हिमाचल बागवानी क्षेत्र में उठाएगा न्यूजीलैंड की विशेषज्ञता का लाभ : मुख्यमंत्री

  • मुख्यमंत्री की पीपफ्रूट, न्यूजीलैंड के प्रतिनिधिमंडल के साथ शिमला में बैठक
  • न्यूजीलैंड सरकार ने हिमाचल प्रदेश में बागवानी विकास परियोजना में सहयोग देने की जताई इच्छा
  • न्यूजीलैंड विश्व में सर्वाधिक सेब उत्पादन करने वाले देशों में शामिल
  • बैठक में प्रदेश में सेब उत्पादन में वृद्धि की दिशा में प्रगति पर की चर्चा

शिमला : मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार बागवानी, कृषि और दूध उत्पादन जैसे क्षेत्रों में न्यूजीलैंड की विशेषज्ञता का लाभ उठाएगा। उन्होंने कहा कि न्यूजीलैंड सरकार ने हिमाचल प्रदेश में विश्व बैंक के सहयोग से कार्यान्वित होने वाली बागवानी विकास परियोजना में सहयोग देने की इच्छा व्यक्त की है। मुख्यमंत्री आज यहां पीपफ्रूट, न्यूजीलैंड के प्रतिनिधिमंडल के साथ आयोजित बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में प्रदेश में सेब उत्पादन में वृद्धि की दिशा में कार्यान्वित होने वाली परियोजना की प्रगति पर चर्चा की गई।

उन्होंने कहा कि न्यूजीलैंड विश्व में सर्वाधिक सेब उत्पादन करने वाले देशों में शामिल है, जहां प्रति हैक्टेयर 57 टन सेब का उत्पादन होता है। उन्होंने कहा कि फल उत्पादन विशेषकर सेब ओर गुठलीदार फलों के उत्पादन में वृद्धि की दिशा में प्रदेश को न्यूजीलैंड के अनुभव और विशेषज्ञता का बहुत लाभ मिलेगा। कृषि और बागवानी क्षेत्र प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मुख्य साधन है और प्रदेश सरकार इन क्षेत्रों को विकसित करने को विशेष प्राथमिकता दे रही है। प्रदेश ने कृषि, बागवानी, जैविक खाद, कीट प्रबंधन में काफी अच्छा कार्य किया है और सेब की नई किस्में भी प्रचलित की हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश होने वाले कुल फल उत्पादन में 90 प्रतिशत योगदान सेब का है। प्रदेश सरकार सेब की और नई एवं उन्नत किस्में शामिल करेगी ताकि सेब उत्पादक और अधिक लाभान्वित हो सकें। वीरभद्र सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार गुठलीदार फलों की विविधता और पुराने सेब के बागीचों के कायाकल्प पर ध्यान केंद्रित करेगी, जिसमें न्यूजीलैंड की विशेषज्ञता की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना के कार्यान्वयन के लिए न्यूजीलैंड सरकार के साथ अगले वर्ष मार्च अथवा अप्रैल में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।

बागवानी विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव तरूण श्रीधर ने इस अवसर पर कहा प्रदेश में तीन-चार महीने ही वर्षा होती है इसलिए सिंचाई के लिए जल प्रबंधन को प्राथमिकता दी जाएगी जो आधुनिक बागवानी के लिए सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। न्यूजीलैंड सरकार के सहयोग से बागवानी विकास परियोजना आरंभ करने के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट लगभग तैयार हो चुकी है और राज्य ने रूट स्टॉक आयात करने का कार्य पहले ही शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार बागवानी के क्षेत्र में सुधार के लिए गंभीर प्रयास कर रही है तथा सेब उत्पादन के अंतर्गत नए क्षेत्रों का चयन किया जाएगा।

बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के कुलपति विजय ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में 28 प्रकार के फलों का उत्पादन किया जा रहा है और आगामी वर्षों में 10 अन्य प्रकार के फलों का उत्पादन आरंभ किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जलवायु अधिकांश फलों के उत्पादन के लिए अनुकूल है। प्रदेश में फल उत्पादन बढ़ाने के लिए विशेष तौर पर प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे न केवल फल उत्पादक लाभान्वित होंगे, बल्कि राज्य की आर्थिकी में भी सुधार होगा। एचपीएमसी के महाप्रबंधक एवं परियोजना निदेशक जे.सी. शर्मा ने परियोजना कार्यान्वयन योजना तैयार करने में पिपफू्रट, न्यूजीलैंड के तकनीकी सहयोग के बारे में अवगत करवाया। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के लिए प्रमाणित संस्थाओं से अंतरराष्ट्रीय निविदा प्रक्रिया के अनुसार निविदाएं आमंत्रित की जाएंगी।

न्यूजीलैंड सरकार के विशेष कृषि दूत माइक पीटरसन ने कहा कि न्यूजीलैंड सरकार व्यापारिक समझौतों के माध्यम से हिमाचल प्रदेश सरकार के साथ साझेदारी की इच्छुक है। उन्होंने कहा कि न्यूजीलैंड के पास बेहतर शोध संस्थान है और हिमाचल को सेब पुनर्जीवन परियोजना में सहायता प्रदान की जाएगी। उन्होंने शिक्षा क्षेत्र में भी हिमाचल प्रदेश के साथ कार्य करने की इच्छा व्यक्त की।

पीटरसन ने मुख्यमंत्री, बागवानी मंत्री और प्रदेश सरकार के अधिकारियों को न्यूजीलैंड आने का न्यौता दिया, जहां प्रगतिशील किसानों के साथ उनकी बैठक आयोजित की जाएगी। मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों को हिमाचली शॉल व टोपी से सम्मानित किया। बागवानी मंत्री विद्या स्टोक्स, अतिरिक्त मुख्य सचिव वी.सी. फारका, सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग के निदेशक डॉ. एम. पी. सूद और बागवानी विभाग के निदेशक डी.पी. भंगालिया सहित प्रदेश सरकार के अन्य वरिष्ठ अधिकारी बैठक में उपस्थित थे।

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