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आरक्षण रोस्टर जारी होने से पूर्व ही धांधलियों के आरोप लगाना बेबुनियाद व तर्कहीन: अनिल शर्मा

शिमला: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिल शर्मा ने पूर्व मंत्री जयराम ठाकुर के उस बयान का खण्डन किया है जिसमें उन्होंने आरोप लगाया है कि प्रदेश सरकार सही स्थिति में नहीं है और ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री की विभाग में रुचि नहीं है।

आज यहां जारी एक प्रेस वक्तव्य में उन्होंने साफ किया कि ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग ग्रामीण जनता के हित तथा सामाजिक व आर्थिक विकास के लिए पूरे समर्पण के साथ कार्य कर रहा है तथा वह स्वयं विभाग की कार्यप्रणाली और विभिन्न योजनाओं के कार्यक्रमों के कार्यान्वयन में गहरी रुचि ले रहे हैं। उनके और विभाग के मध्य ताल-मेल की कोई कमी नहीं है।

उन्होंने कहा कि पंचायती राज चुनावों से सम्बन्धित आरक्षण रोस्टर को 10 साल तक यथावत् लागू करने का प्रदेश सरकार ने कोई निर्णय नहीं लिया गया है, हालांकि ऐसी प्रस्तावना भारत सरकार की विचाराधीन है जिसके पक्ष में प्रदेश सरकार ने भी अपनी टिप्पणियॉं केंद्र को भेजी है। आरक्षण रोस्टर के मामले में उन्होंने स्पष्ट किया कि आरक्षण की प्रक्रिया सॉफ्टवेयर के माध्यम से पूर्ण की जाए या इसे मेनुअली जारी किया जाए, आरक्षित स्थानों का अन्तिम परिणाम एक समान रहेगा। अतः इस प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की मनमानी की कोई गुंजाइश नहीं है। केन्द्र सरकार द्वारा राजीव गांधी पंचायत सशक्तिकरण अभियान योजना समाप्त करने के पश्चात् विभाग द्वारा विकास खण्ड स्तर तथा जिला स्तर पर नियुक्त कम्पयूटर प्रोग्रामर तथा कम्पयूटर ऑपरेटरों की सेवाएं समाप्त करनी पड़ी जिस कारण सॉफ्टवेयर के संचालन में कठिनाईयां आ रही थीं। इसलिए सरकार ने आरक्षण की प्रक्रिया को पूर्व की भांति मैनुअली करने का निर्णय लिया। सॉफ्टवेयर को लागू न करने के लिए विभाग पर किसी भी प्रकार का दबाब नहीं था।

अनिल शर्मा ने कहा कि आरक्षण की प्रक्रिया हिमाचल प्रदेश पचंायती राज अधिनियम, 1994 तथा इसके अधीन जारी किये गए नियमों तथा दिशा-निर्देशों के अनुरुप समपन्न की जाएगी। इसमें किसी प्रकार की धांधलियों को बर्दाशत नहीं किया जाएगा जिसके लिए विभाग द्वारा समस्त जिलाधीशों तथा जिला पंचायत अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी किये जा चुके है। इसलिए आरक्षण रोस्टर जारी होने से पूर्व ही धांधलियों के आरोप लगाना बेबुनियाद तथा तर्कहीन हैं।

प्रदेश में नई पंचायतों के गठन के सवाल पर अनिल शर्मा ने कहा कि कहा कि इसका कोई औचित्य नहीं है क्योंकि वर्तमान में प्रदेश में पहले ही बहुत छोटे आकार की पंचायतें है। पंचायतों की औसतन जनसंख्या 1905 है, इससे छोटी पंचायतें स्वशासन की दृष्टि से उपयुक्त नहीं है। प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों के मध्यनजर सरकार ने प्रदेश को पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने के पश्चात् 1208 पंचायतों का सृजन किया।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नेता नई पंचायतों के सृजन का मुद्दा राजनीतिक कारणों से उछाल रहे हैं। यदि उन्हें नई पंचायतों के गठन की आवश्यकता महसूस हो रही थी तो भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान नई पंचायतों का गठन क्यों नहीं किया गया। कांग्रेस सरकार ने वर्ष 2005-06 में 206 नई पंचायतों का गठन किया गया था जबकि वर्ष 2010 में भाजपा की सरकार जिसमें जयराम ठाकुर ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री थे, ने एक भी नई पंचायत सृजित नहीं की जिससे भाजपा के दोहरे चेहरे का पता चलता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनसंख्या में बढ़ौतरी के दृष्टिगत ग्राम पचंायतों में वार्डों की संख्या में बढ़ौतरी की गई है।

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