प्रकृति की जन्नत: किन्नौर

प्रकृति की जन्नत: किन्नौर

खरीददारी- किन्नौर हैंडलूम और हस्तशिल्प के सामानों के लिए प्रसिद्ध है। यहां से शॉल, टोपियां, मफलर, लकड़ी की मूर्तियां और धातुओं से बना बहुत-सा सामान खरीदा जा सकता है। इसके अलावा किन्नौर फलों और ड्राई फूडस के उत्पादन के लिए भी काफी जाना जाता है। सेब, बादाम, चिलगोजा, ओगला, अंगूर और अखरोट आदि भी यहां से खरीदे जा सकते हैं। काल्पा, रिकांग पिऊ, करचम ताप्री आदि स्थानों में अनेक दुकानें है, जहां से इनकी खरीदारी की जा सकती है।

कोठी– काल्पा तहसील के इस विशाल प्राचीन गांव को कोष्टांपी के नाम से भी जाना जाता है। इस गांव के खेत और फलों के पेडृ इसकी सुंदरता को और बढृा देते हैं। देवी सुआंग चन्द्रिका मंदिर यहां बना हुआ है। यहां के स्थानीय निवासी इस देवी का बहुत सम्मान करते हैं और इसे बहुत शक्तिशाली मानते हैं। भैरों को समर्पित यहां एक अन्य मंदिर भी खासा लोकप्रिय है।

निचार- यह गांव तरांगा और वांगटू के बीच सतलुज नदी के बाएं तट पर बसा हुआ है। समुद्र तल से 215० मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह गांव प्राकृतिक दृश्यावली से भरपूर है। यदि इस गांव से ऊपर की ओर जाया जाए तो घोरल, एंटीलोप्स, काले और लाल भालुओं को देखा जा सकता है।

नाको- काल्पा से 117 किमी. की दूरी पर नाको स्थित है। हंगरांग घाटी में स्थित यह गांव समुद्र तल से 36०० मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह गांव यहां की नाको झील के कारण भी लोकप्रिय है जिसमें गर्मियों के दौरान नौकायन की सुवधा है। सर्दियों में इस झील का पानी जम जाता है और उसमे स्केटिंग की जाती है। बौद्ध मठ भी यहां देखा जा सकता है।

काजा- एक जमाने में काजा स्पीति के प्रमुख की राजधानी थी। स्पीति नदी के बाएं किनारे पर स्थित यह नगर समुद्र तल से 36०० मीटर की ऊंचाई पर है। वर्तमान में काजा स्पीति सब डिवीज़न का मुख्यालय है। इस खूबसूरत स्थान में बहुत से बौद्ध मठ और हिन्दु मंदिर देखे जा सकते हैं।

छितकुल– समुद्र तल से 345० मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह बास्पा घाटी का अंतिम और सबसे ऊंचा गांव है। बास्पा नदी के दाहिने तट पर स्थित इस गांव में स्थानीय देवी माथी के तीन मंदिर बने हुए हैं। कहा जाता है कि माथी के सबसे प्रमुख मंदिर को 5०० साल पहले गढ़वाल के एक निवासी ने बनवाया था। भोजपत्र नामक वृक्षों के जंगलों से घिरा यह अल्पास के खूबसूरत चरागाहों और हिम भूदृश्यों के लिए जाना जाता हैं।

करछम- करछम (1899 मी.) सतलुज और बस्पा नदियों के संगम स्थल जोअरी, वांग्तु और तापरी गांवों के बाद आता हैं, जहां से सुन्दर बस्पा और सांगला घाटी प्रारंभ होती हैं।

पोवारी: पोवारी रामपुर से 70 कि.मी. दूर राष्ट्रीय राजमार्ग 22 पर अंतिम मुख्य ठहराव हैं।

रिकांग पिओरिकांग पिओ 2670 मी.) शिमला से 231 कि.मी. और पोवारी से 7 कि.मी. दूर स्थित, किन्नौर जिले का मुख्यालय हैं। यहां स्थित उप-जिला मुख्यालय से किन्नौर घाटी में पर्यटन हेतु अनुमति ली जा सकती हैं। निकट ही भगवान बुद्ध की प्रतिमायुक्त कालाचक्र मंदिर से किन्नौर कैलाश का सुन्दर दृश्य दिखाई देता हैं।

कोठी: कोठी, रिकांग पिओ से मात्र 3 कि.मी. दूर स्थित है, जहां चंडिका देवी का मंदिर हैं। पहाड़ों की गोद और देवदार के झुरमुट के बीच स्थापित इस मंदिर की शैली और शिल्प असाधारण हैं। देवी की स्वर्ण-निर्मित प्रतिमा अप्रतिम हैं।

किन्नौर कैलाश

किन्नौर कैलाश

कल्पा: कल्पा रिकोंग पिओ से 7 कि.मी. दूर स्थित ह। नदी के पार, कल्पा के सामने किन्नर कैलाश श्रृंखला हैं। भोर के समय जब उगते सूर्य की लाल और हल्की सुनहरी किरणें हिमानी चौटियों को चूमती हैं तो वह दृश्य बड़ा नयनाभिराम होता हैं

पांगी: पांगी रिकांग पिओ से चिलगोजा चीड़ के जंगलों से गुजरते हुए 10 कि.मी. दूर स्थित हैं। यह सेब के उद्यानों से घिरा है, जहां बुद्ध मंदिर, शेशरी नाग मंदिर दर्शनीय हैं।

रिब्बा: रिब्बा पोवारी से 16 कि.मी. दूर राष्ट्रीय राजमार्ग 22 पर स्थित, अपने अंगूर के बगीचों और अंगूर से बनाई गई स्थानीय शराब ‘अंगूरी‘ के लिए मशहूर है।……

मूरंग: मूरंग राष्ट्रीय राजमार्ग 22 पर पोवारी से 26 कि.मी. दूर, खूमानी की वाटिकाओं के मध्य स्थित हैं।

पुह: पुह राष्ट्रीय राजमार्ग 22 पर पोवारी से 58 कि.मी. दूर स्थित हैं जहां हरियाले खेत, खूमानी व अंगूर के बगीचे और बादाम के उद्यान देखे जा सकते हैं। यहां ठहरने की आरामदायक सुविधाएं हैं।

नाको: नाको राष्ट्रीय राजमार्ग 22 से थोड़ा अलग यांगथांग लिंक रोड पर खूबसूरत गांव हैं, जो निर्जन हांगरांग घाटी का सबसे बड़ा गांव हैं।

चांगो एवं लियों: चांगो एवं लियों सेब के उद्यानों से भरपूर हैं। चांगो में बुद्ध मठ भी स्थित है।

सुमधो: सुमधो स्पिति एवं पारे-चू नदियों के संगम स्थल पर स्थित, किन्नौर का अंतिम गांव हैं।

कैसे पहुंचें : वायु मार्ग- किन्नौर का निकटतम एयरपोर्ट शिमला में है। दिल्ली से शिमला के लिए सीधी फ्लाइट है।

रेल मार्ग- शिमला को रेलवे स्टेशन किन्नौर का निकटतम रेलवे स्टेशन है जो कालका से नेरो गैज लाइन से जुड़ा हुआ है। शिमला से कालका की दूरी 96 किमी.है।

सडक़ मार्ग- सडक़ मार्ग से किन्नौर पहुंचने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग 22 की प्रयोग किया जाता है। दिल्ली, चंडीगढ़, शिमला, मनाली और कुल्लू से किन्नौर के लिए टैक्सी भी की जा सकती है।

 

Pages: 1 2 3

सम्बंधित समाचार

2 Responses

Leave a Reply
  1. Dalbir Singh
    Jun 05, 2016 - 11:20 PM

    अति सुंदर

    Reply
    • मीना कौंडल
      Jun 06, 2016 - 12:14 PM

      धन्यवाद दलबीर जी।

      Reply

अपने सुझाव दें

Your email address will not be published. Required fields are marked *