पार्टी की ओर से दिये गये सम्मान से पूरी तरह से संतुष्ट, भ्रामक बातें न फैलाएं : प्रो. धूमल

मुख्यमंत्री का व्यवहार तानाशाहीपूर्ण : प्रो. धूमल

रणधीर शर्मा को मंच से बोलने का मौका न देना अलोकतान्त्रिक एवं तानाशाहीपूर्ण : प्रो. धूमल

मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह विपक्ष की आवाज को दबाने का कर रहे हैं  प्रयास

9 जुलाई को श्री नैनादेवी जी विधान सभा क्षेत्र में घटी घटना की होनी चाहिए जांच

शिमला: हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने जिला बिलासपुर के श्री नैनादेवी जी विधान सभा क्षेत्र में परसों घटी घटना को लोकतन्त्र पर कलंक बताया और इस पर खेद व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि जब मुख्यमंत्री या मंत्री किसी विधानसभा क्षेत्र में जाते हैं और जनसभा करते हैं तो वहां के विधायक चाहे सत्ता के हों या विपक्ष के उनके सामने जनसमस्याओं को उठाना अपना दायित्व समझते हैं और लोकतन्त्र का तकाजा है कि इसका मौका उन्हें मिलना भी चाहिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मंत्रियों के कार्यालय से जारी प्रवास कार्यक्रम में सीनीयर सकैण्डरी स्कूल बसी के ग्राऊंड में जनसभा का कार्यक्रम लिखा था तो उसे कांग्रेस पार्टी की रैली बताने का कोई औचित्य नहीं। इसलिए वहां पर गए स्थानीय विधायक रणधीर शर्मा को मंच से बोलने का मौका न देना अलोकतान्त्रिक एवं तानाशाहीपूर्ण है। इसके अलावा विधायक रणधीर शर्मा के साथ मंच पर मुख्यमंत्री के सामने सरकार व सत्ताधारी पार्टी के उच्च पदों पर बैठे लोगों द्वारा धक्का मुक्की, गाली-गलौच व हाथापाई करना सरकार प्रायोजित गुण्डागर्दी का जीता जागता उदाहरण है जिसकी सभी को कड़ी निन्दा करनी चाहिए। यह अपमान विधायक रणधीर शर्मा का नहीं बल्कि स्थानीय विधान सभा क्षेत्र की जनता का है जिसने लगातार दो बार जीताकर उन्हें विधानसभा भेजा।

प्रो. धूमल ने कहा हि.प्र. के इतिहास में ऐसी घटनाऐं कम ही घटी है परन्तु जो घटी है वो मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के सामने घटी है। चाहे घटना धर्मपुर के विधायक ठाकुर महेन्द्र सिंह की हो और चाहे नालागढ़ के पूर्व विधायक स्व. हरीनारायण सैणी की। यही नहीं इनके सामने ही कांग्रेस पार्टी के नेताओं पूर्व मुख्यमंत्री स्व. रामलाल ठाकुर, पूर्व मंत्री स्व. जय बिहारी लाल खाची, पूर्व केन्द्रीय मंत्री आनन्द शर्मा के साथ परवाणु में जो हुआ था उसे प्रदेश की जनता अभी भूली नहीं है। इन घटनाओं से यह स्पष्ट हो जाता है कि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह अपने राजनैतिक विरोधियों को अपना दुश्मन मानते हैं और दुश्मनों की तरह का व्यवहार करते हैं जो लोकतान्त्रिक ढंग से चुने हुए मुख्यमंत्री को शोभा नहीं देता।

प्रो. धूमल ने आरोप लगाया कि जबसे यह सरकार सत्ता में आई है मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह विपक्ष की आवाज को दबाने का हर संभव प्रयास कर रहे हैं। ऐसा प्रदेश के अन्य स्थानों में भी हुआ जब विपक्ष के विधायकों को बोलने का मौका नहीं दिया गया। कुछ माह पूर्व तो मुख्यमंत्री ने यह कह दिया था कि अधिकारी विपक्ष के विधायकों से न मिला करें जो इस बात को साबित करता है कि मुख्यमंत्री का व्यवहार तानाशाहीपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का लोकतान्त्रिक मर्यादाओं पर से विश्वास उठ गया है और ऐसा करके वे मुख्यमंत्री पद की गरीमा को ठेस पहुंचा रहे हैं। प्रो. धूमल ने कहा कि 9 जुलाई को श्री नैनादेवी जी विधान सभा क्षेत्र में घटी घटना की जांच होनी चाहिए और जिन्होंने स्थानीय विधायक के साथ दुर्व्यहार किया है उनके खिलाफ सख्त कारवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भाजपा विधायक दल इस मुददे को विधान सभा के अन्दर भी उठाएगा।

सम्बंधित समाचार

अपने सुझाव दें

Your email address will not be published. Required fields are marked *