शिक्षक शिक्षा को मिशन के रूप में अपनाएं : वीरभद्र सिंह

शिक्षक शिक्षा को मिशन के रूप में अपनाएं : वीरभद्र सिंह

  • शिक्षक शिक्षा को मिशन के रूप में अपनाएं : वीरभद्र सिंह
  • हि.प्र. विश्वविद्यालय ने मनाया 46वां स्थापना दिवस
  • राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण: वीरभद्र सिंह
  • प्रदेश में 91 डिग्री कालेज और 15500 विद्यालय
  • प्रदेश सरकार ने विगत अढ़ाई वर्षों में राज्य के सुदूरवर्ती एवं ग्रामीण क्षेत्रों में 22 डिग्री कालेज खोले

शिमला: मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की स्थापना के 46 वर्ष पूरे होने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि एक सर्वेक्षण में हि.प्र. विश्वविद्यालय को देश भर में 22वें स्थान पर आंका गया है, जो गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि पूर्ण प्रतिबद्धता और उत्साह से कार्य करते हुए शिक्षण संस्थानों का निर्माण, सुदृढ़ीकरण और विस्तार अधिक महत्वपूर्ण है।

वीरभद्र सिंह ने विश्वविद्यालय परिसर में अनुशासन की भावना को और मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय को देश भर में प्रथम स्थान अर्जित करने के लिए लम्बा सफर तय करना है, जिसके लिए सभी अध्यापकों, कर्मियों एवं विद्यार्थियों के पूर्ण समर्पित प्रयासों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि परिसर में किसी भी प्रकार की हिंसा से विद्यार्थियों में असुरक्षा एवं डर की भावना पनपति है। उन्होंने कहा कि अकादमिक वातावरण बिगाड़ने और सार्वजनिक सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले असमाजिक तत्वों को दो चेतावनियां जारी करने के उपरान्त न मानने पर हमेशा के लिए संस्थान से बाहर कर देना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक को संस्थान के नियमों, अध्यापकों और बढ़ों का सम्मान करना चाहिए। केवल वही संस्थान प्रगति करता है, जहां विद्यार्थी और स्टाफ अनुशासन में रहकर नियमों का पालन करते हैं और किसी भी प्रकार की हिंसा को अस्वीकार करते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को शिक्षा को मिशन के रूप में अपनाना चाहिए, क्योंकि उनपर देश के भविष्य को आकार देने, युवाओं का भविष्य संवारने और स्वस्थ समाज के निर्माण की बड़ी जिम्मेवारी है।

वीरभद्र सिंह ने कहा कि अस्तित्व में आने के बाद से हिमाचल ने विकास के अनेक आयाम स्थापित किए। आज प्रदेश के लगभग हर गांव में बिजली, पेयजल, सड़क नेटवर्क सुविधा उपलब्ध है तथा शिक्षा के क्षेत्र में भी व्यापक विस्तार हुआ है। प्रदेश में 91 डिग्री कालेज और 15500 विद्यालय हैं। प्रदेश सरकार ने विगत अढ़ाई वर्षों में राज्य के सुदूरवर्ती एवं ग्रामीण क्षेत्रों में 22 डिग्री कालेज खोले हैं। इन शिक्षण संस्थानों के खुलने से लड़कियों ज्यादा लाभान्वित हुई हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने कौशल विकास भत्ता योजना के अन्तर्गत इस वित्त वर्ष के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के कौशल उन्नयन और उनके लिए रोजगार के अधिक अवसर सृजित करने के उद्देश्य से 9वीं से 12वीं कक्षा तक आटोमोबाईल, रिटेल, सुरक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, पर्यटन और कृषि जैसे व्यवसायिक शिक्षा आरम्भ की गई है। निजी संस्थान भी युवाओं के कौशल उन्नयन के लिए आगे आए हैं।

वीरभद्र सिंह ने कहा कि प्रदेश में विभिन्न राजनैतिक दलों के मध्य वैचारिक भिन्नता के बावजूद सौहार्दपूर्ण संबंध रहे हैं। लेकिन आज विपक्ष के कुछ अवसरवादियों द्वारा इस परिपाटी को बदल दिया है, जो सही नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रदेश को सफलता के शिखर पर ले जाने के लिए सभी को एकजुट होने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि मीडिया ने हमेशा देश की एकता के लिए सकारात्मक भूमिका निभाई है और मौजूदा परिपेक्ष्य में समाज व राष्ट्र की मजबूती में मीडिया की जिम्मेवारी और बढ़ जाती है।

विद्यार्थियों को किया सम्मानित

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने अकादमिक क्षेत्र और अन्य सांस्कृतिक गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित भी किया। वीरभद्र सिंह ने प्रो. लक्षमण सिंह ठाकुर को सर्वश्रेष्ठ अध्यापक और प्रो. डी.सी. गौतम को सर्वश्रेष्ठ शोधकर्ता के पुरस्कार से सम्मानित किया। उन्होंने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय सामान्य प्रशासन के अधीक्षक किशोरी लाल को सर्वश्रेष्ठ कर्मचारी का पुरस्कार प्रदान किया।

मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय के अकादमिक, प्रशिक्षण कार्यक्रम, पर्यटन शोध संबंधित गतिविधियों पर आधारित मोनोग्राफ, जनरलस, स्मारिका और बुलेटिन का विमोचन किया। उन्होंने विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों एवं लेखकों द्वारा विभिन्न विषयों से संबंधित पुस्तकों का विमोचन भी किया।

नागालैंड के पूर्व राज्यपाल डा. अश्विनी कुमार ने कहा कि वह हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के विद्यार्थी रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह विश्वविद्यालय गुणवत्तापरक शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी शिक्षण संस्थानों में एक है और यहां से शिक्षा प्राप्त अनेक विद्यार्थी सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र में बड़े पदों पर आसीन होकर विश्वविद्यालय का नाम रोशन कर रहे हैं। विश्वविद्यालय के समक्ष आज आधुनिक तकनीक से संबंधित अनेक चुनौतियां हैं और बदलते परिवेश में हमें स्वयं को अद्यतन बनाए रखने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हम ‘ज्ञान क्रांति’ के युग में प्रवेश कर रहे हैं और आधुनिक विश्व के बदलते रूझानों के अनुरूप अध्यापन सुविधाओं, अन्तरराष्ट्रीय स्तर की पाठ्य सामग्री की आवश्यकता है।

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