मुख्यमंत्री ने जल-विद्युत परियोजनाओं की ढील के लिए कहा, लक्ष्यों को समयबद्ध हासिल किया जाए

मुख्यमंत्री ने जल-विद्युत परियोजनाओं की ढील के लिए कहा, लक्ष्यों को समयबद्ध हासिल किया जाए

  • मुख्यमंत्री के जल-विद्युत परियोजनाओं में ढील के लिए जिम्मेदारी तय करने के निर्देश
  • मुख्यमंत्री ने की जल विद्युत परियोजनाओं को चालू करने में देरी पर चिंता व्यक्त
  • अधिकारियों को तय समय सीमा के भीतर लम्बित जल विद्युत परियोजनाओं को पूरा करने के दिए निर्देश
  • लक्ष्यों को समयबद्ध हासिल किया जाना चाहिए ताकि लोगों को शीघ्र लाभान्वित किया जा सके
  • रेणुकाजी बांध परियोजना, जिसे राष्ट्रीय महत्व की परियोजना घोषित किया गया है, का मामला केन्द्र सरकार से उठाया जाएगा
  • मुख्यमंत्री ने की राज्य में निबार्ध एवं सरपल्स बिजली प्रदान करने के लिए ऊर्जा उत्पादन एजेंसियों के प्रयासों की सराहना

 

शिमला: मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने राज्य में स्थापित जा रही सभी जल विद्युत परियोजनाओं के कार्य की गुणवत्ता को बनाए रखने तथा इनमें ढील बरतने के लिए संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रत्येक परियोजना के सुरक्षा ऑडिट के लिए भी कहा ताकि परियोजना क्षेत्रों में अवांछित घटनाओं को रोका जा सके।

मुख्यमंत्री आज यहां हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड सीमित, हि.प्र. ऊर्जा निगम और हि.प्र. पावर ट्रांसमिशन कारर्पोरेशन सीमित की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। वीरभद्र सिंह ने कहा कि राज्य में 27,436 मैगावाट जल विद्युत की क्षमता को चिन्हित किया गया है, जिसमें से अभी तक 10,264 मैगावाट का दोहन किया गया है। उन्होंने लागत में वृद्धि पर अंकुश के लिए अधिकारियों को तय समय सीमा के भीतर लम्बित जल विद्युत परियोजनाओं को पूरा करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने जल विद्युत परियोजनाओं को चालू करने में देरी पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि लक्ष्यों को समयबद्ध हासिल किया जाना चाहिए ताकि लोगों को शीघ्र लाभान्वित किया जा सके।

उन्होंने कहा कि भोकटू से अकपा तक 13.8 किलोमीटर विद्युत लाईन का निर्माण करके इसे चालू किया गया है और अकपा से पूह तक लगभग 35 किलोमीटर लाईन का कार्य भी पूरा किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सभी पुराने ट्रांसफार्मरों को चरणबद्ध ढंग से बदला जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने किन्नौर जिले की संजय जल विद्युत परियोजना भावानगर के अन्तर्गत 100 मैगावाट ऊहल तृतीय चरण जल विद्युत परियोजना की समीक्षा भी की। उन्होंने रूकती एवं रॉंग-टॉंग परियोजनाओं, सावड़ा-कुडडू परियोजना शॉंग-टॉंग कड़छम परियोजना, 130 मैगावाट की काशंग -दो एवं तीन तथा अन्य परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा भी की।

वीरभद्र सिंह ने कहा कि विशेष परियोजना सहायता के लिए रेणुकाजी बांध परियोजना, जिसे राष्ट्रीय महत्व की परियोजना घोषित किया गया है, का मामला केन्द्र सरकार से उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस परियोजना के लिए 1981.35 करोड़ रुपये की धनराशि की लगातार मांग कर रही है।

उन्होंने कहा कि हि.प्र.पावर ट्रांसमिशन कारर्पोरेशन सीमित राज्य में हि.प्र. स्वच्छ ऊर्जा ट्रांसमिशन निवेश कार्यक्रम के अन्तर्गत एशियन विकास बैंक से लगभग 2200 करोड़ रुपये की बाह्य सहायता से राज्य में ट्रांसमिशन नेटवर्क सृजित कर रहा है। यह राशि राज्य को 90 प्रतिशत अनुदान और 10 प्रतिशत ऋण के रूप में उपलब्ध करवाई जाएगी। मुख्यमंत्री ने राज्य में निबार्ध एवं सरपल्स बिजली प्रदान करने के लिए ऊर्जा उत्पादन एजेंसियों के प्रयासों की सराहना की।

अतिरिक्त मुख्य सचिव बहुउद्देशीय परियोजनाएं एवं ऊर्जा तरूण श्रीधर ने ऊर्जा क्षेत्र में हासिल उपलब्धियों का ब्यौरा देते हुए कहा कि निर्धारित लक्ष्यों को पूरा कर लिया गया है और निर्माणाधीन परियाजनाओं को तय समय सीमा के भीतर पूरा करने के प्रयास जारी हैं।

 

 

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