जाएगी और जेल की सलाखों के पीछे भेजा जाएगा। चिट्टे के कारोबार में संलिप्त कोई भी व्यक्ति नहीं बचेगा, कर्मचारी बर्खास्त होंगे और चिट्टा तस्करों की संपत्ति नेस्तनाबूद कर दी जाएगी।

भाजपा को हिमाचल विरोधी करार देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में आपदा के दौरान भाजपा बार-बार विधानसभा सत्र बुलाने की मांग करते थे, जबकि पूरी कांग्रेस सरकार प्रभावित परिवारों की मदद में जुटी थी। लेकिन जब हिमाचल प्रदेश को केंद्र सरकार से विशेष राहत पैकेज दिलाने का प्रस्ताव आया तो भाजपा विधायक नारे लगाते हुए विधानसभा से बाहर चले गए। उन्होंने कहा कि मैं आम आदमी का दर्द जानता हूं। इसलिए आपदा प्रभावितों की मदद के लिए नियमों में संशोधन कर आशातीत वृद्धि की। वर्ष 2023 में पूरा घर नष्ट होने पर सात लाख रुपये दिए गए, जबकि इस वर्ष 8 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी। आरडीजी पर भी राज्य सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाई, लेकिन वहां भी हिमाचल के अधिकारों के लिए भाजपा साथ नहीं खड़ी हुई। उन्होंने कहा कि अगर हिमाचल प्रदेश को उसके अधिकार दे दिए जाएं तो हमें किसी से कुछ भी मांगने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि भाजपा आज पांच गुटों में बंटी है। उन्होंने कहा कि नाचन के विधायक विनोद कुमार को भी भाजपा के बाकी चार गुटों से खतरा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब विद्यार्थियों की सुरक्षा को देखते हुए सरकार ने आपदा में प्रभावित हॉर्टिकल्चर कॉलेज थुनाग को चैलचौक शिफ्ट करने की बात की तो नेता विपक्ष ने नाचन का विरोध किया। उन्होंने कहा ‘‘जयराम जी तब मंडी भूल गए और उन्हें सिराज याद आ गया।’’
श्री सुक्खू ने कहा कि पिछली भाजपा सरकार ने चुनावी लाभ के लिए 5000 करोड़ रुपये की रेवड़ियां बांट दी। चुनाव से छह महीने पहले पूरे प्रदेश में अनेकों संस्थान खोल दिए। स्कूलों और स्वास्थ्य संस्थानों को स्तरोन्नत किया गया, जिसके लिए स्टाफ का कोई प्रावधान नहीं किया गया। दूसरे संस्थान से स्टाफ ट्रांसफर किए गए जिससे दोनों संस्थानों के शिक्षा स्तर में गिरावट आई। उन्होंने कहा कि पिछली भाजपा सरकार के कार्यकाल में गुणात्मक शिक्षा के मामले में राज्य देश भर में 21वें स्थान पर पहुंच गया। भाजपा सरकार के कार्यकाल में शिक्षकों की भर्ती नहीं हुई। उन्होंने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार ने रिक्त पदों को भरा और आज हिमाचल प्रदेश गुणात्मक शिक्षा के मामले में 5वें स्थान पर पहुंच गया है। उन्होंने कहा ‘‘सरकार स्कूलों के बच्चे भी सीबीएसई पाठ्îक्रम पढ़ना चाहते हैं। इसीलिए हमने प्रदेश में सीबीएसई स्कूल खोलने की शुरूआत की है। मैं नाचन के तीन स्कूलों को सीबीएसई पाठ्यक्रम पर आधारित बनाने की घोषणा करता हूं तीन महीने में तीन हजार अध्यापकों की भर्ती सीबीएसई अध्यापकों की भर्ती की जाएगी।’’
नाचन के विधायक विनोद कुमार ने कहा कि वह लगातार अपने विधानसभा क्षेत्र का विकास सुनिश्चित करने में लगे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने प्रदेश को नशा मुक्त बनाने के लिए संकल्प लिया और वह इस कार्यक्रम की सफलता के लिए राज्य सरकार को भरपूर साथ देंगे।
हिमाचल प्रदेश एससी-एसटी आयोग के अध्यक्ष लाल सिंह कौशल ने शिलान्यास और उद्घाटनों के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 और 2025 प्रदेश के साथ-साथ नाचन विधानसभा क्षेत्र के लोगों को आपदा का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने ग्राउंड जीरो से रेस्क्यू ऑपरेशन का नेतृत्व किया और प्रभावित परिवारों की भरपूर मदद की। कर्मचारियों के हित के लिए ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने पहली ही कैबिनेट बैठक में सरकारी कर्मचारियों को ओपीएस दी। उन्होंने कहा कि राजस्थान में भी कांग्रेस सरकार ने कर्मचारियों को पुरानी पेंशन दी लेकिन भाजपा की सरकार बनते ही उसे बंद कर दिया गया।

कांग्रेस का फैसला संगठन को मजबूत करने वाला, भाजपा की दलगत राजनीति बेनकाब – नरेश चौहान

शिमला: मुख्यमंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने आज यहां कहा कि कांग्रेस नेतृत्व द्वारा कांगड़ा के जिला कांग्रेस समिति अध्यक्ष अनुराग शर्मा को राज्यसभा के लिए अवसर देना इस बात का स्पष्ट संदेश है कि कांग्रेस पार्टी में जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं को सम्मान और अवसर मिलता है। यह निर्णय कांग्रेस नेता राहुल गांधी की उस सोच को दर्शाता है जिसके तहत संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को आगे लाने पर बल दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा लोकतांत्रिक परंपराओं का सम्मान करती आई है, जबकि भाजपा सत्ता, दबाव और धनबल के सहारे राजनीति करने की कोशिश करती रही है। पिछले राज्यसभा चुनाव के दौरान हिमाचल में जिस प्रकार का माहौल बनाया गया था, वह लोकतंत्र की भावना के अनुरूप नहीं था। इस बार बहुमत के आधार पर शांतिपूर्ण ढंग से चुनाव होना लोकतांत्रिक मूल्यों की जीत है।
नरेश चौहान ने कहा कि कांग्रेस सरकार प्रदेश में व्यवस्था परिवर्तन के लक्ष्य के साथ काम कर रही है।
पंचायत चुनावों को लेकर उन्होंने कहा कि सरकार लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। डिजास्टर एक्ट समाप्त होने के बाद अब पंचायत चुनाव करवाने का रास्ता साफ हो गया है और सरकार का लक्ष्य है कि मई माह तक प्रदेश में पंचायत चुनाव संपन्न करवा दिए जाएं। नई पंचायतों के गठन और परिसीमन की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है तथा मतदाता सूचियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि विपक्ष केवल अनावश्यक बयानबाजी और भ्रम फैलाने की राजनीति कर रहा है, जबकि कांग्रेस सरकार विकास और जनहित के मुद्दों पर गंभीरता से काम कर रही है। प्रदेश की जनता भाजपा की दलगत राजनीति को समझ चुकी है और आने वाले समय में भी विकास और जनहित की राजनीति को ही समर्थन मिलेगा।

300 यूनिट मुफ्त बिजली का वादा करने वाली कांग्रेस अब जनता पर बिजली महंगी करने की तैयारी में – संदीपनी भारद्वाज

शिमला:  भाजपा प्रदेश प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज ने प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि चुनावों के समय 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने का वादा करने वाली कांग्रेस सरकार अब बिजली की दरों में बढ़ोतरी कर प्रदेश की जनता पर महंगाई का नया बोझ डालने की तैयारी में है। उन्होंने कहा कि यह कांग्रेस की कथनी और करनी के अंतर का सबसे बड़ा उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि सामने आए तथ्यों के अनुसार प्रदेश में बिजली की दरों में लगभग 1 रुपये प्रति यूनिट तक बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। इसका सीधा असर प्रदेश के लाखों बिजली उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो प्रदेश की आम जनता पर सालाना करीब 1200 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है।
संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि जानकारी के अनुसार हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड ने नियामक आयोग के समक्ष आगामी वित्त वर्ष के लिए लगभग 8593 करोड़ रुपये की मांग रखी है, जो पिछले वर्ष से कहीं अधिक है। ऐसे में यह साफ संकेत है कि सरकार अपनी गलत नीतियों और आर्थिक कुप्रबंधन का बोझ अब सीधे जनता पर डालने जा रही है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों से मिलने वाली बिजली को वापस लेकर नई व्यवस्था लागू की, जिसका सीधा प्रभाव बिजली व्यवस्था और दरों पर पड़ रहा है। पहले यह बिजली सीधे बिजली बोर्ड को मिलती थी जिससे उपभोक्ताओं को राहत मिलती थी, लेकिन अब सरकार की नीतियों के कारण यह व्यवस्था प्रभावित हुई है और बिजली बोर्ड को ओपन मार्केट से महंगी बिजली खरीदने की नौबत आ सकती है।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि कांग्रेस ने चुनावों के दौरान 10 गारंटियों और मुफ्त बिजली के वादों के नाम पर जनता को भ्रमित किया, लेकिन सत्ता में आते ही कांग्रेस सरकार ने अपने मैनिफेस्टो और गारंटियों को दरकिनार कर दिया। आज स्थिति यह है कि जनता को राहत देने के बजाय सरकार महंगाई बढ़ाने का काम कर रही है।
संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि कांग्रेस सरकार की गलत नीतियों का खामियाजा मध्यम वर्ग, किसानों, छोटे व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि सरकार को तुरंत स्पष्ट करना चाहिए कि 300 यूनिट मुफ्त बिजली का वादा कहां गया और जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने के पीछे क्या कारण है।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि प्रदेश सरकार ने बिजली की दरों में बढ़ोतरी कर जनता पर बोझ डालने का प्रयास किया तो भारतीय जनता पार्टी इसका सड़कों से लेकर सदन तक कड़ा विरोध करेगी।

CM सुक्खू ने मण्डी के दियाड़गी में 60 करोड़ रुपये की 14 परियोजनाएं की लोगों को समर्पित

मण्डी : मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज मण्डी जिला के एक दिवसीय दौरे के दौरान, मंडी के दियाड़गी में लगभग 60 करोड़ रुपये की लागत की 14 विकासात्मक परियोजनाओं के लोकार्पण एवं शिलान्यास किए।
मुख्यमंत्री ने नाबार्ड के अंतर्गत 25.99 करोड़ रुपये की लागत से शिमला-मंडी सड़क वाया तत्तापानी (चैल चौक से बग्गी) के उन्नयन कार्य का उद्घाटन किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने 6.96 करोड़ रुपये की लागत से नाबार्ड के तहत नेहरा से फगोह वाया कुथल, बगला, लोअर नातन मार्ग तथा कांशा खड्ड पर मोटरेबल पुल सहित सड़क का उद्घाटन किया।
उन्होंने 2.75 करोड़ रुपये की लागत से धनोटू में निर्मित लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृह, तहसील बल्ह के चम्यार में 12 लाख रुपये की लागत से निर्मित पटवार भवन, ग्राम पंचायत कोटली में 14 लाख रुपये की लागत से निर्मित ‘अपना पुस्तकालय’, जाछ (झुंगी) में 55 लाख रुपये की लागत से निर्मित लोक निर्माण विभाग के कनिष्ठ अभियंता कार्यालय एवं आवास भवन का उद्घाटन किया।
मुख्यमंत्री ने निचली बेहली में 37 लाख रुपये की लागत से निर्मित सामुदायिक केन्द्र तथा 38-38 लाख रुपये की लागत से जाच और फंगवास में सामुदायिक केंद्रों का भी उद्घाटन किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने ग्राम पंचायत पंडोह में 8 लाख रुपये की लागत से निर्मित पुस्तकालय का लोकार्पण भी किया।
इसके अतिरिक्त उन्होंने 3.08 करोड़ रुपये की लागत से तहसील सुंदरनगर की चौक, महादेव, अपर बेहली, चंबी, पलोहोटा, जय देवी तथा बलाना ग्राम पंचायतों के लिए उठाऊ जलापूर्ति योजना का उद्घाटन किया। इसके साथ ही 3.14 करोड़ रुपये की लागत से जल जीवन मिशन के अंतर्गत तहसील बल्ह की ग्राम पंचायत धाबन और लोहारा तथा टांडा की बस्तियों के लिए उठाऊ जलापूर्ति योजना तथा 11.57 करोड़ रुपये की लागत से तहसील चच्योट की ग्राम पंचायत सैंज और नंदी के विभिन्न गांवों के लिए उठाऊ जलापूर्ति योजना को भी लोगों को समर्पित किया।
इसके अलावा मुख्यमंत्री ने 3.67 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाली गडोग नाला से बरनोग सड़क का शिलान्यास भी किया।

मण्डी: CM सुक्खू ने नेरचौक में रोबोटिक सर्जरी सुविधा का किया शुभारंभ; चिकित्सा महाविद्यालय में खुलेगा हृदय रोग विभाग, पैट स्कैन मशीन भी लगेगी

पीजी कोर्स शुरू करने के लिए सरकार देगी एकमुश्त राहत

मण्डी: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज जिला मंडी स्थित मेडिकल कॉलेज नेरचौक में रोबोटिक सर्जरी सुविधा का शुभारम्भ किया। इस विश्वस्तरीय आधुनिक तकनीक पर 28.44 करोड़ रुपये व्यय किए गए हैं। उन्होंने यहां पर स्वयं पहली सर्जरी को देखा। इससे पूर्व, जिला शिमला के अटल सुपरस्पेशलिटी अस्पताल चमियाणा और जिला कांगड़ा के मेडिकल कॉलेज टांडा में रोबोटिक सर्जरी की शुरूआत की गई थी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शीघ्र ही आईजीएमसी शिमला और हमीरपुर मेडिकल कॉलेज में भी रोबोटिक सर्जरी की सुविधा शुरू कर दी जाएगी, जिसकी प्रक्रिया चल रही है।
ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि चमियाणा में अब तक 151 तथा टांडा मेडिकल कॉलेज में 92 ऑपरेशन रोबोटिक सर्जरी के माध्यम से किए जा चुके है, जिसके बेहतर परिणाम सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों में एम्स दिल्ली के स्तर पर हाईएंड तकनीक का समावेश किया जा रहा है, ताकि प्रदेश के मेडिकल कॉलेज रैफरल स्वास्थ्य संस्थान बनकर न रह जाएं। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों को भी एक्सपोजर विजिट पर भेजा जाएगा, ताकि वे आधुनिक तकनीक के बारे में और बेहतर जानकारी हासिल कर सकें। उन्होंने कहा, ‘‘बिगड़ी हुई व्यवस्थाओं को ठीक करने में समय लगता है। आरडीजी बंद होने के कारण प्रदेश के बजट से 10 हजार करोड़ कम हुए हैं, इसके बावजूद आने वाले समय में राज्य सरकार आधुनिक मेडिकल तकनीक पर तीन हजार करोड़ रुपये खर्च करने जा रही है। स्वास्थ्य सेवाओं के सुधार के लिए धन की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।’’
मुख्यमंत्री ने कहा कि मेडिकल कॉलेज नेरचौक में हृदय रोग विभाग स्थापित किया जाएगा। कॉलेज के सभी विभागों में पीजी कोर्स शुरू किए जाएंगे। ऐसे सभी विभागों में जहां पीजी कोर्स शुरू करने के लिए प्रोफेसर नहीं है, उन्हें एकमुश्त रिलेक्सेशन (छूट) दी जाएगी, ताकि वहां पीजी कोर्स शुरू करने में किसी प्रकार की दिक्कत न आए। इसके अलावा मेडिकल कॉलेज में एस.आर.शिप के पद भी बढ़ाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि नेरचौक में रेडियोलॉजी विभाग के साथ-साथ सभी विभागों को सशक्त किया जाएगा और डॉक्टरों, पैरा मेडिकल और टेक्नीशियन के पदों को भरा जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार के नीतिगत फैसले के तहत सभी मेडिकल कॉलेजों में पीजी और एसआर शुरू की जाएंगी। राज्य सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार के लिए प्रयास कर रही है, ताकि प्रदेश के मरीजों को बेहतर इलाज के लिए बाहर न जाना पड़े। उन्होंने कहा कि नेरचौक ट्रॉमा सेंटर में खाली पदों को भरा जाएगा, ताकि इमरजेंसी सेवाओं में सुधार हो सके। थ्री-टेस्ला एमआरआई मशीन के साथ-साथ लिनाक (LINAC) मशीन को शुरू करने की प्रक्रिया चल रही है और जल्द ही पैट स्कैन मशीन भी लगाई जाएगी।
ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार ने सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों का स्टाइपंड 40 हजार रुपये से बढ़ाकर 1 लाख रुपये किया है, जबकि सीनियर रेजिडेंट सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों का स्टाइपंड एक लाख रुपये से बढ़ाकर 1.30 लाख रुपये किया गया है।
मुख्यमंत्री ने मेडिकल कॉलेज नेरचौक के डॉक्टरों और स्टाफ से भी संवाद किया और मेडिकल कॉलेज में विभिन्न सुविधाओं और कमियों के बारे में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि चिकित्सा शिक्षा के संबंध में मिले सुझावों को नीति में शामिल किया जाएगा, ताकि मरीजों को प्रदेश में ही बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त हो सकें। उन्होंने कहा कि इससे पूर्व वह आईजीएमसी शिमला, टांडा और हमीरपुर मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों से भी इसी तर्ज पर संवाद कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेजों में छात्रों के लिए 60-60 के सेक्शन बनाए जाएंगे। उसी अनुपात में स्टाफ भी उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा मिल सके।