सर्द मौसम में महिलाएं रखें विशेष ध्यान

डॉ प्रेम मछान

डॉ प्रेम मछान

सर्द मौसम में महिलाओं को अपना विशेष ध्यान रखना चाहिए। इन दिनों महिलाओं को कई प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बीमारी उन्हें जब तक पूरी तरह से न पकड़ ले, वे चिकित्सक के पास जाना पसंद नहीं करती हैं। लापरवाही के कारण कभी-कभी बीमारियां इतनी गंभीर हो जाती हैं कि इलाज असंभव हो जाता है। पहले महिलाएं अज्ञानता के चलते ऐसा करती थीं। आज महिलाएं शिक्षित और समझदार हैं लेकिन आज भी सिर्फ ध्यान न देने की वजह से बीमारियां ने गंभीर रूप ले लेती हैं। महिलाओं को चाहिए कि अपनी सेहत का विशेष ध्यान रखें और समय-समय पर डॉक्टरी परामर्श लेते रहें।

  •  व्यायाम को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लें। व्यायाम ज्यादा पकाऊ न हो, इसके लिए रोज कुछ नया करने का प्रयास करें। जैसे सोमवार को सैर, मंगलवार को योग, बुधवार को एक्सरसाइज आदि। व्यायाम करते समय अपनी पसंद का म्यूजिक सुनना बहुत जरूरी होता है। इससे मन प्रसन्न होता है, और शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
  • खाने में हरी सब्जी, फल, सलाद और जूस का नियमित सेवन करें। तेल-घी का ज्यादा उपयोग न करें। महिलाएं एक गिलास दूध प्रतिदिन पिएं। कैल्शियम और सोयायुक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करें।
  • बदलते मौसम में मॉइश्चराइजर का उपयोग करें। त्वचा को स्वस्थ रखने के लिए एलोवेरा का उपयोग भी कर सकते हैं। दिनभर में लगभग 8 से12 गिलास पानी पीने से आधी से ज्यादा बीमारियां दूर रहती हैं।
  • विटामिन, एंटीऑक्सीडेंट दवाइयों का सेवन करें। महिलाएं ब्रेस्ट कैंसर और बच्चादानी के कैंसर की समय-समय पर जांच कराती रहें। साथ ही अन्य चेकअप भी कराती रहें।

जितना घातक हाई ब्लड प्रेशर उतना ही नुकसानदेह लो ब्लड प्रेशर : डा. मच्छान

आजकल की भागमभाग और तनाव भरी जिंदगी में लोगों में ब्लड प्रेशर (रक्तचाप) की समस्या पेश आ रही है। जितना घातक हाई ब्लड प्रेशर होता है उतना ही नुकसानदेह लो ब्लड प्रेशर। हम कहीं भी देखें घर हो या बाहर, चिन्ता, परेशानी व गुस्सा हमारे दिल दिमाग व शरीर के दूसरे भागों को भी प्रभावित करता है। हृदय शरीर में रक्त को प्रवाहित करता है। स्वच्छ रक्त आर्टरी से शरीर के दूसरे भागों में जाता है और शरीर के दूसरे भागों से दूषित रक्त हृदय में वापस जाता है। ब्लड प्रेशर खून को पम्प करने की इसी प्रक्रिया को कहते हैं। ब्लड प्रेशर कोई बीमारी नहीं है बल्कि एक नॉर्मल प्रक्रिया है। लेकिन जब किसी कारणवश यह प्रेशर कम या ज़्यादा होता है, तो इसे हाई ब्लड प्रेशर या लो ब्लड प्रेशर कहते हैं। आज लोगों में हाईपरटेंशन एक बहुत ही आम समस्या है। यह बिना किसी चेतावनी के होती है इसलिए इसे साइलेंट किलर कहते हंै।  हमें ऐसी समस्या में क्या-क्या सावधानी और ध्यान रखना चाहिए हम इसी विषय में आपको इस बार जानकारी देने जा रहे हैं।  प्रस्तुत हैं आईजीएमसी अस्पताल एवं चिकित्सालय के मेडिसन विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. प्रेम मच्छान से मीना कौंडल की बातचीत के महत्वपूर्ण अंश :

प्रश्र: हाइपरटेंशन के मुख्य की मुख्य वजह क्या हैं?

उत्तर: इसके दो मुख्य कारण हैं शारिरिक और मानसिक।  शारिरिक की वजह से जहां खून में कालेस्ट्राल का बढऩा, मोटापा, आनुवांशिक, अधिक मात्रा में मांसाहारी भोजन करना, अधिक मात्रा में तैलीय भोजन करना और शराब पीना है तो वहीं मानसिक में संवेदनशील लोगों में चिंता व डर से हृदय गति बढ़ जाती है, जिससे कि आगे जाकर ब्लड प्रेशर भी बढ़ जाता है।, अकारण परेशान होना, जरूरत से ज्यादा काम, परिवार में या कार्यस्थल में तनाव होना भी इसकी एक वजह है।

प्रश्र: डीहाइड्रेशन पर किस प्रकार काबू पाया जा सकता हैं?

उत्तर: खूब पानी पिएं। दिन में कम से कम 2 से 3 लीटर पानी पियें। पानी न पीने से डीहाइड्रेशन हो सकता है। ताजे फल खाएं ताजे फलों में बहुत ज्यादा रस पाया जाता है। ऐसे फल जैसे, सेब, खीरा, ककड़ी आदि खाएं। सेब में 84 प्रतिशत पानी और खीरे में 96 प्रतिशत पानी होता है। शरीर में पानी की कमी नहीं होगी। बेहतर होगा यदि कैफीन का सेवन बंद कर दें।  ज्यादा कॉफी न पियें। अच्छा होगा कि आप इसकी जगह पर गन्ने का रस या कोई अन्य जूस पी लें।

प्रश्र: हाई ब्लड-प्रेशर सबसे घातक बीमारियों में है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक दुनिया भर में हर साल हाई ब्लड-प्रेशर के चलते 70 लाख मौतें होती हैं। दुनिया का लगभग हर तीसरा व्यक्ति इससे प्रभावित है। तो आप बताएं कि हाई ब्लड प्रेशर क्या है? कहा जाता है कि हाई ब्लड-प्रेशर का सीधे तौर पर कोई इलाज नहीं है ऐसे में कैसे इससे बचाव किया जा सकता है?

उत्तर: ऐसा भी नहीं है कि हाई ब्लड-प्रेशर का सीधे तौर पर कोई इलाज नहीं है बल्कि इसमें जानकारी ही बचाव है। अगर आप अपने खान-पान और लाइफस्टाइल पर ध्यान दें तो इस पर काबू पाया जा सकता है। रक्त द्वारा धमनियों पर डाले गए दबाव को ब्लड-प्रेशर या रक्तचाप कहते हैं। हाई ब्लड-प्रेशर किसी भी व्यक्ति को किसी भी उम्र में हो सकता है। यह बीमारी पुरुष व महिला किसी को भी हो सकती है। एक बार अगर आप इस रोग के शिकार हो गए तो इससे निकल पाना मुश्किल होता है लेकिन असंभव नहीं। इसीलिए सावधानी बरतना ही इसका सबसे बड़ा इलाज है। हाई ब्लड-प्रेशर को ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है। यह अपने साथ अन्य कई बीमारियां लेकर आता है। जिससे शरीर के अन्य हिस्से भी प्रभावित होते हैं।

प्रश्र: हाई ब्लड-प्रेशर से हमारे शरीर के किन-किन अंगों पर प्रभाव पड़ सकता है?

उत्तर: आंखों पर प्रभाव, गुर्दे की समस्या,  हार्ट अटैक का खतरा और  मस्तिष्क पर असर हो सकता है। हाई ब्लड-प्रेशर से आंखों की समस्या हो सकती है। रोगी के आंखों की रोशनी कम होने लगती है उसे धुंधला दिखाई देने लगता है। इसलिए ब्लड प्रेशर की समस्या में आंखों की नियमित जांच की सलाह दी जाती है।

प्रश्र: हाई ब्लडप्रेशर के कारण क्या हैं?

उत्तर: खासकर उच्च रक्तचाप का पहला मुख्य कारण है। जितनी अधिक आयु होगी, रक्तचाप की चपेट में आने की सम्भावना भी उतनी ही अधिक होगी। बुजुर्गों में उच्च सिस्टोलिक रक्तचाप विकसित होने का जोखिम रहता है। इसका कारण धमनियों में कडक़पन होता है। दूसरा बड़ा कारण आनुवंशिकता को मानते हैं। यदि परिवार में किसी को उच्च कॉलेस्ट्रोल रहने का इतिहास है तो आपको समय पर सावधान हो जाना चाहिये। हो सकता है कि आनुवंशिक कारणों से कम आयु में ही उच्च रक्तचाप चपेट में ले ले।  तनाव आधुनिक जीवनशैली का हिस्सा है। पूरे दिन हम तनाव में रहते हैं। यह काम से जुड़ा होता है और रक्तचाप बढ़ाने में मदद करता है। जरूरी है कि हम तनाव की स्थितियों पर नियंत्रण रखें। नियमित रूप से गर्भनिरोधक पिल्स का इस्तेमाल उच्च रक्तचाप का कारण बन सकता है इसलिये इनका सेवन करना हानिकारक है। घंटों एक स्थान पर बैठे न रहें। काम के दौरान बीच-बीच में उठें। अधिक वजन या मोटापा उच्च रक्तचाप का बहुत ही प्रमुख कारण है। इसलिये वजन पर नियंत्रण बेहद जरूरी है। ऐसा नहीं है कि पतले लोगों का रक्तचाप नहीं बढ़ेगा पर मोटे लोगों में रक्तचाप बढऩे की जोखिम ज्यादा रहती है। अपने खाने में नमक की मात्रा पर ध्यान दें। यदि बिना नमक या कम नमक का आहार गले नहीं उतरे तो सावधान हो जाइये। फास्ट फूड में भी नमक की मात्रा बहुत अधिक होती है इसलिये घर में पका कम नमक का आहार लेने को प्राथमिकता दें। एल्कोहल का सेवन कम से कम करें। रक्तचाप को नियंत्रित रखने के लिये ऐसा करना जरूरी होगा। अक्सर लोग दवायें लेने की आदत बना लेते हैं। थोड़ा सिर दर्द हो या छोटी तकलीफ हो तुरंत ओरल पिल्स ले लेेते हैं। सर्दी या संक्रमण से दूर करने वाली दवायें रक्तचाप बढ़ा सकती हैं इसलिये अत्यधिक जरूरी होने पर ही दवा लें और वह भी चिकित्सकीय परामर्श के साथ। चिकित्सक को अपनी मेडिकल हिस्ट्री जरूरी बतायें।

प्रश्र: हाई ब्लडप्रेशर में किस प्रकार से ध्यान देना आवश्यक है?

उत्तर: भोजन में नमक का इस्तेमाल कम करें। वजन घटाएं और समय-समय पर अपना वजन मापते रहें। अपने फैमेली डॉक्टर से अपना रक्तचाप नियमित रूप से चैक कराते रहना चाहिए।  तम्बाकू, बीड़ी, सिगरेट, गुटखा का उपयोग और यदि पीने की आदत हो, तो बन्द कर दें। शरीर को सुस्ती का घर ना बनने दें फुर्ति पैदा करें। इसके लिए सुबह शाम टहलना आवश्यक है। उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने की कोशिश करें। संतुलित भोजन लें। फल सब्जियां एवं कम वसा वाली चीजे खाएं। शारीरिक श्रम करें। प्रतिदिन 30 मिनट पैदल चलें। मादक पदार्थों का सेवन न करें। संयमित खान-पान, रहन-सहन के बाद भी बीपी बढ़ जाता है, फिर कुछ देर बाद सामान्य हो जाता है। तला हुआ खाना, घी आदि कम से कम खाएं जिससे वज़न भी नियंत्रित रहेगा। खानपान और दिनचर्या में भी बदलाव आपके जीवन में बेहतर परिणाम दे सकता है।

प्रश्र: लो ब्लड प्रेशर का पता कैसे चलता है, इसके मुख्य कारण और लक्षण क्या हैं?

उत्तर: इसके दो प्रमुख कारण हैं। लेकिन इससे पहले एक बात स्पष्ट करना जरूरी है कि आप जब भी हाई और लो ब्लड प्रैशर की समस्या से ग्रसित हों तो जरूरी है कि आप अपने डॉक्टर केे  संपर्क में रहें। अपनी मर्जी से किसी प्रकार की दवा न लें। साथ ही समय-समय पर अपने ब्लड प्रेशर को लगभग तीन महीने में एक बार जरूर चैक करवाते रहें। क्योंकि हाई और लो ब्लड प्रेशन दोनों ही खतरनाक हो सकते हैं लेकिन अगर सही ढंग से आप डॉक्टर से इलाज करवाएं और सावधानी बरतें तो यह कोई बड़ी समस्या भी नहीं है।
लो ब्लड प्रेशर के कारण आर्थोस्टेटिक हाइपरटेंशन टाइप वन:  इसमें मरीज़ को खड़े होने पर चक्कर आ जाते हैं, क्योंकि उसका ब्लड प्रेशर एकदम से 20 प्वाइंट से नीचे आ जाता है। यह काफी हद तक वैस्क्यूलर एवं नर्वस सिस्टम पर आधारित वैरायटी है। हालांकि ऐसा कई बार दवाओं के साइड इफेक्ट से या एलर्जी से भी हो सकता है। और दूसरा हार्ट डिजीज की वजह से ब्लडप्रेशर कम होना हार्ट की गंभीर बीमारी से जुड़ा हो सकता है जिसमें हार्ट के एयॉटिर्क व माइट्रल वॉल्व की सिकुडऩ (स्टिनोसिस) या लीकेज की बीमारी, हार्ट फेल्योर यानी लो पंपिंग कपैसिटी एवं हार्ट की स्पीड की अनियमितता (एट्रियल फिब्रिलेशन या वेंट्रीक्यूलर एब्नॉर्मल बीट्स) प्रमुख हैं।

प्रश्र: लो ब्लड प्रेशर में क्या-क्या सावधानियां बरतनी आवश्यक हैं?

उत्तर: लो ब्लड प्रेशर की स्थिति वह होती है कि जिसमें रक्तवाहिनियों में खून का दबाव काफी कम हो जाता है। सामान्य रूप से 90/60 एमएम एचजी को लो ब्लड प्रेशर की स्थिति माना जाता है। जब किसी के शरीर में रक्त-प्रवाह सामान्य से कम हो जाता है तो उसे निम्न रक्तचाप या लो ब्लड प्रेशर कहते हैं। नार्मल ब्लड प्रेशर 120/80 होता है। थोड़ा बहुत ऊपर-नीचे होने से कोई फर्क नहीं पड़ता। लेकिन यदि ब्लड प्रेशर 90 से कम हो जाए तो उसे लो ब्लड प्रेशर कहते हैं। भोजन में जरूरी है कि आप पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ाएं। प्रोटीन, विटामिन बी और सी लो ब्लड प्रेशर को ठीक रखने में मददगार साबित होते हैं।  लो ब्लड प्रेशर को दूर करने के लिए ताजे फलों का सेवन करें। दिन में करीब तीन से चार बार जूस का सेवन करना फायदेमंद रहेगा। जितना संभव हो सके, लो ब्लड प्रेशर के मरीज दूध का सेवन करें।  लो ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए पैदल चलना, साइकिल चलाना जैसी कसरतें फायदेमंद साबित होती हैं। इन सबके अलावा सबसे जरूरी यह है कि व्यक्ति तनाव और काम की अधिकता से बचें। ऐसी समस्या होने पर सबसे पहले तो अपने आपसे कभी दवा न लें सीधे डॉक्टर से परामर्श लें। अपना ब्लड प्रेशर चैक करवाएं और डॉक्टर की सलाह पर ही चलें।

फिटनेस प्लान का लें भरपूर फायदा

आजकल लोगों में फिटनेस को लेकर काफी सजगता आ गई है। फिर भी कई बार जानकारी के अभाव में लोग कुछ ऐसी गलतिया कर जाते हैं, जिनकी वजह से उन्हें अपने फिटनेस प्लान में पूरी कामयाबी नहीं मिल पाती। अगर आप हमारी सलाह पर अमल करें तो अपने फिटनेस प्लान का भरपूर फायदा उठा सकती हैं.. अगर नियमित रूप से एक्सरसाइज करने के बावजूद आप खुद को पूरी तरह फिट महसूस नहीं करतीं तो आपको यह जानने की कोशिश करनी चाहिए कि आपकी जीवनशैली में कुछ ऐसी गलत आदतें तो शामिल नहीं हैं, जो आपके फिटनेस प्लान की राह में रुकावट बन रही हैं। आइए जानते हैं कुछ ऐसी ही आदतों के बारे में:

1. पर्याप्त नींद न लेना :  अध्ययनों में यह पाया गया है कि किसी भी इंसान को प्रतिदिन औसतन सात से आठ घटे की गहरी नींद की जरूरत होती है, लेकिन मात्र चार-पाच घटे की नींद लेने वाले जब सुबह उठकर वर्कआउट करते हैं तो उन्हें इस दौरान कभी-कभी झपकी भी आने लगती है। इससे एक्सरसाइज में गलतियां होती हैं और चोट लगने का भी खतरा रहता है। अगर नींद पूरी न हो तो इससे सुबह के समय शरीर में मेटाबॉल्जिम प्रक्रिया धीमी हो जाती है और इस वजह से एक्सरसाइज करने के बावजूद वजन कम नहीं होता।
सलाह : अगर रात को आपकी नींद पूरी न हो तो अगली सुबह एक्सरसाइज के लिए जबरदस्ती न उठें।
2. डिनर न लेना : कुछ लोग वजन बढऩे के डर से डिनर नहीं लेते। यह आदत सेहत के लिए बहुत नुकसानदेह साबित होती है। सुबह वर्कआउट करने के लिए आपके शरीर को पर्याप्त ऊर्जा की जरूरत होती है, लेकिन खाली पेट एक्सरसाइज या जॉगिंग करने से पेट में दर्द और एसिडिटी की समस्या हो सकती है।
सलाह : जॉगिंग पर या जिम जाने से कम से कम 45 मिनट पहले हल्का सा स्नेक्स जैसे चाय या कॉफी के साथ दो बिस्किट, एक कप दूध जरूर लें।
3. टीवी के साथ वर्कआउट : अगर आपको ट्रेडमिल पर चलते हुए या वेट लिफ्टिंग के दौरान टीवी देखने की आदत है तो इसे बदल डालें। इससे आपको चोट लग सकती है। अगर आप साइकल पर कॉर्डिओवैस्कुलर एक्सरराइज के दौरान या ट्रेडमिल पर चलते हुए टीवी देख रहे होते हैं तो इस दौरान एक्सरसाइज के तरीके के बजाय आपका सारा ध्यान टीवी पर होता है। इससे कई बार हैंडल पर पकड़ ढीली पड़ जाती है, जिससे शरीर को एक्सरसाइज का पूरा फायदा नहीं मिल पाता।
सलाह : एक्सरसाइज के दौरान टीवी देखने के बजाय अच्छा संगीत सुनें।
4. वार्मअप नहीं करना : कुछ लोग समय बचाने के लिए वार्मअप के बिना सीधे एक्सरसाइज शुरू कर देते हैं, यह सेहत के लिए बहुत नुकसानदेह साबित होता है। यह आपके शरीर को एक्सरसाइज के अनुकूल बनाता है। इससे रक्त संचार समान रूप से होता है और शरीर का तापमान संतुलित हो जाता है। अगर वार्मअप किए बिना एक्सरसाइज की जाए तो इससे मासपेशियों में दर्द हो सकता है।
सलाह : अगर आप एरोबिक्स, जॉगिंग, साइक्लिंग या ब्रिस्क वॉक करती हैं तो इसके लिए कम से कम पाच मिनट के लिए वार्मअप जरूर करें।
5. फुटवेयर : कुछ लोग ट्रेडमिल एक्सरसाइज के दौरान बॉस्केट बॉल शूज पहनते हैं तो एरोबिक्स के दौरान वॉकिंग शूज पहनते हैं। इससे केवल पैरों के तलवों में ही नहीं, बल्कि घुटने, कूल्हे और पीठ के निचले हिस्से में भी दर्द हो सकता है।
सलाह : हर एक्सरसाइज के लिए उसी के अनुकूल फुटवेयर का चुनाव करें।
6. बोरिंग : फिटनेस प्लान अगर आपके फिटनेस प्लान में रोचकता और विविधता न हो तो इससे बहुत जल्दी ही आपका मन ऊब जाएगा और कुछ ही दिनों में आपका यह प्लान ठप पड़ जाएगा। मिसाल के तौर पर कुछ सिर्फ मॉर्निग वॉक करते हैं तो कुछ लोग एरोबिक्स। इससे उनके फिटनेस रुटीन में बोरियत आ जाती है और उन्हें इसका पूरा फायदा नहीं मिल पाएगा।
सलाह : एक सप्ताह के अंतराल पर जॉगिंग, एरोबिक्स, स्किपिंग और कार्डियोवैस्कुलर एक्सरसाइज को शामिल करें।

ज्यादा खाने से करें कैसे परहेज

हम में से कई लोग खाने को इतना पसंद करने वालों में से हैं कि हम खाने के लिए जि़ंदा रहते हैं। स्वस्थ और सुखी जीने के तरीके को अपनाने के लिए संयम से खान बहुत ज़रूरी है। हम आपके लिए ऐसे 13 नवीन तरीके लाये हैं जिनकी मदद से आप अपने आप को कह पायेंगे, जऱा कम खाओ। ज्यादा खाने से कई प्रकार की बीमारियां हो जाती हैं और साथ में मोटापा भी बढने लगता है। अगर आपने खाने पर कंट्रोल नहीं रखा तो आप तो परेशान होगें ही होगें लेकिन साथ में आपकी मां या कोई भी अन्य खाना बनाने वाली भी परेशान हो जाएगी। तो ऐसे में अच्छा होगा कि आप अपनी जुबान पे समय रहते ताला लगा लें।

  1.  गर्लफ्रेंड या बॉयफ्रेंड की तलाश अपने आप को अस्वस्थ या ज्यादा खाने से रोकने का सबसे अच्छा तरीका है अपने आप को यह याद दिलाना कि आप अभी तक अकेले हैं और आपको अपने लिए एक सुन्दर लडक़ी को प्रभावित करना है।
  2. नीरस खाना जब आपको बेवक्त और ज़्यादा भूख लगे तो दुनिया के सारे नीरस खाने के बारे में सोचें। संभवत: इसके बाद आपको खाने के अलावा दूसरी गतिविधि में मन लगने लगेगा।
  3. रात को खाने की आदत छोडऩा वह सब लोग जो देर रात तक जग कर फिल्में देखना पसंद करते हैं, उनमें असाधारण रूप से अल्पाहार लेने की आदत होती है। इस आदत को बदलकर अगर रात को आप अपनी गर्लफ्रेंड से बातें करते हैं तो आप कम खायेंगे।
  4. विडियो देखना कभी कभी विचित्र चीज़ों के बारे में सोचने से ही सब कुछ नहीं हो जाता, इसके लिए आपको उन्हें देखना पड़ता है। ऐसी विडियो देखें जिनमें लोग ऐसा खाना खा रहे हों जो आपको बिलकुल पसंद नहीं हैं जैसे, कॉकरोच, कीड़े। यह देखने के बाद थोड़ी देर तक आपका कुछ भी खाने का मन नहीं करेगा।
  5. पहले सूप लें दिन के मुख्य आहार से पहले अपनी पसंद का सूप या पानी पी सकते हैं ताकि मुख्य आहार लेने के समय आपके पेट में ज्यादा जगह न बचे। पेट में जा चुके तरल पदार्थ से आपका पेट भरा सा लगेगा।
  6. माँ नाम का तुरुप का पत्ता अपनी माँ को समझा दें कि अगर उनको अपने बेटे के लिए सुन्दर लडक़ी चाहिए तो उसे पूरे दिन में थोड़ा थोड़ा खाना दें जिसमें घी या बटर की मात्र काफी कम हो। अगर आपकी माँ ने निर्णय ले लिया तो आप संतुलन में खायेंगे।
  7. च्युइंगम चबाएं जब आपके आस पास ऐसा खाना हो जिसको देख कर आप अपने आप को रोक नहीं पा रहे हों तो अपने पॉकेट से च्युइंग गम निकालें और थोड़ी देर तक उसे चबाएं। आपका ध्यान अपने आप दूसरी चीज़ों पर चला जाएगा।
  8. सही व्यक्ति का चुनाव वह व्यक्ति जिसके साथ आप ज्यादा समय गुज़ारते हैं, उसका असर आपकी रोज़मर्रा की आदतों, पसंद और नापसंद पर पड़ता है। जब आपको भूख लग रही हो तो अपने साथ किसी लडक़ी को ले जाएँ ताकि उसके प्लेट में कम खान देख कर आप भी कम खाने के बारे में सोचेंगे।

फिटनेस के फंडे, युवाओं के लिए
आज का युवा बड़ी जल्दबाजी में है। उसे करियर भी बनाना है और मनी भी। इन सब के साथ उसे स्मार्ट भी दिखना है और डेशिंग भी। इतने-इतने टेंशन में वह सबसे ज्यादा उपेक्षित करता है अपनी सेहत को। लीजिए, जीवन की हड़बड़ी में हम बता रहे हैं कुछ आसान से फिटनेस फंडे :

  •  एक चुटकी कच्चा चावल मुंह में रखकर पानी से निगल लें। इससे लीवर मजबूत होता है और पित्त की शिकायत नहीं रहती। जिन्होंने उपयोग किया, उन्हें बड़ा लाभ हुआ।
  • सुबह-सुबह तांबे के बर्तन में रखा पानी पीजिए। ठंडा पानी आधा सेर से एक सेर तक पीना चाहिए।
  • ताड़ासन कीजिए। यानी दोनों पैरों के बल पर खड़े होकर दोनों हाथ जितने ऊपर ले जा सकते हैं, ले जाएं।
  • रात में एक तोला त्रिफला एक पाव ठंडे पानी में भिगो सुबह छानकर उससे आंख धोएं और बचे हुए जल को पी जाएं।
  • नमक में कहुआ (सरसों का) तेल मिलाकर दांत और मसूढ़ों को रगडक़र साफ कीजिए। इससे दांत मजबूत होते हैं, यहां तक कि पायरिया की बीमारी भी ठीक होती है।
  • प्राणायाम 5 से 10 या 15 से 20 मिनट तक अपनी शक्ति के अनुसार अवश्य करें। प्राणायाम के बाद क्षमता के अनुसार व्यायाम करें। जो जिम न जा सके वह घर पर ही योगा और एक्सरसाइज करें। आलस के कारण यदि योगा और एक्सरसाइज न कर सकें तो सुबह या शाम 1-2 मील तक घूमना चाहिए। रोज ठंडे पानी से नहाना चाहिए। लेकिन ठंड के दिनों में गुनगुने पानी से नहाएं। सूखे तौलिए से रगड़ कर शरीर को गर्म करना लाभदायक रहेगा।
  • शक्ति के अनुसार सूर्य स्नान करें। इससे शरीर में विटामिन डी की प्राप्ति होती है।
  • तुलसी का रस एक या दो चम्मच पानी में मिलाकर खाली पेट सेवन करें। इसके एक घंटे बाद तक कुछ भी न खाएं।
  • ठंडे पानी से नहाने के बजाय गुनगुने पानी से नहाएं, साथ ही अधिक नमक व अधिक चीनी का इस्तेमाल हानिकारक है।

 

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