ऊर्जा न सिर्फ मानव जीवन की जरूरत बल्कि आर्थिक उत्थान में भी ऊर्जा का अहम योगदान : हिमऊर्जा मुख्य कार्यकारी अधिकारी रूपाली ठाकुर

  • नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने को वर्ष 1984-85 में भारत सरकार के सहयोग से प्रदेश में एकीकृत ग्रामीण ऊर्जा कार्यक्रम चलाया गया : रूपाली ठाकुर

  • कार्यक्रम को बढ़ावा देने के लिए आम जनता में ऊर्जा के प्रति जागरूकता उत्पन्न करने के उ६ेश्य से 18 मार्च, 1989 को हिमऊर्जा का गठन किया गया

  • जिसका उ६ेश्य प्रदेश में ऊर्जा की आपूर्ति, नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से पूरा करने के लिए योजना बनाना और कार्यान्वित करना है

  • जिससे पारम्परिक स्रोतों पर ऊर्जा के लिए निर्भरता कम हो, पर्यावरण स्वच्छ रहे तथा ग्रामीणों के जीवन स्तर में बेहतरी आए

ऊर्जा न सिर्फ मानव जीवन की जरूरत है बल्कि आर्थिक उत्थान में भी ऊर्जा का अहम योगदान है। हिमाचल प्रदेश हिमऊर्जा मुख्य कार्यकारी अधिकारी रूपाली ठाकुर ने “हिम शिमला लाइव” को हिम ऊर्जा के  35 वर्षों के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए को बताया परम्परागत ऊर्जा स्रोतों में प्रतिदिन हो रहे क्षय व पर्यावरण प्रदूषण को रोकने हेतु नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का दोहन अनिवार्य हो गया है। इन स्रोतों के दोहन हेतु नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने हेतु वर्ष 1984-85 में भारत सरकार के सहयोग से प्रदेश में एकीकृत ग्रामीण ऊर्जा कार्यक्रम चलाया गया। 

रूपाली ठाकुर ने बताया कि इस कार्यक्रम को बढ़ावा देने के लिए आम जनता में इस के प्रति जागरूकता उत्पन्न करने के उ६ेश्य से 18 मार्च, 1989 को हिमऊर्जा का गठन किया गया, जिसका उ६ेश्य प्रदेश में ऊर्जा की आपूर्ति, नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से पूरा करने के लिए योजना बनाना और कार्यान्वित करना है, जिससे पारम्परिक स्रोतों पर ऊर्जा के लिए निर्भरता कम हो, पर्यावरण स्वच्छ रहे तथा ग्रामीणों के जीवन स्तर में बेहतरी आए।

  • सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भी हिम ऊर्जा अपना वर्चस्व बनाए हुए

उन्होंने अवगत कराया कि हिमऊर्जा द्वारा अपनी यात्रा आम जनता को ऊर्जा दक्ष संयंत्रों तथा सौर ऊर्जा पर आधारित संयंत्र/उपकरण के वितरण से आंरभ की गई थी। तत्पश्चात् वर्ष 1995 में हिमऊर्जा को निजी क्षेत्र की भागीदारी से लघु जल विद्युत परियोजनाओं के कार्यन्वयन का कार्य भी सौंपा गया। सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भी हिम ऊर्जा अपना वर्चस्व बनाए हुए है। यह अभिकरण वर्तमान में राज्य में लघु जल विद्युत परियोजनाओं और सोलर ऊर्जा के साथ-साथ वैकल्पिक ऊर्जा के अन्य संसाधनों के दोहन से भी जुड़ा है।

रूपाली ठाकुर ने बताया कि शुरू से ही इस अभिकरण ने विद्युत रहित गाँवों और आम जनता पर ध्यान रखा और उन स्थानों को प्राथमिकता दी जहां लोग वर्ष के अधिकतर महीनों में भारी बर्फबारी के कारण रोशनी व अन्य मुख्य साधनों से वंचित रहते हैं।

  • जनजातीय जिला किन्नौर के कुन्नू और चारंग गाँवों का सौर ऊर्जा से विद्युतीकरण

  • गाँवों की गलियों में सौर गली रोशनियां स्थापित की गई

रूपाली ठाकुर ने अवगत कराया कि जनजातीय जिला “किन्नौर” के कुन्नू और चारंग गाँवों राष्ट्रीय उच्च मार्ग 205 (जंगी) से लगभग 45 किलोमीटर की दूरी परस्थित हैं। वर्ष 2015 से पूर्व इन गाँवों तक पहुंचने के लिए राष्ट्रीय उच्चमार्ग 205 (जंगी) से ठंगी तक वाहन योग्य मार्ग तथा ठंगी गाँव से 35 कि.मी. का सफर पैदल तय करना पड़ता था। “शरद ऋतु” में भारी बर्फबारी के कारण सड़क मार्ग अवरूद्ध हो जाने के कारण जंगी से ही पैदल यात्रा करनी पड़ती थी। इन गाँवों में 95 परिवार की जनसंख्या लगभग 455 है। वर्ष 1988 व 1989 में इन दोनों गाँवों के प्रत्येक परिवार को सौर घरेलू रोशनी प्रदान की गई, जिसमें 2-3 बल्ब की सुविधा थी। गाँवों की गलियों में सौर गली रोशनियां स्थापित की गई तथा लोगों के मनोरंजन हेतु सामुदायिक “दूरदर्शन” भी प्रदान किया गया।

  • वर्ष 2019-20 में हर घर को 1 किलोवाट के ऑफ ग्रिड सौर संयंत्र प्रदान किए गए

  • सभी संयन्त्र सुचारू रूप से कार्य कर रहे हैं, इन संयत्रों की स्थापना से यहां की जनता बहुत खुश है

उन्होंने बताया कि यद्यपि ये गाँवों अब सड़क सुविधा से जुड़ गए हैं तथा परम्परागत बिजली भी पहुंच गई है तथा भारी बर्फबारी के कारण ये गाँव 5-6 महीनों तक प्रदेश और देश के अन्य क्षेत्रों से कटे रहते हैं, ऐसी परिस्थितियों में इन लोगों के लिए रोशनी का मुख्य साधन “सौरऊर्जा” है। इन गाँवों में स्वच्छ एवम् हरित ऊर्जा की पूर्ति सुनिश्चित् करने हेतु हि.प्र. सरकार द्वारा वर्ष 2019-20 में हर घर को 1 किलोवाट के ऑफ ग्रिड सौर संयंत्र प्रदान किए गए। ये सभी संयन्त्र सुचारू रूप से कार्य कर रहे हैं। इन संयत्रों की स्थापना से यहां की जनता बहुत खुश है।

  • 5 मैगावाट तक क्षमता की लघु जल विद्युत परियोजनाओं का कार्यन्वयन

वर्ष 1995 में हिमऊर्जा को निजी क्षेत्र की भागीदारी से लघु जल विद्युत परियोजनाओं के कार्यन्वयन का कार्य भी सौंपा गया, जिसके अंर्तगत विभिन्न निजी निवेशकों को 5 मैगावाट तक की कुल 742 लघु जल विद्युत परियोजनाएं (1781 डू) आबंटित की जा चुकी है जिनमें से 88 परियोजनाएं (326.25डॅ) की पूर्ण हो चुकी हैं।

  • जनजातीय क्षेत्र पांगी घाटी में ऑफ ग्रिड सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना

  • वर्ष 1997 व 1998 में हिम ऊर्जा द्वारा इस क्षेत्र की ऊर्जा मांग पूरी करने हेतु पोर्टेबल हाईडल जनरेटर सैट स्थापित किए गए

  • वर्ष 2000 व 2004 तथा वर्ष 2010 में सूक्ष्म जल विद्युत परियोजनाएं स्थापित की गईं

मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने कहा कि जनजातीय क्षेत्र  “पांगी घाटी” सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण लगभग 6 महीने बंद रहती है और विद्युत लाईनें भी बाधित रहती हैं। वर्ष 1997 व 1998 में हिम ऊर्जा द्वारा इस क्षेत्र की ऊर्जा मांग पूरी करने हेतु पोर्टेबल हाईडल जनरेटर सैट स्थापित किए गए तत्पश्चात वर्ष 2000 व 2004 तथा वर्ष 2010 में सूक्ष्म जल विद्युत परियोजनाएं स्थापित की गईं।

बिजली की समस्या से निजात पाने हेतु वर्ष 2020-21 के बजट में प्रदेश सरकार द्वारा इस घाटी के 1000 बी.पी.एल. परिवारों को 250 वॉट (प्रत्येक) के ऑफ ग्रिड सौर ऊर्जा संयंत्र प्रदान करने का निर्णय लिया गया। बजट में किए वचन के अनुरूप पांगी में 1000 सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित कर दिए गए हैं, जो सुचारू रूप से चल रहें हैं। एक संयंत्र से एक एल.ई.डी. टीवी और 5-6 एल.ई.डी.लाइटें चल रही हैं। मोबाईल चार्ज की सुविधा भी उपलब्ध हो रही है। इन संयंत्रों के लगने से लोग बहुत प्रसन्न है।इस घाटी के शेष बचे 1162 बी.पी.एल. परिवारों को भी 250 वॉट (प्रत्येक) के ऑफ ग्रिड सौर ऊर्जा संयंत्र प्रदान किए जाएंगे।

  • क्र ग्रिड कनेक्टेड़ रूफटॉप प्रोग्रामः-

  • कार्यक्रम का उद्देश्य हर घर को बिजली घर बनाना व बिजली बिलों में कटौती करना

उन्होंने बताया कि नवीन व नवीनकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा इस कार्यक्रम का प्रथम चरण वर्ष 2017 व द्धितीय चरण 2019 मे शुरू किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य हर घर को बिजली घर बनाना तथा बिजली बिलों में कटौती करना है।

प्रथमचरण के अंतर्गत हि.प्र. को 8 मैगावाट का लक्ष्य आबंटित किया था। जिसके अंर्तगत घरेलू उपभोक्ताओं के भवनों, सामाजिक क्षेत्र के भवनों तथा संस्थाओं (जो सोसायटी एक्ट व ट्रस्ट एक्ट के अन्तर्गत पंजिकृत की गई है), पर इस प्रकार के संयंत्रों की 10.165 डॅ क्षमता स्थापित की गई, जिन पर केन्द्रीय अनुदान 70 प्रतिशत तथा हि.प्र. सरकार द्वारा 4000 रूपये प्रति किलोवाट उपदान दिया गया। सरकारी भवनों की छतों पर भी 2.00 डॅ यह संयंत्र स्थापित किए गए जिन पर भारत सरकार द्वारा 60 प्रतिशत अनुदान दिया गया । शिमला शहर के सरकारी भवनों के छतों पर 2.50 डॅ की क्षमता स्थापित की गई।

  • 1 किलोवाट के संयंत्र से 1 वर्ष में लगभग 1500 यूनिट बिजली उत्पन्न होती है

उन्होंने बताया कि 1 किलोवाट के संयंत्र से 1 वर्ष में लगभग 1500 यूनिट बिजली उत्पन्न होती है,जिस से जहां उपभोक्ता बिजली के भारी-भरकम बिल से निजात पान में सफल हुए हैं वही मांग से अधिक बिजली पैदा होन पर इसे हिमाचल प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड लिमिटेड के ग्रिड में पहुंचा कर अतिरिक्त आय भी प्राप्त करने में कामयाब रहे हैं।

द्वितीय चरण के अंर्तगत भारत सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश को 15 मैगावाट का लक्ष्य आबंटित किया है। प्रतिकिलोवाट कीमत 42,000 रूपये से शुरू होती हैं और 500 किलोवाट तक की क्षमता के लिए 35,000 रूपये प्रतिकिलोवाट हैं। भारत सरकार के नवीन व नवीकरणीय मंत्रालय द्वारा इन संयंत्रों पर 3 ज्ञॅ तक 40 प्रतिशत तथा 3 किलोवाट से उपर 10 कि.वाट तक के संयंत्रों पर 20 प्रतिशत वितीय सहायता घरेलू उपभोक्ताओं को देय होगी। हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा घरेलू उपभोक्ताओं को 4000 रूपये प्रति किलोवाट का उपदान प्रदान किया जाएगा।

उन्होंने अवगत कराया कि भारत सरकार द्वारा देय 20 प्रतिशत अनुदान “आवासीय हित संगठनों” तथा समूह आवासीय समितियों को भी देय है। इन ईकाईयों द्वारा एक जगह पर निर्मित मकानों के लिए प्रति मकान क्षमता 10 किलोवाट तथा प्रति संगठन/समिति कुल संचित क्षमता 500 किलोवाट होगी।

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