फलों, सब्जियों, मशरूम व मधुमक्खी पालन

सेब व अन्य प्रमुख फलों के लिए बीमा योजना लागू

  • 74 विकास खण्डों में सेब, आम, किन्नू, आड़ू व प्लम फलों को लाया जाएगा बीमा योजना के तहत
  • योजना 21 दिसम्बर, 2015 से संचालित की जाएगी तथा 31 जुलाई, 2016 तक मान्य होगी
  • सेब की फसल के लिए प्रति पौधा प्रीमियम की दर 31.15 रुपये तथा 62.30 रुपये
  • सेब के पौधों की बीमा दर प्रति पौधा 350 रुपये व 700 रुपये आयु के अनुसार निर्धारित

शिमला: बागवानी विभाग के एक प्रवक्ता ने कहा कि राज्य सरकार ने वर्ष 2015 के लिए मौसम आधारित फल फसल बीमा योजना के कार्यान्वयन का निर्णय लिया है, जिसके अन्तर्गत चालू वित्त वर्ष के दौरान राज्य के 74 विकास खण्डों में सेब, आम, किन्नू, आड़ू व प्लम फलों को लाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि यह योजना 21 दिसम्बर, 2015 से संचालित जाएगी तथा 31 जुलाई, 2016 तक मान्य होगी। सेब की फसल के लिए प्रति पौधा प्रीमियम की दर 31.15 रुपये तथा 62.30 रुपये रखी गई है। इस बीमा राशि में से क्रमशः 16.80 रुपये व 33.60 रुपये प्रति पौधे की दर से 5 से 15 से 40 वर्ष की आयु के पौधों के लिए निर्धारित की गई हैं। शेष राशि राज्य सरकार व केन्द्र सरकार द्वारा 50 प्रतिशत के अनुपात में समान रूप से वहन की जाएगी।

प्रवक्ता ने कहा कि सेब के पौधों की बीमा दर प्रति पौधा 350 रुपये व 700 रुपये आयु के अनुसार निर्धारित की गई हैं इसी प्रकार आम, किन्नू, आड़ू व प्लम के पौधों के लिए यह मौसम आधारित फल फसल बीमा योजना राज्य सरकार द्वारा वागवानों के हितों को ध्यान में रखते हुए निर्धारित की गई है, जिसमें आम के लिए यह योजना 21 दिसम्बर, 2015 से 31 जून, 2016 तक, किन्नू की फसल के लिए 15 फरवरी 2016 से 30 जून, 2016 तक, आड़ू के लिए 1 मार्च, 2016 से 30 जून, 2016 तक व प्लम के लिए 1 मार्च, 2016 से 30 मई, 2016 तक मान्य होगी। मौसम आधारित फल फसल बीमा योजना उन समस्त बागवानों के लिए अनिवार्य होगी।

प्रवक्ता ने कहा कि उपरोक्त फलों की बीमा योजना के लिए विभिन्न मौसमी कारकों, जिसमें फल पौधों के लिए शीतोष्ण अवधि की आवश्यकता हो, अत्याधिक व न्यून बीमा अवधि में वर्षा, मौसम के तापक्रम में उतार चढ़ाव इत्यादि को सम्मिलित किया गया है। इन सभी मौसमी कारकों के निर्धारण के लिए प्रदेश के विभिन्न स्थानों में मौसमी केन्द्रों की स्थापना की गई है। हिमाचल प्रदेश के अनुसार यह योजना प्रदेश के लगभग समस्य विकास खंडों में संचालित की जा रही है। उनके अनुसार इसके लिए छः बीमा कम्पनियों को सूचीबद्ध किया गया है ताकि इसका लाभ अधिक से अधिक बागवानों को मिल सके। उन्होंने यह भी व्यक्ति किया कि बागवान इस योजना का लाभ अधिक से अधिक संख्या में उठाने के लिए अपने निकटवर्ती उद्यान अधिकारियों से सम्पर्क कर सकते हैं।

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