पर्यटकों को लुभाने के लिए ‘पहाड़ों की रानी’ पूरी तरह तैयार : मुख्य सचिव

ऐतिहासिक इमारतों की नगरी व खूबसूरत वादियों से लबालब “शिमला”

  •  शिमला की खूबसूरत प्राचीन विरासत

शिमला रिज़

शिमला प्राचीन विरासत इमारतों के लिए प्रसिद्ध है, जो ब्रिटिश वास्तु-कला शैली का प्रतिनिधित्व करती हैं। ‘रोथनी कैसल’, इन्हीं इमारतों में से एक है, जो ‘एलन ऑक्टेवियन ह्यूम’ का निवास स्थान हुआ करता था। वहीं आकर्षक विरासत भवन है टाउन हॉल, जिसे 1919 में बनाया गया था। वर्तमान में इस इमारत में शिमला नगर निगम कार्यालय है। ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडी’ वर्तमान में इसी इमारत में स्थित है। इस इमारत की नवजागरण वास्तुकला शैली इसे शिमला का आकर्षक और हॉट पर्यटन स्थल बनाती है। गेयटी थियेटर सांस्कृतिक विरासत परिसर, गोथिक विक्टोरियन वास्तुकला शैली का प्रतिनिधित्व करता है। इसे ‘हेनरी इरविन’ ने डिज़ाइन किया था। यह भवन परिसर दर्शकों को पारंपरिक और आधुनिक कलाकृतियों के एक विशाल संग्रह को देखने का अवसर प्रदान करता है। इस भवन में एक सभागृह और एक पुराना नाट्य-गृह है। ‘वुडविले’, जनरल सर विलियम रोज मैन्सफील्ड का निवास स्थान था। जिन्होंने भारत में उपनिवेश काल के दौरान कमांडर-इन-चीफ के रूप में अपनी सेवाएं दी थी। यह इमारत 1977 में एक हैरिटेज होटल में तब्दील कर दी गई थी। रेलवे बोर्ड बिल्डिंग भी शिमला के औपनिवेशिक वास्तुकला के चमत्कार हैं। स्कैंडल प्वाइंट, माल रोड और रिज की ओर जाने वाली सडक़ के मिलन बिंदु पर स्थित है। यहाँ पर्यटक स्कॉटलैंड चर्च, पुराने अल्फा रेस्तरां और घाटियों के सम्मोहित कर देने वाले दृश्यों का आनंद ले सकते हैं। इस जगह के असामान्य नाम के पीछे एक कहानी है। एक प्रचलित कथा के अनुसार पटियाला के राजा, भारत के वायसराय की बेटी पर मुग्ध हो गए और जब वह इस जगह पर टहल रही थी उन्होंने उसका अपहरण कर लिया। स्कैंडल प्वाइंट मॉल का सबसे उंचा स्थान है।

  • पर्यटन आकर्षण

रिज, मॉल, काली बाड़ी मंदिर, राज्य संग्रहालय, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडी, प्रोस्पेक्ट हिल, समर हिल चैडविक फॉल, संकट मोचन और तारादेवी शिमला के पर्यटन के आकर्षण केंद्र हैं।

धरोहर: शिमला शहर के हृदय में स्थित यह रिज पहाड़ी श्रंखला का मनोहारी दृश्य प्रस्तुत करती है। यह एक बड़ी खुली जगह

होटल पीटर होफ

होटल पीटर होफ

है, जो पश्चिम में स्कैंडल प्वाइंट से जुड़ी हुई है पूर्व की ओर लक्कर बाज़ार है, जहां पर्यटक हस्तकला से सज्जित विभिन्न प्रकार के लकड़ी की वस्तुएं खरीद सकते हैं। यहां पानी का एक बड़ा जलाशय है जो शहर में पानी की आपूर्ति करता है। मई के महीने में यहां ग्रीष्मकालीन उत्सव मनाया जाता है। इसके अलावा सरकार द्वारा आयोजित विभिन्न कार्यक्रम एवं नव-वर्ष की पूर्व संध्या पर स्थानीय समारोहों का भी इस रिज पर आयोजन किया जाता है। इस जगह पर खूबसूरत परिवेश में लम्बी पैदल यात्रा का आनंद उठाया जा सकता है। खूबसूरत चर्च, वाचनालय और कई सारे स्टैचू इस प्रसिद्ध जगह की खूबसूरती में चार चाँद लगाते हैं। जाखू मंदिर, जाखू पहाड़ी पर समुद्र तल से 8०48 फीट की ऊंचाई पर स्थित है, यह बर्फीली चोटियों, घाटियों और शिमला शहर का सुंदर और मनोरम दृश्य प्रस्तुत करता है। भगवान हनुमान को समर्पित यह धार्मिक केंद्र रिज के निकट स्थित है। इस जगह से पर्यटक सूर्योदय और सूर्यास्त के लुभावने दृश्यों का आनंद ले सकते हैं। यह उल्लेखनीय बात है कि शिमला में स्थित यह क्राइस्ट चर्च भारत के उत्तरी भाग में दूसरी सबसे पुरानी चर्च मानी जाती है। इसका निर्माण 1846 से 1857 के बीच की अवधि के दौरान किया गया

क्राइस्ट चर्च शिमला

क्राइस्ट चर्च शिमला (मीना कौंडल)

था। रिज से देखने पर चर्च की खिड़कियां रंगीन ग्लासों और ब्रास के सुन्दर टुकड़ों से सजी हुई दिखाई पड़ती हैं। चर्च कर्नल जे.टी बोइल्यू के द्वारा डिज़ाइन की गई थी। चर्च के स्तंभ पर जो घड़ी है वह सन् 1860 में स्थापित की गई थी। प्रमुख लेखक रुडयार्ड किपलिंग के पिता लॉकवुड किपलिंग ने, चैपल विंडो, फ्रेस्को इन्सर्किल(भित्ति चित्रों के खांचे) को डिज़ाइन किया था। औपनिवेशिक युग के दौरान, मुख्यत: ब्रिटिश अधिकारी और इनाम के हकदार लोग इस चर्च में प्रार्थना करते थे। ‘सेंट माइकल कैथेड्रल’ इस पहाड़ी क्षेत्र की प्रथम रोमन कैथोलिक चर्च थी। यह 1886 में, वास्तुकला की फ्रेंच-गोथिक शैली में बनाई गई थी। पत्थरों पर उत्कृष्ट नक्काशी और रंगीन ग्लासों से सजी सुन्दर खिड़कियां इस इमारत को शानदार आकृति देती हैं।

गोर्टोंन कैसल: सन् 19०4 में स्थापित गोर्टोंन कैसल, गोथिक वास्तुकला शैली का प्रतिनिधित्व करता है। इसे एक प्रसिद्ध ब्रिटिश वास्तुकार, ‘सर स्विंटन जैकब’ के द्वारा स्थापित किया गया था और इसने ग्रीष्मकालीन राजधानी के रूप में अंग्रेजों की सेवा की है। इमारत की बालकनी जटिल ‘राजस्थानी जाली’ (नेट) के काम से सजाई गई हैं। 125 कमरों वाला यह 3 मंजिला महल, ब्रिटिश शासनकाल के दौरान सिविल सचिवालय के कार्यालय के रूप में इस्तेमाल किया जाता था और वर्तमान में यह राज्य के महालेखाकार की सीट है। इस इमारत के निर्माण में संजौली पत्थर का इस्तेमाल किया गया था, हाल ही में लाल पत्थरों वाली छत को गैल्वेनाइज़्ड, लाल लोहे के चादर वाली छत से बदल दिया गया था। अंडमान के, रोज़वुड की लकड़ी के ब्लॉक, इस इमारत के चारों तरफ स्थित हैं।

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One Response

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  1. Harendra kushwaha
    Jan 26, 2017 - 10:21 PM

    Hame achcha laga mai gya tha ghumane

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