कुल्लवी संस्कृति व इतिहास का आइना बनेंगी तीन पुस्तकें

कुल्लवी संस्कृति व इतिहास का आइना बनेंगी तीन पुस्तकें

  • अंतर्राष्ट्रीय दशहरा उत्सव पर रिलीज की जाएंगी ये तीनों किताबें
  • निरमंड से रोहतांग तक के दर्शनीय स्थलों से रूबरू होंगे लोग
  • विभिन्न विदेशी यात्रियों के यात्रा वृतांत पर भी होगी एक पुस्तक

कुल्लू : अंतर्राष्ट्रीय दशहरा उत्सव के उपलक्ष्य पर जिला सांस्कृतिक परिषद कुल्लू इस वर्ष दशहरा उत्सव समिति के सहयोग से तीन विशेष पुस्तकें प्रकाशित करने जा रही है। इन तीन अलग-अलग पुस्तकों में आम पाठकों, शोधकर्ताओं व पर्यटकों को कुल्लू की देव संस्कृति, देव स्थलों, पर्यटक स्थलों और पारंपरिक पकवानों के अलावा इतिहास के विभिन्न कालखंडों के दौरान कुल्लू जिला का दौरा करने वाले ह्वेन त्सांग, क्रिस्टिना नोबल व अन्य प्रसिद्ध विदेश यात्रियों के वृतांत पढ़ने को मिलेंगे।

उपायुक्त एवं जिला सांस्कृतिक परिषद के अध्यक्ष राकेश कंवर ने बताया कि दशहरा उत्सव पर रिलीज होने वाली इन तीनों पुस्तकें के माध्यम से पहली बार कुल्लू जिला का प्राकृतिक सौंदर्य, संस्कृति, इतिहास, लोगों का रहन-सहन और खान-पान एक विस्तृत व समग्र रूप में विश्व के सामने आएगा।

पहली पुस्तक ‘ए सैके्रड जर्नी’ यानि एक पवित्र यात्रा में कुल्लू जिला के आउटर सिराज क्षेत्र की सतलुज घाटी से सटे गांव नीरथ के सूर्य मंदिर से लेकर मनाली के निकट ब्यास नदी के उदगम स्थल रोहतांग तक के सभी मुख्य देव स्थलों और पर्यटक स्थलों के लगभग 250 शानदार चित्र व विवरण प्रकाशित किए जा रहे हैं।

उपायुक्त ने बताया कि कई विद्वान नीरथ गांव को हड़प्पा सभ्यता से भी जोड़ते हैं जिसका विस्तार निरमंड तक कहा गया है। उन्होंने बताया कि निरमंड, आनी, बंजार और कुल्लू के विभिन्न स्थलों से रूबरू करवाते हुए यह यात्रा जिला के अंतिम छोर रोहतांग दर्रे पर समाप्त होगी जिसे ‘ग्राउंड आॅफ डेड’ यानि मौत का दर्रा भी कहा जाता है। इस पुस्तक में प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर दर्शनीय स्थलों के खूबसूरत चित्रों के साथ-साथ इनसे संबंधित बहुत ही महत्वपूर्ण व रोचक जानकारियां भी होंगी। इनमें भगवान परशुराम द्वारा निरमंड गांव की स्थापना सहित कई अन्य धार्मिक, ऐतिहासिक व रोचक कथाएं शामिल हैं।

उपायुक्त ने बताया कि पेनेलाप चैटवुड, ब्रिटिश इंडिया के आर्मी कमांडर की पुत्री व अन्य विदेशी यात्रियों के यात्रा वृतांत भी इस पुस्तक में शामिल किए गए हैं। ब्रिटिश इंडिया के आर्मी कमांडर की पुत्री ने वर्ष 1931 में आनी व कुल्लू के विभिन्न क्षेत्रों की यात्रा की थी। यहां के पहाड़ों से उसे बहुत लगाव था और वह आजादी के बाद भी कई बार यहां आई थीं। 1986 में देहांत के बाद उन्हें जलोड़ी दर्रे के निकटवर्ती गांव खनाग में ही दफनाया गया था।

उपायुक्त ने बताया कि दूसरी पुस्तक जिला कुल्लू के खान-पान से संबंधित होगी। कुल्लू जिला के विभिन्न पारंपरिक व्यंजन सिड्डू, असकलू, बबरू, फेम्ड़ा और गीची आदि इस पुस्तक में कुल्लवी संस्कृति व खान-पान की महक बिखेरेंगे। देश-विदेश के पर्यटक इन पारंपरिक व्यंजनों से रूबरू होंगे। इसी पुस्तक में कुल्लू जिला के विभिन्न पर्यटक स्थलों पर भारतीय, चाइनीज, तिब्बतियन, इजरायली, कोरियाई, नेपाली, लेबनानी, जर्मनी और अन्य देशों के व्यंजन परोसने वाले रेस्तरांओं का ब्यौरा भी होगा।

तीसरी पुस्तक में पिछले लगभग 1400 वर्षों के इतिहास के विभिन्न कालखंडों में कुल्लू आने वाले प्रसिद्ध विदेशी यात्रियों के यात्रा वृतांत होंगे। यह पुस्तक सातवीं सदी के मशहूर चीनी यात्री ह्वेन त्सांग से शुरू होगी और बीसवीं सदी की क्रिस्टिना नोबल के यात्रा वृतांत पर समाप्त होगी। क्रिस्टिना नोबल बीसवीं सदी के अंतिम दशक में कुल्लू आई थीं और यहीं बस गई थी।

उपायुक्त ने बताया कि दशहरा उत्सव समिति ने पिछले वर्ष कुल्लू के देवी-देवताओं पर एक संदर्भ पुस्तक (रैफरेंस बुक) प्रकाशित की थी, जबकि वर्ष 2013 में भी दशहरा उत्सव पर एक काफी टेबल बुक का प्रकाशन किया था। इस प्रकार तीन वर्षों के दौरान प्रकाशित की गई ये पांच पुस्तकें आम लोगों व देश-विदेश के पर्यटकों को जिला कुल्लू की देव संस्कृति, लोक संस्कृति, रहन-सहन, खान-पान, पर्यटन और इतिहास से अवगत करवाएगी। प्रकाशन के बाद इन पुस्तकों की साफ्ट कापियां पीडीएफ फारमेट में कुल्लू दशहरा की वैबसाइट पर भी निशुल्क उपलब्ध रहेंगी।

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