शिमला: चकौता धारकों ने भूमि पर मालिकाना हक न दिए जाने पर जताया रोष

 

  • मालिकाना हक न मिलने पर निकाली रोष रैली, मांगे पूरी न होने पर दी आंदोलन की चेतावनी

शिमला: प्रदेश में वर्षों से भूमि के मालिकाना हक के लिए संघर्षत चकौता धारक आज भूमि के मालिकाना हक की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे। प्रदेश भर से चकौता धारकों ने आज लघु किसान कल्याण एकता के बैनर तले आज रॉबट रॉय के माध्यम से भूमि पर मालिकाना हक न दिए जाने पर अपना रोष प्रकट किया। चकौता धारकों ने शिमला के लिफ्ट से टॉलेंड तक एक रैली निकाली और इस रैली के माध्यम से सरकार से भूमि का मालकिना हक देने की मांग की। इसके साथ ही चकौता धारकों ने सरकार को चेताते हुए कहा कि अगर उनकी मांगें पूरी न कि गयी तो वह उग्र आंदोलन से भी पीछे नही हटेंगे। चकौता धारकों ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि कई वर्षों से हजारों लघु किसानों की अनदेखी की जा रही है। किसान भूमि पर मालिकाना हक देने की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी मांगों को अनसुना कर रही है।

लघु किसान कल्याण एकता के प्रदेश महासचिव रॉबट रॉय ने कहा कि प्रदेश में कई वर्षों से मालिकाना हक के लिए लघु किसान अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन वर्तमान और गत सरकार द्वारा किसानों की अनदेखी की गई है। दोनों सरकारों ने किसानों के हक की बात को न ही कभी कैबिनेट में उठाया गया न ही विधानसभा में इस मुद्दे पर चर्चा हुई । उन्होंने कहा कि प्रदेश में 20 हजार से ज्यादा चकौता धारक हैं और सरकार से भूमि के मालिकाना हक की मांग कर रहे है। उन्होंने कहा कि सरकार ने पहले चरण में 5 बीघा तक दिए है, लेकिन उसमें काफी त्रुटियां है. उन्होंने कहा कि सरकार वर्षों की मेहनत से भूमि अर्जित करने वाले किसानों को 20 बीघा भूमि का हक नही दे रही है।

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