किसानों के लिए जैविक खेती तथा जीरो बजट प्राकृतिक खेती पर आयोजित चार दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का शुभारम्भ

किसानों के लिए जैविक खेती व जीरो बजट प्राकृतिक खेती पर आयोजित चार दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का शुभारम्भ

  • राज्यपाल का पारम्परिक खेती को प्रोत्साहन देने पर बल
  • किसानों को कृषि की नवीनतम तकनीक व जानकारी प्रदान करने के लिए आगे आएं वैज्ञानिक : राज्यपाल
राज्यपाल का पारम्परिक खेती को प्रोत्साहन देने पर बल

राज्यपाल का पारम्परिक खेती को प्रोत्साहन देने पर बल

शिमला: राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने आज सोलन जिला के डॉ. वाई.एस. परमार वानिकी एवं बागवानी विश्वविद्यालय नौणी द्वारा किसानों के लिए जैविक खेती तथा जीरो बजट प्राकृतिक खेती पर आयोजित चार दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का शुभारम्भ किया।

राज्यपाल ने इस अवसर पर प्रदेश में पारम्परिक खेती के प्रोत्साहन के लिए अनुसंधान करने पर बल दिया। उन्होंने वैज्ञानिकों से आग्रह किया कि वे किसानों को कृषि की नवीनतम तकनीक व जानकारी प्रदान करने के लिए आगे आएं ताकि किसान अपनी दक्षता में सुधार ला सके। उन्होंने कहा कि स्वदेशी बीजों को विकसित करने की आवश्यकता है, जो बीमारी अवरोधक होते है।

आचार्य देवव्रत ने कहा कि प्रयोगशालाओं में किए जा रहे अनुसंधानों के बारे में किसानों को जागरूक करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अनुसंधान की जानकारी किसानों तक न पहुंचने से अनुसंधान का कोई महत्व नहीं रह जाता है। उन्होंने कृषि व बागवानी व पशुपालन विभागों से आग्रह किया कि वे ज्ञान को खेतों व किसानों तक पहुंचाएं और खेतों की गतिविधियों के अनुश्रवण पर विशेष ध्यान केंद्रित करें।

राज्यपाल ने कहा कि प्राकृतिक कीटनाशकों के बारे किसानों को जागरूक किया जाना चाहिए और किसान उसके प्रयोग के बारे में जागरूक होंने चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान में प्रयोग किए जा रहे कीटनाशक न केवल उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, बल्कि इससे भूमि की उर्वरकता भी क्षीण हो रही है। उन्होंने कहा कि किसानों को खेतीचक्र अपनाना चाहिए, जो पारम्परिक खेती का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक कीटनाशकों के उपलब्ध होने से और खेती में विविधिकरण से किसानों की आय में भी बढ़ोतरी होगी। उन्होंने किसानों के उत्पादों के लिए शीत भंडारण चेन के प्रबन्ध पर बल दिया। राज्यपाल ने हर्बल व अन्य पौधों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया और आयोजकों के प्रयासों की सराहना की। प्रसद्धि वैज्ञानिक एवं शिविर के मुख्य वक्ता डॉ. सुभाष पालेकर ने कहा कि 35 करोड़ एकड़ भूमि खेती के लिए उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि देश की सम्पूर्ण जनसंख्या की भोजन जरूरतों को पूरा करने के लिए 2050 तक कृषि उत्पादन दुगुना करना होगा, जो मुख्य चुनौती है। उन्होंने कहा कि जीरो बजट प्राकृतिक खेती इसके लिए सहायक है और किसानों को प्रशिक्षण शिविरों के दौरान इस बारे जागरूक किया जाएगा।

डॉ. वाई.एस. परमार वानिकी एवं बागवानी विश्वविद्यालय नौणी के कुलपति डॉ. विजय सिंह ठाकुर ने विश्वविद्यालय की गतिविधियों बारे विस्तृत जानकारी दी। विस्तार शिक्षा के निदेशक डॉ. डी.के. श्रीवास्तव ने राज्यपाल तथा अन्य गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत किया। निदेशक अनुसंधान डॉ. आर.सी. शर्मा ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। चौधरी सरवण कुमार कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के कुलपति डॉ. के.के. कटोच, कृषि विभाग के निदेशक जे.सी. राणा, पशुपालन विभाग, बागवानी विभाग व डॉ. वाई.एस. परमार वानिकी एवं बागवानी विश्वविद्यालय नौणी के वैज्ञानिक व प्राध्यापक सहित प्रदेश भर के किसानों ने शिविर में भाग लिया।

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One Response

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  1. sneha
    Jan 31, 2018 - 02:11 PM

    किसानों को जैविक खेती के लिए जागरूक करने के लिए ऐसी कार्यशालाओ की बहुत आवश्यक्ता है. जिससे किसानों को सही ज्ञान हो सके.

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