विभागों को सूखे जैसी स्थिति के लिए आकस्मिक योजना तैयार करने के निर्देश : ओंकार शर्मा

बीज उपचार हेतु राज्यव्यापी अभियान 17 से 31 अक्तूबर तक

शिमला: फसलों को रोगों से छुटकारा दिलाने के लिए शत प्रतिशत बीजोपचार के राज्यव्यापी अभियान की सफलता को देखते हुए प्रदेश सरकार ने पिछले वर्ष की भांति इस वर्ष भी इसे रबी फसलों में भी जारी रखने का फैसला किया है। यह जानकारी देते हुए कृषि निदेशक, डा. रमेश चन्द ने कहा कि इस अभियान को प्रदेश में “राष्ट्रीय टीकाकरण व पल्स पोलियो” अभियान की तर्ज पर 17 से 31 अक्तूबर तक चलाया जायेगा।

डा. रमेश चन्द ने कहा कि सभी तरह की फसलों के बीजों को मृदाजनित व बीजजनित रोगों से ग्रसित होने की सम्भावना रहती है, जो न केवल फसल उगते समय बल्कि फसल की अन्य अवस्थाओं में भी भारी नुकसान पहॅुंचाते हैं। वर्तमान में किसान बीज की 70 प्रतिशत जरूरत को अपने द्वारा पैदा किए गए बीजों से पूरा करते है, जिन्हें वे बिना उपचार किए ही बो देते हैं। उन्होंने कहा कि इस अभियान का उद्देष्य बीजोपचार द्वारा फसलों को बीजजनित व मृदाजनित रोगों व कीटों से छुटकारा दिलवाना है। बीजोपचार करने से बेहतर बीज अंकुरण, पर्याप्त स्वस्थ पौधे, स्वस्थ पौधों के कारण अधिक पैदावार व बीजाई के समय से ही रोगों व कीटों पर नियंत्रण रहता है। छिड़काव की तुलना में बीजोपचार करना आसान व सस्ता होता है।

डा. रमेश चन्द ने बताया कि प्रत्येक जिले में बीजोपचार पर 15 दिन का अभियान चलाया जायेगा। इससे होने वाले फायदों के बारे में प्रदर्शन लगवाये जाएंगे, जिसमें उपचारित व बिना उपचारित बीजों से पैदा होने वाली फसल की तुलना की जायेगी। विभाग द्वारा विभिन्न रबी फसलों के 76500 क्विटंल उपचारित बीज किसानों को उपलब्ध करवाया जा रहे हैं। बीजोपचार के बारे में किसानों को जागरूक करने व बीजोपचार के तरीकों के बारे में प्रशिक्षण शिविरों का भी आयोजन किया जा रहा है। कृषि विष्वविद्यालय व कृषि विज्ञान केन्द्रों को भी इस अभियान को प्रभावी ढ़ग से चलाने हेतु अनुरोध किया गया है। प्रचार प्रसार में इलैक्ट्रॉनिक व प्रिन्ट मिडिया की सषक्त भूमिका है, इसके दृष्टिगत इन माध्यमों के द्वारा भी बार-बार इस अभियान का प्रचार किया जायेगा। उन्होंने आगे बताया कि राज्य के किसानों को उच्च गुणवत्ता के बीज उपलब्ध करवाने के उद्देष्य से चालू रबी मौसम में बीज के 400 नमूने लिए जायेंगे व सोलन, पालमपुर व मंडी में स्थित बीज परीक्षण प्रयोगशाला में इनकी गुणवत्ता की जांच की जायेगी। इसके अतिरिक्त खाद के 1000 नमूने व कीटनाशकों के 150 नमूने लिए जायेंगे व इनकी गुणवत्ता की जांच की जायेगी। उन्होंने किसानों को आह्वान किया कि वे इस अभियान को सफल बनाने में बढ़ चढ़ कर भाग लें तथा बीजों को उपचारित करने के बाद ही बोएं। इससे जहां फसलों की पैदावार बढ़ेगी, वहीं उत्पाद की गुणवत्ता में भी सुधार होगा।

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