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जिला प्रशासन व जिला आपदा प्रबंधन द्वारा स्थापित नियंत्रण कक्ष में किसी भी प्रकार की सहायता एवं शिकायत के लिए दूरभाष संख्या 1077 पर सम्पर्क

जिला शिमला में भारी बारिश से करीब 90 करोड़ का नुकसान

  •   किसी भी प्रकार की सहायता एवं शिकायत के लिए दूरभाष संख्या 1077 पर करें सम्पर्क

शिमला: भारी बारिश के कारण जिला में गत सांय तक लगभग 90 करोड़ रुपए के नुकसान का आंकलन किया गया है। जिला में शनिवार सांय से 205 एमएम बारिश दर्ज की गई है। उपायुक्त शिमला अमित कश्यप ने आज यहां यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि चैपाल क्षेत्र में अतिरिक्त उपायुक्त शिमला तथा जुब्बल क्षेत्र में अतिरिक्त जिला दण्डाधिकारी प्रोटोकाल को 19 अगस्त, 2019 से चार दिनों के लिए भारी बारिश से हुए नुकसान के उपरांत स्थिति से निपटने तथा जनजीवन को सामान्य बनाए रखने के लिए तैनाती निर्देश दिए।

अमित कश्यप ने बताया कि भारी वर्षा के कारण हुए विभिन्न हादसों में जिला में 12 लोगों की मौत हुई है तथा 270 सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं। उन्होंने बताया कि जिला के सभी उपमंडलाधिकारियों को सड़कों को सुचारू बनाये रखने के लिए कड़े निर्देश जारी किये गये हैं। इसके लिए प्रत्येक उपमंडलाधिकारी को 30 लाख रुपए की राशि प्रदान की गई। उपायुक्त ने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा जिला के लिए पांच करोड़ रुपए की अग्रिम राहत राशि प्रदान की गई है।

उपायुक्त शिमला ने कहा कि सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग की जिला में भारी बारिश के कारण बाधित हुई जलापूर्ति की 80 प्रतिशत स्कीमों को जल्द सुचारू कर दिया जाएगा। उन्होंने हिमाचल पथ परिवहन निगम के अधिकारियों को जिला के सभी सम्पर्क सड़कांे पर यातायात को सुचारू रखने के निर्देश दिये।जिला में विद्युत की लगभग 580 डीटीआर प्रभावित हुई हैं, जिनमें से 50 प्रतिशत को ठीक कर दिया गया है।

जिला प्रशासन द्वारा नगर निगम को शहर में नुकसान की संभावना वाले चिन्हित 197 पेड़ों की अनुमति लेकर तुरंत काटने के निर्देश दिए गए। जिला प्रशासन द्वारा भारी वर्षा से हुए नुकसान से जनजीवन को सामान्य बनाने के लिए युद्धस्तर पर कार्य किया जा रहा है।उन्होंने जिला के सभी उपमंडाधिकारियों को बारिश से सड़कों को हुए नुकसान के कारण सेबों को मंडियों तक पहुंचाने में आने वाली दिक्कतों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने संबंधित उपमंडलाधिकारियों को शिमला के ऊपरी क्षेत्रों से सेब मण्डियों तक पहुंचाने के लिए सभी सम्पर्क सड़कों को खोलने के लिए हर संभव सहायता उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन द्वारा निर्धारित किये गये दरों के आधार पर ही सेबों का ढुलान किया जाएगा। अधिक दरें वसूल करने की स्थिति में बागवान संबंधित उपमंडलाधिकारी को शिकायत कर सकते हैं।

उन्होंने बताया कि जिला में संचार व्यवस्था सामान्य है। बिजली की आपूर्ति चैपाल के अतिरिक्त अन्य सभी स्थानों पर सामान्य है। जिला के सभी राष्ट्रीय मार्ग खोल दिए गए हैं।उपायुक्त शिमला ने नगर निगम शिमला को शिमला नगर मंे जलापूर्ति  सामान्य बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि जिला के सभी स्थानों में खाद्य पदार्थों का भण्डारण पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है।

जिला के सीमावर्ती उत्तराखंड के सनैल तथा अराकोट क्षेत्र में वर्षा के दौरान लोगों को राहत व बचाव कार्य किया गया। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन द्वारा इन क्षेत्रों में पर्याप्त मात्रा में खाद्य सामग्री तथा अन्य सहायता सामग्री उपलब्ध करवाई जा रही है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन व जिला आपदा प्रबंधन द्वारा स्थापित नियंत्रण कक्ष में किसी भी प्रकार की सहायता एवं शिकायत के लिए दूरभाष संख्या 1077 पर सम्पर्क किया जा सकता है।

हिमाचल विधानसभा मानसून सत्र : पहले दिन तपा सदन

हिमाचल विधानसभा मानसून सत्र: पहले दिन तपा सदन

शिमला : हिमाचल विधानसभा में मानसून सत्र का पहला दिन काफी हंगामेदार रहा। जहाँ नेता विपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने ऊना सदर से कांग्रेस विधायक सतपाल रायजादा के नाम शराब माफिया से जोड़ने पर सदन में नियम 67 के तहत स्थगन प्रस्ताव लाया। वहीं विधानसभा अध्यक्ष ने इसे मानने से इंकार कर दिया। जिस पर विपक्ष ने सदन में हंगामा करना शुरू कर दिया और सदन के अंदर ही सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। जिस पर सरकार के विधायकों ने भी विपक्ष के खिलाफ नारेबाजी की। काफी देर तक नारेबाजी के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने 15 मिनट के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी। 15 मिनट बाद सदन की कार्यवाही एक बार फिर शुरू हुई। लेकिन विपक्ष इसके बाबजूद सदन मे बेल में आकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करता रहा। बीच में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने विपक्ष को मामले पर जवाब देने की भी कोशिश की, लेकिन दोनों पक्षों की नारेबाज़ी के बीच जयराम ठाकुर को बैठना पड़ा।

प्रदेश में भारी बारिश से 25 लोगों की मौत, करीब 574 करोड़ रुपये का नुकसान....

प्रदेश में भारी बारिश से 27 लोगों की मौत, करीब 574 करोड़ रुपये का नुकसान….

  •  भारी वर्षा से हुए नुकसान की क्षति के बहाली कार्यों के लिए 15 करोड़ जारी
  • सूबे में चार एनएच समेत 1088 सड़कें दूसरे दिन भी बंद रहीं। नदी-नाले अभी भी उफान पर हैं।

शिमला: हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश के चलते चार नेशनल हाईवे समेत 1088 से सड़के  अभी तक बंद हैं। कई क्षेत्रों में पानी-बिजली की सप्लाई ठप है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने मंगलवार को भी बारिश के आसार जताए हैं। भारी बारिश से 27 लोगों की जान गई है और राज्य को लगभग 574 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने आज जिला उपायुक्तों को शिमला से वीडियों कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित करते हुए कहा कि स्थिति से निपटने के लिए चौकसी बरती जाए तथा जरूरतमंद लोगों को तुरन्त सहायता पहुंचाई जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने बहाली कार्यों के लिए लोक निर्माण विभाग को 10 करोड़ रुपये, सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग को 4 करोड़ रुपये और हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत् बोर्ड लिमिटेड को एक करोड़ रुपये जारी किए हैं। उन्होंने सभी जिला उपायुक्तों को नुकसान का शीघ्र जायज़ा लेकर राज्य सरकार को तुरन्त रिपोर्ट प्रेषित करने के निर्देश दिए हैं।

जय राम ठाकुर ने उपायुक्त शिमला को सेब सीजन होने के कारण संबंधित क्षेत्रों की सड़कों की तुरन्त मुरम्मत व बहाली के निर्देश दिए हैं ताकि सेब उत्पादकों को उनके उत्पाद को बाजार तक पहुंचाने में परेशानी न उठानी पड़े। उन्होंने कहा कि जिन पेड़ों को खतरनाक घोषित किया गया है, उन्हें शीघ्र चिन्हित कर कटवा दिया जाए ताकि किसी भी संभावित खतरे से बचा जा सके। उन्होंने सभी उपायुक्तों से जिलों में बिजली, पानी और संचार सुविधाओं के शीघ्र बहाली के भी निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन को स्थानीय व पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए स्थानीय लोगों तथा पर्यटकों से नदियों से दूर रहने का आग्रह किया क्योंकि भारी वर्षा के कारण पानी का स्तर बढ़ने की आशंका रहती है। उन्होंने कहा कि कालका-शिमला और पठानकोट-मण्डी-मनाली जैसे मुख्य राष्ट्रीय राजमार्गों से मलबा और अवरोधों को शीघ्र हटाया जाए ताकि यातायात को सुचारू बनाया जा सके।

उपायुक्त किन्नौर ने बताया कि पिछले दो दिनों से हो रही भारी वर्षा के कारण जिले में लगभग 8 हजार सेब के पौधे बह गए हैं। उपायुक्त सोलन ने कहा कि जिले में नालागढ़ उपमण्डल के अंतर्गत सबसे अधिक क्षति हुई है। उपायुक्त कांगड़ा ने कहा कि जिले में लगभग 250 सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य योजनाओं को भारी वर्षा से नुकसान पहुंचा है, जिनमें से अधिकतर बहाल की जा चुकी हैं और शेष को कल तक बहाल कर दिया जाएगा। उपायुक्त चम्बा ने जानकारी दी कि मणिमहेश यात्रा के दौरान सभी एहतियाती कदम उठाए जाएंगे। उपायुक्त बिलासपुर ने मुख्यमंत्री को अवगत करवाया कि पिछले दो दिनों से हो रही वर्षा के कारण जिले में 140 सड़कें प्रभावित हुई हैं और एक व्यक्ति की मृत्यु हुई है। उपायुक्त मण्डी ने कहा कि पर्यटकों व आम यात्रियों की सुविधा के लिए मण्डी-मनाली उच्च-मार्ग को शीघ्र ही खोल दिया जाएगा।

उन्होंने उपायुक्त लाहौल-स्पीति को घाटी में असामयिक बर्फबारी के कारण फसे हुए स्थानीय लोगों और पर्यटकों को शीघ्र सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए।

भारी बारिश के चलते सोमवार को इन जिलों के स्कूल-कॉलेज बंद

शिमला: हिमाचल प्रदेश में हो रही लगातार भारी बारिश के चलते जहाँ कुछ जिलों के नदी नाले उफान पर हैं वहीं भूस्खलन जैसी घटनाएँ बढ़ रही है। जगह-जगह जाम और सड़कों की खस्ता हालत बनी हुई है।

भारी बारिश के चलते राजधानी शिमला सहित जिला सिरमौर, सोलन, कुल्लू, चंबा और बिलासुपर के सभी शिक्षण संस्थानों में सोमवार यानी 19 अगस्त को छुट्टी घोषित कर दी गई है। जिला प्रशासन ने यह निर्णय प्रदेश में हो रही भारी बारिश के चलते लिया है। जिला प्रशासन के आदेशों के अनुसार सोमवार को सभी सरकारी, निजी, स्कूल, कॉलेज, आईटीआई, आंगनवाड़ी केंद्र बंद रहेगे।

मुख्यमंत्री के सभी उपायुक्तों को स्थिति पर कड़ी निगरानी रखने के निर्देश, राज्य को बारिश से करीब 490 करोड़ रुपये का नुकसान

मुख्यमंत्री के सभी उपायुक्तों को स्थिति पर कड़ी निगरानी रखने के निर्देश, राज्य को बारिश से करीब 490 करोड़ रुपये का नुकसान

  • सभी उपायुक्तों को उनके जिलों के सभी शैक्षणिक संस्थानों को स्थिति के अनुसार समय पर बंद करवाने के निर्देश

शिमला : पिछले 24 घण्टों में भारी वर्षा के कारण राज्य के विभिन्न भागों में 18 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। राज्य में पिछले दो दिनों से भारी वर्षा होने के कारण जगह-जगह पर भूस्खलन, फ्लैश फ्लड और पेड़ों के गिरने की सूचना मिली है। यह बात मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने आज यहां पत्रकारों से बात करते हुए कही।

उन्होंने कहा कि अकेले शिमला जिले में ही 8 लोगों की मृत्यु की सूचना मिली है। उन्होंने कहा कि चम्बा, कुल्लू, सिरमौर और सोलन जिले में दो-दो व्यक्तियों ने अपनी जान गंवाई है। इसके अतिरिक्त बिलासपुर तथा लाहौल-स्पीति जिले में पिछले 24 घण्टों से हो रही भारी वर्षा के कारण एक-एक व्यक्ति ने अपनी जान गवाई है।

जय राम ठाकुर ने राज्य के सभी जिलों के उपायुक्तों को स्थिति पर कड़ी निगरानी रखने तथा स्थानीय व पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने पर्यटकों से नदियों से दूर रहने का आग्रह किया क्योंकि फ्लैश फ्लड और भारी वर्षा के कारण पानी का स्तर बढ़ने की आशंका रहती है। उन्होंने कहा कि इस वर्षा ऋतु के दौरान राज्य को लगभग 490 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

जय राम ठाकुर ने सभी उपायुक्तों को उनके जिलों के सभी शैक्षणिक संस्थानों को स्थिति के अनुसार समय पर बंद करवाने के निर्देश दिए, जिससे विद्यार्थियों को किसी असुविधा का सामना न करना पड़े। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि गत दिवस और आज सुबह असामयिक बर्फबारी के कारण जिला लाहौल-स्पीति में फसलों को भारी नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में सभी महत्वपूर्ण सड़कों को समयबद्ध तरीके से मुरम्मत करवाना सुनिश्चित करेगी ताकि प्रदेश के लोगों विशेषकर बागवानों को उनकी फसलों को बाजार तक पहुंचाने में असुविधा न हो।

 

हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश ने मचाई तबाही, 19 लोगों की मौत, 400 से ज्यादा सड़कें बंद

हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश ने मचाई तबाही, 19 लोगों की मौत, 400 से ज्यादा सड़कें बंद

शिमला : हिमाचल प्रदेश में मूसलाधार बारिश से भारी तबाही हुई है। प्रदेश में बीते 24 घंटो में 19 लोगों की मौत हो गई है। जिला शिमला में सबसे ज्यादा 10 मौतें हुई हैं। प्रदेश में सभी नदियां और नाले उफान पर है और जगह-जगह भू-स्खलन हो रहे हैं। शिमला-चंडीगढ़ हाईवे समेत प्रदेश में 400  से ज्यादा सड़कें बंद हो गई हैं। उधर जुब्बड़हट्टी के गांव सुजाणा में पशुशाला में आए भूस्खलन में दबने से महिला की मौत हो गई। महिला को स्थानीय निवासियों की मदद से पशुशाला से बाहर निकाला गया। महिला की उम्र 40 से 42 साल बताई जा रही है। उधर कुमारसैन में ढारे पर पेड़ गिरने से दो नेपाली मजदूरों की मौत हो गई, जबकि पांच गंभीर रूप से घायल हो गए। मृतकों में अर्जुन बुद्धा (19) और सन बहादुर (52) शामिल हैं।

मूसलाधार बारिश से भारी तबाही

मूसलाधार बारिश से भारी तबाही

पूरे प्रदेश में कई सड़कें और पुल ध्वस्त हो गए हैं। शिमला में भूस्खलन से एक ही परिवार के चार लोग दब गए। चंबा के बंदला में दीवार गिरने से दादा-पोती की मौत हो गई। पूरे प्रदेश में 102.5 मिलीमीटर रिकॉर्ड बारिश दर्ज की गई है जो कि 24 घंटो में सबसे ज्यादा बारिश है। भूस्खलन से कालका-शिमला हेरीटेज ट्रैक भी बंद है। सभी ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं। घुमारवीं के कसारू में पहाड़ी दरकने से आठ मकान ध्वस्त हो गए हैं। कई पशु दब गए हैं। क्षेत्र में भारी नुकसान हुआ है।

भारी बारिश से हुए भूस्खलन और पेड़ गिरने से अभी तक शिमला में 10 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। जिसमे एक व्यक्ति की मौत हाटकोटी में ट्रक पर चट्टानों के गिरने से हुई, जबकि दूसरा मौत से जंग लड़ रहा है। एक मौत सेमिट्री में घर में मलबा आने से हुई, जबकि इसका दूसरा साथी अस्पताल में अंतिम साँसे गिन रहा है। 3 मौतें शिमला

भारी बारिश से जगह-जगह भूस्खलन और पेड़ गिरने से भारी नुकसान

भारी बारिश से जगह-जगह भूस्खलन और पेड़ गिरने से भारी नुकसान

के आरटीओ ऑफिस के पास भूस्खलन से हुई है। जहाँ दो बेटियों सहित मां मलबे के नीचे दब गईं, जबकि पिता आईजीएमसी में गंभीर हालत में है। जबकि ठियोग में नाला पार करते हुए दो नेपाली महिलाएं बह गई। इसी के साथ नारकंडा में घर पर पेड़ गिरने से दो नेपाली व्यक्तियों की मौत हो गई। जबकि 5 घायल हो गए।

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने जानकारी देते हुए बताया कि भारी बारिश से अब तक प्रदेश में 490 करोड़ रूपए का नुक्सान हुआ जबकि 19 लोगों की मौत हो गई है। सरकार ने प्रशासन को अलर्ट पर रखा है और अगर कहीं हेलीकाप्टर की जरुरत महसूस हुई तो हेलीकाप्टर को भी रेस्क्यू के लिए लाया जायेगा।

प्रदेश में पिछले 24 घण्टों में जमकर बरसे मेघ, अगले 24 घण्टे तक बिगड़ा रहेगा मौसम का मिजाज

प्रदेश में पिछले 24 घण्टों में जमकर बरसे मेघ, अगले 24 घण्टे तक बिगड़ा रहेगा मौसम का मिजाज

शिमला : हिमाचल प्रदेश में पिछले 24 घण्टों में जमकर बारिश हुई है। प्रदेश में 102.5 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है। बिलासपुर में गत 24 घण्टों में 360 मिलीमीटर, तो वहीं शिमला में 153 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है। अगले 24 घण्टों तक मौसम के मिजाज बिगड़े रहने की संभावना है।

मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक मनमोहन सिंह ने बताया कि प्रदेश के सभी क्षेत्रों में रिकॉर्डतोड़ बारिश हुई है। उन्होंने कहा कि अगले 24 घण्टों में शिमला, सिरमौर, बिलासपुर समेत सोलन में मौसम के मिजाज बिगड़े रहेंगे तथा वर्षा होगी। वहीं चंबा, कांगड़ा तथा ऊना में हल्की वर्ष होगी। 24 घण्टों के बाद मौसम में परिवर्तन होगा।

जिला प्रशासन व जिला आपदा प्रबंधन द्वारा स्थापित नियंत्रण कक्ष में किसी भी प्रकार की सहायता एवं शिकायत के लिए दूरभाष संख्या 1077 पर सम्पर्क

शिमला में भारी बारिश के कारण भूस्खलन में दबने से एक परिवार के 3 सदस्यों की मौत

शिमला : शिमला में आरटीओ कार्यालय के पास रविवार भूस्खलन होने से मलबा एक मकान में घुस गया। जिससे वहां रह रहा परिवार मलबे में दब गया। परिवार के मुखिया हरिदास (46 वर्ष) की हालत स्थिर है वह टैक्सी चालक हैं। जबकि हरिदास की पत्नी कृष्णा तथा उनकी दोनों सुपुत्रियाँ विशाखा (15 वर्षीय ) तथा दिव्या (18 वर्षीय) की मौत हो गई। मौके पर पहुंची रेस्क्यू टीम द्वारा काफी मशक्कत के बाद उन्हें बाहर निकाला गया।

वहीं उपायुक्त शिमला अमित कश्यप ने बताया कि पिछले 24 घण्टों में शिमला में रिकॉर्डतोड़ बारिश दर्ज की गई है जिससे आरटीओ के समीप भूस्खलन होने से मलबे में चार लोग दब गए। जिसमें दो बच्चियों समेत एक महिला की मौत हो गई है। उन्होंने बताया कि शहर के अन्य क्षेत्रों में भी भूस्खलन व पेड़ गिरे हैं तथा अधिकतर रास्ते बंद है जिन्हें खोलने का कार्य जारी है।

1960 में अस्तित्व में आया "किन्नौर"

“किन्नौर” का प्राचीन इतिहास

  • “किन्नौर” का प्राचीन इतिहास
  • देव स्थली व प्राकृतिक सौंदर्य से विभोर “किन्नौर”
  • किन्नौरों को ‘खुनु-पा’ कहते हैं तिब्बती लोग

किन्नौर को कनौर, कनावर, कुनावुर, कुनावर तथा कनौरिंङ भी कहते हैं। स्थानीय बोली में इसे कनौरिंङ कहा जाता है। कहीं-कहीं कनौरस भी कहते हैं। तिब्बती लोग किन्नौरों को खुनु-पा कहते हैं। अर्थात एक बार ब्रह्मा ने अपने प्रतिबिम्ब को देखा। तब उन्होंने अपने को बहुत सुंदर मानकर उस प्रतिबिम्ब से किन्नर और किम्पुरूष उत्पन्न किए। किन्नर जन शिव कैलाश में देवता, गन्धर्व और अप्सराओं के साथ रहते हैं। किन्नौर की मुख्य सम्पर्क भाषा को हमस्कद् कहा जाता है। हमस्कद् की अन्य बोलियों में थोशङ, पो-स्कद, शुम छो-स्कद, शुन्नम्-स्कद, उस्कद, नयम्स्कद् आदि प्रमुख हैं। आजकल इस जिले का लोकप्रिय नाम किन्नौर प्रचलित है। शब्द व्युत्पत्ति के आधार पर डॉ. विद्या चंद ठाकुर का मानना है कि किन्नौर शब्द की व्युत्पत्ति मूल शब्द किन्नर से करें तो किन्नर से कनाऊर से कनौर शब्द बनने के बाद कनौर शब्द के ‘क’ वर्ण में ‘अ’ स्वर के स्थान पर ‘इ’ स्वर के आने एवं ‘न’ के द्वितवीकरण के फलस्वरूप मध्य में ‘न’ व्यंजन के आगम होने पर किन्नौर शब्द बना है।

  • किन्नौर का प्राचीन इतिहास दंतकथाओं पर ही आधारित
  • किन्नौर में 7वीं से 13वीं शताब्दी तक था तिब्बती राजाओं का शासन

किन्नौर का प्राचीन इतिहास दंतकथाओं पर ही आधारित है। एक मान्यता के आधार पर राज्य के पूर्व पुरूष प्रद्युम्र थे तो दूसरे के अनुसार वाणासुर। प्रद्युम्र के पिता अनिरूद्ध को निचार की देवी उषा का पति माना जाता है और उषा वाणासुर की बेटी। राहुल सांकृत्यायन का कहना है कि किन्नौर में 7वीं शताब्दी से 13वीं शताब्दी तक तिब्बती राजाओं का शासन था। 13वीं से 16वीं तक ठकुराइयों में विभक्त था, जिसके अधिकृत क्षेत्र को खूंद कहते थे। इन सात खूंदों में से दोशी खूंद गौरा और उससे नीचे के क्षेत्र में था। पंद्रह-बीस खूंद गानबी, अठारह-बीस खूंद सुंगरा, बङ पो खूंद भावा, राजग्राम खूंद चगांव, छूवङ खूंद चीनी तथा टुक्पा खूंद कामरू में था। इन सब खूंदों के अपने-अपने देवता थे। दोशी खूंद में बसारू, पंद्रह-बीस खूंद में लाछी, अठारह-बीस, सुगरा, बङ-पो तथा राजग्राम खूंद में मेशू, छूवङ खूंद में चंडिका और टुक्पा खूंद में बदरीनाथ थे। ये खूंद आगे चार-पांच गांवों के समूहों में विभाजित थे, जिन्हें घोड़ी कहा जाता था। इन ठाकुरों ने छोटे-छोटे गढ़ एवं किले बना रखे थे। किले ऐसे स्थान पर बनाए हुए होते थे, जहां आक्रांताओं का आना आसान नहीं होता था और जहां से चारों और नज़र रखी जा सकती थी। शत्रु के आक्रमण होने पर इन किलों में इक्ट्ठे किए हुए पत्थरों और तीरों से उन्हें मारकर भगाया जाता था। इन ठकुराइयों में कामरू का ठाकुर सबसे शक्तिशाली था। उसने अपनी शक्ति के बल पर आसपास के छोटे-छोटे खूंदों को अपने अधीन करके कामरू में राज्य की स्थापना की थी।

"किन्नौर" का प्राचीन इतिहास

“किन्नौर” का प्राचीन इतिहास

  • 1960 में अस्तित्व में आया किन्नौर जिला
  • रामपुर बुशहर के 14 गांव इसमें किये सम्मिलित

स्वतन्त्रता से पहले यह बुशहर रियासत का एक अंग था, जिसका मुख्यालय चीनी गांव में था। इस पूरे क्षेत्र को चीनी नाम से ही जाना जाता था। 15 अप्रैल, 1948 को जब हिमाचल प्रदेश की स्थापना हुई तो चीनी को महासू जिला की एक तहसील बनाया गया। किन्नौर जिला 1960 में अस्तित्व में आया। जिला बनने पर इसमें रामपुर बुशहर के 14 गांव भी सम्मिलित किए गए।

  • तिब्बत के साथ लगती किन्नौर की पूर्वी सीमा

सतलुज के दोनों किनारों पर अवस्थित किन्नौर का क्षेत्रफल 6401 वर्ग किलोमीटर है। सन् 2001 की जनगणना के अनुसार इसकी आबादी 78334 है, जिसमें 42173 पुरूष और 36162 महिला हैं। इस जिले में 77 राजस्व गांव हैं जिनके अन्तर्गत छोटे-छोटे 258 गांव आते हैं। इसकी पूर्वी सीमा तिब्बत के साथ लगती है, दक्षिण और दक्षिण-पूर्व में उत्तराखण्ड का उत्तरकाशी जिला, उत्तर तथा उत्तर-पश्चिम में लाहुल-स्पिति, दक्षिण-पश्चिम में शिमला जिला तथा पश्चिम में कुल्लू जिले के पंद्रह-बीस क्षेत्र पड़ते हैं।

  • किन्नौर के अधिकांश ऊपरी हिस्से में सूखे पहाड़

तापमान सर्दियों में जनवरी में कम से कम 4 डिग्री तथा अधिकतम 16 डिग्री सेल्सियस तथा जुलाई में कम से कम 10 डिग्री और अधिकतम 25 डिग्री सेल्सियस रहता है। अधिकांश ऊपरी भागों में सूखे पहाड़ हैं। देवदार के जंगल निचले क्षेत्रों में हैं। कुल वन भूमि 458297.47 हेक्टेयर तथा कृषि भूमि 4355 हेक्टेयर है। रिकांगपियो जिला मुख्यालय है। पूह, कल्पा और निचार उपमण्डल तथा पूह, मूरंग, कल्पा, सांगला, निचार तहसील तथा यंगथंग उपतहसील है।

  • खाव में स्पिति नदी और सतलुज नदी का संगम

किन्नौर की यात्रा करते हुए एक बार राहुल सांकृत्यायन ने डायरी में लिखा है-देवदारूओं की छाया में चलने से मालूम हो रहा था, मैं अपने प्राणों और आयु को बढ़ाता चल रहा हूं। यद्यपि मैं देवदारूओं की भूमि में पैदा नहीं हुआ, पर न जाने क्यों मुझे वह इतना प्रिय लगता है। मैं इसे प्राकृतिक सौंदर्य का मानदण्ड मानता हूं। यहां मैं देवदार का अंग बन गया हूं। सचमुच सतलुज उपत्यका प्राकृतिक सौंदर्य की रानी है। नाको से वापसी में यंगथंग से आगे खाव पड़ता है। खाव में स्पिति नदी और सतलुज नदी का संगम होते देखना बहुत ही अदभुत प्रतीत होता है। पूह उपमण्डल मुख्यालय में आर्मी की एक टुकड़ी तैनात रहती है।

किम्पुरूष से बना किन्नौर: लेखक : डॉ. सूरत ठाकुर

हिमाचल की उत्कृष्ट कलाएं एवं वास्तुकला विश्वभर में विख्यात

हिमाचल की उत्कृष्ट कलाएं एवं वास्तुकला विश्वभर में विख्यात

हिमाचल प्रदेश की प्राचीन कलाएं, मंदिरों के वास्तुशिल्प, लकड़ी पर

हिमाचल प्रदेश की प्राचीन कलाएं, मंदिरों के वास्तुशिल्प, लकड़ी पर खुदाई, पत्थरों और धातुओं की मूर्तियों तथा चम्बा रूमालों आदि के रूप में आज भी सुरक्षित

हिमाचल प्रदेश की प्राचीन कलाएं, मंदिरों के वास्तुशिल्प, लकड़ी पर खुदाई, पत्थरों और धातुओं की मूर्तियों तथा चम्बा रूमालों आदि के रूप में आज भी सुरक्षित

खुदाई, पत्थरों और धातुओं की मूर्तियां तथा चम्बा रूमालों आदि के रूप में आज भी सुरक्षित है। हिमाचल अपनी सांस्कृतिक विरासत तथा लोगों के समृद्ध रीति-रिवाजों एवं परम्पराओं के लिये विश्व भर में जाना जाता है। प्रदेश में सदियों पुराने मन्दिरों, दुर्गों तथा अन्य ऐतिहासिक स्मारकों की बहुमूल्य धरोहर है। हिमाचल अपनी उत्कृष्ट कला एवं शिल्प विशेषकर चम्बा रूमाल, थंका, लघुचित्र, पेंटिग्ज़ तथा धातु, स्टोन, काष्ठ शिल्प व विशिष्ट वास्तुकला इत्यादि के लिये भी विख्यात है।

इन कलाओं को तीन मुख्य वर्गों में बांटा जा सकता है।

  • 1. देशी और अधिक स्पष्ट कहें तो खश कलाएं। 2. भारतीय आर्यकलाएं।  3. भारतीय तिब्बती कलाएं।

हिमाचल की सबसे प्राचीन कलाकृतियां खश शैली में हैं और इनमें अधिकतर लकड़ी का प्रयोग हुआ है। इस शैली के प्राचीनतम उदाहरण औदुम्बरों के तांबे और चांदी से बने सिक्कों में मिलता है जो कि दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व के हैं। औदुम्बरों के सिक्कों पर अंकित मंदिरों पर एक ध्वज, त्रिशूल और युद्ध में प्रयोग होने वाली कुल्हाड़ी है। इस आकृति के आधार पर यह अनुमान लगाया जा सकता है कि ये शैव मन्दिर हैं।

  • मन्दिर शैली

संपूर्ण हिमाचल में वास्तुकला की दृष्टि से चार प्रकार के मंदिर मिलते हैं जो विभिन्न युगों में विभिन्न धार्मिक विश्वासों के सूचक हैं तथा इस अनुमान को आधार प्रदान करते हैं कि पुराने निवासियों के बीच नई जातियों का समावेश होता रहा है। इन शैलियों को अलगाने के लिए यदि छतों को आधार बनाया जाए तो चार प्रकार हैं- 1. पूरी तरह से बन्द छत जिसके चारों ओर बरामदा रहता है। 2. पिरामिड जैसी छत। 3. पैगोड़ा शैली वाले मंदिर जिन पर लकड़ी की गोल छत एक-दूसरे पर बनाई जाती है। 4. ढलानदार और पैगोड़ा आकार की छतें। अन्तिम शैली वाले मंदिर सतलुत घाटी की शैली वाले माने जाते हैं।

  • बन्द छत वाले मंदिर सबसे पुराने

बन्द छत वाले मंदिर सबसे पुराने हैं। भरमौर के शासक मेरूवर्मन द्वारा 7वीं शताब्दी में निर्मित भरमौर का लक्षणा देवी मंदिर तथा

संपूर्ण हिमाचल में वास्तुकला की दृष्टि से चार प्रकार के मंदिर मिलते हैं

हिमाचल में बन्द छत वाले मंदिर सबसे पुराने हैं

चित्तराड़ी का शक्ति देवी मंदिर इसके प्रसिद्ध उदाहरण हैं। इसी प्रकार का एक अन्य उदाहरण कालिदेवी अथवा मृकुला देवी के नाम से विख्यात मंदिर भी है जिसे कि कश्मीर के राजा आनन्द देव की पत्नी सूर्यमति ने बनवाया था जो कि त्रिगर्त कांगड़ा की राजकुमारी थी।

  •  जुब्बल घाटी में पिरामिड के आकार की छतों वाले मंदिर

पिरामिड के आकार की छतों वाले मंदिर जुब्बल घाटी में मिलते हैं। इसके सुन्दर उदाहरण हैं- हाटकोटी में हाटेश्वरी देवी और शिवजी का मंदिर तथा महासू और शिव का मंदिर जो कि जुब्बल के देयोरा में है। पैगोड़ा शैली सर्वाधिक रोचक है। यह शैली नेपाल से हिमाचल में आई जहां काठमांडू के अधिकांश मंदिर इसी शैली में बने हैं। कुछ इतिहासकारों का मत है कि इस शैली को मैदानों से आने वाले लोगों ने ईसा सन् के प्रारम्भ में प्रचलित किया था जैसा कि औदुम्बरों के सिक्कों से पता चलता है।

  • हिमाचल के मण्डी, कुल्लू, किन्नौर, शिमला के पर्वतीय क्षेत्रों में पैगोड़ा शैली के असंख्य मंदिर

हिमाचल प्रदेश के मण्डी, कुल्लू, किन्नौर, शिमला के पर्वतीय क्षेत्रों में पैगोड़ा शैली के असंख्य मंदिर हैं। राजा बाणसेन द्वारा 1346 में निर्मित मण्डी का पराशर मंदिर, मनाली का हिडिम्बा मंदिर जिसे कि कुल्लू के राजा बहादुर सिंह ने 1553 में बनवाया था। नगगर का त्रिपुरा सुन्दरी मंदिर, दयार में स्थित त्रियुगी नारायण मंदिर, खोखन में आदि ब्रह्मा मंदिर, कुल्लू घाटी में सनहार में स्थित मनु का मंदिर, सुंगरा में स्थित माहेश्वर मंदिर तथा किन्नौर में स्थित चगाओं मंदिर सभी पैगोड़ा छत शैली में निर्मित हैं।

चौथी शैली के मंदिर बंद छतों और पैगोड़ा शैली की छतों का मिश्रण हैं। इस मिश्रित शैली के उदाहरणों में बाहरी सिराज के नीरथ नामक स्थान पर निर्मित वाहन महादेव और धनेश्वरी देवी के मंदिर हैं। इनके अतिरिक्त पहाड़ी वास्तुशैली के मुख्य मंदिर हैं भीमाकाली मंदिर (सराहन, शिमला), बीजट देवता मंदिर (सराहां, चौपाल), शिरगुल देवता मंदिर, (जोडऩा, चौपाल), डोम देवता मंदिर, (गुठाण, ठियोग), मगलेश्वर मंदिर (बलग, ठियोग), कामरू मंदिर (सांगला, किन्नौर), रूद्रदेवता मंदिर (देवठी-मझगांव, सिरमौर), बौइन्द्रा देवता (अढाल, रोहडू), शिरगुल देवता मंदिर (शामा, सिरमौर) मगरू महादेव मंदिर (छतरी, मण्डी), मांहूनाग मंदिर (करसोग, मण्डी), गुड़ारू देवता मंदिर (गवास, रोहडू), महासू देवता मंदिर (बालीकोटी, शिलाई), नाग देवता मंदिर (जायली, चौपाल), दुर्गामाता मंदिर (शड़ी, ठियोग) तथा चेवली मंदिर शिला (बलसन, ठियोग)।