हिमाचल में बांस आधारित आजीविका परियोजना आरम्भ करने पर विचार

हिमाचल में बांस आधारित आजीविका परियोजना आरम्भ करने पर विचार

शिमला: वन विभाग बांस एवं इसके उत्पादों की बहुउपयोगिता के दृष्टिगत जल्द ही प्रदेश के संभावित क्षेत्रों में बांस आधारित आजीविका परियोजना शुरू करेगा। यह परियोजना वन, कृषि और पशु पालन विभागों तथा राज्य वन विकास निगम एच.पी.के.वी.एन. हथकरघा एवं हस्तशिलप निगम, सामान्य उद्योग केन्द्र व एच.पी.एम.एच.डब्ल्यू.डी.पी. को सम्मिलित करके इन विभागों व निगमों के माध्यम से जन सहभागिता पर आधारित होगी। हिमाचल प्रदेश राज्य वन विकास निगम के उपाध्यक्ष केवल सिंह पठानिया ने यह जानकारी आज यहां राज्य में बांस आधारित आजीविका की संभावनाओं का पता लगाने के संबंध में आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए दी।

उन्होंने कहा कि यह परियोजना प्रदेश के संभावित जिलों विशेषकर कांगड़ा, हमीरपुर, चम्बा, सोलन, बिलासपुर, मण्डी तथा सिरमौर में आरम्भ की जाएगी। उन्होंने कहा कि बांस आधारित उद्योग से संबंधित कौशल और विपणन इत्यादि की समुचित जानकारी उपलब्ध करवाने से यह उद्योग ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के लिए आजीविका कमाने का एक अच्छा साधन बन सकते हैं। पठानिया ने कहा कि बांस का उपयोग पशुओं के लिए चारा एर्वं इंधन के साथ-साथ फलोरिंग, पर्दे, पायदान, टोकरियां, किल्टे, सजावटी वस्तुएं, सीढ़ियां और बेंत इत्यादि बहुत से उत्पाद बनाने के लिए किया जाता है। प्रदेश के कुछ भागों में पानी के बहाव को रोकने के लिए भी इसका उपयोग किया जाता है।

उन्होंने कहा कि बांस प्रदेश के विभिन्न जिलों में बहुतायत में पाया जाता है और इसकी प्रजातियां अन्य कई पौधों के मुकाबले अधिक तेजी से बढ़ती हैं। निजी क्षेत्रों एवं वन भूमि से बांस की सतत् आपूर्ति के लिए प्रत्येक चार वर्षों के अन्तराल में इसकी फसल प्राप्त की जा सकती है। बांस से बनी वस्तुओं का उपयोग कार्यालयों की सजावट के लिये करने के साथ-साथ यह फर्नीचर व कुटीर बनाने में भी काम आता है जोे कम लागत के साथ पर्यावरण मित्र भी है। पठानिया ने कहा कि परियोजना की व्यावहारिकता को सुनिश्चित करने तथा उद्देश्यों की पूति के दृष्टिगत एच.पी.के.वी.एम., हथकरघा एवं हस्तशिल्प निगम, वन, कृषि और पशुपालन विभागों, एम.ओ.इ.एफ. तथा आईएनबीएआर जैसी अन्य अन्तरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ सम्पर्क स्थापित करके परियोजना के वित्त पोषण की संभावनाओं को तलाशा जाएगा। उन्होंने कहा कि परियोजना के तकनीकी सहयोग के लिए एच.एफ.आर. आई., वाणिकी एवं बागवानी विश्वविद्यालय नौणी, कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर तथा आई.एच.बी.टी. पालमपुर संस्थानों से परामर्श लिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि वन विभाग द्वारा बांस आधारित आजीविका पर एक संकल्प नोट तैयार किया जाएगा और इसके कार्यान्वयन तथा प्रक्रिया के लिए इसे वनमंत्री को प्रस्तुत किया जाएगा। प्रधान मुख्य अरण्यपाल एस.एस. नेगी, हि.प्र. राज्य वन विकास निगम के प्रबन्ध निदेशक ललित मोहन, हथकरघा एवं हस्तशिल्प निगम के प्रबन्ध निदेशक ए.सी. शर्मा और अन्य वरिष्ठ अधिकारी बैठक में उपस्थित थे।

 

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