
सोलन:नाहन-कुम्हारहट्टी राष्ट्रीय राजमार्ग पर शुक्रवार शाम कैदी को सोलन की अदालत से पेशी के बाद नाहन ला रही पुलिस जवानों की निजी गाड़ी ने सड़क किनारे बैठी महिला को कुचल दिया। हादसे में महिला की मौत हो गई। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में आक्रोश फैल गया। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि वाहन में सवार दोनों पुलिस जवान नशे की हालत में थे। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। आरोपों को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने दोनों जवानों के नमूने जांच के लिए भेज दिए हैं। मृतका बाला देवी स्थानीय स्कूल में मिड-डे मील कर्मी थीं।
एएसपी योगेश रोल्टा हादसे के बाद मेडिकल कॉलेज नाहन पहुंचे। यहां महिला के परिजनों को शांत किया और उन्हें समझाया कि पुलिस निष्पक्ष जांच कर रही है। एएसपी ने बताया कि दोनों पुलिस कर्मियों के खून व पेशाब के सैंपल एकत्रित कर लिए गए हैं। मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। कैदी को नाहन जेल में भेज दिया गया है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसे के बाद कुछ समय तक पुलिसकर्मी और घायल महिला मौके पर ही रहे। बाद में लोग वहां पहुंचे और महिला को मेडिकल कॉलेज नाहन पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। बताया जा रहा है कि हादसे के समय महिला सड़क किनारे अपने पशु चरा रही थीं, तभी वाहन उनकी ओर अनियंत्रित होकर आ गया। मेडिकल कालेज में मौके पर जुटे लोगों ने आोपी पुलिस कर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई है। उन्होंने कैदी के बयान दर्ज करवाने की भी मांग की है।
पुलिस थाना सदर नाहन की अतिरिक्त थाना प्रभारी उपनिरीक्षक सीता देवी मेडिकल कॉलेज पहुंचीं। हादसे के बाद बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मेडिकल कॉलेज और घटनास्थल पर एकत्र हो गए। लोगों ने पुलिस जवानों पर नशे में वाहन चलाने का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की। मामले की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक योगेश रोल्टा स्वयं मेडिकल कॉलेज पहुंचे। उन्होंने परिजनों से मुलाकात कर निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया और कहा कि मामले के हर पहलू की गहनता से जांच की जा रही है।

सोलन: डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के अधीनस्थ महाविद्यालय, औद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय, नेरी हमीरपुर द्वारा माहभर चलाए जा रहे वृक्षारोपण एवं पर्यावरण संरक्षण अभियान के अंतर्गत हमीरपुर जिले के इको विलेज भलेटा कला में ‘वृक्षारोपण गतिविधियों के क्रियान्वयन एवं पर्यावरण संरक्षण’ विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
यह कार्यक्रम हिमाचल प्रदेश सरकार की इको विलेज योजना के अंतर्गत पर्यावरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, शिमला के सहयोग से आयोजित किया गया। महाविद्यालय वर्ष 2024 से इको विलेज भलेटा में ‘जलवायु-अनुकूल औद्यानिकी एवं वानिकी तकनीकों के संवर्धन’ विषय पर अनुसंधान परियोजना का क्रियान्वयन कर रहा है।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 1 से 31 जुलाई तक जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, हमीरपुर के समन्वय से चलाए जा रहे राज्यव्यापी वृक्षारोपण एवं पर्यावरण जागरूकता अभियान का हिस्सा था। कार्यक्रम में इको विलेज भलेटा के लगभग 75 किसानों ने भाग लिया। इस अवसर पर पर्यावरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के पर्यावरण अधिकारी सुमित ठाकुर ने प्रतिभागियों का स्वागत किया तथा राज्य सरकार द्वारा मॉडल इको विलेज योजना के अंतर्गत संचालित विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी।
परियोजना के प्रधान अन्वेषक डॉ. दुष्यंत शर्मा ने किसानों को महाविद्यालय द्वारा प्रोत्साहित की जा रही जलवायु-अनुकूल औद्यानिकी एवं वानिकी तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने वृक्षारोपण के पर्यावरणीय एवं आर्थिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए किसानों से सतत आजीविका के लिए उपयुक्त वृक्ष प्रजातियों को अपनाने का आग्रह किया।
कार्यक्रम के दौरान महाविद्यालय में तैयार किए गए तूनी, महोगनी, सहजन, मौसमी, अमरूद, नीम तथा मालाबार नीम के लगभग 530 गुणवत्तायुक्त पौधों का वितरण किसानों के बीच किया गया तथा उनके खेतों में रोपण भी करवाया गया। किसानों को फल एवं वन प्रजातियों के वैज्ञानिक रोपण एवं प्रबंधन की तकनीकों का भी प्रशिक्षण दिया गया, ताकि पौधों की बेहतर जीवितता एवं वृद्धि सुनिश्चित की जा सके।
ग्राम पंचायत नेरी की प्रधान रीना देवी ने जागरूकता कार्यक्रम एवं वृक्षारोपण अभियान के सफल आयोजन के लिए औद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय, नेरी तथा पर्यावरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण एवं सतत ग्रामीण विकास के लिए उनके निरंतर सहयोग के प्रति आभार भी व्यक्त किया।
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शिमला : शिमला से जारी बयान में पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में नशे की स्थिति भयावह होती जा रही है। जिस प्रदेश को कभी शांत और सुरक्षित माना जाता था, आज वहां नशा गांव-गांव तक पहुंच चुका है। आए दिन नशे के ओवरडोज़ से लोगों की जान जा रही है। सबसे गंभीर बात यह है कि अब जेलों के भीतर भी नशा मिलने की घटनाएं सामने आ रही हैं। जो अपराधियों के सुधरने का स्थान है, वहीं नशे का कारोबार चल रहा है। इसी से प्रदेश में नशे की भयावहता का अंदाजा लगाया जा सकता है। आज भी बीबीएन में एक युवक की नशे के ओवरडोज़ से मौत का मामला सामने आया है। यह आए दिन की बात है। जब लोग खुलेआम नशे का सेवन करते पाए जा रहे हैं तो सरकार कर क्या रही है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि नशे के खिलाफ कार्रवाई के लिए गठित विशेष कार्य बल (एसटीएफ) के कुछ कर्मियों के खिलाफ भी नशा तस्करों से मिलीभगत का मामला सामने आ चुका है। बड़े अधिकारियों के मातहतों और कई सरकारी कर्मचारियों के नशे में संलिप्तता के मामले सामने आए हैं। जिन पर नशा रोकने की जिम्मेदारी है, यदि उन्हीं पर सवाल उठने लगें तो सरकार को आत्ममंथन करना चाहिए। प्रदेश में ऐसा वातावरण बन गया है कि नशा माफिया बेखौफ होकर काम कर रहा है। सरकार की कार्रवाई केवल अखबारों की सुर्खियां बटोरने और इवेंट मैनेजमेंट तक सीमित दिखाई देती है। वास्तविकता यह है कि प्रदेश के कोने-कोने में नशा पहुंच चुका है और युवा इसकी चपेट में आ रहे हैं। सरकार नशे के नेटवर्क को तोड़ने में पूरी तरह असफल साबित हुई है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि यदि जेलों तक नशा पहुंच रहा है तो यह सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर सेंध का मामला है। इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। सरकार को केवल बड़े-बड़े दावे करने के बजाय नशा तस्करों के पूरे नेटवर्क और उन्हें संरक्षण देने वाले लोगों पर निर्णायक कार्रवाई करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि भाजपा नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति की पक्षधर है। प्रदेश के युवाओं का भविष्य बचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, लेकिन वर्तमान सरकार इस मोर्चे पर पूरी तरह विफल साबित हुई है। हिमाचल की जनता जवाब चाहती है कि आखिर नशा माफिया को संरक्षण कौन दे रहा है और सरकार इस पर प्रभावी अंकुश लगाने में क्यों नाकाम है।
एचआरटीसी की बदहाल बसें लोगों की जान से खेल रही हैं
जयराम ठाकुर ने कहा कि एचआरटीसी की खस्ता हालत और सड़कों पर दौड़ रही जर्जर बसें आए दिन प्रदेशवासियों की जान से खिलवाड़ कर रही हैं। लगातार सामने आ रही दुर्घटनाएं, तकनीकी खराबियां और रास्ते में बसों के बंद होने की घटनाएं सरकार की घोर लापरवाही का परिणाम हैं। प्रदेश की जीवनरेखा मानी जाने वाली एचआरटीसी को मजबूत करने के बजाय सुक्खू सरकार ने इसे बदहाली के हालात में पहुंचा दिया है। सरकार केवल घोषणाओं और प्रचार तक सीमित है, जबकि यात्रियों की सुरक्षा गंभीर संकट में है। प्रदेशवासियों की जान के साथ इस तरह का खिलवाड़ किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है।
हिमाचल: प्रदेश के लोकायुक्त न्यायमूर्ति चंद्र भूषण बरोवालिया, जो हिमाचल प्रदेश मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष का अतिरिक्त कार्यभार भी संभाल रहे हैं, ने आज यहां लोक भवन में राज्यपाल कविंद्र गुप्ता को हिमाचल प्रदेश मानवाधिकार आयोग की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की।
इस रिपोर्ट में आयोग की पिछले एक वर्ष की कार्यप्रणाली और गतिविधियों का विस्तृत विवरण दिया गया है। यह रिपोर्ट राज्य में मानवाधिकारों के संरक्षण और संवर्धन के प्रति आयोग के निरंतर प्रयासों को दर्शाती है।
राज्यपाल के सचिव संदीप भारद्वाज भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कजाकिस्तान के एक्सपोजर विज़िट पर गए हिमाचल प्रदेश के विभिन्न औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) के प्रशिक्षुओं से शुक्रवार सायं दूरभाष पर बातचीत की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से उनके अनुभव और उपलब्ध करवाई जा रही सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। उन्होंने प्रशिक्षुओं को इस अंतरराष्ट्रीय शिक्षण अवसर का भरपूर लाभ उठाने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि कहा कि ऐसे शैक्षणिक दौरे विद्यार्थियों के भविष्य को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
श्री सुक्खू ने कहा कि यह पहली बार है जब राज्य सरकार ने तकनीकी संस्थानों के प्रशिक्षुओं के लिए विदेश में एक्सपोजर विजिट का आयोजन किया है। इससे पहले सरकारी स्कूलों के मेधावी विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए भी शैक्षणिक एवं एक्सपोजर यात्राओं का आयोजन किया जा चुका है और भविष्य में भी यह पहल जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार चिकित्सकों और मेडिकल छात्रों के लिए भी अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर दौरे आयोजित करने पर विचार कर रही है ताकि वे वैश्विक स्तर पर आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों का अनुभव प्राप्त कर सकें और हिमाचल की स्वास्थ्य सेवाओं को और सुदृढ़ बना सकें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने प्रदेश के युवाओं को सुरक्षित और विदेश में रोजगार के सुरक्षित अवसर उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से हिमाचल प्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम (एचपीएसईडीसी) ओवरसीज एम्प्लॉयमेंट सेल की स्थापना की है। उन्होंने विद्यार्थियों से निगम में पंजीकरण करवाने का आग्रह किया ताकि उन्हें विदेश में रोजगार के अवसर मिल सकें। यह पहल नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को फर्जी ट्रैवल एजेंट से बचाने के साथ-साथ उन्हें विदेशों में वास्तविक और बेहतर वेतन वाली नौकरियों तक पहुंच सुनिश्चित करेगी।
इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने मुख्यमंत्री को प्रशिक्षुओं द्वारा देखे गए शैक्षणिक संस्थानों, उद्योगों और अन्य प्रतिष्ठानों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस यात्रा से विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान और बहुमूल्य सीख प्राप्त हुई है।
विद्यार्थियों ने इस अनूठे अवसर के लिए मुख्यमंत्री आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस एक्सपोजर विजिट ने उनके दृष्टिकोण का विस्तार और उनकी तकनीकी समझ को समृद्ध किया है तथा उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर का अनुभव प्रदान किया है जो भविष्य के लिए अत्यंत लाभदायक सिद्ध होगा।

शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज बागवानी विभाग की बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने मंडी मध्यस्थता योजना (एमआईएस) के अंतर्गत वर्ष 2022, 2023, 2024 और 2025 में खरीदे गए सेबों के बकाया भुगतान प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के माध्यम से सेब उत्पादकों के खातों में भेज दिए हैं।
उन्होंने कहा कि एमआईएस के अंतर्गत 30 बैग तक सेब बेचने वाले उत्पादकों को भुगतान पहले ही किया जा चुका है जबकि 100 बैग या उससे अधिक सेब बेचने वाले उत्पादकों को भुगतान की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि लंबित देनदारियों के भुगतान के लिए राज्य सरकार ने 45 करोड़ रुपये जारी किए हैं।
वर्तमान सीजन में एमआईएस के तहत सेब खरीद की तैयारियों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने बागवानी मंडी मध्यस्थता योजना (एचएमआईएस) की वेबसाइट और मोबाइल ऐप का भी शुभारंभ किया। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म सेब खरीद से लेकर उसके प्रसंस्करण तक की पूरी प्रक्रिया का ऑनलाइन रिकॉर्ड रखेगा, जिससे पारदर्शिता और कार्यकुशलता सुनिश्चित होगी।
सेब उत्पादकों को पोर्टल पर आधार संख्या, भूमि संबंधी विवरण और बैंक खाते की जानकारी देकर पंजीकरण करवाना होगा। इसके साथ ही वे अपनी उपज बेचने के लिए ऑनलाइन समय स्लॉट भी बुक कर सकेंगे, जिससे प्रतीक्षा समय कम होगा और उन्हें अधिक सुविधा मिलेगी। खरीद और भुगतान की स्थिति से संबंधित जानकारी उत्पादकों को उनके मोबाइल पर एसएमएस के माध्यम से उपलब्ध करवाई जाएगी, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनेगी।
मुख्यमंत्री ने खरीद सीजन के दौरान सभी संग्रहण केंद्रों (कलेक्शन सेंटर) पर उत्पादकों की सहायता के लिए पर्याप्त कर्मचारी तैनात करने के निर्देश दिए। आवश्यकता पड़ने पर अन्य विभागों के कर्मचारियों की भी सेवाएं ली जा सकती हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि खरीद सीजन शुरू होने से पहले सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली जाएं, ताकि बागवानों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
श्री सुक्खू ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार किसानों और बागवानों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है तथा उनके उत्थान के लिए अनेक योजनाएं लागू की हैं। उन्होंने कहा कि सेब की पैकेजिंग के लिए यूनिवर्सल कार्टन प्रणाली लागू की गई है ताकि बागवानों को बिचौलियों के शोषण से बचाया जा सके।
हिमफेड के अध्यक्ष महेश्वर सिंह चौहान, बागवानी सचिव सी. पॉलरासु, निदेशक डिजिटल प्रौद्यागिकी एवं नवाचार डॉ. निपुण जिंदल, एचपीएमसी के प्रबंध निदेशक डी.सी. राणा, बागवानी निदेशक सतीश कुमार तथा विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में उपस्थित थे। .0.

शिमला: मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (मीडिया) नरेश चौहान ने आज यहां पत्रकार वार्ता को सम्बोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में उल्लेखनीय परिवर्तन किए हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य, शिक्षा और ग्रामीण विकास सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल हैं।
आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण विरासत में मिलने के बावजूद सरकार ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के अपने संकल्प पर अडिग रही है। वर्तमान प्रदेश सरकार ने आधुनिक तकनीक के समावेश, स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार और श्रमशक्ति को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा प्रदान की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के 70 स्वास्थ्य संस्थानों को ‘आदर्श स्वास्थ्य संस्थान’ के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकीय सेवाएं और आधुनिक जांच सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही है ताकि लोगों को उनके घर-द्वार के समीप ही गुणवत्तापूर्ण एवं किफायती स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
नरेश चौहान ने कहा कि हिमाचल सरकारी क्षेत्र में रोबोटिक सर्जरी शुरू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। इसके साथ ही सरकार अस्पतालों को विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधाओं से लैस कर रही है। सभी राजकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में 3 टेस्ला एमआरआई मशीनें स्थापित की जा रही हैैं। आईजीएमसी शिमला और एआईएमएसएस चमियाना में यह सुविधा उपलब्ध करवा दी गई है। वहीं जिला एवं क्षेत्रीय अस्पतालों में 1.5 टेस्ला एमआरआई, पीईटी स्कैन, सीटी स्कैन तथा आधुनिक कैंसर उपचार प्रणाली स्थापित की जा रही है। साथ ही 16 से 20 वर्ष पुराने चिकित्सा उपकरणों को भी बदला जा रहा है।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य अधोसंरचना को सुदृढ़ करने के लिए लगभग 3,000 करोड़ रुपये व्यय किए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त ट्रॉमा, कैंसर और क्रिटिकल केयर सेवाओं को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप और एम्स दिल्ली की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जापान अंतरराष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (जायका) के सहयोग से स्वास्थ्य क्षेत्र की कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को क्रियान्वित कर रही है। प्रथम चरण के तहत लगभग 1,710 करोड़ रुपये की परियोजनाओं पर कार्य किया जा रहा है, जिनमें अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों की खरीद और स्वास्थ्य अधोसंरचना का विकास शामिल है। वहीं द्वितीय चरण के लिए 1,600 करोड़ रुपये से अधिक का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया है। इन परियोजनाओं में अत्याधुनिक बाल चिकित्सा सुविधाएं, आधुनिक दंत चिकित्सालय तथा राजकीय चिकित्सा महाविद्यालयों को और अधिक सशक्त बनाने का प्रावधान है।
नरेश चौहान ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में श्रमशक्ति को सुदृढ़ करने पर भी विशेष बल दिया जा रहा है। पिछले साढ़े तीन वर्षों के दौरान राजकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में चिकित्सकों, विशेषज्ञ चिकित्सकों, फैकल्टी सदस्यों, नर्सों, पैरामेडिकल तथा अन्य सहायक कर्मचारियों सहित कुल 2,432 नियुक्तियां की गई हैं। इसके अतिरिक्त 218 वरिष्ठ रेजिडेंट एवं ट्यूटर विशेषज्ञ के पद भी सृजित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि इन पदों के मानदेय में भी उल्लेखनीय वृद्धि की गई है ताकि प्रदेश में विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत किया जा सके।
उन्होंने कहा कि विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को दूर करने के लिए चिकित्सा शिक्षा का भी व्यापक विस्तार किया गया है। राजकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में स्नातकोत्तर चिकित्सा (पीजी) सीटों की संख्या 277 से बढ़ाकर 597 करना प्रस्तावित है। इसके अलावा बीएससी मेडिकल लेबोरेटरी टेक्नोलॉजी, रेडियोलॉजी एवं इमेजिंग, एनेस्थीसिया तथा ऑपरेशन थिएटर टेक्नोलॉजी की सीटों में भी उल्लेखनीय वृद्धि की गई है ताकि भविष्य के लिए कुशल स्वास्थ्य कर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।
नरेश चौहान ने कहा कि पूर्व भाजपा सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र में गंभीर वित्तीय अव्यवस्था छोड़कर गई थी, जिसके कारण हिमकेयर और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं में अनियमितताएं तथा वित्तीय देनदारियां बढ़ गई थीं। उपचार पैकेज और सर्जरी दरों के निर्धारण के लिए कोई वैज्ञानिक व्यवस्था नहीं थी, जिससे वित्तीय अनुशासन प्रभावित हुआ और भुगतान में देरी हुई। वर्तमान सरकार ने इन सभी कमियों को दूर करने तथा पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था स्थापित करने के लिए व्यापक सुधार किए हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार हिमकेयर और आयुष्मान भारत योजनाओं को पारदर्शी एवं प्रभावी प्रतिपूर्ति प्रणाली के माध्यम से सुव्यवस्थित कर रही है ताकि दावों का समय पर निपटारा सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा कि सरकारी कर्मचारियों के लंबित चिकित्सा प्रतिपूर्ति दावों के भुगतान के लिए हाल ही में 212 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं तथा हिमकेयर और आयुष्मान भारत के लंबित भुगतान भी शीघ्र जारी किए जाएंगे।
नरेश चौहान ने कहा कि वर्तमान सरकार केवल स्वास्थ्य अधोसंरचना को मजबूत करने तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र में व्यापक बदलाव लाने के लिए कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है कि हिमाचल प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण, आधुनिक और किफायती स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच सकें तथा प्रदेश को अत्याधुनिक चिकित्सा सेवाओं के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाया जा सके।