श्रमिकों की कमी के कारण सेब तुड़ान में नहीं आ रही तेजी, जबकि रॉयल सेब की खरीद के लिए बड़ी कंपनियां दिखा रही रूचि

श्रमिकों की कमी के कारण सेब तुड़ान में नहीं आ रही तेजी, जबकि रॉयल सेब की खरीद के लिए बड़ी कंपनियां दिखा रही रूचि

शिमला : देश की कई बड़ी नामी कंपनियों ने बागवानों से रॉयल वैरायटी का सेब खरीदना शुरू कर दिया है। अब तक हिमाचल की फल मंडियों में करीब 55 लाख सेब की पेटियां पहुंच चुकी है। हिमाचल में पिछले साल के मुकाबले इस बार सेब की कम फसल का अनुमान लगाया जा रहा है। कोरोना संकट के दौरान लिहाजा फिर भी बागवानों को सेब के अच्छे दाम मिलने लगे है। इस बार मंडियों में सेब की आमद कम है। कोरोना काल में बागवान इस बार प्रदेश की छोटी मंडियों में सेब बेचने को प्राथमिकता दे रहे हैं। श्रमिकों की कमी के कारण सेब सीजन तुड़ान में तेजी नहीं आ पा रही है।

शिमला के किन्नौर के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रॉयल वैरायटी के सेब की अधिक पैदावार होती है। बड़ी कंपनियां रॉयल सेब के लिए सीधे बागवानों से संपर्क कर रहीं हैं। वहीं सूबे की फल मंडियों में हर रोज करीब 2 लाख सेब की पेटियां पहुंच रही हैं। इसके अलावा दिल्ली की आजदपुर मंडी व चंडीगढ़ के नजदीक पंचकुला फल मंडी में सेब पहुंचने लगा है। हिमाचल में सेब सीजन अक्टूबर महीने तक चलता है।

प्रदेश मार्केटिंग बोर्ड के प्रबंध निदेशक नरेश ठाकुर का कहना है कि सेब का कम उत्पादन होने के कारण मंडियों में सेब कम पहुंच रहा है।  मंडियों में आढ़तियों व खरीददारों को समय-समय पर एहतियात बरतने के निर्देश दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई बड़ी कंपनियां सीधे बागवानों से सेब खरीदने के लिए संपर्क कर रही है। उनका कहना है कि कम पैदावार होने से बागवानों को सेब के अच्छे दाम मिल रहे हैं। कोरोना वायरस के चलते मंडियों में गाइडलाइन का भी पूरा पालन किया जा रहा है।

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