सरकार नया उद्यम शुरू करने वाले युवाओं को देगी प्रोत्‍साहन : डॉ जितेंद्र

नए कानून बनाने के बजाय सरकार ने पुराने कानून हटाए: डॉ. जितेंद्र

  • नए कानून बनाने के बजाय सरकार ने पुराने कानून हटाए: डॉ. जितेंद्र सिंह
  • ई-कार्यालय और ई-गवर्नेन्स के कार्यान्वयन पर केंद्र सरकार की कार्यशाला का शुभारंभ

 

नई दिल्ली: पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, जन शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज यहां कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार ने प्रशासन को सही मायने में आसान बनाने की अपनी प्रतिबद्धता का पालन किया है तथा इसका एक महत्वपूर्ण प्रमाण यह है कि जबकि प्रत्येक सरकार नए कानून बनाने में गौरव महसूस करती है लेकिन इसके बावजूद वर्तमान सरकार ने नए कानून हटाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने कई पुराने कानून और अनुचित बाधाएं दूर की हैं। इस संदर्भ में उन्होंने प्रमाणपत्रों के सत्यापन कराने के नियम को हटाने का उल्लेख किया और प्रत्येक वृद्ध पेंशनधारक के लिए जीवन का प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने की अनिवार्यता को हटाने का जिक्र भी किया। डॉ. जितेंद्र सिंह ई-कार्यालय और ई-गवर्नेन्स के कार्यान्वयन पर केंद्र सरकार की कार्यशाला के आरंभिक सत्र को संबोधित कर रहे थे।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने याद किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले के प्राचीर से स्वतंत्रता दिवस के भाषण के दौरान सुझाव दिया था कि क्या पदों के लिए साक्षात्कार लेने की प्रक्रिया को समाप्त करना संभ है जहां ऐसा करना बहुत अनिवार्य न हो। उन्होंने कहा कि अभी एक महीना भी नहीं हुआ और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग और प्रशासनिक सुधार एवं जन शिकायत विभाग ने यह प्रक्रिया आरंभ कर दी है तथा महाराष्ट्र जैसे कुछ राज्यों ने इस दिशा में अच्छी प्रगति भी कर ली है।

कानून और नियम आम आदमी के लाभ के लिए होते हैं। डॉ. सिंह ने कहा कि जिस कानून और नियम से शासन का बोझ बढ़ता हो और काम करने में देरी होती हो या आम आदमी को परेशानी होती हो वह बनाए रखने लायक नहीं है। सुशासन की अग्नि परीक्षा इस बात में निहित है कि क्या उसके लाभ आम आदमी तक पहुंचे क्योंकि हमारे संस्थापक दीनदयाल उपाध्याय की शिक्षा अंत्योदय ही थी।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सुशासन की कुंजी लाल फीताशाही को कम करने, इलेक्ट्रानिक एवं डिजिटल माध्यमों के जरिए शासन प्रक्रिया में तेजी लाने और अधिकारियों को बेहतरीन कार्य करने में बाधक नियमों को दूर करने में निहित है। उन्होंने कहा कि नौकरशाही और प्रशासन से जनता की आकांक्षा का स्तर बहुत ऊंचा है लेकिन समाज को भी तेजी से हाई टेक होती ग्लोबल दुनिया के अनुरूप तेजी से परिणाम देखने की उम्मीद है।

प्रशासनिक सुधार एवं जन शिकायत विभाग और पेंशन एवं पेंशनधारक कल्याण विभाग के सचिव देवेंद्र चौधरी ने स्वागत भाषण में युवा आईएएस अधिकारियों को याद दिलाया कि पांच महत्वपूर्ण चीजों में बदलाव लाना है – नेतृत्व, लोग जो नेतृत्व कर सकें, प्रक्रिया, नजरिया और लीगेसी। उन्होंने लोक सेवक दिवस के दौरान 21 अप्रैल, 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण को याद करते हुए कहा कि शासन के पांच ई एफर्ट यानी प्रयास, ईजी यानी आसान, इकोनोमिकल यानी किफायती, एफीसिएंट यानी दक्ष और इलेक्ट्रानिक।

प्रधानमंत्री कार्यालय में अपर सचिव भास्कर खुल्बे ने कहा कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 51 ए एच में वैज्ञानिक सोच के विकास, मानवता, पूछताछ और सुधार की बात कही गई है। इसलिए यह सरकार का कर्तव्य है कि कार्यालय के मॉड्यूल में बदलाव लाने के लिए रूपरेखा तैयार करने और पारदिर्शता, प्रभावशीलता और सरकारी कामकाज में प्रौद्योगिकी लाई जाए।

डीएआरपीजी, अपर सचिव उषा शर्मा और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने कार्यशाला में भाग लिया। यह कार्यशाला खासतौर से 2013 के बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को बुनियादी जानकारी देने के लिए आयोजित की गई जो हाल ही में केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों में तैनात किए गए हैं। सहायक सचिवों के रूप में ये सभी केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों में ई-कार्यालय परियोजना के तेजी से कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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