हिमाचल: एक दिसंबर से ऑनलाइन होंगी 9वीं से 12वीं कक्षा की परीक्षाएं, डेटशीट जारी

CTET की वैधता पर NCTE का बड़ा फैसला, अब आजीवन मान्य होगा सीटेट का प्रमाणपत्र

 नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने शिक्षक बनने बनने के इच्छुक नौजवानों को भारी राहत दी है। अब उन्हें हर सात साल में शिक्षक अर्हता परीक्षा (टीईटी) पास करने की जरूरत नहीं होगी। बल्कि एक बार टीईटी पास करने पर जीवन भर के लिए मान्य रहेगी। यह व्यवस्था पूरे देश भर में लागू होगी। नेशनल काउंसिल फार टीचर एजुकेशन (एनसीटीई) के चैयरमैन विनीत जोशी ने कहा कि टीईटी को अब जीवन भर के लिए मान्य कर दिया गया है। अभी तक यह सिर्फ सात साल के लिए मान्य होती थी। हाल में काउंसिल की बैठक में यह निर्णय लिया गया।

यह व्यवस्था पूरे देश में लागू होगी। नई व्यवस्था आगे आयोजित होने वाली टीईटी परीक्षाओं के लिए लागू होगी। जो छात्र पहले ही टीईटी पास कर चुके हैं, उनके मामले में एनसीटीई ने कहा कि वह कानूनी सलाह लेकर फैसला लेगी।

बता दें कि शिक्षा का अधिकार कानून लागू होने के बाद उच्च शिक्षा की भांति स्कूल शिक्षा में भी नेट की तर्ज पर टीईटी का प्रावधान किया गया। लेकिन अभी इसकी मान्यता सिर्फ सात साल के लिए है। यानी टीईटी करने के बाद यदि कोई व्यक्ति सात साल के भीतर शिक्षक नियुक्त नहीं होता है तो फिर से उसे टीईटी परीक्षा पास करनी होती थी। इसी प्रकार नई नौकरी के लिए आवेदन में भी यह प्रक्रिया आड़े आती थी। शिक्षण में महिलाएं ज्यादा हैं जिनका पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते करियर में अवरोध आ जाता है तथा दोबारा शुरूआत करने के लिए उन्हें दोबारा टीईटी पास करना पड़ता है। इसके चलते हर साल केंद्र सरकार या राज्यों द्वारा आयोजित होने वाली टीईटी परीक्षाओं में लाखों उम्मीदवार बैठते हैं।

सीटेट (CTET) के पहले के नियमों के अनुसार सीटेट सर्टिफिकेट की वैधता 7 साल (रिजल्ट डेट के बाद से) की रहती थी। लेकिन अब यह आजीवन मान्य रहेगा।

वहीं हिमाचल प्रदेश में भी हर साल बीएड और जेबीटी करने वाले हजारों शिक्षकों को बड़ी राहत मिलने वाली है। उन्हें जेबीटी और बीएड करने के बाद केवल एक ही बार शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट) पास करनी होगी। एक बार यह परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद इसकी मान्यता उम्रभर के लिए हो जाएगी। जिस तरह नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट (नेट) की मान्यता है, उसी तरह टेट की भी मान्यता हो जाएगी। हिमाचल शिक्षा विभाग के मुताबिक राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने हाल ही में आयोजित एक बैठक में  नवोदय, केंद्रीय विद्यालयों में लागू करने का निर्णय लिया है। एनसीटीई ही शिक्षक भर्ती के लिए पात्रता तय करती है। ऐसे में यह तय है कि हिमाचल में इस नियम को लागू किया जाएगा। केंद्र और राज्य सरकार की ओर से शिक्षक पात्रता परीक्षा का आयोजन करवाया जाता हैं।

शिक्षा के अधिकार अधिनियम यानि आरटीई के तहत शिक्षक बनने के लिए टेट की शर्त अनिवार्य है। शिक्षक चाहे सरकारी स्कूल में हो या निजी में सभी के लिए टेट उत्तीर्ण होना जरूरी है। अभी तक टेट की मियाद सात साल थी। यानी सात साल के भीतर यदि शिक्षक को नौकरी न मिले तो उन्हें दोबारा टेट की परीक्षा देनी पड़ती थी। अन्यथा इनकी पात्रता खत्म हो जाती है। अब नए नियम के तहत एक बार परीक्षा पास करने पर उम्रभर के लिए पात्रता मिलेगी।

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