मकर संक्रांति के दिन जरूर करें ये उपाय, जीवन में आएगी सुख समृद्धि : कालयोगी आचार्य महिंदर शर्मा

मकर संक्रांति पर सूर्य और भगवान विष्णु की पूजा का विधान

भगवान को तांबे के पात्र में जल, गुड़ और गुलाब की पत्तियां डालकर दें अर्घ्य

इस वर्ष संक्रांति देवी बाघ के वाहन पर आई हैंसंक्रांति देवी पीले वस्त्र पहनकर दक्षिण दिशा की ओर चलेंगी. मकर संक्रांति पर इस बार शत्रुओं का हनन होगा और बाधाएं नष्ट होंगी। शुक्रवार का दिन होने की वजह से मां लक्ष्मी की कृपा भी बनी रहेगी। इस दिन तीर्थ धाम पर नदी या सरोवर में आस्था की डुबकी लेने का बड़ा महत्व बताया गया है। यदि किसी कारणवश आप ऐसा नहीं कर पा रहे हैं तो पानी में गंगाजल, तिल और थोड़ा सा गुड़ मिलाकर स्नान कर लें।

मकर संक्रांति पर सूर्य और भगवान विष्णु की पूजा का विधान है। यह व्रत भगवान सूर्य नारायण को समर्पित है। इस दिन भगवान को तांबे के पात्र में जल, गुड़ और गुलाब की पत्तियां डालकर अर्घ्य दें। गुड़, तिल और मूंगदाल की खिचड़ी का सेवन करें और इन्हें गरीबों में बांटें। इस दिन गायत्री मंत्र का जाप करना भी बड़ा शुभ बताया गया है। आप भगवान सूर्य नारायण के मंत्रों का भी जाप कर सकते हैं।

आचार्य महिंदर कृष्ण शर्मा

आचार्य महिंदर कृष्ण शर्मा

 मकर संक्रांति के सुबह जल्दी उठकर नहा लेना चाहिए और उसके बाद सूर्य देव को जल अर्घ्य देकर प्रणाम करना चाहिए। एक थाली में रोली, मौली, लौंग, हल्दी, गुड़, दूध, घी लेकर सूर्य देव की प्रतिमा के सामने पूजा करते हुए अर्पित कर सकते हैं। मकर संक्रांति पर तिल मिले हुए जल से भगवान ​सूर्य देव की पूजा करनी चाहिए। इस दिन एक साफ लोटे में काला तिल, साफ पानी, अक्षत्, लाल फूल, शक्कर और रोली डालें। फिर सूर्य मंत्र का उच्चारण करते हुए या उन्हें प्रणाम करते हुए अर्पण करें।

मान्यता के अनुसार, इस दिन काले तिल से पूजा करने पर सूर्य देव प्रसन्न होते हैं और शनि देव की तरह ही भक्तों को भी धन और संतान आदि की प्राप्ति का आशीर्वाद देते हैं। ऐसा करने से इंसान के जीवन में सुख, समृद्धि और सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दिन कंबल, गर्म कपड़े, घी, दाल चावल की खिचड़ी और तिल का दान करने से गलती से भी हुए पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख समृद्धि आती है। मकर संक्रांति के दिन स्नान करने के पानी में काले तिल डालें। तिल के पानी से स्नान करना बेहद ही शुभ माना जाता है। साथ ही ऐसा करने वाले व्यक्ति को रोग से मुक्ति मिलती है।

यदि कोई बीमार है तो, उसे मकर संक्रांति के दिन तिल का उबटन लगाकर स्नान करना चाहिए. ऐसा करने से व्यक्ति की काया निरोगी बनी रहती है।

क्या है उत्तरायण और दक्षिणायन?

उत्तरायण देवताओं का दिन है और दक्षिणायन देवताओं की रात्रि हैदक्षिणायन की तुलना में उत्तरायण में अधिक मांगलिक कार्य किए जाते हैं। ये बड़ा शुभ फल देने वाले होते हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने खुद गीता में कहा है कि उत्तरायण का महत्व विशिष्ट है। उत्तरायण में प्राण त्यागने वाले व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। यही वजह थी कि भीष्म पितामाह भी दक्षिणायन से उत्तरायण की प्रतीक्षा करते रहे। सूर्य जब कर्क राशि में प्रवेश करते हैं तो दक्षिणायन शुरू हो जाता है और सूर्य जब मकर में प्रवेश करते ही उत्तरायण प्रारंभ हो जाता है।

दान करने पुण्य तो मिलता ही है हिंदू धर्म में मकर संक्रांति के दिन का बेहद ही खास महत्व बताया गया है। कहा जाता है कि, यदि कोई व्यक्ति साल भर या पूरे महीने में कभी दान पुण्य ना कर सके तो उसे मकर संक्रांति के दिन दान पुण्य ज़रुर करना चाहिए। ऐसा करने से इंसान के जीवन में सुख, समृद्धि और सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दिन कंबल, गर्म कपड़े, घी, दाल चावल की खिचड़ी और तिल का दान करने से गलती से भी हुए पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख समृद्धि आती है। इसके अलावा भी कई उपाय हैं जो इस दिन किए जाते हैं।

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