विपक्षी दलों का किसानों के आन्दोलन में समर्थन बेबुनियाद मुद्दों को उछालकर किसानों को गुमराह करना : सीएम

विपक्षी दलों का किसानों के आन्दोलन में समर्थन बेबुनियाद मुद्दों को उछालकर किसानों को गुमराह करना : सीएम

  • मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों के भारत बंद के आह्वान की भर्त्सना की

शिमला: विपक्षी दलों द्वारा किसानों के आन्दोलन के समर्थन में 8 दिसम्बर को भारत बंद के आह्वान की मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने  भर्त्सना की है। आज यहां इलैक्ट्राॅनिक मीडिया के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह किसान आंदोलन नहीं है, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एनडीए सरकार की छवि को धूमिल करने के एकमात्र उद्देश्य के साथ विपक्षी दलों का राजनीतिक आंदोलन है।

जय राम ठाकुर ने कहा कि यह आश्चर्यजनक है कि जिन राजनीतिक दलों ने विधेयक का समर्थन किया था, वे अब राजनीतिक लाभ हासिल करने के लिए आंख बंद करके उसी का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन के पीछे एकमात्र उद्देश्य खबरों में बने रहना और बेबुनियाद मुद्दों को उछालकर किसानों को गुमराह करना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 2009 में कांग्रेस पार्टी ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में स्पष्ट रूप से कहा था कि कांग्रेस कृषि उत्पाद विपणन समिति अधिनियम और आवश्यक वस्तु अधिनियम को समाप्त कर देगी तथा इसके बजाय एक नया कानून लाएगी। उन्होंने कहा कि पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने 27 दिसंबर, 2013 को अपनी प्रेस काॅन्फ्रेंस में कहा था कि कांग्रेस शासित राज्यों में फलों और सब्जियों को कृषि उत्पाद विपणन समिति अधिनियम से बाहर किया जाएगा ताकि उनकी कीमतों में कमी लाई जा सके। उन्होंने कहा कि वही कांग्रेस पार्टी अब इस अधिनियम का विरोध कर रही है।

जय राम ठाकुर ने कहा कि राष्ट्रवादी पार्टी के प्रमुख शरद पवार ने यूपीए सरकार में कृषि मंत्री रहते हुए कृषि सुधारों को लागू करने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा कि शरद पवार ने आदर्श कृषि उत्पाद विपणन समिति अधिनियम को लागू करने और राज्यों के कृषि उत्पाद विपणन समिति अधिनियम में संशोधन के लिए अगस्त, 2010 और नवंबर, 2014 में राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखा था। उन्होंने कहा कि मई, 2012 में केंद्रीय कृषि मंत्री ने कृषि बाजार सुधारों का खुलकर समर्थन किया था, लेकिन अब उन्होंने यू टर्न ले लिया है और अधिनियम का विरोध कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आश्चर्यजनक है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी इस विधेयक का विरोध कर स्वयं पूरे आंदोलन की देखरेख कर रहे हैं, जबकि उन्होंने 23 नवंबर को अपने राज्य में इस कानून को लागू कर दिया था। उन्होंने कहा कि स्वराज पार्टी के प्रमुख योगेंद्र यादव ने एनडीए सरकार पर यूपीए सरकार के तीन साल का कार्यकाल पूरा करने पर कृषि उत्पाद विपणन समिति अधिनियम को लागू करने के लिए कोई भी काम नहीं करने का आरोप लगाया था। अब वही योगेंद्र यादव उस अधिनियम का विरोध कर रहे हैं, जो अनुचित है।

जय राम ठाकुर ने कहा कि इस अधिनियम पर अकाली दल का रुख भी अनुचित है क्योंकि 12 दिसंबर, 2019 तक स्थायी समिति की रिपोर्ट में अकाली दल के सांसदों का रूख अलग था और उन्होंने कृषि उत्पाद विपणन समितियों को भ्रष्टाचार और राजनीति का केंद्र करार दिया था। उन्होंने कहा कि 3 जून, 2020 को जब इस अध्यादेश को लाया गया तो अकालियों ने अध्यादेश का समर्थन किया था और इसके सांसद और एनडीए सरकार में तत्कालीन मंत्री ने इस फैसले का समर्थन किया था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी तरह समाजवादी पार्टी ने 12 दिसम्बर 2019 में कृषि स्थायी समिति की रिपोर्ट का समर्थन और एपीएमसी अधिनियम की आलोचना की थी। उन्होंने कहा कि अब वहीं नेता अधिनियम की आलोचना और विरोध कर रहे है तथा केंद्र सरकार की छवि को धूमिल करने के लिए किसानों को गुमराह कर रहे है। उन्होंने कहा कि वाम दलों ने 2007-2012 के लिए पंचवर्षीय योजना के दौरान एपीएमसी को खत्म करने का सुझाव दिया था।

जय राम ठाकुर ने राज्य के लोगों से भारत बंद के आहवान से दूर रहने का आग्रह किया है, क्योकि यह अस्वीकार राजनीतिक दलों का कार्य है। उन्होंने कहा कि किसानों के हित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों सुरक्षित है, जो 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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