शूलिनी विश्वविध्यालय में हुआ तीन दिवसीय ‘आध्यात्मिक रिट्रीट’ का आगाज़

शूलिनी यूनिवर्सिटी क्यूएस रैंकिंग्स में पीयू, जीएनडीयू से भी रही आगे.. 

साइटेशन इम्पैक्ट में अपना शीर्ष स्थान बरकरार रखा

प्रो.पी.के खोसला ने उपलब्धि पर फैकेल्टी और शोधकर्ताओं को दी बधाई,  कहा:- यह 200 शीर्ष वैश्विक यूनिवर्सिटीयों में शामिल होने के अपने लक्ष्य की दिशा में एक और कदम 

सोलन: पंजाब यूनिवर्सिटी और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी और हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी जैसे कई स्थापित यूनिवर्सिटीयों को पीछे छोड़ते हुए, हिमाचल प्रदेश स्थित ट्रस्ट द्वारा संचालित शूलिनी यूनिवर्सिटी एशिया के लिए दुनिया की शीर्ष उच्च संस्थान रैंकिंग एजेंसी, प्रतिष्ठित क्वाकक्वरेली साइमंड्स (क्यूएस) में अपनी ऊंची रैंकिंग को बरकरार रखने में सफल रही है। आज घोषित रैंकिंग के अनुसार प्रति प्रकाशन साइटेशन के लिए देश में अपना नंबर एक स्थान बरकरार रखते हुए, शूलिनी यूनिवर्सिटी ऑफ बायोटेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट साइंसेज इस साल इसी श्रेणी में एशिया में 14 वें स्थान से संयुक्त चौथे स्थान पर आने में सफल रही है। 12 साल पुराने यूनिवर्सिटी ने अपनी समग्र एशिया रैंकिंग में पिछले साल के 291-300 से सुधार कर इस साल 271-280 का स्लॉट हासिल किया है। इस प्रतिष्ठित 2022 क्यूएस

प्रो.पी.के खोसला ने उपलब्धि पर फैकेल्टी और शोधकर्ताओं को दी बधाई,  कहा:- यह 200 शीर्ष वैश्विक यूनिवर्सिटीयों में शामिल होने के अपने लक्ष्य की दिशा में एक और कदम

एशिया यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2022 को  प्रकाशित किया गया है। पंजाब यूनिवर्सिटी को 301-350 समूह में रखा गया है, जबकि जीएनडीयू को 451-500 समूह में रखा गया है और कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी को 601-650 समूह में रखा गया है। सूची में एचपीयू का नाम नहीं है। चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी को 271-280 स्लॉट में शूलिनी यूनिवर्सिटी के साथ शामिल किया गया है। देश के सभी 1000 से अधिक यूनिवर्सिटीयों में, शूलिनी यूनिवर्सिटी को पिछले वर्ष 38वें स्थान पर रखा गया है और इस वर्ष इसने अपनी स्थिति सुधार कर 35 रैंक कर ली है। यह देश के सभी यूनिवर्सिटीयों में 20वें स्थान पर है। देश के सभी निजी यूनिवर्सिटीयों में इसे देश की सर्वश्रेष्ठ सूची में 8वें स्थान पर रखा गया है।रैंकिंग को एकेडमिक प्रतिष्ठा, कर्मचारी-छात्र अनुपात, प्रति फैकेल्टी पेपर्स, साइूशन इम्पैक्ट, इंटरनेशनल रिसर्च नेटवर्क, अंतरराष्ट्रीय कर्मचारी और छात्र, एक्सचेंज स्टूडेंट्स और इम्पलॉयर प्रतिष्ठा सहित व्यापक मानदंडों के आधार पर की जाती है।

क्यूएस एशिया ने समीक्षाधीन अवधि के दौरान 38 नए संस्थानों सहित एशिया में 675 संस्थानों पर विचार किया। भारत में कुल 119 संस्थानों का मूल्यांकन किया गया।शूलिनी यूनिवर्सिटी के संस्थापक और चांसलर प्रो.पी.के खोसला ने इस उपलब्धि पर फैकेल्टी और शोधकर्ताओं को बधाई दी और कहा कि यह 200 शीर्ष वैश्विक यूनिवर्सिटीयों में शामिल होने के अपने लक्ष्य की दिशा में एक और कदम है।

वाइस चांसलर प्रोफेसर अतुल खोसला ने कहा कि यह बहुत गर्व की बात है कि शूलिनी यूनिवर्सिटी क्यूएस एशिया द्वारा शीर्ष स्थान पाने वाला सबसे युवा यूनिवर्सिटी है। इसने अधिकांश आईआईटी, पंजाब यूनिवर्सिटी और कई अन्य स्थापित संस्थानों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है।प्रो चांसलर विशाल आनंद ने शोधकर्ताओं, फैकेल्टी और छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि यह सूची में स्थान पाने वाला हिमाचल प्रदेश का एकमात्र संस्थान है।एक युवा, ट्रस्ट द्वारा संचालित यूनिवर्सिटी, जो अनुसंधान और इनोवेशन के क्षेत्र में लगातार नई सफलताएं हासिल कर रही है, को हाल ही में देश में पेटेंट दाखिल करने के लिए शिक्षा मंत्रालय की सूची में तीसरा स्थान दिया गया था, जो देश के सभी 23 आईआईटी के संयुक्त आउटपुट में शीर्ष पर था। अब तक इसके शोधकर्ताओं ने 700 से अधिक पेटेंट दायर किए हैं।हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के बझोल गांव में स्थित यूनिवर्सिटी को भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के तहत नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग्स फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) द्वारा 89 वें स्थान पर रखा गया है। शूलिनी यूनिवर्सिटी की हाल ही में प्राप्त एक अन्य उपलब्धि में, इसके कम से कम सात फैकेल्टी सदस्यों को स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार दुनिया के शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों में शामिल किया गया है। इसे अखिल भारतीय स्तर पर अटल रैंकिंग्स ऑफ प्राइवेट इंस्टीट्यूशंस ऑन इनोवेशन एंड अचीवमेंट्स (एआरआईआईए) में छह से 25 तक बैंड में रखा गया था, जो कि शूलिनी यूनिवर्सिटी के लिए एक और बड़ी उपलब्धि एवं सफलता है।

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