हिमाचल: बजट पर मुख्यमंत्री के जवाब से नाराज विपक्ष ने किया सदन से वाकआउट

  • विपक्ष ने सरकार पर गलत और अधूरे आंकड़े देने के लगाए आरोप

शिमला : मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर द्वारा हिमाचल विधानसभा में गत 6 मार्च को वितीय वर्ष 2020-21 के बजट पर हुई चर्चा के आज दिए गए जवाब से नाराज होकर विपक्ष ने सदन से वाकआउट कर दिया। विपक्ष ने यह वाकआउट उस समय किया, जब मुख्यमंत्री बजट चर्चा का जवाब दे रहे थे। बजट पर चार दिन चर्चा चली और इस दौरान सत्तापक्ष व विपक्ष के 50 सदस्यों ने भाग लिया। चर्चा में 30 सत्तापक्ष के विधायक, 18 विपक्ष के विधायक तथा 1 सीपीआईएम और एक अन्य निर्दलीय विधायक ने बजट अनुमान की चर्चा में हिस्सा लिया। जिसके बाद मुख्यमंत्री ने आज चर्चा का जवाब दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए बजट का प्रावधान किया गया है। लेकिन फिर भी यह कहना कि कुछ नहीं हुआ है, प्रदेश कर्ज में डूब गया यह गलत है। सरकार ने जो योजनाएं शुरू की है जनता ने उन्हें दिल से स्वीकारा है।

2 लाख 76 लोगों के घर मे गैस चूल्हा पहुंचाया गया है। बेरोजगारी को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि समस्या देश भर में है। हिमाचल प्रदेश सरकार ने बेरोजगारी को दूर करने के लिए मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना शुरू की है और कौशल विकास भत्ता के माध्यम से भी बेरोजगारों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा दी जा रही है तथा जनमंच के माध्यम से लोगों की शिकायतें दूर की जा रही है। अब तक प्रदेश में 189 जनमंच हो चुके हैं जिसमें 47 हजार शिकायतों में से 43 हजार शिकायतों को हल किया जा चुका है और विपक्ष कह रहा है कि जनमंच सरकार का प्रायोजित कार्यक्रम है। 25 नई योजनाओं को इस बजट में शुरू करने का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि गरीब परिवार को आवास देने की संख्या को सरकार ने इस बार 5 हजार से 10 हजार किया गया है।

47,906 करोड़ का कर्ज कांग्रेस ने विरासत में बीजेपी सरकार पर छोड़ा है। 2018-19 में तय सीमा से 1617 करोड़ का कम कर्ज सरकार ने उठाया। कुशल वितीय प्रबंधन के तहत ही केंद्र और प्रदेश की बीजेपी सरकार ने कर्ज उठाया है। प्रदेश में 6,442 करोड़ के कर्ज वापिस देना वांछित है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रेम कुमार धूमल की सरकार के समय 2007 से 12 तक 7,465 करोड़ रुपये कर्ज लिया गया जबकि कांग्रेस सरकार ने 2012 से 17 तक 19,195 करोड़ का कर्ज लिया गया। 6,793 करोड़ रुपये का सरकार पर कर्ज लेने का विपक्ष का आरोप गलत आंकड़ा है। 11 मार्च 2020 तक 30,524 करोड़ का वितीय सहायता प्रदेश को केंद्र से मिल चुकी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार को 47 हजार करोड़ का ऋण विरासत में मिला है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार नियमों की परिधि में रहकर ही ऋण ले रही है।

इस बीच विपक्ष ने सरकार पर गलत और अधूरे आंकड़े देने के आरोप लगाए और सदन के अंदर ही सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर वाकआउट कर दिया। नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि सरकार कर्ज को लेकर सदन में आंकड़े नहीं दे रही है जबकि पिछले सरकार के आंकड़ों को ही बताया जा रहा है। सरकार के पास न तो पैसा है और न ही संसाधन विकसित करने को लेकर कोई योजना है।

वहीं कांग्रेस के साथ सीपीआईएम के विधायक राकेश सिंघा ने भी कांग्रेस के विधायकों के साथ वाकआउट किया और सरकार के वितीय प्रबंधन पर सवाल उठाए। राकेश सिंघा ने कहा कि सरकार ने जिन योजनाओं का जिक्र बजट में किया है, उससे प्रदेश में आर्थिक बोझ बढ़ेगा और प्रदेश में कृषि संकट पैदा होगा।

 

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