शूलिनी विश्वविध्यालय में हुआ तीन दिवसीय ‘आध्यात्मिक रिट्रीट’ का आगाज़

शूलिनी व क्रैनफ़ील्ड विश्वविद्यालय के सयुंक्त प्रोजेक्ट को फ़ंड करेगा रॉयल एकेडमी ऑफ इंजीन्यरिंग

शिमला: लंदन की प्रसिद्ध रॉयल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग, शूलिनी विश्वविद्यालय और इंग्लैंड की क्रैनफ़ील्ड विवि के संयुक्त पाठ्यक्रम विकास परियोजना को फ़ंड करेगा। दो साल के इस परियोजना के लिए रॉयल एकेडमी 50,000 पाउंड की राशि प्रदान करेगा। इस प्रोजेक्ट के माध्यम से हासिल किए गए ज्ञान को अन्य शिक्षण संस्थानों के साथ भी साझा किया जाएगा।

इस परियोजना से विश्वविद्यालयों के भीतर इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम और शैक्षिक अभ्यास में औद्योगिक इनपुट को बढ़ाने की उम्मीद की जा रही है ताकि व्यावहारिक इंजीनियरिंग कौशल प्रदान करने और छात्रों के रोजगार पाने की क्षमता में सुधार हो सके। इससे कोर्स की सामग्री को सिखाने के लिए इंजीनियरिंग शिक्षकों की क्षमता में सुधार आएगा और भारत और ब्रिटेन के विश्वविद्यालय और उद्योग संस्थानों के बीच अनुसंधान और ज्ञान-सहयोग मजबूत होगा।

हर साल रॉयल अकादमी ऑफ इंजीन्यरिंग, पूरे विश्व के शोधकर्ताओं को पुरस्कार देती है और दुनिया भर के उम्मीदवारों को अपने विभिन्न परियोजनाओं के लिए आमंत्रित करती है। इस साल का विषय ‘नैनोमिटेरियल्स और उसके प्रयोग’ था। उनका उद्देश्य इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी में उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिए दुनिया भर से प्रतिभाशाली इंजीनियरों और शोधकर्ताओं, प्रौद्योगिकी, ज्ञान और अनुभव को एक साथ लाना है।

यह प्रोजेक्ट तीन क्षेत्रों पर केंद्रित होगा: सबसे पहले, नैनोमैटिरियल्स और इंजीनियरिंग में अत्याधुनिक अनुसंधान यूके की क्रैनफ़ील्ड यूनिवर्सिटी में किया जाएगा। दूसरे भाग में ब्रिटेन के विश्वविद्यालयों के समरूप इंजीनियरिंग छात्रों के पाठ्यक्रम को संरेखित करने पर ध्यान केंद्रित रहेगा। यह प्रोजेक्ट इंजीनियरिंग छात्रों के लिए एक बूस्टर के रूप में कार्य करेगा और कई उद्योगों में नौकरी के अवसर खोलेगा। अंत में, परियोजना का तीसरा हिस्सा अन्य विश्वविद्यालयों और संस्थानों के साथ इस परियोजना के माध्यम से प्राप्त ज्ञान और विशेषज्ञता का प्रसार करना होगा। इस प्रोजेक्ट में किए गए कार्य से अनुसंधान, नीति निर्माण, शिक्षा और उद्यमशीलता, और उन सभी गतिविधियों को बढ़ाने में मदद मिलेगी जो इंजीनियरिंग को समृद्ध बनाने में उपयोगी है।

शूलिनी के स्कूल ऑफ फ़िज़िक्स अँड मैटेरियल्स साइन्स में प्रोफेसर डॉ अतुल ठाकुर, उन्नत निर्माण प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में औद्योगिक रूप से केंद्रित पाठ्यक्रम विकसित करने के उद्देश्य से इस परियोजना के लिए शोधकर्ताओं की एक टीम का नेतृत्व करेगें। पाठ्यक्रम की डिजाइनिंग में डॉ ठाकुर और उनकी टीम, यूके के विभिन्न विश्वविद्यालयों का दौरा करेगें। इस प्रोजेक्ट के दौरान शूलिनी और क्रैनफ़ील्ड के बीच में एम॰ओ॰यू॰ पर हस्ताक्षर किए जा सकते है।

इस मौके पर शूलिनी विवि के उप कुलपति प्रो॰ पी॰के॰ खोसला ने कहा की यह बहुत गर्व की बात है कि शूलिनी को  इस प्रतिष्ठित प्रोजेक्ट का हिस्सा बनने के लिए चुना गया है। यह हमारे संस्थान में किए जा रहे शोध का प्रमाण है। यह उल्लेखनीय है कि शूलिनी विश्वविद्यालय नेनोटैक्नोलॉजी में उत्कृष्ट काम कर रहा है। इस क्षेत्र में अनुसंधान को और बढ़ावा देने के लिए पिछले साल विवि में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के चेयरमैन न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार ने हिमालय सेंटर ऑफ नैनोटेक्नोलॉजी का उद्घाटन किया था।

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