दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में पीएचसी बंद करना जनविरोधी : रोहित ठाकुर

पीटीए, पैरा और पैट शिक्षकों ने कई वर्षों के संघर्ष से जीती है क़ानूनी लड़ाई : रोहित ठाकुर

  •  पीटीए व अन्य शिक्षकों के पक्ष में आये सुप्रीम कोर्ट के फैसले का  रोहित ठाकुर ने किया स्वागत 

शिमला: हिमाचल प्रदेश के हज़ारों पीटीए, पैट व पैरा शिक्षकों द्वारा सुप्रीम कोर्ट से लम्बी क़ानूनी लड़ाई जीतने पर जुब्बल नावर कोटखाई के पूर्व विधायक व पूर्व मुख्य संसदीय सचिव रोहित ठाकुर ने शिक्षकों को बधाई व शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि दुर्गम व कठिन पहाड़ी क्षेत्रों में शिक्षकों की भारी कमी को देखते हुए और ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा प्रणाली को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा पूरे हिमाचल में 8900 पीटीए शिक्षक रखें गए थे, जिसमें सर्वाधिक 370 शिक्षक जुब्बल-नावर-कोटखाई में नियुक्त किए गए थे। इसी तरह इस अवधि में जुब्बल-नावर-कोटखाई में पैरा व पैट के 270 पद अलग से भरें गए। इन भर्तियों से स्थानीय बेरोजगार युवाओं को बड़ी संख्या में रोज़गार मिला था। उन्होंने कहा कि वर्ष 2003-07 के कार्यकाल के दौरान कांग्रेस सरकार द्वारा जुब्बल-कोटखाई में 24 वरिष्ठ माध्यमिक, 04 उच्च विद्यालय, 26 माध्यमिक विद्यालय और 06 प्राथमिक स्कूल खोलें गए थे गौरतलब हैं कि सर्वाधिक 24 वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय जुब्बल-कोटखाई में खोलें गए।

उन्होंने कहा कि सता परिवर्तन के बाद 2007 में भाजपा सरकार ने द्वेषपूर्ण राजनीति के चलते सानन कमेटी बनाकर इन नियुक्तियों को अवैध घोषित कर बर्खास्त करने का प्रयास किया और इस दौरान इन पर कई उत्पीड़न के मामले भी देखने को मिलें। वर्ष 2014 में कांग्रेस सरकार ने हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के समक्ष शिक्षकों के पक्ष को मज़बूती से रखा और माननीय न्यायालय ने पीटीए,पैरा और पैट की नियुक्तियों को वैध ठहराया। उन्होंने कहा कि अब इन नियुक्तियों पर सर्वोच्च न्यायालय ने भी अपनी मोहर लगा दी हैं। रोहित ठाकुर ने कहा कि पीटीए, पैरा और पैट शिक्षकों ने कई वर्षों के त्याग और संघर्ष से क़ानूनी लड़ाई जीती हैं उन्होंने सरकार से नियमितीकरण से वंचित शिक्षकों को पिछली तिथि से नियमित करने के साथ-2 सभी वित्तीय लाभ देने की मांग की हैं।

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