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रणधीर शर्मा का बयान गैर-जिम्मेदाराना : पठानिया और सुधीर शर्मा

शिमला : ऊर्जा मंत्री सुजान सिंह पठानिया और शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा ने भाजपा महासचिव रणधीर शर्मा के इस बयान को हास्यस्पद् करार दिया है कि कांग्रेस पार्टी के कुछ मंत्री और विधायक भाजपा के सम्पर्क में हैं। आज यहां जारी एक संयुक्त प्रेस वक्तव्य में उन्होंने कहा कि रणधीर शर्मा को कोई भी गंभीरता से नहीं लेता है क्योंकि वह हमेशा बेतुकी बयानबाजी करते हैं जिनका कोई आधार नहीं होता। उन्होंने कहा कि प्रदेश भाजपा में कई ‘नटवर लाल’ हैं जिनमें रणधीर शर्मा भी एक हैं, जो निराधार बयानबाजी के माध्यम से लोगों का ध्यान बांटने और मीडया की सुर्खियों में बने रहने की फिराक में रहते हैं।

प्रदेश के भाजपा नेता पूरी तरह हताश और निराश हैं और रणधीर शर्मा का यह गैर-जिम्मेदाराना बयान इसका उदाहरण है। भाजपा नेताओं की कुंठित मानसिकता है और वे सभी मंत्रियों व कांग्रेस विधायकों के मुख्यमंत्री के साथ खड़े होने कारण एक बार फिर उन्हें बदनाम करने की विफल कोशिश कर रहे हैं, जिसका उन्हें कोई भी लाभ मिलने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी सहित पूरी पार्टी और प्रदेश के सभी मंत्री व कांग्रेस विधायक व प्रदेश के लोगों का समर्थल है जिसके कारण भाजपा नेताओं में हताशा है।

मंत्रियों ने कहा कि भाजपा नेताओं को प्रजातांत्रिक ढंग से चुनी गई सरकार को गिराने के सपने देखना बंद करना चाहिए क्योंकि वीरभद्र सिंह के कुशल नेतृत्व में यह सरकार पूर्णतः स्थिर है और प्रदेश व प्रदेश के लोगों के हित में कार्य करते हुए अपना कार्यकाल पूरा करेगी। उन्होंने कहा कि हाल ही में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के घर पर सी.बी.आई और प्रवर्तन निदेशालय की छापेमारी के बाद भाजपा की फजीहत हुर्ह है क्योंकि इस षड़यंत्र के पीछे प्रदेश के भाजपा नेता भी शामिल थे। इस छापेमारी के लिए केंद्रीय जांच एजेंसियों का दुरुपयोग किया गया जिससे साफ हो गया है कि केंद्र सरकार और प्रदेश भाजपा ने मुख्यमंत्री और प्रदेश सरकार को बदनाम व कमजोर करने के लिए प्रतिशोध की भावना से इस कार्रवाई को अंजाम दिया था। मंत्रियों ने कहा कि जहां तक निर्दलीय विधायकों का सवाल है, उन्होंने लिखित तौर पर कांग्रेस सरकार को अपना समर्थन प्रदान किया है और मुख्यमंत्री के साथ पूर्ण निष्ठा से खड़े हैं।

मंत्री ने रणधीर शर्मा के इस बयान पर भी हैरानी जताई है कि मुख्यमंत्री को अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के खिलाफ आयकर रिटर्न को लेकर मामला न्यायालय में विचाराधीन है और सच सबके सामने आ जाएगा। वीरभद्र सिंह को पहले भी कई मामलों में फंसाने की कोशिश हुई और हर बार वे न्यायालय से बेदाग होकर निकले और इस बार भी वे निर्दोष साबित होंगे। उनके त्याग पत्र की मांग करने वाले भाजपा नेताओं को संयम रखना चाहिए और मामले में फैसला आने का इंतजार करना चाहिए।

उन्होंने भाजपा नेताओं से सवाल किया कि वे किस मुंह से वीरभद्र सिंह से इस्तीफा मांग रहे हैं जबकि केंद्र की भाजपा सरकार और भाजपा शासित कुछ राज्यों के मुख्यमंत्रियों पर भ्रष्टाचार के संगीन आरोप लगे हैं जिनको लेकर प्रधानमंत्री और पूरी भाजपा बिल्कुल चुप्पी साधे हुए है, जो भाजपा के दोहरे चरित्र को दर्शाता है। मंत्रियों ने कहा कि भाजपा ने जब-जब वीरभद्र सिंह को झूठे मामलों में फंसाने और घेरने की कोशिश की है, वह हमेशा मजबूती से उभरे हैं। मुख्यमंत्री की लोकप्रियता और जनाधार से बौखलाकर भाजपा नेता आए दिन राजनीति से प्रेरित ओछी बयानबाजी पर उतारू हैं, जिसका उन्हें जनता को जवाब देना पड़ेगा।

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