डॉ मछान

स्वाइन फ्लू से बचाव और सावधानी: डॉ. प्रेम मच्छान

 प्रदेश में आए दिन स्वाइन फ्लू के मामले देखने को मिल रहे हैं। स्वाइन फ्लू के लक्षण आमतौर पर सामान्य फ्लू जैसे ही होते हैं। लेकिन इन लक्षणों में मौजूद जरा से फर्क को आप पहचान पायें, तो आप परेशानियों से बच सकते हैं। आरंभिक दौर में इस बीमारी के लक्षणों को पहचानने से कई संभावित खतरों को कम किया जा सकता है। स्वाइन फ्लू से किस प्रकार से सावधानी बरतने की आवश्यकता है इसी के चलते हम आपको प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल आईजीएमसी के मेडिसन विभाग के विशेषज्ञ व सहायक प्रोफेसर डा. प्रेम मच्छान से स्वाइन फ्लू से बचाव और सावधानी के बारे में विस्तृत जानकारी देने जा रहे हैं। पेश है हिम शिमला लाइव की एक रिपोर्ट:

  • प्रश्र: स्वाइन फ्लू क्या है और कैसे फैलता है?

उत्तर: स्वाइन फ्लू श्वसन तंत्र से जुड़ी बीमारी है, जो ए टाइप के इनफ्लुएंजा वायरस से होती है। यह वायरस एच1 एन1 के नाम से जाना जाता है और मौसमी फ्लू में भी यह वायरस सक्रिय होता है।

जहाँ तक इसके फैलने की बात है तो जब आप खांसते या छींकते हैं तो हवा में या जमीन पर या जिस भी सतह पर थूक या मुंह और नाक से निकले द्रव कण गिरते हैं, वह वायरस की चपेट में आ जाता है। यह कण हवा के द्वारा या किसी के छूने से दूसरे व्यक्ति के शरीर में मुंह या नाक के जरिए प्रवेश कर जाते हैं। मसलन, दरवाजे, फोन, कीबोर्ड या रिमोट कंट्रोल के जरिए भी यह वायरस फैल सकते हैं, अगर इन चीजों का इस्तेमाल किसी संक्रमित व्यक्ति ने किया हो। इसके शुरुआती लक्षण नाक का लगातार बहना, छींक आना, नाक जाम होना, मांसपेशियां में दर्द या अकडऩ महसूस करना, सिर में भयानक दर्द, कफ और कोल्ड, लगातार खांसी आना, बहुत ज्यादा थकान महसूस होना, बुखार होना, दवा खाने के बाद भी बुखार का लगातार बढऩा, गले में खराश होना और इसका लगातार बढ़ते जाना इसकी ।

  • प्रश्र: सामान्य फ्लू और स्वाइन फ्लू में कितना अंतर है? और यह वायरस कब तक रहता है ?

उत्तर: सामान्य फ्लू और स्वाइन फ्लू के वायरस में एक फर्क होता है। स्वाइन फ्लू के वायरस में चिडिय़ों, सूअरों और इंसानों में पाया जाने वाला जेनेटिक मटीरियल भी होता है। सामान्य फ्लू और स्वाइन फ्लू के लक्षण एक जैसे ही होते हैं, लेकिन स्वाइन फ्लू में यह देखा जाता है कि जुकाम बहुत तेज होता है। नाक ज्यादा बहती है। पीसीआर टेस्ट के माध्यम से ही यह पता चलता है कि किसी को स्वाइन फ्लू है। स्वाइन फ्लू होने के पहले 48 घंटों के भीतर इलाज शुरू हो जाना चाहिए। पांच दिन का इलाज होता है, जिसमें मरीज को टेमीफ्लू दी जाती है। एच1एन1 वायरस स्टील, प्लास्टिक में 24 से 48 घंटे, कपड़े और पेपर में 8 से 12 घंटे, टिश्यू पेपर में 15 मिनट और हाथों में 30 मिनट तक एक्टिव रहते हैं। इन्हें खत्म करने के लिए डिटर्जेंट, एल्कॉहॉल, ब्लीच या साबुन का इस्तेमाल कर सकते हैं। किसी भी मरीज में बीमारी के लक्षण इन्फेक्शन के बाद 1 से 7 दिन में डिवेलप हो सकते हैं। लक्षण दिखने के 24 घंटे पहले और 8 दिन बाद तक किसी और में वायरस के ट्रांसमिशन का खतरा रहता है।

  • प्रश्र: किसी को स्वाइन फ्लू का होना क्या काफी चिंता की बात है?

उत्तर: इस बीमारी से लडऩे के लिए सबसे जरूरी है दिमाग से डर को निकालना। ज्यादातर मामलों में वायरस के लक्षण कमजोर ही दिखते हैं। जिन लोगों को स्वाइन फ्लू हो भी जाता है, वे इलाज के जरिए सात दिन में ठीक हो जाते हैं। कुछ लोगों को तो अस्पताल में एडमिट भी नहीं होना पड़ता और घर पर ही सामान्य बुखार की दवा और आराम से ठीक हो जाते हैं। कई बार तो यह ठीक भी हो जाता है और मरीज को पता भी नहीं चलता कि उसे स्वाइन फ्लू था। डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट बताती है कि जिन लोगों का स्वाइन फ्लू टेस्ट पॉजिटिव आता है, उनमें से इलाज के दौरान मरने वालों की संख्या केवल 0.4 फीसदी ही है। यानि एक हजार लोगों में चार लोग। इनमें भी ज्यादातर केस ऐसे होते हैं, जिनमें पेशेंट पहले से ही हार्ट या किसी दूसरी बीमारी की गिरफ्त में होते हैं या फिर उन्हें बहुत देर से इलाज के लिए लाया गया होता है।

  • प्रश्र: स्वाइन फ्लू से बचने के लिए किस प्रकार की सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है? स्वाइन फ्लू से बचाव और इसके इलाज के बारे में बताएं?

उत्तर: बचाव के लिए जरूरी है कि 5 साल से कम उम्र के बच्चे, 65 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएं, जिन लोगों को निम्न में से कोई बीमारी है, उन्हें ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत होती है। जैसे किसी को फेफड़ों, किडनी या दिल की बीमारी हो, मस्तिष्क संबंधी (न्यूरोलॉजिकल) बीमारी मसलन, कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग, डायबीटीज़, ऐसे लोग जिन्हें पिछले 3 साल में कभी भी अस्थमा की शिकायत रही हो या अभी भी हो। ऐसे लोगों को फ्लू के शुरुआती लक्षण दिखते ही डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। गर्भवती महिलाओं का प्रतिरोधक तंत्र (इम्यून सिस्टम) शरीर में होने वाले हॉरमोन संबंधी बदलावों के कारण कमजोर होता है। खासतौर पर गर्भावस्था के तीसरे चरण यानी 27वें से 40वें सप्ताह के बीच उन्हें ज्यादा ध्यान रखने की जरूरत है। बच्चों में बुखार या बढ़ा हुआ तापमान होने पर डॉक्टर से संपर्क करें। यदि बच्चा अत्यधिक थकान महसूस करे तो उसे डॉक्टर को दिखायें। व्यस्कों को बहुत जल्दी जल्दी सांस लेना या सांस लेने में तकलीफ हो सकती है। छाती या पेट में दर्द या भारीपन होना भी स्वाइन फ्लू का लक्षण हो सकता है। साफ-सफाई का ध्यान रखा जाए और फ्लू के शुरुआती लक्षण दिखते ही सावधानी बरती जाए, तो इस बीमारी के फैलने के चांस न के बराबर हो जाते हैं। स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए ख्याल रखें कि जब भी खांसी या छींक आए रूमाल या टिश्यू पेपर यूज करें, इस्तेमाल किए मास्क या टिश्यू पेपर को ढक्कन वाले डस्टबिन में फेंकें, थोड़ी-थोड़ी देर में हाथ को साबुन और पानी से धोते रहें, लोगों से मिलने पर हाथ मिलाने, गले लगने या चूमने से बचें, फ्लू के शुरुआती लक्षण दिखते ही अपने डॉक्टर से संपर्क करें, अगर फ्लू के लक्षण नजर आते हैं तो दूसरों से एक मीटर की दूरी पर रहें, फ्लू के लक्षण दिखने पर घर पर रहें। ऑफिस, बाजार, स्कूल न जाएं, बिना धुले हाथों से आंख, नाक या मुंह छूने से परहेज करें।

  • प्रश्र: स्वाइन फ्लू होने के ठीक होने के कितने दिनों बाद वापस व्यक्ति अपने काम पर जा सकता है?

उत्तर: अस्पताल वयस्कों को स्वाइन फ्लू के शुरुआती लक्षण दिखने पर सामान्यत: पांच दिनों तक ऑब्जर्वेशन में रखते हैं। बच्चों के मामले में सात से दस दिनों तक इंतजार करने को कहा जाता है। सामान्य परिस्थितियों में व्यक्ति को सात से दस दिन तक रेस्ट करना चाहिए, ताकि ठीक से रिकवरी हो सके। जब तक फ्लू के सारे लक्षण खत्म न हो जाएं, वर्कप्लेस से दूर रहना ही बेहतर है।

  • प्रश्र: अगर किसी को स्वाइन फ्लू है और कोई दूसरा व्यक्ति उसके संपर्क में आता है तो क्या करना चाहिए?

उत्तर: सामान्य जिंदगी जीते रहें, जब तक फ्लू के लक्षण नजर नहीं आने लगते। अगर मरीज के संपर्क में आने के सात दिनों के अंदर आपमें लक्षण दिखते हैं, तो डॉक्टर से सलाह करें।

  • प्रश्र: क्या एक बार होने के बाद किसी को दो बार स्वाइन फ्लू हो सकता है?

उत्तर: जब भी शरीर में किसी वायरस की वजह से कोई बीमारी होती है, शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र उस वायरस के खिलाफ एकswine flu प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेता है। जब तक स्वाइन फ्लू के वायरस में कोई ऐसा बदलाव नहीं आता, जो अभी तक नहीं देखा गया, किसी को दो बार स्वाइन फ्लू होने की आशंका नहीं रहती। लेकिन इस वक्त फैले वायरस का स्ट्रेन बदला हुआ होता है। जिससे हो सकता है शरीर का प्रतिरोधक तंत्र इसे न पहचानें। ऐसे में दोबारा बीमारी होने की आशंका हो सकती है।

  • प्रश्र: स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए मास्क मिलते हैं इससे स्वाइन फ्लू से कितना बचाव हो सकता है? किन लोगों को इन्हें पहनाने की जरूरत होती है? मास्क कितनी देर काम करता है?

उत्तर: मास्क पहनने की जरूरत सिर्फ उन्हें है, जिनमें फ्लू के लक्षण दिखाई दे रहे हों। फ्लू के मरीजों या संदिग्ध मरीजों के संपर्क में आने वाले लोगों को ही मास्क पहनने की सलाह दी जाती है। भीड़ भरी जगहों मसलन, सिनेमा हॉल या बाजार जाने से पहले सावधानी के लिए मास्क पहन सकते हैं, मरीजों की देखभाल करने वाले डॉक्टर, नर्स और हॉस्पिटल में काम करने वाला दूसरा स्टाफ, एयरकंडीशंड ट्रेनों या बसों में सफर करने वाले लोगों को ऐहतियातन मास्क पहन लेना चाहिए। जहां तक मास्क के कितनी देर काम करने की बात है तो स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए सामान्य मास्क कारगर नहीं होता, लेकिन थ्री लेयर सर्जिकल मास्क को चार घंटे तक और एन-95 मास्क को आठ घंटे तक लगाकर रख सकते हैं। ट्रिपल लेयर सजिर्कल मास्क लगाने से वायरस से 70 से 80 प्रतिशत तक बचाव रहता है और एन-95 से 95 प्रतिशत तक बचाव संभव है। वायरस से बचाव में मास्क तभी कारगर होगा जब उसे सही ढंग से पहना जाए। जब भी मास्क पहनें, तब ऐसे बांधें कि मुंह और नाक पूरी तरह से ढक जाएं क्योंकि वायरस साइड से भी अटैक कर सकते हैं। एक मास्क चार से छह घंटे से ज्यादा देर तक न इस्तेमाल करें, क्योंकि खुद की सांस से भी मास्क खराब हो जाता है। सिर्फ ट्रिपल लेयर और एन 95 मास्क ही वायरस से बचाव में कारगर हैं सिंगल लेयर मास्क की 20 परतें लगाकर भी बचाव नहीं हो सकता। मास्क न मिले तो मलमल के साफ कपड़े की चार तहें बनाकर उसे नाक और मुंह पर बांधें। सस्ता व सुलभ साधन है। इसे धोकर दोबारा भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

  • प्रश्र: क्या मास्क पहनने के लिए भी किसी प्रकार का ध्यान रखने की आवश्यकता है?

उत्तर: जब तक आपके आस-पास कोई मरीज या संदिग्ध मरीज नहीं है, तब तक मास्क न लगाएं। अगर मास्क को सही तरीके से नष्ट न किया जाए या उसका इस्तेमाल एक से ज्यादा बार किया जाए तो स्वाइन फ्लू फैलने का खतरा और ज्यादा होता है। खांसी या जुकाम होने पर मास्क जरूर पहनें। मास्क को बहुत ज्यादा टाइट पहनने से यह थूक के कारण गीला हो सकता है। अगर यात्रा के दौरान लोग मास्क पहनना चाहें तो यह सुनिश्चित कर लें कि मास्क एकदम सूखा हो। अपने मास्क को बैग में रखें और अधिकतम चार बार यूज करने के बाद इसे बदल दें। किसी भी प्रकार के फ्लू से पैदा होने वाली सबसे साधारण गंभीर स्थिति श्वास प्रश्वास क्षेत्र का दूसरे दर्जे का जीवाणु संक्रमण है, जैसे कि ब्रांगकाइटस (वायुमार्ग का संक्रमण्) या न्यूमोनिया । ये संक्रमण अधिकतर लोगों में प्रतिजैविक (ऐन्टिबाइआटिक) द्वारा पूरी तरह से ठीक हो जाते हैं, लेकिन कभी कभी ये संक्रमण जानलेवा भी बन सकते हैं।

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