
ऊना: स्कूली बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा निर्धारित सुरक्षा मानकों की अनुपालना के मद्देनज़र ऊना जिला प्रशासन के निर्देशों पर पुलिस और संबंधित विभागों द्वारा जिले के विभिन्न स्थानों पर स्कूल बसों और वैन के दस्तावेजों की जांच का अभियान लगातार जारी है। अभियान के तहत अब तक 182 स्कूल वाहनों की जांच की जा चुकी है, जबकि नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर 60 वाहनों के चालान भी किए गए हैं।इसके साथ ही एक वाहन को जब्त किया है।
उल्लेखनीय है कि उपायुक्त ऊना जतिन लाल ने हाल ही में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्कूल बसों और अन्य स्कूली वाहनों के संचालन को लेकर आवश्यक निर्देश जारी किए थे तथा संबंधित अधिकारियों को सुरक्षा मानकों की अनुपालना सुनिश्चित करने के लिए विशेष निरीक्षण करने को कहा था।
इसी क्रम में पुलिस और संबंधित विभागों की टीमों द्वारा विभिन्न स्थानों पर निरीक्षण किया गया। इस दौरान बसों के फिटनेस प्रमाण पत्र, पंजीकरण, बीमा, प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (पीयूसी) सहित अन्य आवश्यक दस्तावेजों की जांच की गई।
उपायुक्त जतिन लाल ने कहा कि स्कूली बच्चों की सुरक्षा जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए ऐसे निरीक्षण आगे भी जारी रहेंगे। उन्होंने स्कूल प्रबंधन और वाहन संचालकों से सभी नियमों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए हैं।
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नौतोड़ और जनजातीय अधिकारों पर सच्चाई छिपाने के लिए राज्यपाल को बना रहे निशाना
कहा – जनजातीय मंत्री होकर भी जनजातीय हितों में विफल, अब संवैधानिक पदों पर हमला कर रहे हैं जगत सिंह नेगी
शिमला: भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता सूरत नेगी ने जनजातीय मंत्री जगत सिंह नेगी द्वारा राज्यपाल के विरुद्ध दिए गए बयान को दुर्भाग्यपूर्ण और संवैधानिक संस्थाओं का अपमान बताया है। भाजपा प्रवक्ता सूरत नेगी ने कहा कि मंत्री नेगी का यह रवैया न केवल एक संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुँचाने वाला है, बल्कि यह उनके राजनीतिक अहंकार और प्रशासनिक असफलता को भी उजागर करता है।
भाजपा प्रवक्ता सूरत नेगी ने स्पष्ट कहा कि जनजातीय क्षेत्रों से जुड़े नौतोड़ जैसे संवेदनशील मुद्दे को लेकर जिस तरह से मंत्री जगत सिंह नेगी लगातार भ्रामक बयान दे रहे हैं, उससे साफ है कि वे अपनी सरकार की नाकामियों को छिपाने के लिए राज्यपाल जैसे संवैधानिक पद को निशाना बना रहे हैं।
सूरत नेगी ने कहा कि नौतोड़ का विषय आज का नहीं है, बल्कि पिछले 20-25 वर्षों से यह मुद्दा चर्चा में रहा है। वर्ष 2006 में जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी और स्वयं जगत सिंह नेगी विधायक थे, उस समय ट्राइबल एडवाइजरी कमेटी की बैठक में यह प्रस्ताव पारित किया गया था कि नौतोड़ की जमीन केवल “लैंडलेस” यानी भूमिहीन लोगों को ही दी जाएगी। 1975 के अधिनियम में लैंडलेस की स्पष्ट परिभाषा दी गई थी और उसी आधार पर यह शर्त लागू की गई।
भाजपा प्रवक्ता सूरत नेगी ने आरोप लगाया कि वर्ष 2014 में कांग्रेस सरकार ने जनता को गुमराह करने का काम किया। उस समय फॉरेस्ट कंजरवेशन एक्ट, 1980 को आंशिक रूप से निलंबित करने की बात कही गई, लेकिन साथ ही 2006 में लगाई गई “लैंडलेस” की शर्त को नहीं हटाया गया। इसका परिणाम यह हुआ कि वास्तव में किसी भी व्यक्ति को नौतोड़ का लाभ मिल ही नहीं सकता था। सूरत नेगी ने कहा कि यह पूरी तरह से जनजातीय क्षेत्रों के साथ धोखा था।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 में जब प्रदेश में जयराम ठाकुर के नेतृत्व में भाजपा सरकार बनी, तब इस पूरे मामले का गहन अध्ययन किया गया। भाजपा सरकार ने 2006 में लगाई गई उस शर्त को हटाने का रास्ता निकाला ताकि जनजातीय क्षेत्रों के लोगों को वास्तव में नौतोड़ का लाभ मिल सके। लेकिन उस समय फॉरेस्ट कंजरवेशन एक्ट से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित होने के कारण इस पर तत्काल निर्णय लेना संभव नहीं था।
सूरत नेगी ने यह भी स्पष्ट किया कि संविधान की पाँचवीं अनुसूची के तहत राज्यपाल को कुछ विशेष अधिकार जरूर दिए गए हैं, लेकिन किसी केंद्रीय कानून को निलंबित करना इतना सरल नहीं है जितना कि मंत्री नेगी जनता को बताने की कोशिश कर रहे हैं। बिना कानूनी प्रक्रिया और नियमों के किसी को भी जमीन नहीं दी जा सकती।
भाजपा प्रवक्ता सूरत नेगी ने कहा कि आज जनजातीय मंत्री होने के बावजूद जगत सिंह नेगी अपने क्षेत्र और पूरे जनजातीय समाज के हितों की रक्षा करने में पूरी तरह असफल साबित हुए हैं। भाजपा सरकार के समय ट्राइबल सब प्लान के तहत लगभग 400 करोड़ रुपये का बजट तीनों जनजातीय विधानसभा क्षेत्रों के लिए रखा गया था, जिसे वर्तमान कांग्रेस सरकार ने घटाकर लगभग 150 करोड़ रुपये कर दिया है। इससे साफ है कि वास्तव में जनजातीय विरोधी नीति कौन चला रहा है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि फॉरेस्ट राइट्स एक्ट (FRA) के तहत जनजातीय लोगों को भूमि अधिकार देने की प्रक्रिया भी वर्तमान सरकार के कार्यकाल में बेहद धीमी रही है। भाजपा सरकार के समय जहां इस दिशा में पहल शुरू हुई थी, वहीं आज तीन वर्षों में भी बड़ी संख्या में लंबित मामलों का समाधान नहीं हो पाया है।
अंत में सूरत नेगी ने कहा कि मंत्री नेगी को अपने व्यवहार और भाषा पर संयम रखना चाहिए। किसी भी संवैधानिक पद, विशेषकर राज्यपाल के विरुद्ध इस प्रकार के बयान देना न केवल लोकतांत्रिक परंपराओं के विरुद्ध है बल्कि इससे जनजातीय क्षेत्रों के वास्तविक मुद्दे भी पीछे छूट जाते हैं।
सूरत नेगी ने कहा कि यदि मंत्री नेगी वास्तव में जनजातीय समाज के हितैषी हैं तो उन्हें बयानबाजी छोड़कर केंद्र सरकार और राज्यपाल से संवाद स्थापित करना चाहिए, ताकि नौतोड़, फॉरेस्ट राइट्स और वाइब्रेंट विलेज योजना जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर ठोस समाधान निकल सके।
भाजपा ने स्पष्ट किया कि जनजातीय क्षेत्रों के विकास और अधिकारों की रक्षा के लिए पार्टी सदैव प्रतिबद्ध रही है और भविष्य में भी इन मुद्दों को मजबूती से उठाती रहेगी।

1683 करोड़ की परवाणू–सोलन परियोजना पूरी, अन्य खंडों में कार्य प्रगति पर; संवेदनशील स्थलों पर दीर्घकालिक सुरक्षा कार्य जारी
शिमला: भाजपा सांसद सुरेश कश्यप द्वारा लोकसभा में पूछे गए प्रश्न के जवाब में केंद्र सरकार ने परवाणू–शिमला चार लेन परियोजना की प्रगति, लागत और देरी के कारणों को लेकर विस्तृत जानकारी दी है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन जयराम गडकरी ने लोकसभा में दिए लिखित उत्तर में बताया कि इस परियोजना के विभिन्न चरणों में कार्य प्रगति पर है और कई महत्वपूर्ण हिस्सों में कार्य पूर्ण भी हो चुका है।
लोकसभा में पूछे गए प्रश्न में सांसद सुरेश कश्यप ने सरकार से यह जानकारी मांगी थी कि परवाणू–शिमला चार लेन परियोजना के लिए अब तक कितनी राशि स्वीकृत की गई है, परियोजना की वास्तविक और वित्तीय प्रगति क्या है तथा कार्य में देरी के क्या कारण हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी पूछा था कि मानसून के दौरान इस मार्ग पर होने वाले भूस्खलन और यातायात बाधा की समस्या के स्थायी समाधान के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है।
केंद्रीय मंत्री ने अपने उत्तर में बताया कि परियोजना के विभिन्न हिस्सों के लिए हजारों करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है और अलग-अलग चरणों में कार्य जारी है।
परियोजना के परवाणू–सोलन खंड (एनएच-22, नया एनएच-05) के किमी 67.000 से किमी 106.139 तक चार लेन निर्माण के लिए 1683.31 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई थी। इस खंड में 100 प्रतिशत वास्तविक और 100 प्रतिशत वित्तीय प्रगति दर्ज की गई है और इसका निर्माण कार्य पूरी तरह पूर्ण हो चुका है।
इसी प्रकार सोलन–कैथलीघाट खंड (किमी 106.139 से किमी 129.050) के चार लेन निर्माण के लिए 1519.53 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए। इस परियोजना में अब तक 91.05 प्रतिशत वास्तविक प्रगति और 86.03 प्रतिशत वित्तीय प्रगति दर्ज की गई है। इस खंड में 24 नवंबर 2025 को पीसीसी (Provisional Completion Certificate) जारी किया गया है।
इसके अलावा कैथलीघाट से शकराल/ढली क्षेत्र तक शिमला बाईपास पैकेज के अंतर्गत लगभग 2742.91 करोड़ रुपये की परियोजना पर कार्य चल रहा है। इस खंड में 53 प्रतिशत वास्तविक प्रगति और 51.5 प्रतिशत वित्तीय प्रगति दर्ज की गई है और कार्य अभी प्रगति पर है।
इसी तरह शकराल–ढली खंड (डिजाइन लंबाई लगभग 10.985 किमी) के निर्माण के लिए 3005.24 करोड़ रुपये की परियोजना पर काम जारी है, जिसमें 51.54 प्रतिशत वास्तविक प्रगति और 54.04 प्रतिशत वित्तीय प्रगति दर्ज की गई है।
केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि परियोजना के कुछ हिस्सों में कार्य में देरी के पीछे कई कारण रहे हैं, जिनमें 2023 और 2025 में हुई अत्यधिक भारी वर्षा, भूस्खलन की घटनाएं तथा कुछ स्थानों पर डंपिंग साइट की उपलब्धता की समस्या शामिल है।
उन्होंने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने परवाणू–सोलन–कैथलीघाट मार्ग के बीच कुल 85 संवेदनशील स्थलों की पहचान की है। इनमें से 65 स्थानों पर स्थायी और दीर्घकालिक ढलान सुरक्षा कार्य पूरे किए जा चुके हैं, जबकि शेष स्थानों पर कार्य जारी है।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि मानसून के दौरान मार्ग पर होने वाले भूस्खलन और यातायात बाधा की समस्या को देखते हुए ढलान स्थिरीकरण, बेहतर जल निकासी प्रणाली और स्थायी संरचनाओं के माध्यम से समाधान सुनिश्चित किया जा रहा है।
भाजपा सांसद सुरेश कश्यप ने कहा कि केंद्र सरकार के प्रयासों से परवाणू–शिमला फोरलेन परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है और इसके पूरा होने से प्रदेश में पर्यटन, व्यापार और यातायात व्यवस्था को बड़ा लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार हिमाचल प्रदेश के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रही है और आने वाले समय में प्रदेश को इसका बड़ा फायदा मिलेगा।

शिमला: उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप ने कहा कि जिला शिमला में घरेलु गैस, पेट्रोल, डीजल की कोई कमी नहीं है और आपूर्ति निरंतर जारी है। इसीलिए लोग इन चीज़ों का अनावशयक भण्डारण न करें।
उपायुक्त आज यहां जिला के सभी उपमंडल दंडाधिकारियों (एसडीएम) के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से जिला में गैस, पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति का जायजा ले रहे थे। इस बैठक में तेल विपणन कंपनियों के प्रतिनिधि भी शामिल रहे।
जिला नियंत्रक को दें मिट्टी तेल व कोयले की मांग : उन्होंने कहा कि वर्तमान स्थिति को ध्यान में रखते हुए तेल विपणन कंपनियों द्वारा एलपीजी की आपूर्ति के सम्बन्ध में कुछ एहतियाती कदम उठाए गए हैं। वर्तमान में होटल, रेस्टोरेंट तथा अन्य वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों के लिए प्रयुक्त होने वाले वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति प्राथमिकता के आधार पर केवल अस्पतालो एवं शैक्षणिक संस्थानों को की जा रही है। अन्य वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों को आपूर्ति में अस्थायी प्रतिबंध का सामना करना पड़ सकता है। परन्तु इसके लिए वह दूसरे विकल्प के रूप में मिट्टी तेल व कोयले की मांग जिला नियंत्रक, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग शिमला, जिला शिमला के कार्यालय में देना सुनिश्चित करें ताकि मांगा अनुसार उनको मिट्टी तेल व कोयले की आपूर्ति की जा सके। हालांकि, जिला में घरेलू एलपीजी सिलेंडर, पेट्रोल तथा हाई स्पीड डीजल की कोई कमी नहीं है। पर्याप्त मात्रा में स्टॉक उपलब्ध है तथा नियमित रूप से आपूर्ति की जा रही है।
उन्होंने आम जनता से अनुरोध किया कि घबराहट में आकर अनावश्यक रूप से एलपीजी सिलेंडर या पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद या भंडारण न करें, क्योकि इससे कृत्रिम कमी उत्पन्न हो सकती है तथा अन्य उपभोक्ताओं को असुविधा हो सकती है। उन्होंने कहा कि घरेलू एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग वर्तमान दिशा-निर्देशों के अनुसार 25 दिनों के अंतराल के बाद ही की जा सकेगी। उपभोक्ता निर्धारित समय अनुसार ही बुकिंग करें तथा प्रशासन का सहयोग करें। जिला प्रशासन तेल विपणन कंपनियों के साथ समन्वय स्थापित कर स्थिति की निरंतर निगरानी कर रहा है ताकि आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति निर्बाध रूप से सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने सभी नागरिकों से शांति बनाए रखने तथा प्रशासन को सहयोग देने का आग्रह किया।
सभी एसडीएम अपने क्षेत्र में रोजाना लें स्थिति का जायजा: उन्होंने सभी उपमंडल दंडाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र में पेट्रोल पंप और गैस एजेंसी वालों के साथ बैठक कर स्थिति का जायजा लेने के निर्देश दिए। इसके अतिरिक्त, वर्तमान में होटल, रेस्टोरेंट तथा अन्य वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों में घरेलू एलपीजी सिलेंडर के उपयोग की भी जांच करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी एसडीएम को पेट्रोल पंप पर स्टॉक की और आरक्षित कोटा की भी निरंतर जांच करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी एसडीएम अपने क्षेत्र में मिट्टी तेल की आवश्यकता का भी आकलन करे। उन्होंने कहा कि सरकार के आदेशानुसार गैस और पेट्रोलियम उत्पादों की रोजाना स्थिति का जायजा लिया जाना आवश्यक है। इसके अलावा, यह भी सुनिश्चित किया जाए कि उपभोक्ताओं को पेट्रोल या डीजल कैन में न दिया जाए ताकि इन चीज़ों का अनावश्यक भण्डारण न हो।
यह भी रहे उपस्थित: बैठक में उपमंडल दण्डाधिकारी शिमला ग्रामीण मंजीत शर्मा, उपमंडल दण्डाधिकारी शिमला शहरी ओशिन शर्मा, जिला नियंत्रक, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग नरेंद्र धीमान, एफएसओ अनीता ठाकुर सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

शिक्षा विभाग में भरे जाएंगे लेक्चरर और असिस्टेंट लेक्चरर के 400-400 पद
सिद्धार्थ राजकीय महाविद्यालय नादौन में मुख्यमंत्री ने मेधावी विद्यार्थियों को वितरित किए पुरस्कार
शिमला: सिद्धार्थ राजकीय महाविद्यालय नादौन के 29वें वार्षिक पारितोषिक वितरण समारोह में मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया। इस अवसर पर उन्होंने सभी मेधावी छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि राज्य सरकार विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने के उद्देश्य से शिक्षा व्यवस्था में आवश्यक सुधार कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में 140 स्कूलों को सीबीएसई पाठ्यक्रम आधारित किया जा रहा है और अगले दो महीनों के भीतर इन स्कूलों में सभी आवश्यक अध्यापक उपलब्ध करवा दिए जाएंगे। इन स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए अलग ड्रेस कोड भी निर्धारित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग में जल्द ही लेक्चरर के 400 और असिस्टेंट लेक्चरर के 400 पद भरे जाएंगे। इसके अलावा साइंस कॉलेज हमीरपुर के लिए 20 करोड़ रुपये देने की घोषणा भी की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमीरपुर में कैंसर अस्पताल के लिए 300 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। यहां सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक भी स्थापित किया जाएगा और 100 करोड़ रुपये की लागत से मदर एंड चाइल्ड अस्पताल का निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नादौन कॉलेज में आने वाले समय में नए कोर्स शुरू किए जाएंगे। अगले शैक्षणिक सत्र से यहां भौतिक विज्ञान, जीव विज्ञान, वनस्पति विज्ञान के साथ एमसीए और एमबीए कोर्स भी प्रारंभ किए जाएंगे। मुख्यमंत्री सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए पांच लाख रुपये प्रदान करने की घोषणा की।
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘नादौन मेरी जन्मभूमि भी है और कर्मभूमि भी। मैं यहां का विकास सुनिश्चित कर रहा हूं और आने वाले समय में नादौन स्पोर्ट्स टूरिज्म का केंद्र बनकर उभरेगा।’’ उन्होंने कहा कि खरीड़ी में 160 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक स्पोर्ट्स सेंटर बनाया जा रहा है, जिसे जून तक पूरा कर लिया जाएगा। इसके अतिरिक्त ब्यास नदी पर 300 करोड़ रुपये की लागत से रिवर फ्रंट विकसित किया जाएगा, जबकि 80 करोड़ रुपये से रिवर राफ्टिंग सेंटर और 100 करोड़ रुपये से वेलनेस सेंटर स्थापित किया जाएगा। नादौन विधानसभा क्षेत्र में इसी सत्र से नौ सीबीएसई स्कूल शुरू किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि हमीरपुर में 300 करोड़ रुपये की लागत से नया बस अड्डा भी बनाया जा रहा है। प्रदेश में लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध करवाने के लिए पानी की गुणवत्ता सुधार पर 1500 करोड़ रुपये व्यय किए जाएंगे।
अपने छात्र जीवन और राजनीतिक सफर को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2022 के विधानसभा चुनावों के दौरान इसी कॉलेज में मतगणना के समय उन्हें भावनात्मक क्षणों का अनुभव हुआ। उन्होंने कहा कि भाग्य और जनता के आशीर्वाद से उन्हें प्रदेश की सेवा करने का अवसर मिला है। उन्होंने कहा ‘‘मन में सवाल था कि क्या कांग्रेस की सरकार बनेगी और मुख्यमंत्री कौन बनेगा। पद एक होता है, चाहने वाले बहुत होते हैं। भगवान के आशीर्वाद से मैं सबसे लंबी अवधि तक कांग्रेस का अध्यक्ष रहा और मुझसे पहले डॉ. यशवंत सिंह परमार की पत्नी विद्या डांग 6 साल 10 महीने अध्यक्ष रही थीं। भाग्य ने साथ दिया और मुझे मुख्यमंत्री बनने का मौका मिला है। देश के इतिहास में कोई जिला ही होगा, जहां से दो मुख्यमंत्री बने हैं। भाजपा से प्रो. प्रेम कुमार धूमल मुख्यमंत्री रहे और अब यह सौभाग्य मुझे मिला है।’’
उन्होंने कहा कि चुनाव जीतने के लिए पिछली भाजपा सरकार ने पांच हजार करोड़ रुपये बांट दिए, लेकिन फिर भी उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में गुणात्मक शिक्षा के मामले में हिमाचल प्रदेश 21वें स्थान पर पहुंच गया था। हमने बदलाव व व्यवस्था परिवर्तन किया और आज हम पांचवें स्थान पर पहुंच गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने डॉ. वाई एस परमार विद्यार्थी ऋण योजना आरंभ की, जिसके तहत उच्च शिक्षा के लिए छात्रों को 20 लाख रुपये तक का ऋण एक प्रतिशत की दर पर दिया जा रहा है। साथ ही इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना के तहत विधवा महिलाओं के बच्चों की उच्च शिक्षा का खर्च भी राज्य सरकार प्रदान कर रही है। अनाथ बच्चों को चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट के रुप में अपनाया गया है। इसके लिए कानून बनाने वाला हिमाचल प्रदेश देश का पहला राज्य बना जिसके तहत उन बच्चों का पूरा ध्यान राज्य सरकार रख रही है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के चोर दरवाजों को बंद करके 3800 करोड़ रुपये अर्जित किए, जिससे समाज के हर वर्ग के कल्याण के लिए योजनाएं बनाई जा रही हैं।
श्री सुक्खू ने कहा कि आने वाला समय हिमाचल के युवाओं का है। उन्होंने दोहराया कि हिमाचल वर्ष 2027 तक आत्मनिर्भर और 2032 तक सबसे समृद्धशाली राज्य बनेगा। उन्होंने कहा ‘‘भाजपा इसका मजाक बनाती है क्योंकि उन्होंने कुछ नहीं किया। लेकिन हम प्रदेश के लोगों का भविष्य संवारेंगे।’’ उन्होंने कहा कि पिछली भाजपा सरकार को आरडीजी और जीएसटी कंपनसेशन के रूप में 70 हजार करोड़ रुपये मिले, जबकि हमें आरडीजी के रुप में सिर्फ 17 हजार करोड़ रुपये मिले। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता को संविधान के अनुच्छेद 275 (1) में आरडीजी का अधिकार दिया गया है, जिसे बंद कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि मैं आरडीजी की बहाली के लिए भाजपा के नेताओं के नेतृत्व में दिल्ली जाने को भी तैयार हूं लेकिन वह तैयार नहीं हुए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार प्रदेश के लोगों के अधिकार की लड़ाई लड़ रही है। राज्य सरकार बिजली परियोजनाओं से 50 प्रतिशत रॉयल्टी की मांग कर रही है लेकिन भाजपा उसका भी विरोध करती है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश पर पुरानी पेंशन योजना को बंद करने का दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने यह फैसला राजनीतिक लाभ के लिए नहीं किया है, बल्कि इसका उद्देश्य कर्मचारियों का बेहतर भविष्य सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ओपीएस से कभी पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने कहा भाजपा ने राजनीतिक मंडी में विधायकों की खरीद की और चुनी हुई सरकार को गिराने की कोशिश की लेकिन देवी-देवताओं और जनता के आशीर्वाद से कांग्रेस के फिर से 40 विधायक हो गए। उन्होंने कहा ‘‘हम डरने वाले नहीं है। हम हर चुनौती को युद्ध की तरह लड़ते हैं। हमने राजनीतिक चुनौती का भी सामना किया और अब आर्थिक चुनौती का भी डटकर सामना कर रहे हैं।’’
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा के बाद राज्य सरकार की दूसरी प्राथमिकता स्वास्थ्य क्षेत्र है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल आईजीएमसी शिमला में 19 साल पुरानी एमआरआई मशीन लगी हुई थी, जहां अब राज्य सरकार ने थ्री टेस्ला मशीन लगाई गई है। उन्होंने कहा कि एम्स दिल्ली की तर्ज पर सभी मेडिकल कॉलेजों में आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं। प्रदेश के सभी विधानसभा क्षेत्रों में आदर्श स्वास्थ्य संस्थान बनाए गए हैं, जहां स्पेशलिस्ट डॉक्टर उपलब्ध करवाए गए हैं, ताकि लोगों को घर के नजदीक ही बेहतर इलाज मिल सके। उन्होंने कहा कि सर्वाइकल कैंसर से बेटियों के बचाव के लिए पूरे प्रदेश में एचपीवी का टीकाकरण किया जा रहा है। हिमाचल प्रदेश सरकार देश की पहली न्यूट्रीशन पॉलिसी लेकर आ रही है, ताकि प्रदेश के लोग स्वस्थ जीवन जी सकें।
मुख्यमंत्री ने नादौन राजकीय महाविद्यालय में 17.22 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले बहुद्देश्यीय हॉल का शिलान्यास भी किया।

शिमला: आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग द्वारा आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) के अंतर्गत क्षेत्रीय कार्मिकों के लिए आज शिमला में दो दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप आयोजित की गई।
कार्यशाला का शुभारम्भ आर्थिक सलाहकार डॉ. विनोद राणा ने किया। उन्होंने कहा कि सांख्यिकी साक्ष्य-आधारित शासन तथा प्रभावी विकास योजना के लिए एक महत्त्वपूर्ण साधन है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि सटीक एवं विश्वसनीय आंकड़ों का संकलन ही सार्थक श्रम बाजार संकेतकों के निर्माण की आधारशिला है। उन्होंने क्षेत्रीय कार्मिकों को डेटा संकलन में सावधानी बरतने, उपयुक्त तकनीकों के उपयोग तथा कंप्यूटर असिस्टेंट पर्सनल इंटरव्यूइंग प्रणाली के माध्यम से समयबद्ध एवं प्रभावी डेटा संकलन सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया।
उन्होंने कहा कि सर्वेक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य नमूने में लगभग 180 ग्रामीण ब्लॉकों तथा 120 शहरी ब्लॉकों से आंकड़े एकत्रित किए जाएंगे, जबकि केंद्र नमूने में भी लगभग इतने ही ब्लॉकों को शामिल किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि इस कार्यशाला का उद्देश्य राज्य में आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण के प्रभावी क्रियान्वयन को सुदृढ़ करना तथा जिला स्तर पर श्रम बाजार के प्रमुख सूचकांकों जैसे श्रमिक जनसंख्या अनुपात (डब्ल्यूपीआर), श्रम बल भागीदारी दर (एलएफपीआर) तथा बेरोजगारी दर (यूआर) के वार्षिक/त्रैमासिक विश्वसनीय अनुमान तैयार करना है। यह अनुमान राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) तथा राज्य के अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी विभाग द्वारा संकलित नमूनों को संयोजित करके तैयार किए जाएंगे।
आर्थिक सलाहकार ने हिमाचल प्रदेश के नागरिकों तथा जन प्रतिनिधियों से अपील की कि वह सर्वेक्षण के दौरान क्षेत्रीय अन्वेषकों को पूर्ण सहयोग प्रदान करें। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि जब भी सर्वेक्षण अधिकारी उनके घरों पर जानकारी एकत्रित करने के लिए आएं, तो वह सही एवं प्रमाणिक जानकारी उपलब्ध करवाएं। उन्होंने कहा कि एकत्रित आंकड़ों की गुणवत्ता ही विश्वसनीय श्रम बाजार सांख्यिकी तैयार करने का आधार बनेगी, जिससे रोजगार सृजन तथा राज्य के समग्र सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए प्रभावी और साक्ष्य-आधारित नीतियों के निर्माण में सहायता मिलेगी।
आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण की शुरुआत अप्रैल, 2017 में की गई थी, जो रोजगार एवं बेरोजगारी से संबंधित आंकड़े तैयार करने के लिए देश का प्रमुख राष्ट्रीय सर्वेक्षण है। यह सर्वेक्षण श्रम बल भागीदारी, रोजगार की संरचना, बेरोजगारी की स्थिति तथा अन्य श्रम बाजार सूचकांकों के आवधिक अनुमान प्रदान करता है। यह योजना निर्माण, नीतिगत निर्णय तथा विकास कार्यक्रमों की निगरानी के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
क्षेत्रीय अन्वेषकों के लिए प्रशिक्षण सत्र आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय के अधिकारियों द्वारा संचालित किया गया।

शिमला: सचिव जल शक्ति, वित्त, नियोजन, अर्थ एवं सांख्यिकी डॉ. अभिषेक जैन ने आज मनाली क्षेत्र में गत वर्षों में बाढ़ से हुए नुकसान का जायजा लिया तथा बाढ़ सुरक्षा के लिए किए जा रहे कार्यों का निरीक्षण कर प्रगति की समीक्षा की।
उन्होंने जल शक्ति विभाग द्वारा मनाली में आलू ग्राउंड के साथ बाढ़ सुरक्षा कार्य का निरीक्षण किया। उन्होंने जल शक्ति विभाग द्वारा कलाथ वृद्धाश्रम के पास निर्मित बाढ़ सुरक्षा दीवार का भी निरीक्षण किया। 400 मीटर इस लंबी सुरक्षा दीवार का काम पूर्ण हो चुका है।
सचिव ने सभी महत्त्वपूर्ण विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में उन्होंने जलशक्ति विभाग से केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट पर कार्य की प्रगति के बारे में जानकारी हासिल की।
अधिकारियों ने अवगत करवाया कि 8 करोड़ रुपये की लागत से 700 मीटर क्षेत्र पर बाढ़ नियंत्रण का कार्य प्रगति पर है। इसके साथ ही 2100 मीटर क्षेत्र में 30 करोड़ रुपये की लागत से कार्य प्रगति पर है। यह कार्य 15 अप्रैल से पहले पूर्ण हो जाएगा।
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि प्रशासन द्वारा 11 स्थलों पर ड्रेजिंग के कार्य प्रस्तावित है।
लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों द्वारा सचिव को अवगत करवाया गया कि विभाग के माध्यम से आवंटित किए गए कुल 24 करोड़ रुपये में से 15 करोड़ रुपये लागत के कार्य पूर्ण हो चुके हैं।
सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जून माह तक सभी कार्यों को पूर्ण करें ताकि आगामी बरसात से पहले ऐसे सभी स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
उन्होंने निर्देश दिए कि उपायुक्त की अध्यक्षता में हर माह सभी विभागों के साथ नियमित बैठकें आयोजित करवाई जाएं। इनमें एनएचएआई की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि सचिव स्तर पर वह स्वयं भी मासिक बैठक की अध्यक्षता नियमित रूप से सुनिश्चित करेंगे।
बैठक में एसडीएम मनाली रमन शर्मा, अधीक्षण अभियंता जल शक्ति विनोद ठाकुर, लोक निर्माण, नगर परिषद और अन्य विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

हमीरपुर : उपमंडल भोरंज की ग्राम पंचायत हनोह के स्थान डाडू में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत उचित मूल्य की दुकान को दोबारा आवंटित किया जाएगा। इस दुकान के लिए खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने 10 अप्रैल तक निर्धारित प्रपत्र पर ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं।
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के जिला नियंत्रक शिव राम ने बताया कि इच्छुक व्यक्ति या संस्थाएं विभागीय पोर्टल ए एमर्जिंगहिमाचल.एचपी.जीओवी.इन emerginghimachal.hp.gov.in पर निर्धारित प्रपत्र पर सभी आवश्यक दस्तावेजों सहित 10 अप्रैल तक आवेदन कर सकते हैं। ऑफलाइन आवेदन स्वीकार नहीं होंगे।
जिला नियंत्रक ने बताया कि उचित मूल्य की दुकान के आवंटन के लिए पहली प्राथमिकता सार्वजनिक संस्थाएं जैसे- स्थानीय पंचायत, स्वयं सहायता समूह, सहकारी सभा, महिलाओं तथा उनके समूह को दी जाएगी। अगर एक वार्ड में एक से अधिक संस्थाएं आवेदन करती हैं तो पंजीकृत संस्था को अधिमान दिया जाएगा।
दूसरी प्राथमिकता विधवा या एकल नारी, दिव्यांग व्यक्ति जोकि दुकान चलाने में सक्षम हो, भूतपूर्व सैनिक या बेरोजगार व्यक्ति को दी जाएगी। जबकि, हिमाचल प्रदेश राज्य नागरिक आपूर्ति निगम लिमिटेड को तीसरी प्राथमिकता दी जाएगी।
आवेदन के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता मैट्रिक पास रखी गई है। आवेदन के साथ मैट्रिक का प्रमाण पत्र, संबंधित बैंक से हस्ताक्षरित बैंक खाते का विवरण, भूतपूर्व सैनिक या शिक्षित बेरोजगार होने पर परिवार के किसी भी अन्य सदस्य के नियमित सरकारी रोजगार में न होने का प्रमाण पत्र अपलोड होना चाहिए। दुकान की उपलब्धता और भंडारण क्षमता से संबंधित सत्यापित दस्तावेज, अगर किराये की दुकान है तो उसका रेंट एग्रीमेंट अपलोड होना चाहिए।
आवेदक के परिवार के किसी भी सदस्य का पंचायती राज संस्थाओं या नगर निकायों में वर्तमान में निर्वाचित नहीं होने बारे बीडीओ द्वारा जारी प्रमाण पत्र की प्रति तथा परिवार के किसी भी सदस्य के उचित मूल्य दुकान के दुकानधारक नहीं होने के संबंध में ग्राम पंचायत सचिव द्वारा जारी प्रमाण पत्र की प्रति आवेदन पत्र के साथ अपलोड की जानी अनिवार्य है। इनके बिना आवेदन पत्र स्वतः ही रद्द हो जाएगा। इसके अतिरिक्त मैरिट तय करने के लिए उच्च शैक्षणिक योग्यता के प्रमाण पत्रों की प्रतियां, बीपीएल, एससी, एसटी, ओबीसी और अपंगता से संबंधित प्रमाण पत्र, विधवा या एकल नारी से संबंधित दस्तावेज, यदि आवेदक उसी वार्ड का है, जिसमें उचित मूल्य की दुकान खोली जानी प्रस्तावित है, तो पंचायत सचिव द्वारा जारी प्रमाण पत्र की प्रति और अन्य दस्तावेज भी अपलोड होने चाहिए। अधिक जानकारी के लिए जिला नियंत्रक कार्यालय के दूरभाष नंबर 01972-222335 पर संपर्क किया जा सकता है।
हमीरपुर : मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू वीरवार को अपने गृह विधानसभा क्षेत्र नादौन का दौरा करेंगे।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री वीरवार को लगभग 11:20 बजे हैलिकॉप्टर से अमतर मैदान पहुंचेंगे और तुरंत डिग्री कालेज नादौन के लिए रवाना होंगे।
डिग्री कालेज में वह बहुउद्देश्शीय भवन का शिलान्यास करेंगे और कालेज के वार्षिक उत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लेंगे। शाम को वह सेरा के विश्राम गृह में जनसमस्याएं सुनेंगे।
शुक्रवार को मुख्यमंत्री सुबह साढे दस बजे गौना के हैलिपैड से जिला ऊना के बंगाणा क्षेत्र के लिए रवाना हो जाएंगे।