भारतीय संस्कृति व सामाजिक व्यवस्था में महिलाओं का विशेष स्थान व योगदान : प्रतिभा सिंह

भारतीय संस्कृति व सामाजिक व्यवस्था में महिलाओं का विशेष स्थान व योगदान : प्रतिभा सिंह

पहली बार राज्य स्तरीय महिला साहित्यकार सम्मेलन का आयोजन

पहली बार राज्य स्तरीय महिला साहित्यकार सम्मेलन का आयोजन

पहली बार राज्य स्तरीय महिला साहित्यकार सम्मेलन का आयोजन

शिमला : हिमाचल कला संस्कृति भाषा अकादमी द्वारा शिमला के गेयटी थिएटर में आज राज्य स्तरीय महिला साहित्यकार सम्मेलन का आयोजन किया गया। भारतीय संस्कृति तथा सामाजिक व्यवस्था में महिलाओं का विशेष स्थान तथा योगदान है। यह शब्द पूर्व सांसद प्रतिभा सिंह ने सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए कहे। प्रतिभा सिंह ने कहा कि महिलाएं सदैव पारिवारिक, सामाजिक तथा राष्ट्रीय चुनौतियों का सामना करते हुए अपने त्याग और बलिदान से महत्वपूर्ण योगदान देती रही हैं। वर्तमान समय में भी राजनीति, समाज सेवा, खोल-कूद, प्रशासन, पत्रकारिता तथा साहित्य के क्षेत्र में महिलाओं का बराबर का योगदान है।

हिमाचल प्रदेश की महिला साहित्यकारों द्वारा रचित पुस्तकों की प्रदर्शनी से भी यह साबित होता है कि इन्होंने साहित्य की हर विधा में प्रशंसनीय कार्य करते हुए सामाजिक विसंगतियों और राष्ट्रीय चुनौतियों को प्रमुखता से अपनी रचनाओं का विषय बनाया तथा कविता और कहानी के माध्यम से अपने विचारों को सफलतापूर्वक अभिव्यक्त किया है। सम्मेलन के प्रथम सत्र में अपने उद्घाटन भाषण में अकादमी के उपाध्यक्ष डॉ. प्रेम शर्मा ने कहा कि वैदिक और पौराणिक काल में महिलाओं ने अध्यात्म, शिक्षा तथा युद्ध के क्षेत्र में विशेष कौशल दिखाया है। वर्तमान में भी महिलाएं सभी क्षेत्रों में अग्रसर हैं और साहित्य तथा कला के क्षेत्र में भी अपने कर्तव्य का निर्वाह कर रही हैं।

हिमाचल अकादमी के सचिव अशोक हंस ने इस अवसर पर बताया कि अकादमी ने पहली बार राज्य स्तरीय महिला साहित्यकार सम्मेलन का आयोजन किया है जिससे प्रदेश की महिलाओं को अपनी रचनाएं प्रस्तुत करने का मौका मिला सका है। उन्होंने बताया कि अकादमी अध्यक्ष एवं प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के मार्गदर्शन में ऐसी योजनाएं तैयार की जा रही हैं जिनसे प्रदेश के कलाकार तथा साहित्यकार लाभान्वित हो सकेंगे। 2 अक्तूबर, 2015 को अकादमी के स्थापना दिवस पर भी साहित्यिक कार्यक्रम किए जाने की योजना है।

‘साहित्य के क्षेत्र में हिमाचली महिला साहित्यकारो का योगदान‘ विषय पर प्रपत्र प्रस्तुत करते हुए सरोज वशिष्ठ ने कहा कि हिमाचल की महिला लेखिकाओं का हिंदी, अंग्रेजी तथा अन्य भाषाओं की कविता, कहानी, उपन्यास, आलोचना तथा अन्य विधाओं में विशेष योगदान है। सम्मेलन के प्रथम सत्र में रेखा वशिष्ठ ने ‘सर्वे सन्तु निरामया‘ तथा डॉ. देवकन्या ठाकुर ने हेसण कहानियों का पाठ किया। प्रस्तुत कहानियों की समीक्षा करते हुए डॉ. उषा बन्दे, प्रो. जयवन्ती डिमरी, प्रो. मीनाक्षी पॉल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में महिला कहानीकारों द्वारा लिखी जा रही कहानियां समीक्षा की कसौटी पर खरी उतरती हैं। इसी सत्र में डॉ. प्रियंका वैद्य, प्रो. संगीताश्री, प्रोमिला भारद्वाज ने कविताओं का पाठ किया जिन पर समीक्षक एवं आलोचक डॉ. राधा वर्मा, डॉ. ममता मोक्टा, डॉ. विद्या निधि छाबड़ा ने कहा कि हिमाचल की महिला साहित्यकार सामाजिक विसंगतियों और चुनौतियों को अपनी रचनाओं का विषय बनाकर विभिन्न पत्रों के माध्यम से उनके समाधान के प्रति पाठकों को जागरुक करने में सशक्त भूमिका निभा रही हैं।

सम्मेलन के द्वितीय सत्र में बहुभाषी कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमें डॉ. कान्ता शर्मा, संदेश शर्मा, कंचन शर्मा, सविता ठाकुर, अंजलि दीवान, आशा शैली, डॉ. मनोरमा शर्मा, तारा नेगी, शैली किरण, रूपेश्वरी शर्मा, अर्चना शर्मा, भारती कुठियाला, निर्मल चंदेल, सोनिया पखरोलवी, सोम लता, प्रिंयंवदा, कौमुदी ढल, सुनीता शर्मा, वंदना राणा, हरि प्रिया, अनुजा, मोनिका शर्मा तथा सुदर्शन पटियाल इत्यादि कवियित्रियों ने कविता पाठ किया। कार्यक्रम में प्रख्यात कहानीकार सुदर्शन वशिष्ठ, एस.एन. जोशी, एस.आर. हरनोट, बद्री सिह भाटिया तथा वरिष्ठ कवि टी.आर. शर्मा, मदन हिमाचली तथा अन्य साहित्यकार भी उपस्थित रहे। सम्मेलन का संचालन डॉ. कर्म सिंह तथा काव्य संध्या का संचालन कंचन शर्मा ने किया।

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