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हिमाचल प्रदेश रोगी को परामर्शी उपचार सेवाएं प्रदान करने वाला देश का प्रथम राज्य : कौल सिंह

स्वास्थ्य मंत्री ने एचपी टेलिस्ट्रोक स्मार्टफोन एप्लीकेशन किया लांच

शिमला: पक्षाघात से ग्रसित होने पर स्मार्टफोन एप्लीकेशन के माध्यम से रोगी को परामर्शी उपचार सेवाएं प्रदान करने में हिमाचल प्रदेश, देश का प्रथम राज्य बन गया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने आज विश्व पक्षाघात दिवस के मौके पर इंदिरा गांधी चिकित्सा महाविद्यालय शिमला में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान ‘एचपी टेलिस्ट्रोक स्मार्टफोन एप्लीकेशन’ लॉंच की।

इस अवसर पर कौल सिंह ठाकुर ने कहा कि पक्षाघात का सबसे बेहतर इलाज पक्षाघात होने के साढ़े चार घंटे के भीतर संभव है। इस स्मार्टफोन एप्लीकेशन के माध्यम से किसी भी व्यक्ति को हिमाचल प्रदेश में पक्षाघात के इलाज के लिए सभी सुविधाओं से संपन्न सबसे नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान की जानकारी व अन्य परामर्श सेवाएं उपलब्ध होगी। यानि पक्षाघात होने पर रोगी के इलाज की त्वरित प्रक्रिया बिना समय गंवाए आरंभ हो पाएगी। एप्लीकेशन के माध्यम से प्रदेश के 17 स्वास्थ्य संस्थानों के चिकित्सक आईजीएमसी और आरपीएमसी टांडा के विशेषज्ञों से परामर्श भी प्राप्त कर सकेंगे।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश पक्षाघात के इलाज के लिए आधुनिक सूचना तकनीक का इस्तेमाल करने वाला प्रथम राज्य बन गया है। पक्षाघात विश्व में लोगों की जान लेने वाली दूसरी सबसे बड़ी बीमारी है। पक्षाघात से ग्रसित होने पर 50 फीसदी मरीज छह माह से अधिक समय तक जीवित नहीं रह पाते, जबकि 25 फीसदी मरीज इससे बुरी तरह प्रभावित रहते हैं।

उन्होंने कहा कि पक्षाघात के इलाज के लिए हिमाचल प्रदेश में अप्रैल 2014 में ‘टेलिस्कोप योजना’ आरंभ की गई। प्रदेश में पक्षाघात से ग्रसित रोगियों को इलाज के लिए दवाई (टीपीए) नि:शुल्क उपलब्ध करवाई जा रही है। बाजार में इस दवाई की कीमत 60 से 70 हजार रुपये है। इस योजना के आरंभ होने के बाद अक्तूबर, 2015 तक इस दवाई से 98 मरीजों का इलाज किया जा चुका है।

कौल सिंह ठाकुर ने कहा कि प्रदेश सरकार लोगों को गुणात्मक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए वचनबद्ध है। इस दिशा में सभी कदम समयबद्ध रूप से उठाए जा रहे हैं। प्रदेश में चिकित्सकों की काडर संख्या 1597 से बढ़ाकर 1897 की गई है। वर्तमान प्रदेश सरकार के कार्यकाल के दौरान 90 नए स्वास्थ्य संस्थान खोले गए हैं और चार नए मेडिकल कॉलेज शीघ्र ही कार्य करना आरंभ कर देंगे। इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री ने डॉ. गुमान सिंह नेगी को टेलिस्ट्रोक एक्सीलेंस अवार्ड प्रदान किया। उन्होंने पक्षाघात के इलाज के लिए चिकित्सकों, पैरामेडिकल स्टाफ व अन्य स्टाफ को भी सम्मानित किया।

न्यूरोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. सुधीर शर्मा ने पक्षाघात के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि हिमाचल में इस बीमारी के इलाज के लिए विभिन्न प्रयास किए जा रहे हैं और चिकित्सकों को विशेष रूप से प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।

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