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शूलिनी विश्वविद्यालय में डॉ. वाईएस परमार की याद में वृक्षारोपण अभियान का शुभारंभ

शूलिनी विश्वविद्यालय में डॉ. वाईएस परमार की याद में वृक्षारोपण अभियान का शुभारंभ

  • इस साल 3500 पेड़ लगाने का लक्ष्य
  • पिछले साल लगाए थे युनिवर्सिटी ने इस क्षेत्र में 2100 पेड़
  •  डॉ. परमार एक बहुत ही दूरदर्शी नेता: प्रो. खोसला 
इस साल 3500 पेड़ लगाने का लक्ष्य

इस साल 3500 पेड़ लगाने का लक्ष्य

शिमला: हिमाचल प्रदेश के संस्थापक और पहले मुख्य मंत्री डॉ वाई॰एस॰ परमार के जन्म

पिछले साल लगाए थे युनिवर्सिटी ने इस क्षेत्र में 2100 पेड़

पिछले साल लगाए थे युनिवर्सिटी ने इस क्षेत्र में 2100 पेड़

दिवस पर शूलिनी विश्वविद्यालय ने गुरूवार शाम विवि परिसर में वृक्षारोपण अभियान का शुभारंभ किया। इस मौके पर डीएफ़ओ सोलन, अशोक चौहान मुख्य अतिथि रहे।दो सप्ताह तक चलने वाले इस अभियान में विश्वविद्यालय के मौजूदा और नए छात्र के अलावा, संकाय सदस्य और आसपास के क्षेत्र के लोग भाग लेंगे।

इस अवसर पर शूलिनी विश्वविद्यालय के उप कुलपति प्रोफेसर पी॰के॰ खोसला ने हिमाचल प्रदेश वन विभाग के साथ मिलकर विवि कैम्पस में तैयार किए जा रहे एक हिस्से को डॉ परमार की याद में ‘डॉ वाईएस परमार मेमोरियल हिल’ का नाम दिया। इस पहाड़ी पर विभिन्न प्रकार के औषधीय, सजावटी और चारा देने वाले पेड़ लगाए जाएगें ताकि आने वाले समय में इन्हें वैज्ञानिक और पर्यावरण सम्बंधित अनुसंधान के लिए उपयोग में लाया जा सके। यह पहाड़ी विवि के मायरा तरुवाटिका (arboretum)का हिस्सा है जिसकी देखरेख विश्वविद्यालय के सभी विभाग और छात्र करेंगें।

मायरा तरुवाटिका में अनेक प्रकार की स्थानीय पौधों की प्रजातियों के संरक्षण के किए जाएगें लिए प्रयास

मायरा तरुवाटिका में अनेक प्रकार की स्थानीय पौधों की प्रजातियों के संरक्षण के किए जाएगें लिए प्रयास

इस साल 3500 पेड़ इस पहाड़ी पर लगाने का लक्ष्य रखा गया है। पिछले साल भी युनिवर्सिटी ने इस क्षेत्र में 2100 पेड़ लगाए थे। इसमें देवदार, पेल्टोफोरुम, जकरनदा, हरर, भेरा, रूबिनिया, कोलोटेरिया, सिल्वर ओक, चिनार जैसे पेड़ों के अलावा कई ऐतिहासिक महत्व वाले पोधे भी लगाए जाएगें। मायरा तरुवाटिका में अनेक प्रकार की स्थानीय पौधों की प्रजातियों के संरक्षण के लिए प्रयास किए जाएगें। इसकी एक खास बात यह भी है कि कोई भी यहाँ जाकर इस तरुवाटिका में अपने किसी खास दिन जैसे की जन्मदिन, या परिजनों की याद में पेड़ लगा सकता है जिसकी देख-रेख विश्वविद्यालय करेगा।

इस मौके पर प्रो. खोसला ने कहा कि डॉ परमार एक बहुत ही दूरदर्शी नेता थे और उनके विचार और राज्य के लिए सोच बहुत ही सराहनीय है। उन्होनें कहा की वह बहुत भाग्यशाली थे कि उन्हें अपने कैरियर की शुरुआती दिनों में ही डॉ परमार के साथ काम करने और उन्हें नज़दीक से जानने का मौका मिला। डॉ परमार को एक सच्चा पर्यावरण और बागवानी शिक्षक बताते हुए प्रो॰ खोसला ने सभी को उनके जीवन से कुछ सीखने को कहा।डीएफ़ओ सोलन ने इस मौके पर विवि के पर्यावरण के संरक्षण के लिए उठाए जा रहे कार्यों की सराहना की और पर्यावरण के लिए उठाए जा रहे कदमों में पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया।

 

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