ब्लॉग

हिमाचल: विधानसभा बजट सत्र के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम, 700 पुलिस जवान रहेंगे तैनात

शिमला शहर यातायात प्रबंधन व विधानसभा परिसर सुरक्षा में 700 पुलिस कर्मियों की तैनाती

​शिमला: हिमाचल प्रदेश विधानसभा के 18 मार्च से शुरू होने वाले बजट सत्र के दौरान सुरक्षा, कानून-व्यवस्था तथा कार्यवाही के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए जिला पुलिस शिमला ने कमर कस ली है। जिला प्रशासन, गुप्तचर विभाग और विधानसभा अधिकारियों के समन्वय से एक व्यापक एवं बहु-स्तरीय (Multi-layer) सुरक्षा चक्र स्थापित किया गया है। बजट सत्र के दौरान समस्त सुरक्षा व्यवस्थाओं का संचालन एवं समन्वय श्रीमती अंजुम आरा, आईपीएस, पुलिस उपमहानिरीक्षक (दक्षिण खंड, शिमला) की सीधी देखरेख में सुनिश्चित किया जाएगा।

​कानून-व्यवस्था के प्रभावी प्रबंधन के लिए विधानसभा परिसर और उसके आसपास के क्षेत्रों को चार प्रमुख पुलिस सेक्टरों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक सेक्टर की कमान राजपत्रित पुलिस अधिकारियों को सौंपी गई है, जो अपनी निगरानी में पुलिस बल की तैनाती और ड्यूटी का निर्वहन सुनिश्चित करेंगे। सुरक्षा तैयारियों को अंतिम रूप देते हुए पुलिस उपमहानिरीक्षक और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शिमला द्वारा सभी तैनात अधिकारियों और जवानों को सतर्कता बरतने तथा किसी भी आपात स्थिति से निपटने के संबंध में विस्तृत ब्रीफिंग दी गई है। शहर के संवेदनशील स्थानों और विभिन्न प्रवेश बिंदुओं पर दिनांक 17 मार्च से ही 24×7 नाकाबंदी कर दी गई है ताकि संदिग्ध गतिविधियों पर पैनी नजर रखी जा सके।

​सुरक्षा बल की तैनाती के विवरण के अनुसार, इस सत्र के लिए कुल 15 राजपत्रित अधिकारी, 27 अराजपत्रित अधिकारी (NGOs), 19 मुख्य आरक्षी और 260 आरक्षी सहित कुल 306 पुलिस जवान तैनात रहेंगे। इसके अतिरिक्त, सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूती प्रदान करने के लिए 200 होमगार्ड जवान और क्विक रिएक्शन टीम (QRT) व विशेष सुरक्षा इकाई (SSU) के प्रशिक्षित कमांडो विभिन्न रणनीतिक स्थानों पर तैनात रहेंगे। कुल मिलाकर शिमला शहर और विधानसभा परिसर में लगभग 700 पुलिस और होमगार्ड कर्मियों का बल तैनात रहेगा। साथ ही, पुलिस विभाग की विशेष शाखा (राज्य अन्वेषण विभाग) के कर्मचारी सादे कपड़ों में रहकर खुफिया जानकारी एकत्र करेंगे।

​यातायात प्रबंधन को लेकर भी विशेष योजना लागू की गई है। शिमला शहर में सुचारू ट्रैफिक व्यवस्था के लिए एक राजपत्रित अधिकारी के पर्यवेक्षण में 145 नियमित ट्रैफिक कर्मियों के साथ-साथ 27 अतिरिक्त पुलिस जवान, 20 होमगार्ड और 22 मोटरसाइकिल राइडर तैनात किए गए हैं। तकनीक के स्तर पर सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए पूरे क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरों को सक्रिय किया गया है और आवश्यकतानुसार ड्रोन, डिजिटल वीडियोग्राफी व फोटोग्राफी के जरिए निगरानी की जाएगी। जिला प्रशासन ने भी शहर को पांच प्रशासनिक सेक्टरों में बांटकर सभी विभागों को आपसी समन्वय से कार्य करने के निर्देश दिए हैं।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शिमला ने आम जनता और आगंतुकों से अपील की है कि वे सुरक्षा जांच में सहयोग करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को दें।

मित्रों को खुश करने में डूबी सरकार, जनता भुगत रही आर्थिक मार” – विपिन परमार

धर्मशाला: भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं सुलह विधानसभा क्षेत्र से विधायक विपिन सिंह परमार ने कहा कि प्रदेश की वर्तमान सरकार द्वारा आज लिया गया निर्णय न केवल देर से लिया गया कदम है, बल्कि यह इस बात का भी स्पष्ट प्रमाण है कि प्रदेश की आर्थिक बदहाली के लिए सीधे तौर पर स्वयं मुख्यमंत्री और उनकी कार्यप्रणाली जिम्मेदार है। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस फैसले को सरकार आज मजबूरी में ले रही है, उसे बहुत पहले ही जनहित में लागू किया जाना चाहिए था।
विपिन सिंह परमार ने कहा कि प्रदेश की जनता भली-भांति जानती है कि बीते समय में किस प्रकार सत्ता का दुरुपयोग करते हुए कैबिनेट रैंक और अन्य लाभकारी पद “रेवड़ियों” की तरह बांटे गए। यह सब केवल अपने चहेते मित्रों और समर्थकों को खुश करने के लिए किया गया। शासन का यह गैर-जिम्मेदाराना रवैया ही आज हिमाचल प्रदेश को आर्थिक गर्त में धकेलने का मुख्य कारण बना है।
विपिन सिंह परमार ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता प्रदेश का विकास नहीं, बल्कि अपने करीबी लोगों को लाभ पहुंचाना रही। जिस प्रकार से बिना किसी ठोस आवश्यकता के कैबिनेट रैंक प्रदान किए गए, उससे सरकारी खजाने पर अनावश्यक बोझ पड़ा। आज जब वित्तीय स्थिति चरमरा चुकी है, तब जाकर सरकार को अपनी गलतियों का एहसास हो रहा है — लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी है।
विपिन सिंह परमार ने कहा कि यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर प्रदेश के हितों को दरकिनार कर किसके दबाव में या किस स्वार्थ के चलते यह फैसले लिए गए? क्या मुख्यमंत्री को उस समय प्रदेश की आर्थिक स्थिति का अंदाजा नहीं था, या फिर जानबूझकर आंखें मूंद ली गईं? यदि ऐसा है, तो यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं बल्कि जनता के विश्वास के साथ खुला धोखा है।
विपिन सिंह परमार ने कहा कि आज सरकार द्वारा कुछ कैबिनेट रैंक वापस लेने का निर्णय केवल एक दिखावटी कदम प्रतीत होता है। यह आधा-अधूरा प्रयास है, जिससे न तो प्रदेश की आर्थिक स्थिति सुधरेगी और न ही जनता का भरोसा लौटेगा। जब तक उन सभी सुख-सुविधाओं और विशेषाधिकारों को तत्काल प्रभाव से समाप्त नहीं किया जाता, जो इन पदों के साथ दिए गए थे, तब तक यह कदम निरर्थक ही रहेगा।
विपिन सिंह परमार ने कहा कि प्रदेश की जनता यह जानना चाहती है कि जिन लोगों को अब तक सरकारी खर्चे पर सुविधाएं दी जा रही थीं — गाड़ियां, स्टाफ, आवास और अन्य लाभ — उनका खर्च आखिर किसके पैसे से चल रहा था? यह स्पष्ट है कि यह सब जनता की गाढ़ी कमाई से ही हो रहा था। ऐसे में सरकार की जवाबदेही और भी बढ़ जाती है।
विपिन सिंह परमार ने कहा कि मुख्यमंत्री ने अपने पद की गरिमा और जिम्मेदारी को नजरअंदाज करते हुए निजी संबंधों को प्राथमिकता दी। शासन चलाने का यह तरीका न केवल अलोकतांत्रिक है, बल्कि प्रदेश के भविष्य के साथ खिलवाड़ भी है। आज हिमाचल प्रदेश जिस आर्थिक संकट से गुजर रहा है, उसकी जड़ में यही कुप्रबंधन और गलत नीतियां हैं।
विपिन सिंह परमार ने कहा कि अब केवल प्रतीकात्मक निर्णयों से काम नहीं चलेगा। मुख्यमंत्री को अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करनी होगी और यह बताना होगा कि प्रदेश को इस स्थिति तक पहुंचाने के लिए कौन जिम्मेदार है। साथ ही, उन सभी फैसलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, जिनके कारण प्रदेश की आर्थिक स्थिति बिगड़ी।
विपिन सिंह परमार ने कहा कि प्रदेश सरकार को तुरंत प्रभाव से सभी अनावश्यक खर्चों पर रोक लगानी चाहिए, अपने चहेते लोगों को दी जा रही सभी सुविधाएं वापस लेनी चाहिए और एक पारदर्शी वित्तीय नीति अपनानी चाहिए। अन्यथा, आने वाले समय में प्रदेश की जनता इस कुप्रबंधन का जवाब लोकतांत्रिक तरीके से जरूर देगी।
विपिन सिंह परमार ने कहा कि हिमाचल की जनता अब जागरूक है और वह यह सब चुपचाप सहन करने वाली नहीं है। सरकार को यह समझ लेना चाहिए कि सत्ता सेवा के लिए होती है, स्वार्थ सिद्धि के लिए नहीं। यदि सरकार ने अब भी अपनी कार्यशैली नहीं बदली, तो जनता स्वयं इसका कठोर उत्तर देने के लिए तैयार है।

शिमला: शिलाई में पेड़ों के अवैध कटान के विरोध में ABVP ने किया धरना-प्रदर्शन

शिमला: अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद जिला शिमला द्वारा सिरमौर के शिलाई क्षेत्र में हुए पेड़ों के अवैध कटान के विरोध में उपायुक्त कार्यालय शिमला के बाहर धरना-प्रदर्शन किया गया |
विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि शिलाई क्षेत्र में हो रहा अवैध कटान न केवल प्राकृतिक संतुलन को प्रभावित कर रहा है, बल्कि स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी गंभीर खतरा उत्पन्न कर रहा है।

प्रदेश सह मंत्री तेजस्विनी गुलेरिया ने कहा कि शिलाई की यह घटना पूरे प्रदेश को शर्मसार करने वाली है और प्रदेश सरकार द्वारा अभी तक इस मामले को लेकर उच्चअधिकारीयों और दोषियों पर कोई बड़ी कार्यवाही नहीं की गयी है |उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन द्वारा जल्द ही उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो संगठन आगामी दिनों में बड़े स्तर पर आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा।

संजौली इकाई अध्यक्ष ऋतिक जी ने कहा कि आए दिन प्रदेश में ऐसी बढ़ती घटनाओं के कारण प्रदेश में वन माफिया, खनन माफिया और नशा माफिया के हौंसले बुलंद हुए जा रहे है | शिलाई के इस मामले मे प्रदेश सरकार चुप्पी साधे हुए है जिससे प्रतीत होता है की सरकार दोषियों को बचाने का काम कर रही है | अगर प्रदेश सरकार द्वारा जल्द दोषियों पर कोई बड़ी कार्यवाही नहीं की गई तो विद्यार्थी परिषद आने वाले समय मे प्रदेश भर मे उग्र आंदोलन करेगी जिसकी जिम्मेदारी प्रदेश सरकार की होगी |

शिमला : भाजपा विधायक दल की बैठक; जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बनाई

शिमला: भारतीय जनता पार्टी के विधायक दल की महत्वपूर्ण बैठक आज विली पार्क, शिमला में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने की। बैठक में प्रदेश की वर्तमान कांग्रेस सरकार की नीतियों, प्रशासनिक विफलताओं और जनविरोधी फैसलों पर तीखी चर्चा हुई तथा आगामी विधानसभा सत्र में सरकार को मजबूती से घेरने की रणनीति तैयार की गई।
बैठक में विधायकों ने कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति लगातार बिगड़ रही है, विकास कार्य ठप पड़े हैं और कांग्रेस सरकार केवल घोषणाओं तक सीमित होकर रह गई है। कर्मचारियों, पेंशनरों, किसानों, बागवानों और बेरोजगार युवाओं से किए गए वादे पूरे न होने से प्रदेश की जनता निराश और त्रस्त है। भाजपा विधायक दल ने निर्णय लिया कि इन सभी मुद्दों को विधानसभा के भीतर और बाहर पूरी मजबूती से उठाया जाएगा।
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस सरकार अपने वादों को निभाने में पूरी तरह विफल रही है और प्रदेश में कुशासन का माहौल बन गया है। भाजपा विधायक दल जनता की आवाज बनकर सदन में सरकार से जवाब मांगेगा और प्रदेश के हितों से जुड़े हर मुद्दे पर सरकार को कठघरे में खड़ा करेगा।
बैठक में भाजपा विधायक दल के सदस्य विपिन परमार, सतपाल सत्ती, रणधीर शर्मा, अनिल शर्मा, सुधीर शर्मा, सुखराम चौधरी, बिक्रम ठाकुर, राकेश जमवाल, बलबीर वर्मा, डीएस ठाकुर, जीत राम कटवाल, इंदर दत्त लखनपाल, सुरिंदर शौरी, आशीष शर्मा, डॉ. जनक राज, विनोद कुमार, इंद्र सिंह गांधी, लोकेंद्र कुमार, रीना कश्यप, पूर्ण चंद, दिलीप ठाकुर, प्रकाश राणा और रणवीर निक्का उपस्थित रहे।
बैठक में यह भी तय किया गया कि कांग्रेस सरकार की नीतियों से प्रदेश की जनता को हो रही परेशानियों को लेकर भाजपा पूरे प्रदेश में जनजागरण अभियान चलाएगी और सरकार की विफलताओं को जनता के सामने उजागर करेगी।

हिमाचल: कल से शुरू होगा विधानसभा सत्र का दूसरा चरण ; सत्र में गूंजेंगे 834 सवाल; 21 मार्च को पेश होगा बजट

शिमला: प्रदेश  विधान सभा सचिवालय के मुख्य समिति कक्ष में आयोजित प्रैस वार्ता को सम्बोधित करते हुए  विधान सभा अध्यक्ष कुलदीप सिह पठानिया ने कहा कि  एक महीने  की  ब्रेक  के बाद चौदहवीं विधान सभा के 11वें सत्र का दूसरा चरण कल 18 मार्च, 2026 (बुधवार) को पूर्वाह्न 11:00 बजे आरम्भ होगा। इस चरण में कुल 13 बैठकें आयोजित की जाएँगी तथा इस प्रकार पिछली  3 बैठकों समेत इस बजट सत्र में कुल 16 बैठकें होंगी।

 पठानिया ने कहा कि 18,19 व 20 मार्च, 2026 को राज्यपाल महोदय के अभिभाषण पर चर्चा होगी तथा  मुख्यमंत्री 20 मार्च को चर्चा का जवाब देंगे। 21 मार्च, 2026 को शनिवार के दिन पूर्वाह्न 11:00 बजे माननीय मुख्यमंत्री हि0प्र0 ठाकुर सुखविन्दर सिंह सुक्खू बजट अनुमान वित्तीय  वर्ष 2026-27 को सदन में प्रस्तुत करेंगे।  23,24 व 25 मार्च,2026 को बजट अनुमान वित्तीय वर्ष 2026 -27 पर सामान्य चर्चा होगी जबकि 25 मार्च को सामान्य चर्चा का समापन होगा। 27,28 व 30 मार्च, 2026 को बजट अनुमान वित्तीय वर्ष 2026-27 की  मांगो पर चर्चा एवं मतदान होगा। जबकि 30 मार्च, 2026 को बजट अनुमान वित्तीय वर्ष 2026-27 की मांगो पर चर्चा एवं मतदान तथा विनियोग विधेयक पूर-स्थापना, विचार – विमर्श एवं पारण होगा।  31 मार्च, 2026 (मंगलवार)का दिन गैर सरकारी सदस्य कार्य दिवस के लिए निर्धारित किया गया है। 01 व 02 अप्रैल, 2026 को भी शासकीय एवं विधायी कार्य होंगे।

इस अवसर पर उन्होंनेकहा कि अभी तक माननीय सदस्यों से प्रश्नों से सम्बन्घित कुल 834 प्रश्नों की सूचनाएं प्राप्त हुई हैं जिसमें 665 तारांकित तथा 169 अतारांकित जिसमें पिछले चरण की 125 सूचनाएं (111 तारांकित तथा 14 अतारांकित)भी शामिल हैं। यह सभी सूचनाएं  online माध्यम से प्राप्त हुई हैं जिन्हें नियमानुसार सरकार को आगामी कार्यवाही हेतु प्रेषित किया गया है।  इसके अतिरिक्त नियम 62 के तहत 8 सूचनाएं, नियम 101 के तहत 3 सूचनाएं, तथा नियम 130 के अन्तर्गत 5 सूचनाएं माननीय सदस्यों से प्राप्त हुई हैं को भी आगामी कार्यवाही हेतु सरकार को प्रेषित कर दिया गया है।  

             उन्होंने कहा कि माननीय सदस्यों से जो सूचनाएं प्रश्नों के माध्यम से प्राप्त हुई हैं वह मुख्यत: इन्दिरा गांधी प्यारी बहना सुख सम्मान निधि, HP बोर्ड से CBSE बोर्ड में स्कूलों का विलय, सड़कों, पुलों का निर्माण, स्वीकृत सड़कों की DPR’s प्रदेश में महाविद्यालयों, स्कूलों, स्वास्थ्य संस्थानों इत्यादि का उन्नयन एवं विभिन्न विभागों में रिक्त पदों की पदपूर्ति, पर्यटन, उद्यान, पेयजल की आपूर्ति, युवाओं में बढ़ते नशे के प्रयोग की रोकथाम, बढ़ते अपराधिक मामलों व सौर ऊर्जा तथा परिवहन व्यवस्था  पर आधारित है। इसके अतिरिक्त माननीय सदस्यों ने प्रश्नों के माध्यम से अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों से सम्बन्धित मुख्य मुद्दों को भी उजागर किया है।

              पठानिया ने कहा कि सत्र निर्विघ्न तथा सुचारू रूप से चले उनका सतापक्ष तथा प्रतिपक्ष के माननीय सदस्यों से अनुरोध रहेगा कि वे सत्र के संचालन में रचनात्मक सहयोग दें तथा सदन के समय का सदुपयोग सार्थक चर्चा तथा प्रदेश हित से जुड़े मुद्दों के लिए करें जिसका लाभ प्रदेश की जनता को मिल सकें। मेरा सरकार से भी आग्रह रहेगा कि वह भी माननीय सदस्यों द्वारा उठाए गए विषयों के उत्तर तथ्यों तथा सहजता के साथ उपलब्ध करवाने का प्रयास करें। प्रेस वार्ता के दौरान पत्रकारों द्वारा कई प्रश्न भी पूछे गए जिनका विधान सभा अध्यक्ष द्वारा सिलसिलेबार उत्तर दिया गया।

प्रदेश में सरकार और मुख्यमंत्री के खिलाफ अविश्वास का माहौल – जयराम ठाकुर

शिमला : विधानसभा स्थित अपने कार्यालय में मीडिया से औपचारिक बातचीत के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने प्रदेश की वर्तमान सरकार पर चौतरफा हमला बोलते हुए भ्रष्टाचार, बिगड़ती कानून व्यवस्था और राज्य के प्राकृतिक व वित्तीय संसाधनों की कथित लूट को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। जयराम ठाकुर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आगामी विधानसभा सत्र सरकार के लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण रहने वाला है क्योंकि विपक्ष ने प्रदेश में ठप पड़े विकास कार्यों, कानून व्यवस्था की दयनीय स्थिति और अन्य जनहित के मुद्दों पर नियमबद्ध नोटिस दिए हैं, जिनका जवाब देना सरकार के लिए टेढ़ी खीर साबित होगा। पूरे प्रदेश में इस समय कांग्रेस सरकार और मुख्यमंत्री के खिलाफ़ अविश्वास का एक  माहौल खड़ा हुआ है। जो ये दर्शाता है कि जनता इस सरकार से खुश नहीं है। नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री पर सदन को लगातार झूठ बोलकर गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह सरकार की कार्यशैली का हिस्सा बन चुका है और मुख्यमंत्री के भ्रामक बयानों को विशेषाधिकार हनन का मामला मानते हुए इसकी गहन जांच की आवश्यकता है। उन्होंने परंपराओं के उल्लंघन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश के संसदीय इतिहास में संभवतः यह पहली बार हुआ है जब राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा को जानबूझकर लंबित रखा गया है, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि सरकार इस समय भारी असमंजस और वैचारिक भटकाव की स्थिति से गुजर रही है। राज्य की चरमराती आर्थिक स्थिति को सबसे बड़ा मुद्दा बताते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी ने वित्तीय संकट और विकास कार्यों पर लगे ‘विराम’ को लेकर सरकार से जवाब मांगा है, लेकिन सत्ता पक्ष के पास इन बुनियादी सवालों का कोई ठोस उत्तर नहीं है। जयराम ठाकुर ने प्रदेश में सक्रिय भू-माफिया और बिचौलियों पर प्रहार करते हुए कहा कि धारा 118 के नाम पर लोगों को गुमराह कर अवैध उगाही करने वाला एक बड़ा गिरोह सक्रिय है, जिसके चलते प्रदेश से उद्योगों का निरंतर पलायन हो रहा है और साढ़े तीन साल बीत जाने के बाद भी जनहित के संस्थानों को बंद करने का सिलसिला थमा नहीं है। भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सरकार को आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने एंटी करप्शन ब्यूरो और विजिलेंस विभाग को सूचना का अधिकार के दायरे से बाहर करने के निर्णय पर कड़ी आपत्ति जताई और सवाल किया कि आखिर सरकार ऐसी कौन सी गोपनीय बातें हैं जिन्हें जनता से छिपाना चाहती है। उन्होंने तंज कसा कि जिस आरटीआई कानून को डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार पारदर्शी शासन के लिए लाई थी, वर्तमान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू उसी कानून की धज्जियां उड़ाकर उसे राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि सत्ता स्थाई नहीं होती और अब उनके पास गिने-चुने दिन ही शेष बचे हैं। सरकारी संस्थानों के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कैबिनेट रैंक वापस लेने की हालिया प्रक्रिया महज जनता की आंखों में धूल झोंकने का एक असफल प्रयास है, क्योंकि यदि सरकार वास्तव में फिजूलखर्ची रोकना चाहती थी, तो यह निर्णय माननीय न्यायालय द्वारा मुख्य संसदीय सचिवों को हटाए जाने के तुरंत बाद लिया जाना चाहिए था। अंत में उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि जब सारा सरकारी खजाना अपने ‘खास मित्रों’ में लुटा दिया गया है, तब केवल सुर्खियां बटोरने के लिए किए जा रहे ऐसे दिखावटी पैंतरे जनता स्वीकार नहीं करेगी और सरकार को सदन के भीतर एक-एक पैसे के हिसाब और अपने कुशासन का जवाब देना ही होगा।

शिक्षा और स्वास्थ्य बजट में नहीं होगी कोई कटौती; CM सुक्खू के कॉलेजों में न्यू एज के पाठ्यक्रम और अतिरिक्त भाषा कार्यक्रम शुरू करने के निर्देश

न्यू एज पाठ्यक्रमों और भाषा कार्यक्रमों पर दिया बल
उच्च शिक्षा सुधारों पर प्रधानाचार्यों के सम्मेलन की अध्यक्षता

शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज यहां उच्च शिक्षा में सुधारों पर आयोजित एक दिवसीय प्रधानाचार्य सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए कहा कि वित्तीय चुनौतियों के बावजूद शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रों के बजट में कोई कटौती नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि शिक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और दूरदराज क्षेत्रों में भी विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवाने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों में आत्मविश्वास का संचार करना अत्यंत आवश्यक है ताकि वे भविष्य की चुनौतियों का पूर्ण आत्मविश्वास और प्रभावी ढंग से सामना कर सकें। इस दिशा में शिक्षा और शिक्षकों की अहम भूमिका होती है। शिक्षा क्षेत्र में बदलाव लाने के लिए सरकार ने कई पहल की हैं। उन्होंने विज्ञान, वाणिज्य और ललित कला जैसे विशेष महाविद्यालय खोलने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि हमीरपुर में 50 बीघा भूमि पर एक विज्ञान कॉलेज स्थापित किया जा रहा है, जिसके लिए सरकार ने 20 करोड़ रुपये जारी किए हैं। इसके अतिरिक्त राज्यभर में वाणिज्य और अन्य विशेष कॉलेज भी स्थापित किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उच्च शिक्षा में मौजूदा कमियों को दूर करने के लिए और इस दिशा में सार्थक सुधार लाने के दृष्टिगत प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सहायक प्राध्यापकों के 400 और जूनियर सहायक प्राध्यापकों के भी 400 पदों को भरने की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कॉलेजों में न्यू एज के पाठ्यक्रम और अतिरिक्त भाषा कार्यक्रम शुरू करने के निर्देश दिए ताकि विद्यार्थियों की रोजगार प्राप्त करने की क्षमता बढ़ सके। महाविद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्कूलों की तर्ज पर कॉलेज रैंकिंग प्रणाली भी लागू की गई है।
ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि शिक्षा विभाग का पुनर्गठन करते हुए स्कूल शिक्षा निदेशालय और उच्च शिक्षा निदेशालय की स्थापना की गई है। उन्होंने कहा कि राज्य के शिक्षक बहुत सक्षम हैं और ये सुधार उन्हें और बेहतर प्रदर्शन करने में मदद करेंगे। उन्होंने कहा कि सीबीएसई स्कूलों की शुरुआत के बाद इनमें छात्रों के दाखिलों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अगले दो महीनों में इन स्कूलों में आवश्यकतानुसार सभी शिक्षकों की नियुक्ति सुनिश्चित की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र का सुदृढ़ीकरण सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। सरकार के प्रयासों से मेडिकल कॉलेजों में अत्याधुनिक एमआरआई मशीनें स्थापित की गई हैं और स्वास्थ्य संस्थानों में चरणबद्ध तरीके से रोबोटिक सर्जरी सुविधा की शुरूआत की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार के पुरानी पेंशन योजना के बहाली के निर्णय के फलस्वरूप केन्द्र सरकार ने राज्य को मिलने वाला राजस्व घाटा अनुदान बंद कर दिया गया है और 1600 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता भी प्रदान नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि ओपीएस कोई राजनीतिक निर्णय नहीं है, बल्कि सरकारी कर्मचारी सम्मानजनक तरीके से वृद्धावस्था में जीवन व्यतीत कर सकें इसलिए सामाजिक सुरक्षा देने के लिए लिया गया निर्णय है।
मुख्यमंत्री ने राजकीय महाविद्यालयों की इंटरनल रैंकिंग भी जारी की। समग्र रैंकिंग में राजकीय महाविद्यालय हमीरपुर पहले स्थान पर रहा, राजकीय महाविद्यालय संजौली दूसरे और राजकीय कन्या महाविद्यालय, शिमला तीसरे स्थान पर रहा। टियर-1 में राजकीय महाविद्यालय हमीरपुर पहले, संजौली कॉलेज दूसरे और राजकीय कन्या महाविद्यालय, शिमला तीसरे स्थान पर रहा। टियर-2 में राजकीय महाविद्यालय भोरंज पहले, राजकीय महाविद्यालय सरस्वतीनगर (शिमला) दूसरे और राजकीय महाविद्यालय सुन्नी तीसरे स्थान पर रहा। टियर-3 में राजकीय महाविद्यालय कफोटा पहले, राजकीय महाविद्यालय दाड़लाघाट दूसरे और राजकीय महाविद्यालय चैलकोट तीसरे स्थान पर रहा। मुख्यमंत्री ने सभी शीर्ष रैंकिंग वाले कॉलेजों को सम्मानित किया और प्रत्येक को एक-एक लाख रुपये का चेक प्रदान किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश संस्कृत अकादमी का विक्रमी संवत कैलेंडर भी जारी किया और बिलासपुर, धर्मशाला तथा चौड़ा मैदान के राजकीय महाविद्यालयों की डिजिटल पहलों का वर्चुअल शुभारम्भ किया।
कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर, शिक्षा सचिव राकेश कंवर, निदेशक उच्च शिक्षा डॉ. अमरजीत शर्मा, राज्य उच्च शिक्षा परिषद के अध्यक्ष प्रो. सर्बजोत सिंह बहल, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. महावीर सिंह और विभिन्न कॉलेजों के प्रधानाचार्य उपस्थित थे।

निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से समझौता करने वाले ठेकेदारों के खिलाफ होगी सख्त कार्रवाई – विक्रमादित्य 

शिमला: लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने आज यहां प्रेस-वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश में विकास कार्योंं को गति देने के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयासरत और इस दिशा में सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ नवोन्मेषी पहल की जा रही है।
उन्होंने कहा कि लोक निर्माण और शहरी विकास विभाग के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में सड़क, आधारभूत संरचना और शहरी सुविधाओं को मजबूत बनाने पर बल दिया जा रहा है। राज्य के दूरदराज, पहाड़ी और जनजातीय क्षेत्रों में सड़क संपर्क को बेहतर बनाना सरकार की विशेष प्राथमिकता है।
लोक निर्माण मंत्री ने कहा कि हाल ही में उन्होंने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी तथा शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर से भेंट कर प्रदेश से जुड़े विभिन्न मुद्दों को उनके समक्ष मजबूती से प्रस्तुत किया। इस दौरान राज्य सरकार की ओर से भेजे गए प्रस्तावों को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है।
लोक निर्माण एवं शहरी विकास से जुड़े कार्यों के तहत प्रदेश में विकास को नई गति मिली है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा लगभग 600 करोड़ रुपये के प्रस्ताव केन्द्र को भेजे गए हैं। शहरी विकास विभाग को नोडल एजेंसी बनाते हुए ‘राज्यों को पूंजीगत निवेश हेतु विशेष सहायता योजना 2025-26’ के अंतर्गत 366 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय से स्वीकृति प्राप्त हुई है। उन्होंने कहा कि शहरी विकास विभाग के अथक प्रयासों से यह स्वीकृति प्राप्त हुई है। हिमाचल प्रदेश के लिए यह एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है जिससे प्रदेश में शहरी विकास को नई गति मिलेगी तथा आम जनता को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
इन परियोजनाओं में शिमला की सब्जी मंडी के पुनर्विकास के लिए 140 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं, जिसके अंतर्गत आधुनिक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, मल्टीलेवल पार्किंग, नगर निगम कार्यालय, रिटेल आउटलेट्स, होटल, मल्टीस्क्रीन, फूड कोर्ट एवं वेयरहाउस जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसके अतिरिक्त, हमीरपुर के पुराने एचआरटीसी बस स्टैंड के पुनर्विकास के लिए 80 करोड़ रुपये की मंजूरी मिली है, जहां एक आधुनिक सिटी सेंटर विकसित किया जाएगा, जिसमें कन्वेंशन सेंटर, पार्किंग, कमर्शियल स्पेस, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, रिटेल आउटलेट्स, गेमिंग जोन, फूड कोर्ट एवं मल्टीस्क्रीन सुविधाएं शामिल होंगी। इसके अतिरिक्त, धर्मशाला नगर निगम के लिए नेबरहुड इम्प्रूवमेंट प्लान के तहत 20 करोड़ रुपये की परियोजना भी स्वीकृत हुई है। इन परियोजनाओं के माध्यम से प्रदेश में शहरी आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ करने के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा, जो हिमाचल प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क विकास के तहत प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत लगभग 1500 किलोमीटर सड़कों का निर्माण 2300 करोड़ रुपये की लागत से किया जाएगा। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है और 15 अप्रैल से कार्य आरंभ कर दिया जाएगा।
विक्रमादित्य सिंह ने प्रदेशवासियों से अपील की कि सड़क निर्माण कार्यों में भूमि उपलब्ध करवाने के लिए सहयोग करें, क्योंकि सड़क निर्माण के लिए भूमि की कमी सबसे बड़ी बाधा बन रही है। उन्होंने कहा कि बजट की कोई कमी नहीं है, लेकिन भूमि उपलब्धता सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता सुनिश्चित की जाएगी और गुणवत्ता से समझौता करने वाले ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्हें ब्लैकलिस्ट भी किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार पारदर्शिता, गुणवत्ता और समयबद्धता के साथ विकास कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

बोर्ड-कॉरपोरेशनों में 40 से अधिक राजनीतिक नियुक्तियां, वेतन बढ़ाकर अब 20% कटौती का दिखावा – संदीपनी

शिमला: भाजपा प्रदेश प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज ने हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि एक ओर प्रदेश की जनता महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक संकट से जूझ रही है, वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुखू के नेतृत्व वाली सरकार अपने नेताओं और समर्थकों को बोर्ड-कॉरपोरेशनों, आयोगों और सलाहकार पदों पर नियुक्त कर “मुख्यमंत्री की फौज” तैयार करने में लगी हुई है।
संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि प्रदेश सरकार ने सबसे पहले राजनीतिक नियुक्तियों वाले बोर्ड और कॉरपोरेशनों के चेयरमैन और वाइस-चेयरमैन के मानदेय में भारी बढ़ोतरी की। पहले इन पदों पर ₹30,000 प्रतिमाह मानदेय मिलता था, जिसे बढ़ाकर ₹80,000 प्रतिमाह कर दिया गया। इसके अलावा आवास, आतिथ्य और अन्य भत्तों को जोड़कर इन पदों पर बैठे लोगों का कुल मासिक पैकेज लगभग ₹1.11 लाख से ₹1.30 लाख तक पहुंच गया।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में मार्च 2026 तक करीब 40 चेयरमैन और वाइस-चेयरमैन विभिन्न बोर्डों और कॉरपोरेशनों में नियुक्त किए जा चुके हैं। अब जब जनता के बीच इस मुद्दे पर सवाल उठे तो सरकार ने दिखावे के लिए 20 प्रतिशत वेतन कटौती की घोषणा कर दी, जो केवल “आंखों में धूल झोंकने वाला कदम” है।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आते ही अपने नेताओं और समर्थकों को खुश करने के लिए बड़ी संख्या में सलाहकार, ओएसडी, मीडिया सलाहकार, आईटी सलाहकार, राजनीतिक सलाहकार और विभिन्न आयोगों के अध्यक्ष व सदस्य नियुक्त किए। इनमें कई पदों को कैबिनेट रैंक तक दिया गया।
उन्होंने कहा कि सरकार ने प्रधान मीडिया सलाहकार, आईटी सलाहकार, राजनीतिक सलाहकार, ओएसडी, राज्य योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष, विभिन्न आयोगों के चेयरमैन, बोर्ड-कॉरपोरेशनों के चेयरमैन और वाइस-चेयरमैन जैसे अनेक पदों पर कांग्रेस नेताओं की नियुक्तियां की हैं। इसके अलावा विभिन्न संस्थानों और बोर्डों में भी कांग्रेस से जुड़े लोगों को नियुक्त किया गया।
संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि प्रदेश में सहकारी बैंक, पर्यटन बोर्ड, उद्योग विकास निगम, सहकारी एवं ग्रामीण विकास बैंक, जोगिंद्रा केंद्रीय सहकारी बैंक, राज्य अनुसूचित जाति आयोग, महिला आयोग, कौशल विकास निगम, शिक्षा बोर्ड, फूड कमीशन और अन्य कई संस्थानों में राजनीतिक नियुक्तियां की गई हैं।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने मुख्य संसदीय सचिव (CPS) जैसे पदों पर भी नियुक्तियां कर दीं, जबकि इन पदों को लेकर पहले से ही संवैधानिक और कानूनी सवाल उठते रहे हैं। इसके बावजूद सरकार ने छह विधायकों को मुख्य संसदीय सचिव बनाकर उन्हें सुविधाएं और सरकारी संसाधन उपलब्ध करवाए।
भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार का पूरा ध्यान जनता की समस्याओं को हल करने के बजाय अपने नेताओं को पद और सुविधाएं देने पर केंद्रित है। प्रदेश में विकास कार्य ठप पड़े हैं, सेवानिवृत्त कर्मचारी सड़कों पर आंदोलन कर रहे हैं, युवा बेरोजगार हैं, किसान-बागवान परेशान हैं, लेकिन सरकार का ध्यान केवल राजनीतिक नियुक्तियों पर है।
संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि कांग्रेस सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि जब प्रदेश आर्थिक संकट से गुजर रहा है, तब इतने बड़े पैमाने पर राजनीतिक नियुक्तियां कर जनता के पैसे से मोटे वेतन और सुविधाएं क्यों दी जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि भाजपा का मानना है कि यह सरकार जनता के हितों की बजाय “अपनों को पद और सुविधाएं देने वाली सरकार” बनकर रह गई है। भाजपा ने मांग की कि प्रदेश सरकार अनावश्यक राजनीतिक नियुक्तियों को समाप्त करे और प्रदेश के सीमित संसाधनों का उपयोग जनता के विकास और कल्याण के लिए करे।

जल्द ही कांग्रेस हर जिले में बीएलओ व पार्टी कार्यकर्ताओं के लिये चलाएगी प्रशिक्षण कार्यक्रम

शिमला : अखिल भारतीय कांग्रेस ने प्रदेश में शुरू हो रहें एसआईआर,मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनर्निरक्षण को एक चुनाव की तरह लेने व इस प्रकिया पर पार्टी नेताओं से विशेष ध्यान देने का आह्वान करते हुए कहा है कि किसी भी वोट चोरी के प्रयास को रोकने के लिए हर बूथ पर मतदाता सूची के विशेष पुनर्निरक्षण पर पूरा ध्यान देते हुए यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके क्षेत्र से कोई भी मतदाता न तो सूची से बाहर हो,और न ही अनधिकृत तौर पर शामिल हो।इसके लिये बीएलओ के साथ साथ पार्टी कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना होगा।
आज प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की ओर से एसआईआर पर आयोजित एक विशेष कार्यशाला में एसआईआर की प्रक्रिया की पूरी जानकारी देते हुए बताया गया कि इसके लिए निकट भविष्य में हर जिले में बीएलओ व पार्टी कार्यकर्ताओं के लिये एक प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जाएगा,जिससे वह सभी मतदाताओं के नाम मतदाता सूचियों में शामिल करने के सभी प्रपत्रों को सुगमता से भर सकें। उन्होंने कहा कि यह बहुत ही महत्वपूर्ण है,और इसे एक चुनाव की तरह ही लिये जाना चाहिये। उन्होंने कहा कि भाजपा एस आई आर के नाम पर एक सोची समझी रणनीति के तहत मतदाता सूचियों से उन नामों को हटा रही है जो उन्हें वोट नही देते। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र पर सीधा प्रहार है और जनमत की चोरी रोकने के लिए सभी मतदाताओं को जागरूक करना होगा।
आज के इस कार्यक्रम में पार्टी के वरिष्ठ नेता,मंत्रीगण,
कांग्रेस जिलाध्यक्ष विधायक, पूर्व विधायक पिछले चुनावों में पार्टी के प्रत्याशी रहें सभी नेता व अग्रणी संगठनों के प्रदेश प्रमुख मौजूद थे।
—————-
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार ने कहा है कि जल्द ही पीसीसी जिला व ब्लॉक की कार्यकारणी गठन होने के बाद प्रदेश में एसआईआर की प्रक्रिया पर पूरी नजर रखने व बूथ पर पर पार्टी कार्यकर्ताओं को अहम जिम्मेदारी दी जाएगी। उन्होंने कहा कि इसके पश्चात ही प्रदेश में एस आई आर से सम्बंधित पार्टी नेताओं व कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारिया दी जा सकेगी।
विनय कुमार ने कहा कि उन्होंने इस संदर्भ में अपना कार्य पूरा कर लिया है और उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही हाई कमान इसे अपनी मंजूरी दे देगा।