हिमाचल: सरकारी स्कूलों में शिक्षकों-गैर शिक्षकों को चार अप्रैल तक अवकाश

कोरोना के बीच अभी बच्चों को स्कूल बुलाना सही नहीं…

शिमला में स्कूल खोलने के विरोध में उतरे अभिभावक

शिमला: प्रदेश सरकार के स्कूलों में सभी कक्षाओं को शुरू करने के निर्णय को लेकर विरोध होने लगा है। प्राइवेट स्कूल अभिभावक एसोसिएशन शिमला ने सरकार से छात्रों के ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों विकल्प देने और छोटे बच्चों को स्कूल बुलाने के कैबिनेट के फैसले को वापस लेने की मांग की है। जहाँ 15 नवंबर को पहली और दूसरी कक्षा के बच्चों की भी नियमित कक्षाएं शुरू होने वाली हैं। ऐसे में अभिभावक एसोसिएशन ने कहा है कि यदि सरकार अपना फैसला वापस नहीं लेती है तो एसोसिएशन कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगा।

शिमला में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पैरेंट एसोसिएशन के सलाहकार डॉ. संजय पांडे  ने कहा कि प्रदेश सरकार से बंद कमरे में कैबिनेट बैठक कर स्कूलों में सभी कक्षाओं की नियमित पढ़ाई शुरू करने का फैसला तो ले लिया है, लेकिन कोरोना संकट को देखते हुए अभिभावक इस फैसले का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अभिभावकों के मन में अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर कई सवाल हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार ने किस आधार पर यह फैसला लिया इसकी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। संजय पांडे ने कहा कि अभिभावकों को यह जानने का अधिकार है कि स्कूल प्रबंधनों द्वारा कोरोनो संक्रमण से बचाव के लिए क्या व्यवस्थाएं की गई हैं? उन्होंने मांग की है कि अभिभावकों को ये छूट दी जाए कि वह अपने बच्चों को स्कूल भेजना चाहते हैं कि नहीं। साथ ही उन्होंने 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए कोविड टीकाकरण कार्यक्रम जल्द शुरू करने की भी मांग की है।

पैरेंट एसोसिएशन के सदस्य अभिभावक संदीप वर्मा और रीना ने कहा कि बच्चों को सिर्फ 10 से 15 दिन के लिए स्कूल बुलवाने की फैसला तर्क संगत नहीं है, वह कोविड-19 के चलते अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजना चाहते हैं। साथ ही अभिभावकों को सिर्फ ट्यूशन फीस लिए जाने की भी मांग की है।

इस अवसर पर वरिष्ठ सदस्य अनिल गोयल ने कहा कि इस संबंध में अभिभावक एसोसिएशन ने उपायुक्त से भी मुलाकात की है। शहर के स्कूलों में अभिभावक सरकार के स्कूल खोलने के फैसले के खिलाफ उपायुक्त कार्यालय पहुंचे। उपायुक्त को अभिभावकों ने ज्ञापन सौंप कर सरकार से छोटे बच्चों के स्कूलों को न खोलने का आग्रह किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री से फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की।

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