एसजेवीएन का आगामी पांच वर्षों में 35 हजार करोड़ का नए निवेश का लक्ष्य : सीएमडी नंदलाल शर्मा

एसजेवीएन का आगामी पांच वर्षों में 35 हजार करोड़ का नए निवेश का लक्ष्य : सीएमडी नंदलाल शर्मा

  • लूहरी और धौलासिद्ध हाईड्रो परियोजनाओं का काम तय समय में होगा पूरा
  • लूहरी और धौलासिद्ध हाईड्रो परियोजनाओं के लिए निवेश मंजूरी मिलने पर जताया केंद्र का आभार

शिमला : एसजेवीएन ने शिमला स्थित अपने कॉरपोरेट कार्यालय शनान में आज प्रेस वार्ता के दौरान जानकारी देते हुए एसजेवीएन अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक नंदलाल शर्मा ने बताया कि 210 मेगावाट की लूहरी परियोजना चरण एक में 1810 करोड़ का निवेश होगा। 66 मेगावाट की धौलासिद्ध परियोजना को 52 माह में पूरा किया जाएगा। यहां 687 करोड़ का निवेश होगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने एसजेवीएन की 210 मेगावाट लूहरी स्टेज-। जल विद्युत परियोजना के लिए 1810.56 करोड़ रूपए के निवेश की मंजूरी दे दी है।

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उन्होंने लूहरी और धौलासिद्ध हाईड्रो परियोजनाओं के लिए निवेश मंजूरी मिलने पर केंद्र का आभार जताया। एसजेवीएन अध्यक्ष ने बताया कि दोनों परियोजनाओं का काम तय समय में पूरा होगा।

परियोजना का निर्माण हिमाचल प्रदेश के शिमला एवं कुल्लू जिलों में एनएच 05 के समानांतर नीरथ गांव में सतलुज नदी पर बिल्ड, ऑन ऑपरेट,मेंटेन (बूम) आधार पर शुरू किया जा रहा है। यह परियोजना 1 रन ऑफ द रिवर किस्म की परियोजना है जिसमें 3.40 घंटों की पीकिंग के लिए जल भरावन होगा। एक 80 मीटर ऊंचा 225 मीटर लंबा एवं 8 मीटर चौड़ा कंक्रीट ग्रेविट बांध बनाया जाएगा जिससे 6(छह) किलोमीटर लंबे जलाशाय का निर्माण होगा। इसके अंतर्गत 644 क्यूमैक्स जल प्रवाह का उपयोग 4 इंटेक्स के जरिए किया जाएगा जो 90 मीटर लंबे चार पेनस्टॉक से गुजरकर टरबाइन में प्रवेश करेगा।

सतलुज नदी के दाएं किनारे पर एक डैम टो विद्युत गृह की योजना है जिसमें 80 मेगावाट की दो मुख्य यूनिटें और प्रत्येक 25 मेगावाट की दो सहायक यूनिटें होंगी। इस परियोजना से सालाना 758 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन होगा यह परियोजना 62 महीनों के निर्धारित समय में पूरी की जाएगी। इस परियोजना की गतिविधियों से लगभग 2000 लोगों के लिए रोजगार के अवसरों का सृजन होगा और राज्य का सामाजिक आर्थिक विकास होगा।

नंदलाल शर्मा ने बताया कि प्रदेश के जनजातीय क्षेत्र काजा में एसजेवीएन एक हजार मेगावाट का सोलर पार्क बनाएगा। केंद्र सरकार ने एसजेवीएन को हिमाचल सरकार के साथ मिलकर इस पर कार्य करने की स्वीकृति दे दी है। जिसके चलते लाहौल घाटी में उत्पादित सौर ऊर्जा को ट्रांसमिशन लाइनों के जरिये बाहर निकालने के लिए हिमाचल सरकार ने वर्ल्ड बैंक को प्रस्ताव भेज दिया है। ट्रांसमिशन लाइन की समस्या हल होते ही इस पर काम शुरू करेंगे। प्रदेश में अगर आसानी से जमीन मिलती है तो वहां भी सौर ऊर्जा उत्पादित करने के लिए काम करेंगे।

एसजेवीएन अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक नंदलाल शर्मा

एसजेवीएन अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक नंदलाल शर्मा

उन्होंने कहा कि जल विद्युत परियोजनाओं के लिए चिनाब बेसिन में भी ज्यादा संभावनाएं हैं। फ़िलहाल तीन पर काम जारी है। सरकार से अन्य परियोजनाएं भी मांगी हैं। सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है और जल्द ही फैसला होने की संभावना है। सतलुज बेसिन पर जंगी थोपन परियोजना पर भी काम जारी है। वर्ष 2023 तक एसजेवीएन को पांच हजार मेगावॉट की कंपनी बनाने का लक्ष्य है।

एसजेवीएन अध्यक्ष ने बताया कि आगामी पांच वर्षों में 35 हजार करोड़ का नए निवेश का लक्ष्य है। इसके लिए केंद्र या राज्य सरकार से पैसा नहीं लेंगे। एसजेवीएन अपने लाभ से ही इसका इंतजाम करेगा। बीते 15 वर्षों में 17300 करोड़ का लाभ अर्जित किया है। इसमें से चार हजार करोड़ केंद्र और 1949 करोड़ हिमाचल सरकार का हिस्सा दिया है। प्रदेश सरकार को करीब चार हजार करोड़ की निशुल्क बिजली भी दी है। बीते वर्ष लक्ष्य से एक हजार मेगावाट अधिक उत्पादन किया।

उन्होंने बताया कि 66 मेगावाट धौलासिद्ध जल विद्युत परियोजना रन ऑफ द रिवर किस्म की यह परियोजना हिमाचल प्रदेश में हमीरपुर जिले के सुजानपुर के 10  किलो डाउनस्ट्रीम में धौलासिद्ध में व्यास नदी पर स्थित है। भारत सरकार ने 687 करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव को 1 अक्तूबर, 2020 को मंजूरी दे दी है। इस परियोजना की खासियत 70 मीटर ऊंचा 195 मीटर लंबा कंक्रेट ग्रेविटी बांध है। उन्होंने जानकारी देते हुए कहा कि इस बांध से लगभग 20 किलोमीटर लंबा जलाशय निर्मित होगा। 161 क्यूमेक्स जल प्रवाह का उपयोग बांध में स्थित दो इंटेक्स के जरिए किया जाएगा जो प्रत्येक 4.3 मीटर व्यास तथा 62 मीटर लंबे दो पेनस्टॉक के जरिए होकर टरबाइन में प्रवेश करेगा। बांध टो पावर हाउस व्यास नदी के बाएं किनारे पर अभियोजित है जिसमें प्रत्येक 33 मेगावाट क्षमता की दो विद्युत उत्पादन मशीनें होंगी। परियोजना से सालाना 304 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन होगा। यह परियोजना 54 महीनों में पूरी की जाएगी और इससे 1000 लोगों के लिए रोजगार के अवसर उत्पन्न होंगे। प्रोजेक्ट चालू होने पर हिमाचल प्रदेश एमओयू के अनुसार लाभान्वित होगी।

 

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