राष्‍ट्रीय शहरी आवास कोष के गठन को मंत्रिमंडल की मंजूरी

उम्मीदों को लगे पंख

उम्मीदों को लगे पंख

उम्मीदों को लगे पंख

केंद्र में पिछले वर्ष नयी सरकार के गठन और उसके द्वारा शुरू किये गये विकास और जनकल्याण के विभिन्न कार्यक्रमों से आम लोगों में जगी नयी उम्मीदों के बाद अब वे इस बात का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 69वें स्वतंत्रता दिवस पर अपने पिटारे से कौन से ऐसे तोहफे निकालते हैं जो विकास की गति को और तेज कर उनका जीवन स्तर उठाने में मदद करे।

‘सबका साथ सबका विकास’ के संकल्प के साथ सत्ता संभालने के बाद  मोदी ने मेक इन इंडिया, जनधन योजना, सामाजिक सुरक्षा, स्मार्ट सिटी, कौशल विकास, डिजिटल इंडिया, नमामि गंगे, स्वच्छ भारत, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ जैसे कार्यक्रमों की घोषणा और उनके लिये बड़ी राशि का आवंटन किया। इससे लोगों की उम्मीदों को पंख लग गये और उनमें यह एहसास जगा कि उनकी आशाएं और आकांक्षायें अब पूरी हो सकती हैं। हालांकि इन अहम कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की धीमी गति ने आलोचकों को इन्हें निशाने पर लेने का मौका जरुर दे दिया है पर लोगों की आशाएं अभी टूटी नहीं हैं। पिछले वर्ष लाल किले की प्राचीर से पहली बार राष्ट्र को संबोधित करते हुये लोगों को भरोसा दिलाया था कि वह पूरे देश को साथ लेकर चलेंगे और गरीबों की स्थिति बेहतर बनाने की कोशिश करेंगे। सरकार के कार्यक्रमों से वह इस दिशा में प्रयासरत दिखाई दिये। जानकारों का कहना है कि विकास को गति मिली है भले ही यह धीमी जरूर है।

अर्थव्यवस्था के संबंध में भारतीय उद्योग परिसंघ के ताजा सर्वेक्षण से साफ है कि विकास एजेंडा आगे बढ़ रहा है तथा परिणाम सामने आने में समय लग सकता है। अर्थव्यवस्था के पटरी पर आने के संकेत दिखाई देने लगे हैं। सर्वेक्षण में 93 क्षेत्रों का आकलन किया गया और यह पाया गया कि 20 प्रतिशत से ज्यादा वृद्धि दर हासिल करने वाले क्षेत्रों की संख्या पिछले वर्ष की सात प्रतिशत की तुलना में इस वर्ष 16 प्रतिशत पहुंच गयी। इस वर्ष अब तक मानसून के अच्छे रहने तथा अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से अर्थव्यवस्था के मजबूत होने की उम्मीदें बढ़ी हैं।

पिछली सरकार पर नीतिगत निष्क्रियता के लगे आरोपों के उलट इस सरकार ने आते ही एक के बाद एक नये कार्यक्रमों और घोषणायें कर यह दिखाया कि वह सबके विकास के साथ देश को आगे बढ़ाने के प्रति कटिबद्ध है। ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को रोजगार सुनिश्चित कराने की महत्वपूर्ण पहल महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के बेहतर अमल के लिये मजदूरों को सीधे मजदूरी उपलब्ध कराने का कदम उठाया गया। योजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिये ग्राम पंचायतों के अधिकार बढ़ाए गये हैं तथा भ्रष्टाचार रोकने के विशेष प्रावधान किये गये हैं।

रोजगार के अवसर बढ़ाने तथा विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिये सरकार ने पिछले सितंबर में ‘मेक इन इंडिया’ नाम से एक महत्वपूर्ण योजना शुरु की। मोदी अपनी विदेश यात्राओं में इस योजना का जमकर प्रचार कर रहे हैं जिससे देश में ज्यादा से ज्यादा निवेश हो और लोगों विशेषकर युवाओं के लिये रोजगार के अवसर बढ़े। विश्व की कई बड़ी कंपनियों ने इस कार्यक्रम में भारी निवेश की घोषणा की है तथा कई ने इसी तरह की इच्छा दिखाई है लेकिन इसके मूर्तरूप लेने में अभी कुछ समय लगेगा।

देश में पूंजी निवेश को बढ़ावा देने के लिये सरकार ने रक्षा उत्पादन, रेल, बीमा, चिकित्सा जैसे कई क्षेत्रों को प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिये खोल दिया है तथा कई अन्य क्षेत्रों में इसकी प्रक्रिया को आसान बनाया गया है। देश के विभिन्न क्षेत्रों के विकास और लोगों के जीवन का स्तर सुधारने के लिये सरकार ने समर्पित औद्योगिक गलियारे के विकास और स्मार्ट सिटी जैसी कार्यक्रम शुरु किये हैं। सरकार ने अगले पांच वर्ष में 100 स्मार्ट सिटी विकसित करने की योजना बनायी है जिसमें 48000 करोड़ रूपये का निवेश होगा। ग्रामीण क्षेत्रों के कायाकल्प के लिये भी सरकार ने विशेष प्रयास शुरु किये हैं और इसके लिये एक लाख करोड़ रूपये खर्च करने को मंजूरी दी है।

  • शहरों में रहने वालों को अत्याधुनिक सुविधायें उपलब्ध कराने के लिये शुरू की गयी स्मार्ट सिटी योजना में भागीदार बनने में 14 देशों ने रूचि दिखायी है। इन देशों में अमरीका, जापान, चीन, सिंगापुर, जर्मनी, फ्रांस, स्वीडन और इजरायल शामिल हैं। इस योजना के तहत चुने गये प्रत्येक शहर को केंद्र सरकार पांच वर्ष तक प्रति वर्ष एक सौ करोड़ उपलब्ध करायेगी।
  • विपक्ष सरकार के कार्यक्रमों को महज कागजी घोषणायें बताकर उन्हें खारिज करने का प्रयास कर रहा हो लेकिन सरकारी अधिकारियों का कहना है कि इन्हें पूरी ताकत के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। इसका उदाहरण देते हुये उन्होंने कहा कि समर्पित माल कोरीडोर के काम में तेजी लाने के लिये पिछले कुछ महीनों में 15500 करोड़ रूपये के अनुबंधों को मंजूरी दी गयी है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के खुर्जा कानपुर खंड पर अब 100 करोड़ रूपये प्रति माह खर्च किये जा रहे हैं जो पहले 30 करोड़ रूपये प्रति माह था।
  •  सरकार के एक अन्य महत्वाकांक्षी कार्यक्रम स्वच्छ भारत को लेकर भी लोगों को भारी उम्मीद है। प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले वर्ष दो अक्तूबर को राजपथ पर इस कार्यक्रम की घोषणा करते हुये 2019 तक भारत को साफ सुथरा बनाने का संकल्प लिया है। इस पर करीब 66000 करोड़ रूपये खर्च होने का अनुमान है। प्रधानमंत्री ने देश के सभी स्कूलों विशेषकर लड़कियों के स्कूलों में प्राथमिकता के आधार पर शौचालय बनाने का लक्ष्य रखा था। सरकारी अधिकारियो का कहना है कि यह लक्ष्य हासिल करने में भारी सफलता मिली है।
  • जनमानस से जुड़ी पतितपावनी गंगा को स्वच्छ बनाने के लिये वर्षों से चल रही योजनाओं को वांछित सफलता नहीं मिलने को देखते हुये सरकार ने इसे अविरल और स्वच्छ बनाने हेतु नमामि गंगे नाम से एक महत्वपूर्ण योजना शुरू की है। सरकार इसके लिये भारी धनराशि उपलब्ध कराने के साथ इसमें जन भागीदारी भी सुनिश्चित करना चाहती है। कई देशों ने इस योजना में भागीदार होने की इच्छा जतायी है हालांकि अभी तक उनकी ओर से ठोस प्रस्ताव नहीं आये हैं। सरकार ने इस कार्यक्रम के लिये 20 हजार करोड़ रूपये उपलब्ध कराने का फैसला किया है।
  • सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत सरकार ने बहुत कम प्रीमियम पर लोगों को बीमा उपलब्ध कराने की पहल की जिसे लोगों ने हाथों हाथ लिया। जन धन योजना के तहत करोड़ों ऐसे लोगों के बैंक खाते खोले गये जो अब तक इससे वंचित थे। बारह रूपये वार्षिक प्रीमियम पर दुर्घटना होने की स्थिति में दो लाख रूपये उपलब्ध कराने वाली प्रधानमंत्री सुरक्षा जीवन बीमा और 330 रूपये वार्षिक प्रीमियम पर दो लाख रूपये की जीवन बीमा उपलब्ध कराने वाली प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना को भारी सफलता मिली और इन्हें हासिल करने की लोगों में होड़ लग गयी।

संसद का मानसून सत्र में लगातार व्यवधान तथा कुछ मामलों को लेकर विपक्ष के कड़े विरोध के कारण सरकार के आर्थिक सुधार संबंधी कदमों को कुछ झटका लगा है। सेवा और वस्तु कर विधेयक( जीएसटी) तथा भूमि अधिग्रहण विधेयक जरूर अटक गये हैं लेकिन सरकार ने इन्हें आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जतायी है।

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