दो हजार हैक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र जैविक खेती के अधीन लाया गया: उपमा चौधरी

दो हजार हैक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र जैविक खेती के अधीन लाया गया: उपमा चौधरी

प्रदेश में 200 जैविक गांव के माध्यम से प्रदेश सरकार जैविक खेती को देगी बढ़ावा

शिमला: प्रदेश में इस वर्ष दो हजार हैक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र जैविक खेती अधीन लाया जा रहा है, जिसके लिए 20 करोड़ रुपये की योजना स्वीकृत की गई है। यह जानकारी आज यहां अतिरिक्त मुख्य सचिव, (कृषि) उपमा चौधरी ने तीन दिवसीय ऑर्गेनिक फूड फेस्टिवल के समापन कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अपने संबोधन में दी।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में 200 जैविक गांव के माध्यम से प्रदेश सरकार जैविक खेती को बढ़ावा देगी। जैविक प्रमाणीकरण के लिए 100 प्रतिशत व जैविक विकास के लिए 50 प्रतिशत उपादान प्रदेश सरकार द्वारा दिया जा रहा है। प्रदेश में जैविक खाद की आवश्यकता को पूरा करने के लिए इस वर्ष 20 हजार केंचुआ खाद इकाईयों की स्थापना की जाएगी, जिसके लिए किसानों को 50 प्रतिशत उपदान दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि कृषि विभाग द्वारा इस वर्ष प्रदेश के नौ लाख कृषकों को मिट्टी परीक्षण सुविधा उपलब्ध करवाकर स्वास्थ्य कार्ड प्रदान किए जाएंगे। उन्होंने कृषकों व विशेषज्ञों से जैविक खेती के प्रसार के लिए गहन अनुसंधान करने की अपील की। उन्होंने कहा कि जैविक नीति के तहत प्रदेश में अब तक 30110 कृषकों को जैविक खेती के लिए पंजीकृत किया जा चुका है तथा 17848 हैक्टेयर क्षेत्र जैविक खेती के अंतर्गत लाया जा चुका है। उन्होंने कहा कि तीन दिवसीय इस मेले में जैविक उत्पादों की प्रदर्शनी, बिक्री एवं कार्यशाला का आयोजन किया गया। उन्होंने कहा कि इस प्रदर्शनी जैविक उत्पाद राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय विपणन व प्रमाणीकरण संस्थानों ने 21 से अधिक स्टॉल लगाए, जिनमें प्रदेश के 10 स्टॉल थे।

उन्होंने कहा कि इस मेले के दौरान किसानों को जैविक कृषि बारे में जागरूक करने के लिए खुली वार्ताएं व कार्यशालाओं का आयोजन भी किया गया। हिमाचल प्रदेश में जैविक खेती की संभावनाएं आदि विषयों पर तकनीकी सत्र भी आयोजन किए गए। मेले के दौरान प्रदेश के विभिन्न जिलो से लगभग 1000 किसान व 10 हजार से अधिक पर्यटकों तथा स्थानीय लोगों ने मेले में विभिन्न जैविक उत्पादों की खरीददारी कीमेले के दौरान हिमाचल प्रदेश टूरिज्म कॉरपोरेशन ने हिमाचली जैविक व्यजंन तैयार कर लोगों को परोस, जिसका पर्यटकों व स्थानीय लोगों ने लाभ उठाए।

इस अवसर पर निदेशक कृषि विभाग जे.सी. राणा ने बताया कि परंपरागत कृषि विकास योजना के तहत जिला में खंड व जिला स्तर पर जैविक कृषि मेलों का आयोजन किया जाएगा, ताकि जैविक उत्पादन को प्रदेश में और अधिक बढ़ावा दिया जा सके।

उन्होंने बताया कि अक्तूबर माह में शिमला में एक दिन का जैविक मेला आयोजित किया जाएगा, जिसमें जैविक उत्पादकों, क्रेताओं विक्रेताओं को आमंत्रित किया जाएगा, ताकि जैविक खेती के प्रचार व प्रसार के लिए संवाद कायम किया जा सके। उन्होंने बताया कि लोगों की मांग पर बालूगंज, संजौली व छोटा शिमला में जैविक उत्पाद केंद्र खोले जाएंगे, ताकि मेले के बाद स्थानीय लोगों को सुगमता से जैविक उत्पाद प्राप्त हो सके।

उन्होंने बताया कि नवंबर माह में कोचीन में होने वाले अंतरराष्ट्रीय ऑर्गेनिक जैविक मेले में हिमाचल की विभिन्न एजेंसियों, समूहों व उत्पादकों को इसमें शामिल करने के लिए भरपूर सहयोग दिया जाएगा। इस अवसर पर इक्कोआ के कार्यकारी निदेशक मनोज कुमार मेनन ने सभी का आभार व्यक्त किया।

 

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