कौन जिम्मेवार! ना सरकार गंभीर ना ही लोगों में "कोरोना" का डर, लाखों हो रहे संक्रमित हजारों रहे मर

कौन जिम्मेवार! ना सरकार गंभीर ना ही लोगों में “कोरोना” का डर, लाखों हो रहे संक्रमित हजारों रहे मर

  • बढ़ते कोरोना के मामलों पर चिंता जताने के बजाय सचेत और सतर्क रहने की ज्यादा जरूरत 

  • त्यौहारों, शादी, समारोहों और राजनीतिक रैलियों में उमड़ रही लोगों की भीड़

कोरोना के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। बढ़ते मामले चिंता का विषय है लेकिन इसके बावजूद भी न लोग गंभीर हैं न सरकार। आए दिन कोरोना संक्रमित लोगों की संख्या में इज़ाफा चौंकाने वाला है, वहीं कोरोना से मरने वाले लोगों के आंकड़े भी लगातार बढ़ रहे हैं। लेकिन कोरोना का डर कहीं नहीं है। त्यौहारों, शादी, समारोहों और राजनीतिक रैलियों में सैंकड़ों लोगों की भीड़ उमड़ रही है। एक ओर सरकार सोशल डिस्टेंसिंग की पालना करने की बार-बार लोगों से अपील करती आ रही है, वहीं दूसरी ओर राजनैतिक समारोहों में सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ाती नज़र आ रही है। देश में लगातार बढ़ रहे कोरोना के मामलों पर चिंता जताने के बजाय सचेत और सतर्क रहने की ज्यादा जरूरत पर ध्यान देने की आवश्यक है। वहीं अब तो जाड़े के मौसम ने दस्तक दे दी है जिसके चलते कोरोना मामलों में और अधिक वृद्धि होने का अंदेशा है।

लोग सावधानी बरतने के बजाए ‘कोरोना’ को मजाक समझे हुए हैं। शादियों, रैलियों व अन्य समारोह में उमड़ने वाली भीड़ को रुकना चाहिए। क्योंकि घर-परिवार, बड़े-बुजुर्ग, बीमार और छोटे बच्चे हर परिवार में हैं। उनकी एक गलती उनके अपनों पर बहुत भारी पड़ सकती है। हर दिन कोरोना के बढ़ते मामले इस बात का सुबूत हैं।b1 

  • लोग सोशल मीडिया पर तो बढ़ते मामलों पर चिंता जाहिर कर रहे हैं लेकिन अमल नहीं 

  • सोशल डिस्टेंसिंग कहीं नज़र नहीं आ रही, बिना मास्क के लोग सड़कों पर घूमते दिख रहे

कुछ लोग सोशल मीडिया पर तो बढ़ते मामलों पर चिंता जाहिर कर रहे हैं लेकिन अमल नहीं कर रहे। सोशल डिस्टेंसिंग कहीं नज़र नहीं आ रही, बिना मास्क के लोग सड़कों पर घूमते दिख रहे हैं। कोरोना पर कहने वाले बहुत हैं लेकिन इस पर नियम कानून की पालना करने वाले बहुत कम। यही वजह है कि मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है। सोशल मीडिया पर लोग एक बार फिर लॉकडाउन की मांग कर रहे हैं। लेकिन लोग सावधानी, सतर्कता और नियमों को अनदेखा कर रहे हैं। लोग अपनी बीमारी को छुपा रहे हैं ये नहीं सोच रहे कि उनके संपर्क में आने वालों से कितने और लोग आगे इस बीमारी की चपेट में आकर जिंदगी और मौत के बीच जूझ कर रह जाएंगे। हैरान करने वाली बात तो यह भी है कि कुछ लोग इस कोरोना से जानलेवा बीमारी को इतने हल्के में ले रहे हैं कि इसे बीमारी नहीं एक अफवाह ही समझ रहे हैं।

  • समझें कोरोना मज़ाक नहीं, गंभीर और भयानक संक्रमित बीमारी

कृप्या कोरोना को मज़ाक में मत लीजिए, विश्वभर के करोड़ों लोग इस भयानक बीमारी से अपनी जान गंवा बैठे हैं। इस बीमारी से अस्पतालों में जूझ रहे लोग अपने परिवार में कब ठीक होकर जा पाएंगे या नहीं उन्हें नहीं पाता। अपनी जान की परवाह नहीं करते अस्पतालों में तैनात डॉक्टर्स से लेकर हर बड़े अधिकारी से लेकर छोटे कर्मचारी रात-दिन कोरोना से ग्रसित लोगों को बचाने के लिए प्रयासरत हैं। कोरोना मज़ाक नहीं, गंभीर और भयानक संक्रमित बीमारी है। सभी से निवेदन है सतर्कता और सावधानी बरतें। सहयोगी बनें। मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। हाथों को बार-बार सेनिटाइजर करें। रोटी कमाने निकले लोगों की मजबूरी है घर से बाहर निकलना लेकिन बेवजह सिर्फ घुमने के लिए घर से बाहर न निकलें। बहुत जरूरी हो तभी घर से बाहर निकले, कोशिश करें घर पर रहें

  • आरोप के बजाय नियम और कायदों पर चलने की सभी को आवश्यकता

लोगों का कहना है कि सरकार द्वारा प्रशासन को नियमों की पालना करने के कड़े निर्देश जारी तो कर दिए जाते हैं लेकिन खुद के लिए प्रशासन के नियमों की अनदेखी का उन पर दवाब डाला जाता है। यानि प्रशासन की सख्ती आम जनता तक ही है। रही सही कसर बाहर से आने वाले पर्यटकों द्वारा पूरी की जा रही है। लेकिन सरकार आम जनता को नियम और कायदों में रहने की बात कर रही है खुद पर नहीं।

 ori_3768251_xgsbgy9qd7mwsx4gvjyolo2b5jss2lgwdnxfqq1g_prevention-of-coronavirus-infection-use-face-mask-sanitizer-and-washवहीं सरकार का कहना है कि लोग भी नियमों की कोताही बरतने में कोई गुरेज नहीं कर रहे हैं। बाजारों में भीड़, शादी-ब्याह अन्य समारोह में ना सोशल डिस्टेंसिंग ना मास्क का सही इस्तेमाल कर रही है।

मेरे ख्याल से अभी एक-दुसरे पर आरोप लगाने का वक्त नहीं अपितु सभी को नियम और कायदों पर चलने की आवश्यकता है।

 अगर कोई नियम कायदों पर चल ही नहीं रहा तो फिर इसके लिए आखिर कौन जिम्मेवार है! ना सरकार गंभीर, ना ही लोगों में कोरोना का डर, प्रतिदिन लाखों लोग कोरोना से संक्रमित हो रहे हैं तो वहीं हजारों लोगों की मौत हो रही है। भले ही कोरोना संक्रमित की मृत्यु एक संख्या मात्र है परन्तु परिवार के लिए वह संख्या नहीं घर के किसी सदस्य का जाना परिवार के अन्य सदस्यों के लिए किसी आघात व सदमे से कम नहीं।

  • कोरोना से बचाव का एकमात्र उपाय सामाजिक दूरी और मास्क 

याद रखिये कोरोना की अभी तक कोई दवाई नहीं है और ये न केवल देश-प्रदेश अपितु विश्वभर में फैली सबसे खतरनाक बीमारी है इससे बचाव का एकमात्र उपाय सामाजिक दूरी और मास्क है। भीड़ न एकत्रित करें। लापरवाही आपको ही नहीं आपके परिवार और आसपास के बहुत से लोगों पर भारी पड़ सकती है। इसके अलावा उन सतहों टेबल, कुर्सी, रेलिंग या कोई भी ऐसी वस्तु जिसके आसपास कोई संक्रमित व्यक्ति छींका हो, खांसा हो, उस सतह या वस्तु को छूने के बाद यदि हम अपने मुंह, नाक और आंखों को छूते हैं तो कोरोना वायरस हमारे शरीर में प्रवेश कर जाता है। कुछ व्यक्तियों को बीमारी के लक्षण नहीं दिखते हैं फिर भी वह संक्रमित रहता है। मतलब वह अनजाने में बीमारी फैला रहा है। इसीलिए मास्क पहनने के बाद उसकी समुचित साफ-सफाई भी जरूरी है। कपड़े के मास्क को साबुन, गर्म पानी और कीटाणुनाशक से धोना और धूप में सुखाना जरूरी रहता है। सर्जिकल मास्क चार घंटे तक ही प्रभावी रहता है। सावधानी बरतें। सतर्क रहें।

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