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मण्डी: नवोदय विद्यालय पंडोह में छठी व नौवीं कक्षा में प्रवेश के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू

मण्डी: प्राचार्य मनोज भटनागर ने बताया कि पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय, पंडोह, जिला मंडी में सत्र 2027-28 में कक्षा छठी एवं नौवीं में रिक्त सीटों पर प्रवेश के लिए पार्श्व प्रवेश चयन परीक्षा -2027 आयोजित की जाएगी। परीक्षा 10 अप्रैल, 2027 को होगी।

उन्होंने बताया कि इच्छुक अभ्यर्थी प्रवेश परीक्षा के लिए 30 सितम्बर, 2026 तक ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं। कक्षा छठी के लिए अभ्यर्थी सत्र 2026-27 में मंडी जिले के किसी सरकारी या मान्यता प्राप्त गैर-सरकारी विद्यालय में कक्षा पांचवीं में अध्ययनरत होना चाहिए तथा उसका जन्म 1 जून 2010 से 31 जुलाई 2012 के बीच होना चाहिए।

कक्षा नौवीं के लिए अभ्यर्थी सत्र 2026-27 में मंडी जिले के किसी सरकारी या मान्यता प्राप्त गैर-सरकारी विद्यालय में कक्षा आठवीं में अध्ययनरत और मंडी जिले का स्थायी निवासी होना चाहिए। अभ्यर्थी का जन्म 1 मई 2012 से 31 जुलाई 2014 के बीच होना अनिवार्य है।

प्राचार्य ने बताया कि इच्छुक अभ्यर्थी कक्षा छठी के लिए cbseitms.nic.in/2026/nvsix_11 तथा कक्षा नौवीं के लिए

cbseitms.nic.in/2026/nvsix_9 पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए विद्यालय के दूरभाष नंबर 01905-282046 और 9805319303 पर कार्यदिवसों में सुबह 9 से शाम 4 बजे तक संपर्क किया जा सकता है।

बिलासपुर की हर पंचायत में स्थापित होंगे ऑटोमेटिक रेन गेज, ब्लॉक स्तर पर लगेंगे ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन – डीसी

डिजिटल कृषि अभियान की भी हुई समीक्षा
बिलासपुर: जिले में मौसम संबंधी सटीक एवं स्थानीय स्तर का आंकड़ा उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से प्रत्येक ग्राम पंचायत में ऑटोमेटिक रेन गेज तथा प्रत्येक ब्लॉक स्तर पर ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। सरकार द्वारा लिए गए इस निर्णय के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर आज जिला मुख्यालय स्थित बचत भवन में कृषि विभाग की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार ने की।
उपायुक्त ने कहा कि ऑटोमेटिक रेन गेज और ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन स्थापित होने से पंचायत और ब्लॉक स्तर पर वर्षा सहित अन्य मौसम संबंधी मानकों के सटीक एवं वास्तविक समय के आंकड़े उपलब्ध होंगे। इससे जिले में मौसम संबंधी आंकड़ों के व्यवस्थित एवं वैज्ञानिक तरीके से संग्रहण की व्यवस्था मजबूत होगी और कृषि क्षेत्र के लिए स्थानीय स्तर पर अधिक सटीक मौसम संबंधी जानकारी उपलब्ध हो सकेगी।
उन्होंने कहा कि इन उपकरणों से प्राप्त आंकड़े फसल बीमा योजना के तहत फसल नुकसान के आकलन और बीमा दावों के सत्यापन में महत्वपूर्ण आधार बनेंगे। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध आधिकारिक मौसम संबंधी आंकड़ों से फसल बीमा दावों की प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी तथा पात्र किसानों को बीमा दावों के निपटारे में सुविधा मिलेगी।
उपायुक्त ने कहा कि विंड्स के तहत ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन और ऑटोमेटिक रेन गेज का नेटवर्क मजबूत होने से मौसम संबंधी आंकड़ों के संग्रहण, विश्लेषण और उपयोग की व्यवस्था और बेहतर होगी। इससे किसानों को स्थानीय मौसम की अधिक सटीक जानकारी के आधार पर कृषि संबंधी सलाह उपलब्ध करवाने में भी मदद मिलेगी।
उन्होंने कृषि विभाग सहित सभी संबंधित विभागों, खंड विकास अधिकारियों तथा पंचायत प्रतिनिधियों को ऑटोमेटिक रेन गेज और ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन की स्थापना के लिए आवश्यक समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को उपकरण स्थापित करने के लिए उपयुक्त स्थान चिन्हित करने तथा आवश्यक आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाने को कहा।
बैठक में जिले में चल रहे डिजिटल कृषि अभियान की भी समीक्षा की गई। उपायुक्त ने सभी किसानों का पंजीकरण करने, किसान पहचान पत्र बनाने तथा डिजिटल फसल सर्वेक्षण से संबंधित कार्यों को शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि डिजिटल कृषि अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय से कार्य करें तथा सामने आ रही समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करें।
उपायुक्त ने जिला राजस्व अधिकारियों को योजना के तहत सभी पटवारियों के माध्यम से लंबित आंकड़ों को शीघ्र अद्यतन करवाने के निर्देश जारी करने को कहा। साथ ही लोक मित्र केंद्रों को सरकार द्वारा निर्धारित दरों पर किसानों के किसान पहचान पत्र बनाने के निर्देश देने को कहा।

बैठक में कृषि विभाग सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

गत दिन भारी वर्षा से जिला में करीब 3 करोड़ रुपये की हुई क्षति; 6 सड़क मार्ग अस्थाई रूप से हुए बंद, 11 पेयजल योजनाएं हुई हैं प्रभावित -DC बिलासपुर

बिलासपुर: उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार ने जानकारी देते हुए कहा कि जिला में गत दिवस हुई भारी वर्षा के कारण विभिन्न विभागों की परिसंपत्तियों को व्यापक नुकसान पहुंचा है। प्रारंभिक आकलन के अनुसार जिला में लगभग तीन करोड़ रुपये की क्षति दर्ज की गई है। जिला प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं पुनर्बहाली कार्यों को युद्धस्तर पर शुरू कर दिया है।
उन्होंने बताया कि सर्वाधिक नुकसान लोक निर्माण विभाग को हुआ है, जहां लगभग 2.70 करोड़ रुपये की क्षति का अनुमान है। जल शक्ति विभाग की 11 पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई हैं, जिससे लगभग 31 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। इसके अतिरिक्त विद्युत विभाग को भी लगभग डेढ़ लाख रुपये की क्षति पहुंची है।
राहुल कुमार ने बताया कि भारी वर्षा से जिला में सात रिहायशी भवन प्रभावित हुए हैं। इनमें एक कच्चा मकान पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त हुआ है, जबकि एक पक्का और दो कच्चे मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। इसके अलावा तीन गौशालाओं को भी नुकसान पहुंचा है। प्रभावित परिवारों को नियमानुसार फौरी राहत प्रदान करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है तथा आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर शीघ्र मुआवजा प्रदान किया जाएगा।
उपायुक्त ने कहा कि वर्षा के कारण जिला के 6 सड़क मार्ग अस्थायी रूप से बंद हुए, जिनमें गंगलोह-मलरौन, ढोलग चकनाड़-गाह, स्वारघाट मंझेड-मतनोह, थेह-बुहाड़, चैंटा-धानी तथा मरोतन धानी सड़कें शामिल हैं। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग, लोक निर्माण विभाग तथा संबंधित फील्ड अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए, जिसके परिणामस्वरूप सभी प्रभावित मार्गों को शीघ्र यातायात के लिए बहाल कर दिया गया।
राहुल कुमार ने कहा कि पिछले सप्ताह से जिला में लगातार भारी एवं अचानक वर्षा की घटनाएं हो रही हैं। ऐसे में नागरिक अनावश्यक यात्रा से बचें तथा विशेषकर भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में अत्यधिक सावधानी बरतें। वर्षा के दौरान पहाड़ियों से पत्थर गिरने की आशंका बनी रहती है, इसलिए जोखिम वाले मार्गों पर यात्रा करने से परहेज करें। उन्होंने लोगों से नदी-नालों, झीलों एवं अन्य जल स्रोतों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि पूर्व में फिसलने जैसी दुर्घटनाओं के कारण जनहानि की घटनाएं सामने आई हैं। अभिभावक विशेष रूप से बच्चों तथा बुजुर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करें और उन्हें जल स्रोतों के निकट जाने से रोकें।

उपायुक्त ने नागरिकों से आग्रह किया हैकि वह विशेष आवश्यकता के बिना देर रात यात्रा न करें तथा किसी भी प्रकार की आपदा, मकानों को नुकसान, सड़क अवरुद्ध होने अथवा अन्य आपात स्थिति की सूचना तत्काल जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) के हेल्पलाइन नंबर पर दें। उन्होंने कहा कि सूचना प्राप्त होते ही जिला प्रशासन की टीमें तत्काल मौके पर पहुंचकर आवश्यक राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित करेंगी। जिला प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है तथा लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।

रिकेटेशिया से संक्रमित पिस्सू के काटने से होता है स्क्रब टाइफस

स्वास्थ्य विभाग का परामर्श, स्क्रब टाइफस रोग के बचाव को लोग बरतें विशेष एहतियात

बिलासपुर: मुख्य चिकित्सा अधिकारी बिलासपुर शशि दत्त शर्मा ने लोगों को स्क्रब टाइफस रोग के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि स्क्रब टाइफस एक जूनोटिक रोग है, जो ओरिएंटिया त्सुत्सुगामुशी नामक जीवाणु के कारण होता है तथा वर्षा ऋतु के दौरान, विशेषकर घास कटाई के मौसम में इसके मामलों में वृद्धि देखी जाती है। यह रोग प्रायः ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक पाया जाता है, जहां झाड़ियों एवं घासयुक्त स्थानों में रोग वाहक माइट्स मौजूद रहते हैं।

उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा रोग की रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए निगरानी बढ़ा दी गई है तथा सभी स्वास्थ्य संस्थानों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। उन्होंने कहा कि तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर दर्द अथवा अन्य संबंधित लक्षण दिखाई देने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान में चिकित्सकीय परामर्श लें और उपचार में विलंब न करें। उन्होंने लोगों से खेतों अथवा घास वाले क्षेत्रों में कार्य करते समय पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनने, घरों के आसपास साफ-सफाई बनाए रखने, झाड़ियों एवं खरपतवार को हटाने, घास काटने या घनी वनस्पति वाले क्षेत्रों से लौटने के बाद स्नान करने तथा व्यक्तिगत स्वच्छता का विशेष ध्यान रखने का आग्रह किया है। साथ ही पालतू पशुओं की नियमित सफाई करने की भी सलाह दी है।
उन्होंने बताया कि संक्रमित कीटों के काटने से बचाव के लिए जमीन पर सोने, हरी घास वाले क्षेत्रों में बैठने या लेटने तथा कृषि कार्यों के दौरान आधी बांह अथवा अधूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनने से बचें। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा पंचायत प्रतिनिधियों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, विद्यालयों तथा स्वास्थ्य कर्मियों के माध्यम से भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है।

उन्होंने सभी नागरिकों से सतर्कता बरतने, स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने तथा किसी भी संदिग्ध लक्षण की स्थिति में तुरंत स्वास्थ्य संस्थान से संपर्क करने की अपील की है, ताकि मानसून के दौरान स्क्रब टाइफस के संभावित प्रकोप को प्रभावी ढंग से रोका जा सके।

नौकरियां देने के बजाय प्रदेशवासियों को जुए की लत लगवाना चाह रही है सुक्खू सरकार – जयराम ठाकुर

शिमला : भारतीय जनता पार्टी विधायक दल ने विधानसभा परिसर में पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के नेतृत्व में प्रदर्शन कर सुक्खू सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। भाजपा विधायक दल ने सरकार को चिट्टा बिकवाने, लॉटरी और जुआ खिलवाने का काम बंद करके प्रदेशवासियों को रोजगार देने की मांग की। पत्रकारों से बात करते हुए जयराम ठाकुर ने कहा कि यह कितने शर्म की बात है कि सुक्खू सरकार आय बढ़ाने के नाम पर प्रदेश में लॉटरी जैसी बुराई को विधिक मान्यता दे रहे हैं। पहले भी प्रदेश में लॉटरी होती थी लेकिन पूर्व की भाजपा सरकार द्वारा उसे बंद किया गया। यह स्थिति इसलिये आई क्योंकि परिवार के परिवार तबाह हो रहे थे। लोग इसकी लत का शिकार हो रहे थे, जमीनें बिक रही थी, जेवर बिक रहे थे। लोगों की तनख्वाह लॉटरी में जा रही थी। प्रदेश की आय बढ़ाने के नाम पर इस तरीके की बुराई का सरकार द्वारा महिमा मंडन करना दुर्भाग्य की बात है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री कहते हैं कि लॉटरी किस्मत की बात है। तो मेहरबानी करके प्रदेशवासियों को किस्मत के भरोसे ना छोड़े और लॉटरी की बुराई को अविलंब वापस ले। प्रदेशवासियों को जुआ और लॉटरी के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता है। प्रदेशवासियों को नौकरी चाहिए, स्वरोजगार के अवसर चाहिए। लेकिन दुर्भाग्य से व्यवस्था परिवर्तन के नाम पर सरकार चलाने वाले मुख्यमंत्री रोजगार और स्वरोजगार की अवसर देने में पूरी तरीके से नाकाम साबित हुए हैं।

नेता प्रतिपक्ष  ने कहा कि सदन से लेकर सड़क तक, सरकारी मंचों से लेकर जनसभा तक, हर जगह झूठ बोलकर लोगों को गुमराह करके मुख्यमंत्री ने अपना समय भले काट लिया लेकिन अब उन्हें जवाब देना होगा। अब उनके पास भागने की गुंजाइश नहीं है। प्रदेश के लोग सड़कों पर हैं, भारतीय जनता पार्टी भी हर प्रदेश पार्टी के साथ है, उन्हें जवाब देना होगा। प्रदेश के युवाओं को रोजगार चाहिए, स्वावलंबन जैसी आत्मनिर्भर बनाने वाली योजनाएं चाहिए, जरूरतमंदों को सहारा जैसी योजनाएं चाहिए, बेटियों को शगुन और कन्यादान जैसी योजनाएं चाहिए। इसलिए मुख्यमंत्री जनहितकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर काम करें, प्रदेश को लॉटरी के दलदल में न धकेले।
90% सहारा पेंशन धारकों को अपात्र घोषित करके पाप कर रही है सरकार
जयराम ठाकुर ने कहा कि पूर्व सरकार के समय 37000 से ज्यादा लोगों को सहारा पेंशन मिलती थी। सरकार ने 90% से ज्यादा लोगों को पेंशन के लिए अपात्र घोषित कर दिया। जिसमें से ज्यादातर लोगों को सरकार ने मृत घोषित किया है। आए दिन हमें ऐसे लोग मिलते हैं जो बताते हैं कि उनकी पेंशन रोकने के लिए सरकार ने उन्हें मृत घोषित कर दिया है। यू लव बिस्तर पर हैं, पूरी तरीके से अशक्त हैं, अपना दैनिक कार्य भी बिना मदद के नहीं कर सकते हैं, उन लोगों के साथ सुख सरकार का यह रवैया बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। जरूरतमंद लोगों की मदद करना सरकार का काम है लेकिन यह दुखद है कि सरकार इस मामले में पूर्णतया नाकाम है। सहारा जैसी पेंशन रुकना, पात्र लोगों को अपात्र करना पाप है जिसकी कोई माफी नहीं हो सकती।
प्रदेश के इकलौते मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल में हृदय रोग की प्रमुख जांचें बंद
प्रदेश के इकलौते मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल अटल सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल चमियाना में इकोकार्डियोग्राफी समेत हृदय रोग से संबंधित प्रमुख जांचें बंद होना प्रदेश सरकार के व्यवस्था परिवर्तन के दावों की पोल खोलता है। अस्पताल में हृदय रोग की जांच करने वाले इकलौते स्टाफ को हमीरपुर मेडिकल कॉलेज भेजकर सरकार ने अपनी व्यवस्था परिवर्तन की नाकामी और विवेकहीनता का परिचय दिया है। प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में विशेषज्ञ सेवाएं और आवश्यक जांचें बंद होना सरकार के निकम्मेपन, संवेदनहीनता और व्यवस्था के पतन का प्रमाणपत्र है। सरकार को बताना चाहिए कि जब चमियाना अस्पताल में हृदय रोगियों के लिए आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराने वाला स्टाफ ही नहीं रहेगा तो प्रदेश के मरीजों को इलाज और जांच के लिए कहां जाना पड़ेगा। सरकार को तत्काल इस निर्णय को वापस लेकर अस्पताल में सभी आवश्यक विशेषज्ञ सेवाएं और जांचें बहाल करनी चाहिए।

हिमाचल विधानसभा मानसून सत्र: संस्थान बंद करना हमारा उद्देश्य नहीं; हमारा उद्देश्य भ्रष्टाचार को बंद करना – CM सुक्खू

संस्थान बंद करना हमारा उद्देश्य नहीं; हमारा उद्देश्य भ्रष्टाचार को बंद करना – CM सुक्खू

शिमला: हिमाचल प्रदेश विधानसभा मानसून सत्र के दौरान आज मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि पूर्व भाजपा सरकार में सबऑर्डिनेट सिलेक्शन बोर्ड से पेपर लीक होते थे, पेपर बेचे जाते थे। हमारी सरकार ने जब यह देखा, तो हमने इस बोर्ड को बंद करने का काम किया। जिन लोगों ने पेपर लीक किए थे, उनमें अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक, उनके खिलाफ कार्रवाई की और उन्हें जेल की सलाखों के पीछे भेजा। सीएम ने कहा कि NEET के पेपर लीक मामले में दोषियों के खिलाफ जिस तरह की सख्त कार्रवाई होनी चाहिए थी, वह वहाँ देखने को नहीं मिली। संस्थान बंद करना हमारा उद्देश्य नहीं है। हमारा उद्देश्य भ्रष्टाचार को बंद करना है।

पूर्व भाजपा सरकार ने चुनाव से पहले जल्दबाजी में अनेक शिक्षा संस्थान और कॉलेज खोले – CM

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार बीजेपी-कांग्रेस देखकर संस्थान नहीं खोलती। हमारा निर्णय जनता की जरूरत और क्षेत्र की वास्तविक आवश्यकता पर आधारित होता है। पूर्व भाजपा सरकार ने चुनाव से पहले जल्दबाजी में अनेक शिक्षा संस्थान और कॉलेज खोले। राजनीतिक लाभ के लिए करीब 5,000 करोड़ रुपये की रेवड़ियाँ बाँटी गईं। उन्होंने कहा कि सरकार आने के बाद जब हमने इन संस्थानों का रिव्यू किया, तो अनेक जगहों पर पर्याप्त शिक्षक तक नहीं थे। प्लस टू में सात शिक्षकों की जरूरत थी, वहाँ एक शिक्षक के सहारे साइंस शुरू कर दी गई थी। हमने इस वास्तविकता को गंभीरता से समझा। कुछ संस्थानों का युक्तिकरण किया। हम स्कूलों को मजबूत कर रहे हैं। विद्यार्थियों की संख्या के अनुरूप पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध करवाए जा रहे हैं।

जनगणना का कार्य पूरा होने के बाद आवश्यकता के अनुसार नए संस्थानों की समीक्षा की जाएगी; जरूरत के आधार पर आवश्यक संस्थान खोले जाएंगे – मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने जसवां प्रागपुर विधानसभा क्षेत्र में एसडीएम कार्यालय खोलने की घोषणा की थी। इसके लिए भाजपा विधायक को धन्यवाद देना चाहिए था। कैबिनेट से प्रस्ताव पारित होने के बाद इसकी हाईकोर्ट में रिकमेंडेशन की प्रक्रिया पूरी होती है। हमने हाईकोर्ट को इसकी कॉपी भेजी थी, वहां से रिकमेंडेशन प्राप्त हो गई है। अब एक-दो दिन में इसे नोटिफाई कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में इस समय जनगणना का कार्य चल रहा है। जनगणना का कार्य पूरा होने के बाद आवश्यकता के अनुसार नए संस्थानों की समीक्षा की जाएगी और जरूरत के आधार पर आवश्यक संस्थान खोले जाएंगे।

हमारा प्रयास मल्टी-टास्क वर्कर को न्यूनतम वेतन की व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ाया जाए – CM 

मल्टी-टास्क वर्कर के लिए सरकारी विभागों में वर्तमान में अलग-अलग व्यवस्थाएँ लागू हैं। हमारी सरकार अब इन सभी व्यवस्थाओं को एक समान नीति के तहत लाने पर गंभीरता से काम कर रही है। हमारा प्रयास है कि केवल 500 रुपये या 1,000 रुपये की बढ़ोतरी तक सीमित न रहते हुए मल्टी-टास्क वर्कर को न्यूनतम वेतन की व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ाया जाए।

हम ओबीसी समाज का कल्याण किसी राजनीतिक लाभ को देखकर नहीं कर रहे; हम उनकी भावनाओं और अधिकारों को ध्यान में रखकर काम कर रहे हैं – CM

ओबीसी समाज के कल्याण के लिए कांग्रेस पार्टी ने हमेशा काम किया है। भाजपा को अपनी सरकार के दौरान ओबीसी समाज के कल्याण की चिंता नहीं हुई। अब सदन में जोर-जोर से ओबीसी के हित की बात कही जा रही है। हम ओबीसी समाज का कल्याण किसी राजनीतिक लाभ को देखकर नहीं कर रहे हैं। हम उनकी भावनाओं और अधिकारों को ध्यान में रखकर काम कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का अध्ययन किया जा रहा है। हमारी सरकार ने पहली बार ओबीसी कमीशन बनाया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नौकरियों में हम आरक्षण दे रहे हैं। प्रदेश में सर्व समाज का कल्याण कांग्रेस पार्टी ही कर सकती है।

 स्वास्थ्य संबंधी सुझाव हमारे लिए महत्वपूर्ण हैं और सरकार इन सभी बातों का पूरा ध्यान रखेगी – मुख्यमंत्री

बरसात के मौसम में स्वाइन फ्लू और अन्य वायरल बीमारियों को लेकर सरकार पूरी तरह सतर्क रहती है और अतिरिक्त सावधानी बरती जाती है। सदन में जिस मरीज की बात की जा रही है, वह एम्स बिलासपुर से ट्रांसफर होकर आया था। ऐसे गंभीर मामलों में मरीज को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी तत्परता से कार्य करता है। स्वास्थ्य संबंधी सुझाव हमारे लिए महत्वपूर्ण हैं और सरकार इन सभी बातों का पूरा ध्यान रखेगी।

 सरकार खुले मन से जनहित में उपयुक्त विकल्प पर विचार करने के लिए तैयार – CM

गगरेट के विधायक राकेश कालिया जी का चिंतपूर्णी के रोप-वे को लेकर सुझाव स्वागत योग्य है। सरकार इस सुझाव को सकारात्मक रूप से देखती है। हमारा एक एम.ओ.यू. पहले से हुआ है, जिसका अभी क्रियान्वयन नहीं हो पाया है। विधायक के सुझाव पर माननीय उपमुख्यमंत्री से चर्चा करेंगे। रोप-वे 900 मीटर का हो, 1,000 मीटर का हो या 1,500 मीटर का- सरकार खुले मन से जनहित में उपयुक्त विकल्प पर विचार करने के लिए तैयार है। जहाँ से भी रोप-वे लगाना उचित होगा, सरकार उस दिशा में सहयोग करेगी।

नड्डी में एशिया की सबसे बड़ी ज़िपलाइन का निर्माण किया जाना है; एफ.सी.ए. की अड़चन को दूर करवाकर परियोजना का काम जल्द शुरू करवाया जाएगा : CM

हिमाचल प्रदेश पर्यटन की दृष्टि से बेहद खूबसूरत है। हमारे पास स्विट्जरलैंड से अधिक स्नो-बाउंड क्षेत्र है, जहाँ रोप-वे के माध्यम से अनछुए पर्यटक स्थलों तक पहुँच बनाई जा सकती है।
नड्डी में एशिया की सबसे बड़ी ज़िपलाइन का निर्माण किया जाना है। रोप-वे परियोजना के लिए 80 लाख रुपये का अपफ्रंट प्रीमियम जमा कराया जा चुका है। एफ.सी.ए. की अड़चन को दूर करवाकर परियोजना का काम जल्द शुरू करवाया जाएगा। 

घर बनाने में किश्तों के भुगतान के लिए निश्चित समय-सीमा तय की जाए – मुख्यमंत्री 

घर बनाने में एक किश्त के बाद दूसरी किश्त और फिर तीसरी किश्त मिलने में समय लगने से अनेक परिवारों के सामने बड़ी कठिनाई खड़ी हो जाती है। मिस्त्री और मजदूर दूसरे काम पर चले जाते हैं।
यह लंबे समय से चली आ रही समस्या है। मैं माननीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री जी से भी आग्रह करूँगा कि किश्तों के भुगतान के लिए निश्चित समय-सीमा तय की जाए, ताकि गरीब परिवारों को बार-बार इंतजार न करना पड़े। 

पुलिस कांस्टेबल (पुरुष एवं महिला) भर्ती प्रक्रिया स्पष्ट – मुख्यमंत्री

पुलिस कांस्टेबल (पुरुष एवं महिला) भर्ती प्रक्रिया स्पष्ट है। पदों का विज्ञापन 10 जुलाई 2026 को जारी हुआ था और आवेदन की प्रारंभिक अंतिम तिथि 6 अगस्त 2026 थी। इस दौरान करीब 65,000 आवेदन प्राप्त हुए।
युवाओं के हित में प्रदेश सरकार ने आयु सीमा में 1 वर्ष की छूट देने का निर्णय लिया। पात्र अभ्यर्थियों को इसका लाभ देने के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 15 दिन बढ़ाकर 21 अगस्त 2026 की गई। इस अतिरिक्त अवधि में करीब 11,000 आवेदन प्राप्त हुए, जिससे कुल आवेदन 77,000 हो गए।
अभ्यर्थियों की सुविधा को देखते हुए अब ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 5 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है। पात्र अभ्यर्थी निर्धारित तिथि तक आवेदन कर सकते हैं। 

पुलिस भर्ती में आवेदन की अंतिम तिथि 15 दिन बढ़ाकर 5 सितंबर; 1 सितंबर तक कुल 98,719 आवेदन प्राप्त – सीएम

प्रदेश के होम गार्ड्स कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए हमारी सरकार ने उन्हें एकमुश्त 5 वर्ष की आयु सीमा में छूट दी है। साथ ही, पुलिस भर्ती में आवेदन की अंतिम तिथि 15 दिन बढ़ाकर 5 सितंबर 2026 कर दी गई है।
इस बढ़ी हुई अवधि में 21,000 अतिरिक्त आवेदन प्राप्त हुए हैं। 1 सितंबर 2026 को सायं 7:00 बजे तक कुल 98,719 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। इससे यह भी स्पष्ट है कि हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग का ऑनलाइन पोर्टल सुचारू रूप से कार्य कर रहा है और पोर्टल के बंद या क्रैश होने संबंधी खबरें तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं।
भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के अनुसार शारीरिक मानक परीक्षण एवं शारीरिक दक्षता परीक्षण प्रदेश के सभी 12 जिलों में पुलिस विभाग द्वारा आयोजित किए जाने हैं। प्रदेश की भौगोलिक एवं मौसमी परिस्थितियों को देखते हुए आवेदन की तिथि बार-बार बढ़ाने से आगामी शीत ऋतु में इन परीक्षणों के आयोजन में कठिनाई आ सकती है।
प्रदेश सरकार ने युवाओं के हित में आयु सीमा में छूट के साथ आवेदन की अवधि दो बार बढ़ाई है।

मण्डी: दो सड़क हादसों में दो की मौत, पांच घायल

हिमाचल: प्रदेश के मण्डी जिले में बुधवार को दो हादसों में दो  लोगों की मौत हो गई और करीब पांच लोग घायल हो गए। पहला हादसा मण्डी जिले के करसोग में हुआ औऱ दूसरा हादसा मंडी शहर के पुलघ्राट के पास हुआ। जानकारी के अनुसार,  पुलघ्राट के पास एक कार सुकेती खड्ड में जा गिरी, जिसमें एक युवक की मौत हो गई, जबकि 3 लोग घायल हुए हैं। जानकारी अनुसार जिला मण्डी के पुलघराट के पास एक गाड़ी सीधे सुकेती खड्ड में जा गिरी। हादसे में कार चालक बैंक मैनेजर 39 वर्षीय मनीष भाटिया पुत्र संतराम भाटिया निवासी सन्यार्ड, तहसील व जिला मंडी की मौके पर ही मौत हो गई। बताया जा रहा है कि बैंक मैनेजर मनीष अपनी कार एचपी 33 एफ 9944 में नेरचौक की ओर जा रहे थे कि पुलघराट के पास उनकी गाड़ी अनियंत्रित होकर सीधी 200 मीटर खाई में पलटे खाकर सीधी सुकेती खड्ड में जा गिरी। बताया जा रहा है कि सीट बेल्ट न खुलने के कारण घायल मनीष गाड़ी में ही फंस गया और नदी के पानी में डूब गया। जब तक लोगों ने उसे निकाला तो वह सांस नहीं ले पा रहे थे मौके पर ही उन्हें गाड़ी निकालकर अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सक ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

इससे पहले, मण्डी जिले के उपमंडल करसोग में माहूनाग के समीप बुधवार सुबह एक बेहद दर्दनाक सड़क हादसा सामने आया है। जानकारी अनुसार, एक कार के अचानक अनियंत्रित होने से वाहन में सवार मोहन सिंह मेहरन की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि विनीत और चुड़ामणी नाम के दो अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे की आवाज सुनते ही आसपास के स्थानीय ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे और बिना समय गंवाए राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत के बाद दुर्घटनाग्रस्त वाहन में फंसे घायलों को बाहर निकाला और तुरंत उपचार के लिए नजदीकी अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों की देखरेख में दोनों का इलाज चल रहा है। पुलिस दवारा मामले की जाँच की जा रही है।

हिमाचल: प्रदेश विधानसभा में राज्य विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक पास..

हिमाचल: प्रदेश विधानसभा में हिमाचल प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026’ पारित कर दिया गया। इस विधेयक के माध्यम से प्रदेश के 6 राज्य विश्वविद्यालयों से जुड़े कानूनों में संशोधन किए गए हैं। संशोधन में विश्वविद्यालयों के वित्तीय मामलों, नियुक्तियों, पद सृजन, पदोन्नति और वेतन-भत्तों को लेकर कई अहम प्रावधान किए गए हैं।  भाजपा विधायक दल के विरोध के बीच संशोधन विधेयक सदन में ध्वनिमत से पारित हुआ। मंगलवार को मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने विधेयक सदन के पटल पर रखा था। संशोधन विधेयक लागू होने के बाद छह विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की सीधी भर्ती हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग (एचपीपीएससी) के माध्यम से होगी।  गैर-शिक्षण पदों पर सीधी भर्ती हिमाचल प्रदेश राज्य चयन आयोग (एचपीआरसीए) या सरकार की ओर से अधिसूचित किसी अन्य भर्ती एजेंसी के जरिये की जाएगी। भर्ती प्रक्रिया विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के निर्धारित मापदंडों के अनुसार होगी। 

हिमाचल: मांगों को लेकर विधानसभा के बाहर बिजली बोर्ड का प्रदर्शन..

हिमाचल: राज्य बिजली बोर्ड के कर्मचारी, इंजीनियर और पेंशनरो ने OPS बहाली सहित विभिन्न मांगों को लेकर शिमला के चौड़ा मैदान में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने सरकार और प्रबंधन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया और OPS बहाली को लेकर नारेबाजी की।यूनियन की ओर से सुबह 11 बजे कुमार हाउस से अंबेडकर चौक तक रैली निकाली गई। इसके बाद चौड़ा मैदान में प्रदर्शन किया गया।

इस मौके पर बिजली बोर्ड ज्वाइंट एक्शन कमेटी के सहसंयोजक हीरालाल वर्मा ने कहा कि बिजली बोर्ड में 15 मई 2003 के बाद नियुक्त कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल की जाए। इसके अलावा लंबे समय से सेवाएं दे रहे आउटसोर्स कर्मचारियों को बोर्ड में समायोजित कर नौकरी सुरक्षा दी जाए। कांग्रेस सरकार ने पहली कैबिनेट में OPS बहाल कर दी थी, लेकिन बिजली बोर्ड के कर्मचारी इससे वंचित हैं। मुख्यमंत्री ने 15 अक्टूबर 2025 को सम्मेलन में भी घोषणा की थी, लेकिन बोर्ड प्रबंधन लागू नहीं कर रहा।सरकार जल्द ठोस फैसला लेकर उनके भविष्य को सुरक्षित करे।

युवाओं को रोजगार देने का वादा करने वाली सुक्खू सरकार आउटसोर्स के सहारे चला रही भर्ती व्यवस्था – बिक्रम ठाकुर

शिमला: विधानसभा में नियम 130 के अंतर्गत रोजगार एवं बेरोजगारी के विषय पर हुई चर्चा के दौरान पूर्व उद्योग मंत्री एवं भाजपा विधायक बिक्रम ठाकुर ने सुक्खू सरकार को प्रदेश में बढ़ती बेरोजगारी, घटती नियमित भर्तियों, उद्योगों के कमजोर होते वातावरण और युवाओं के भविष्य को लेकर जमकर घेरा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने सत्ता में आने से पहले युवाओं से पांच वर्षों में पांच लाख नौकरियां देने का वादा किया था, लेकिन आज सरकार की वास्तविकता यह है कि नियमित रोजगार देने के बजाय आउटसोर्स और अल्प वेतन वाली नौकरियों को रोजगार की उपलब्धि बताकर अपनी पीठ थपथपाई जा रही है।बिक्रम ठाकुर ने कहा कि लेबर फोर्स सर्वे के आंकड़े प्रदेश की चिंताजनक तस्वीर सामने रखते हैं। हिमाचल प्रदेश में बेरोजगारी दर 4.5 प्रतिशत है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह 3.01 प्रतिशत है। यानी हिमाचल की बेरोजगारी राष्ट्रीय औसत से लगभग 60 प्रतिशत अधिक है। महिला बेरोजगारी भी हिमाचल में राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक है। शहरी महिलाओं में बेरोजगारी की स्थिति और भी चिंताजनक है।उन्होंने कहा कि ये आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि हिमाचल के सामने आज सबसे बड़ी चुनौती युवा बेरोजगारी की है। लगभग हर पांचवां युवा जो रोजगार बाजार में प्रवेश कर रहा है, वह बेरोजगार है। ऐसे समय में सरकार को रोजगार के नए अवसर पैदा करने चाहिए थे, लेकिन सरकार की नीतियां इसके विपरीत दिशा में जा रही हैं।बिक्रम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश की वित्तीय स्थिति ऐसी नहीं है कि हर बेरोजगार युवा को सरकारी नौकरी दी जा सके। प्रदेश की देनदारियां लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में सरकार को केंद्र की तर्ज पर पारदर्शी और नियमित भर्तियों के साथ-साथ निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर पैदा करने पर विशेष ध्यान देना चाहिए। लेकिन प्रदेश सरकार इस दिशा में गंभीरता से काम नहीं कर रही है।

एमएसएमई और उद्योगों के आंकड़े गिनाने से रोजगार नहीं मिलेगा: बिक्रम ठाकुर ने कहा कि सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार हिमाचल में लगभग 95 प्रतिशत औद्योगिक इकाइयां एमएसएमई क्षेत्र से जुड़ी हैं। प्रदेश में 600 से अधिक फार्मास्यूटिकल इकाइयां हैं और फार्मा क्षेत्र का प्रदेश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान है। सैकड़ों औद्योगिक परियोजनाओं को निवेश के साथ स्वीकृति मिलने की बात सरकार करती है। उन्होंने सवाल किया कि सिर्फ करोड़ों रुपये के निवेश के आंकड़े बताने से क्या होगा, यदि हिमाचल के बेरोजगार युवा को इन उद्योगों में रोजगार ही नहीं मिल रहा?

उन्होंने कहा कि सरकार को यह बताना चाहिए कि जिन परियोजनाओं और एमएसएमई का वह आंकड़ा देती है, उनसे कितने हिमाचली युवाओं को वास्तविक रोजगार मिला है। उद्योग तभी टिकेंगे जब उन्हें बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, नीति और अनुकूल वातावरण मिलेगा। बिक्रम ठाकुर ने आरोप लगाया कि प्रदेश में उद्योग बंद हो रहे हैं, निवेश प्रभावित हो रहा है और औद्योगिक इकाइयां अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं कर पा रही हैं। उन्होंने कहा कि उद्योग बंद होंगे तो रोजगार कहां से आएगा? मुख्यमंत्री को उद्योगों के विषय को केवल भ्रष्टाचार के आरोपों तक सीमित करने के बजाय यह सोचना चाहिए कि प्रदेश में उद्योग कैसे आएं और टिकें।

सरकार के अपने जवाब में 115 औद्योगिक इकाइयों के बंद होने की बात: बिक्रम ठाकुर ने विधानसभा में सरकार के जवाब का हवाला देते हुए कहा कि 26 अगस्त 2025 को पूछे गए प्रश्न के जवाब में सरकार ने बताया था कि प्रदेश में लगभग 115 औद्योगिक इकाइयां बंद हुई हैं। उन्होंने सवाल किया कि यदि उद्योग बंद हो रहे हैं तो सरकार रोजगार के नए अवसर कैसे पैदा करेगी? उन्होंने कहा कि सरकार को उद्योगों को यह स्पष्ट करना होगा कि हिमाचल उन्हें क्या सुविधाएं देगा, ताकि वे यहां निवेश करें और युवाओं को रोजगार दें। लेकिन पिछले साढ़े तीन वर्षों में ऐसा भरोसेमंद औद्योगिक वातावरण बनाने में सरकार विफल रही है।

पांच लाख नौकरियों का वादा, लेकिन ₹4-10 हजार की नौकरी: बिक्रम ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस ने सत्ता में आने के लिए पांच वर्षों में पांच लाख नौकरियों का वादा किया था। यहां तक कि सरकार के वरिष्ठ नेताओं ने पेंशन वाली नौकरियों के बड़े-बड़े दावे किए थे। लेकिन आज स्थिति यह है कि वन विभाग में वन मित्र को करीब ₹12 हजार, पशुपालन विभाग में पशु मित्र को लगभग ₹5 हजार, जल वाहक को करीब ₹6 हजार और बिजली मित्र जैसी योजनाओं में करीब ₹10 हजार मानदेय की बात की जा रही है। उन्होंने कहा कि क्या ₹4 हजार, ₹6 हजार या ₹10 हजार की नौकरी देकर सरकार अपनी पीठ थपथपाएगी? हिमाचल का युवा पढ़ा-लिखा है, उसके पास डिग्री और योग्यता है। उसे सम्मानजनक और स्थायी रोजगार चाहिए, न कि ऐसी अस्थायी व्यवस्था जिसमें भविष्य की कोई सुरक्षा नहीं है।

नियमित भर्तियां कम, आउटसोर्स भर्ती ज्यादा: बिक्रम ठाकुर ने विधानसभा में सरकार के जवाब का उल्लेख करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से 725 लोगों की भर्ती हुई है, जबकि राज्य चयन बोर्ड के माध्यम से केवल 97 लोगों की भर्ती हुई। इसके अलावा बड़ी संख्या में भर्ती आउटसोर्स के माध्यम से की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह प्रदेश के युवाओं के साथ बड़ा अन्याय है कि जो युवा प्रतियोगी परीक्षा पास कर सरकारी सेवा में जाने की उम्मीद करता है, उसे भी अंततः आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से नौकरी लेने के लिए मजबूर किया जाए। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी, निष्पक्ष और समयबद्ध होनी चाहिए।

पेपर लीक पर सरकार को घेरा: बिक्रम ठाकुर ने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाओं से सबसे ज्यादा नुकसान उस युवा को होता है जिसने वर्षों तक मेहनत करके परीक्षा की तैयारी की होती है। उन्होंने कहा कि सरकार सदन में अपनी पारदर्शिता का दावा करती है, लेकिन भर्ती से जुड़े मामलों में गंभीर सवाल खड़े होते रहे हैं। उन्होंने एक जांच संबंधी पत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि कुछ अधिकारियों की भूमिका को लेकर जांच एजेंसी द्वारा गंभीर टिप्पणियां की गई थीं। उन्होंने सरकार से पूछा कि यदि जांच में जिम्मेदारी तय की गई है तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई? उन्होंने कहा कि सरकार को पारदर्शिता के दावे से आगे बढ़कर वास्तविक कार्रवाई करनी चाहिए।

414 टीजीटी आर्ट्स अभ्यर्थियों को नियुक्ति कब?: बिक्रम ठाकुर ने शिक्षा मंत्री से विशेष रूप से मांग की कि टीजीटी आर्ट्स के 414 अभ्यर्थियों ने परीक्षा उत्तीर्ण कर ली है और 75 दिनों से अधिक समय बीत जाने के बावजूद उन्हें नियुक्ति पत्र नहीं मिले हैं। उन्होंने कहा कि इन युवाओं ने परीक्षा पास की है, अपनी योग्यता साबित की है और अब उन्हें नियुक्ति के लिए भटकना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि इन 414 अभ्यर्थियों को जल्द से जल्द नियुक्ति पत्र जारी किए जाएं।

मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना को किया खत्म: बिक्रम ठाकुर ने उद्योग मंत्री को घेरते हुए कहा कि भाजपा सरकार के समय मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य युवाओं को अपने पैरों पर खड़ा करना और उन्हें रोजगार देने वाला बनाना था। भाजपा के समय इस योजना के तहत हजारों इकाइयां स्थापित हुईं और बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार मिला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय इस योजना की स्थिति बेहद खराब हो गई है। जिन युवाओं ने योजना के भरोसे अपनी पूंजी लगाई और आवेदन किए, वे आज परेशान हैं और कई लोग सरकार के खिलाफ न्यायालय तक जाने को मजबूर हैं।

व्यवस्था परिवर्तन के नाम पर प्रदेश को आउटसोर्स व्यवस्था में धकेला: बिक्रम ठाकुर ने कहा कि सरकार बार-बार व्यवस्था परिवर्तन की बात करती है, लेकिन प्रदेश में जो व्यवस्था परिवर्तन दिखाई दे रहा है वह नियमित रोजगार से आउटसोर्स रोजगार की ओर जाने का है। लोक सेवा आयोग और अधीनस्थ सेवाओं में नियमित भर्ती कम हो रही है, जबकि आउटसोर्स एजेंसियों के माध्यम से नियुक्तियां बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल का युवा आज रोजगार के लिए प्रदेश से बाहर जाने को मजबूर है। यह सरकार की रोजगार नीति की विफलता का सबसे बड़ा प्रमाण है।

भर्ती और ट्रांसफर में राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों की जांच हो: बिक्रम ठाकुर ने अपने विधानसभा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि शहीद परिवार से जुड़े एक कर्मचारी को बार-बार दूर स्थान पर भेजे जाने का मामला उनके सामने आया है। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रांसफर और एडजस्टमेंट के नाम पर राजनीतिक दबाव और भ्रष्टाचार की शिकायतें सामने आती रही हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि यदि उनके द्वारा लगाए गए आरोप गलत हैं तो उनकी जांच करवाई जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि सरकारी नौकरी किसी की राजनीतिक पहुंच या पैसे के आधार पर नहीं, बल्कि योग्यता और नियमों के आधार पर मिलनी चाहिए।

बिक्रम ठाकुर ने कहा कि आज प्रदेश का नौजवान परेशान है। किसानों, महिलाओं और युवाओं से किए गए वादे पूरे नहीं हुए। उन्होंने कहा कि सुक्खू सरकार को अभी भी समय रहते अपनी रोजगार नीति पर पुनर्विचार करना चाहिए, नियमित भर्तियों को गति देनी चाहिए, उद्योगों को सुरक्षित और अनुकूल वातावरण देना चाहिए तथा युवाओं को स्थायी एवं सम्मानजनक रोजगार उपलब्ध करवाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने सत्ता में आने से पहले युवाओं से बड़े-बड़े वादे किए थे। अब उन वादों का हिसाब देने का समय है। हिमाचल का युवा केवल आश्वासन नहीं, रोजगार चाहता है और सुक्खू सरकार को इसका जवाब देना होगा।