डेंगु बुखार के प्रति आयुर्वेद विभाग लोगों को करेगा जागरूक

डेंगु बुखार के प्रति आयुर्वेद विभाग लोगों को करेगा जागरूक

  • विभाग का घरों के आस-पास की सफाई एवं औषधियों के छिड़काव की सलाह

शिमला : आयुर्वेद विभाग के एक प्रवक्ता ने आज यहां कहा कि विभाग डेंगु बुखार से बचाव के लिये लोगों में जागरूकता उत्पन्न करेगा। इस सम्बन्ध में प्रदेश के समस्त जिला आयुर्वेदिक अधिकारियों, क्षेत्रीय चिकित्सालयों तथा अधीनस्थ आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केन्द्रों में कार्यरत अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किये गए हैं।

उन्होंने कहा कि अभियान के दौरान डेंगु रोग तथा इसके लक्षणों के बारे में लोगों को जानकारी प्रदान की जाएगी। डेंगु बुखार के लक्षणों पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि अचानक तेज बुखार जिसमें जुकाम व खांसी नहीं होती, बल्कि सिर के सामने वाले भाग अथवा माथे, आंखों के पिछले हिस्से तथा कमर में तेज दर्द होता है। सामान्यतः यह बुखार वर्षा ऋतु के उपरान्त फैलता है तथा मादा एडिज एजिप्टी मच्छर के काटने से होता है। बुखार के दौरान शरीर पर लाल दाने निकल आते हैं तथा भूख कम लगती है और नींद में भी विघ्न होता है।

बुखार की स्थिति में प्राथमिक उपचार में तुलसी पत्र, गिलोय, पपीते के पत्ते, चौकर, लहसुन, चिरायता का काढा बनाकर रोगी को सुबह-शाम तीन से चार चम्मच देने की सलाह दी जाती है। इसके अतिरिक्त, पानी उबाल कर पीना, ताजा फल, मौसमी जूस, नींबू पानी शहद मिलाकर एवं सुपाच्य भोजन रोगी को दिए जाने चाहिए। आयुर्वेद विभाग ने लोगों को घरों के आस-पास खर-पतवार की नियमित तौर पर सफाई एवं पानी की सही निकासी करने तथा कीट नाशक औषधियों अथवा नीम तेल के छिड़काव की सलाह दी है।

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