साइबर क्राइम

साइबर क्राइम

सबसे मजूबत कंप्यूटर नेटवर्क भी हैकरों से सुरक्षित नहीं

इंटरनेट ने पूरी दुनिया को आज अपने आप में ही समेट कर रख दिया है। घर बैठे आप दुनिया के किसी भी शहर या गांव की तस्वीर और उसके बारे में जानकारियां अपने कंप्यूटर पर ले सकते हैं। इसने जहां जन-साधारण की जिंदगी आसान की है, वहीं इससे कुछ की जिंदगी मुश्किल में भी आ गई है। इस माध्यम का अब दुरुपयोग होने लगा है। जहां इसके फायदे नजर आते हैं वहीं अब हम इससे हो रही परेशानियोंं और मुश्किलों से भी मुंह नहीं फेर सकते। इन्टरनेट या कंप्यूटर के द्वारा किये जाने वाले अपराधों को साइबर क्राइम कहते हैं।

 

सुरक्षा सिस्टम को भेदने वाले हैकर्स और वायरस ही इसके दुश्मन नहीं हैं, अब मोर्फिग (धड़ किसी का और सिर किसी का लगाकर फोटो बनाना), पोर्नोग्राफी (अश्लील फिल्में), पेडोफाइल (बाल यौन शोषण), सेक्स रैकेट से लेकर लिंग निर्धारण के टेस्ट भी इसके जरिये होने लगे हैं। कई बार अपराध ऐसे होते हैं कि उनका स्रोत विदेशी जमीन होती है। वहां न तो पुलिस पहुंच पाती है और न ही सरकार कुछ कर सकती है।

अधिवक्ता - रोहन सिंह चौहान

अधिवक्ता – रोहन सिंह चौहान

देश में इस मामले में जागरूकता बढ़ी है। सरकार ने 2000 में आईटी एक्ट बनाया और 2008 में इसे संशोधित भी किया लेकिन इसके बावजूद साइबर क्राइम को रोकना मुश्किल हो रहा है। दुनिया का सबसे मजूबत कंप्यूटर नेटवर्क भी हैकरों से सुरक्षित नहीं है। पिछले दिनों चीनी हैकरों ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के दफ्तर के  कंप्यूटरों को हैक करने की कोशिश की जिसे समय रहते नाकाम कर दिया गया। लेकिन सेना अपने कंप्यूटरों को चीनी हैकिंग से नहीं बचा पाई। इस तरह से देखें तो लगभग यूरोप और अमेरिका तक हैकरों से परेशान हैं। देश में साइबर क्राइम से निपटने के लिए आईटी एक्ट बनाया गया है, जिसमें वेबसाइट ब्लॉक करने तक के प्रावधान हैं। लेकिन यह एक्ट देश के अंदर ही ठीक से लागू नहीं हो पा रहा है। कंप्यूटर की दुनिया ऐसी है जिसमें अनेक प्रॉक्सी सर्वर होते हैं। किस सर्वर से अपराध किया गया और यह सर्वर कहां स्थित है, यह पता लगना काफी मुश्किल है। यदि पता लग भी जाए तो उसे ब्लॉक करना उससे भी कठिन होता है क्योंकि जिस देश में यह सर्वर होगा, वहां भारत के कानून लागू नहीं होंगे। जन्म से पूर्व लिंग निर्धारण के लिए किट बेचने वाली एक वेबसाइट को ब्लॉक करने से सरकार ने मना कर दिया है क्योंकि यह साइट गूगल और याहू पर भी उपलब्ध है। वेबसाइट ब्लॉक करने के बारे में सरकार का अपना मत है। सरकार कहती है कि किसी भी साइट को ब्लॉक तभी किया जा सकता है जब उसमें प्रदर्शित सामग्री या सूचनाएं राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हों। विधि मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि साइट ब्लॉक करना एक आपात शक्ति है जिसके इस्तेमाल को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में ही जायज ठहराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार पिछले दरवाजे से और मनमाने तरीके से वेबसाइटों को ब्लॉक करने की पक्षधर नहीं है। इस बारे में नैतिक थानेदारी को हतोत्साहित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि संशोधित आईटी एक्ट जो गत वर्ष अक्तूबर में प्रभाव में आया है, में पोर्नोग्राफी से निपटने के लिए पर्याप्त प्रावधान हैं। हालांकि यह इंटरनेट की सतत समस्या है। वहीं बाल यौन शोषण इससे भी बुरा है। उन्होंने कहा कि आईटी एक्ट की धारा-79 सर्विस प्रोवाइडर की जिम्मेदारी तय करती है। यदि पुलिस उससे एक बार कहती है कि वह अपनी साइट से आपत्तिजनक सामग्री हटा ले और वह उसे नहीं हटाता है तो उसे तीन साल तक की सजा हो सकती है। अधिकारी ने कहा कि आईटी एक्ट में आईपीसी को मद्देनजर रखते हुए सुधार किया गया है। दोनों कानूनों के प्रावधानों को एक साथ लागू कर अश्लीलता पर आसानी से काबू पाया जा सकता है। यह पूछे जाने पर कि आईटी एक्ट में संशोधन के बाद धारा 60 हल्की हो गई है। अधिकारी ने कहा कि कानून का पालन करवाने वाली एजेंसियों के सामने यह समस्या सबसे गंभीर है कि इंटरनेट पर अश्लीलता किसे कहा जाए?

इन्टरनेट या कंप्यूटर के द्वारा किये जाने वाले अपराधों को साइबर क्राइम कहते हैं। साइबर क्राइम अनेक प्रकार के होते हैं: पहचान की चोरी cyber crime(आइडेंटिटी थेफ़्ट): किसी व्यक्ति की पहचान की चोरी करना या उसके इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर हैक करके अपराधिक कार्य करने को पहचान की चोरी कहते हैं।  अपने बैंक अकाउंट का पासवर्ड या एटीएम पिन किसी को न बतायें और इसे समय-समय पर बदलते रहें। वायरस या दोष्पुरण सॉफ्टवेर फैलाना: कंप्यूटर वायरस किसी दूषित पेन ड्राइव या सीडी से आ सकते हैं।  ये इन्टरनेट के ज़रिये किसी ईमेल में भी आ सकते हैं। अपने कंप्यूटर में हमेशा एंटीवायरस रखें और अनजान ईमेल को न खोलें ।

हैकिंग : हैकिंग का मतलब है किसी भी कंप्यूटर, मोबाइल या किसी नेटवर्क में अनधिकृत रूप से घुसपेठ करना और डाटा को चुराना। साधारण भाषा में कह सकते हैं कि किसी के कम्प्युटर सिस्टम में गैरकानूनी तरीके से घुसपैठ करना। इसे क्रैकिंग भी कहते हैं। इस अपराध को करने वाले को हैकर कहते हैं। हैकर अपने लक्षित कम्प्युटर पर रेडीमेड प्रोग्राम के द्वारा अटैक करते हैं। आम तौर पर हैकर धन ऐंठने के लिए इस तरह का काम करते हैं। इसके द्वार क्रेडिट कार्ड की सूचनायें आदि चुराई जाती हैं।  हैकिंग एक जघन्य अपराध है जिसके साबित होने पर 3 साल तक की जेल और 5 लाख तक जुर्माना हो सकता है।

ईमेल स्पूफिंग: किसी व्यक्ति को गलत इरादों से ईमेल भेजने को ईमेल स्पूफिंग कहते हैं। क्रेडिट कार्ड फ्रॉड, वायरस भेजना, बैंक अकाउंट पता करना सब ईमेल स्पूफिंग के ही अंदर आता है?

साइबर आतंकवाद : इन्टरनेट के ज़रिये  किसी भी धार्मिक या राजनितिक क्षेत्र में अशांति फैलाना साइबर आतंकवाद के अंदर आता है।

आईपीआर उल्लंघन: इन्टरनेट पर मौजूद सॉफ्टवेर को बिना इजाज़त इस्तेमाल करना या प्रकाशित करने को आईपीआर उल्लंघन कहते हैं।

अशलीलता: अशलील ईमेल, अशलील चित्र, चित्रों को बदल कर किसी अन्य का चित्र लगा देना, यह सब अशलीलता के अन्दर आता है।  आईटी एक्ट में वेबसाइट को ब्लाक करने का भी प्रावधान है पर सरकार केवल उन्ही बेवसाइट को ब्लाक करेगी जिनमें ऐसी जानकारी हो जो देश की सुरक्षा के खिलाफ हो। साइबर क्राइम से निपटना काफी कठिन काम है, लेकिन जैसे-जैसे साइबर क्राइम्स बढ़ रहे हैं वैसे-वैसे ही इससे जुड़े कानूनों में भी सुधार हो रहा है।  दुनिया भर में कानूनी एजेंसियां साइबर क्राइम्स को बहुत गंभीरता से ले रही है। बहुत बार व्यक्ति ये सोचता है कि अगर वह इन्टरनेट के जरिये अपराध करेगा तो वह अनजान बनकर अपराध कर सकेगा और पकड़ा नहीं जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं है। जल्द ही इस तरह के अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए कदम उठाए जाएंगे और कोई भी व्यक्ति साइबर अपराध करने वाला बख्शा नहीं जाएगा।

चाइल्ड पोर्नोग्राफी– इंटरनेट के बढ़ते चलन से ग्लोबल लेवल पर ब्च्चों को सेक्सुअली नुकसान पहुंचाने के लिए चाइल्ड पोर्नोग्राफी नेट पर काफी बढ़ गई है। चूंकि इंटरनेट की पहुंच अब घर-घर तक हो गई है इसलिए बच्चे इस अपराध के आसानी से शिकार हो रहे हैं। इसके तहत अपराधी बच्चों से सम्पर्क करते हैं। उनका विश्वास जीतते हैं और उनके ईमेल से सम्पर्क बनाते हैं और उस सम्पर्क का दुरूपयोग करते हैं।

साइबर स्टाकिंग– इसके तहत साइबर अपराधी अपने लक्षित व्यक्ति को अनेक तरह से परेशान करते हैं। उनके नम्बर पर कॉल करना, उनका पीछा करना उन्हें तंग करने के लिए लगातार मैसेज करना आदि। वायरस आक्रमण- इसके तहत साइबर अपराधी कुछ ऐसे सॉफ्टवेयर का उपयोग करते हैं जो आपके कम्प्युटर सिस्टम को नुकसान पहुंचाते हैं। वे अटैचमैंट के द्वारा ( इनमें वायरस, वर्म, टार्जन हॉर्स, लॉजिक हॉर्स) आदि आपके कम्प्युटर पर भेजते हैं।

डिनायल ऑफ सर्विस अटैक- इसके तहत साइबर अपराधी आपके बैंडिविथ को नुकसान पहुंचाने के लिए स्पेम मेल से आपके इनबॉक्स को भर देते हैं और आपको आवश्यक सूचनाओं से वंचित कर देते हैं।

सॉफ्टवेयर पाइरेसी– इसके तहत सॉफ्टवेयर की गैरकानूनी तरीके से कॉपी की जाती है और नकली सॉफ्टवेयर का प्रचलन बढ़ाने की कोशिश की जाती है जिससे ऑरिजनल साफ्टवेयर का चलन कम हो जाता है और नतीजे में कम्पनियों को नुकसान उठाना पड़ता है। इंटरनेट रिले चैट- सर्वर के चैट रूम पर दुनिया के किसी भी कोने से लोग आकर चैट करके अपने लक्षित व्यक्ति को किसी भी तरह से तंग या परेशान कर सकते हैं।

क्रेडिट कार्ड फ्रॉड– इसके तहत अपराधी किसी व्यक्ति के क्रेडिट कार्ड की सूचनाओं के द्वार गैरकानूनी सम्पत्ति की खरीद-बिक्री कर देते हैं। जिसके कारण उस व्यक्ति को आर्थिक हानि के साथ-साथ कई तरह के कानूनी गिरफ्त में आने का भी खतरा रहता है।

नेट एक्सटोर्शन- किसी कम्पनी की गुप्त सूचनाओं को कॉपी करके उस कम्पनी से मोटी रकम वसूल करने के अपराध को नेट एक्सटोर्शन कहा जाता है।

– किसी ईमेल यूजर्स के पास ऐसे ईमेल भेजना जिसमें खुद को वैध कारोबारी या इंटरप्राज बताना और यूजर्स को इस बात के लिए प्रेरित करना कि वह अपनी निजी जानकारियां उसे दे। ये अपराधी ईमेल यूजर्स को अपने इंटरनेट साइट्स पर अपनी सूचनायें अपलोड करने को भी कह सकते हैं। वह यूजर्स से अपना बैंक अकाउंट, पासवर्ड आदि की सूचनायें लेने की कोशिश करते हैं। यदि किसी यूजर ने वेबसाइट पर अश्लील सामग्री पोस्ट कर दी है तो इस मामले में सर्विस प्रोवाइडर को सीधे जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। उस पर कार्रवाई करने से पहले उसे अपनी साइट को साफ करने का मौका देना पड़ेगा। उनका कहना है कि अमेरिका और चीन के मामलों में देखा गया है कि वेबसाइट को ब्लॉक करने से कोई मकसद हल नहीं हुआ है।

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