देश व प्रदेश की मंडियों में हिमाचल के रॉयल सेब की डिमांड बढ़ी

देश व प्रदेश की मंडियों में हिमाचल के रॉयल सेब की डिमांड बढ़ी

  • अच्छी वेरायटी के सेब की मंडियों में ज्यादा डिमांड : मार्केटिंग बोर्ड के प्रबंध निदेशक नरेश ठाकुर

शिमल: राज्य में इस बार सेब सीजन की रफ्तार धीमी है। एक तो सेब की फसल कम है। इसके अलावा सेब सीजन के लिए बागवानों के सामने सेब श्रमिकों की भी भारी कमी है। जिसके चलते मंडियों में सेब की आमद कम है। प्रदेश के निचले क्षेत्रों में अब सेब सीजन लगभग खत्म हो चुका है। मध्यम और अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेब सीजन शुरू हो चुका है। प्रदेश की विभिन्न मंडियों में अब तक करीब 95 लाख सेब की पेटियां पहुंच चुकी हैं। वहीं इस बार देश व प्रदेश की फल मंडियों में रॉयल सेब की डिमांड बढ़ गयी है। रॉयल वेरायटी के सेब का बागवानों को ऊंचे दाम मिलने लगे हैं। मंडियों रॉयल वेरायटी के सेब दाम 1500 से 2800 रूपए प्रति पेटी चल रहा है। सूबे के अधिकतर क्षेत्रों में अभी रॉयल वेरायटी के सेब की पैदावार की जाती है। कई सालों पहले अमरिका से रॉयल सेब के पौधें हिमाचल लाए गए थे। ऊंचाई वाले क्षेत्रों के बागवान आज भी रायल सेब की पैदावार को प्राथमिकता दे रहे है। देश की कई बड़ी कंपनियां अब रॉयल सेब खरीदने में दिलचस्पी दिखा रही है। मंडियों में रॉयल सेब के दाम भी बागवानों को अच्छे मिल रहे है।

शिमला व किन्नौर जिला के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पैदा होने वाले रॉयल वेरायटी के सेब की खास बात यह है कि यह सेब लंबे समय तक कोल्ड स्टोर में रखा जा सकता है। रॉयल सेब में जूस भी ज्यादा होता है और यह सेब जल्दी खराब भी नहीं होता है। एशिया की सबसे बड़ी आजादपुर मंडी दिल्ली रॉयल सेब की खासी डिमांड रहती है।

उधर, प्रदेश मार्केटिंग बोर्ड के प्रबंध निदेशक नरेश ठाकुर का कहना है कि प्रदेश में सेब की कम फसल होने के कारण मंडियों में सेब कम  पहुंच रहा है। अब ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेब शुरू होने जा रहा है। उनका कहा है कि इस बार ऊंचाई वाले क्षेत्र के सेब के बागवानों को अच्छे दाम मिलने लगे है। अच्छी वेरायटी के सेब की मंडियों में डिमांड भी ज्यादा है। सेब सीजन के अक्टूबर महीने तक चलेगा।

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